इंदौर से कांग्रेस उम्मीदवार अक्षय कांति बम ने नामांकन लिया वापस, सूरत की हो रही है चर्चा

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- Author, शुरैह नियाज़ी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, भोपाल से
मध्य प्रदेश बीजेपी ने सोशल मीडिया वेबसाइट एक्स पर ट्वीट करके बताया है कि इंदौर लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी अक्षय कांति बम ने अपना नामांकन वापस ले लिया है.
मध्य प्रदेश की इंदौर सीट पर 13 मई को मतदान होना है. इंदौर में अलग-अलग पार्टियों और निर्दलीय को मिलाकर 23 प्रत्याशी मैदान में थे. आज नाम वापसी का अंतिम दिन है.
मध्य प्रदेश के मंत्री और बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने ट्वीट करके बताया है कि अक्षय कांति बम बीजेपी में शामिल हो गए हैं.
कैलाश विजयवर्गीय ने एक गाड़ी में अक्षय कांति के साथ एक सेल्फ़ी लेकर ट्वीट की है.
उन्होंने ट्वीट में लिखा है, “इंदौर से कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याशी श्री अक्षय कांति बम जी का माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जेपी नड्डा जी, मुख्यमंत्री मोहन यादव जी और प्रदेश अध्यक्ष श्री वीडी शर्मा जी के नेतृत्व में भाजपा में स्वागत है.”
नामांकन वापिस लेने और भाजपा में शामिल होने पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस उम्मीदवार का स्वागत किया है.
उन्होंने लिखा, "आदरणीय प्रधानमंत्री जी श्री नरेंद्र मोदी जी के यशस्वी मार्गदर्शन एवं माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जेपी नड्डा जी के नेतृत्व में भाजपा के प्रगतिशील विचारों से प्रभावित होकर इंदौर से कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याशी श्री अक्षय कांति बम जी ने हमारे साथी श्री कैलाश विजयवर्गीय जी और लोकप्रिय विधायक रमेश मेन्दोला जी की उपस्थिति में आज अपना नामांकन वापस लिया. मैं राष्ट्रवादी भाजपा परिवार में आपका आत्मीय स्वागत करता हूं."
बीजेपी उम्मीदवार लालवानी की राह आसान

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, कांग्रेस उम्मीदवार के नाम वापस लेने के बाद बीजेपी के उम्मीदवार शंकर लालवानी की राह बहुत आसान हो गई है.
माना जा रहा है कि अब उनके लिए किसी भी तरह की चुनौती नहीं है.
कांग्रेस उम्मीदवार के बीजेपी में जाने के बाद इसे कांग्रेस के लिए एक बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है क्योंकि इसकी भनक कांग्रेस में किसी को भी नहीं लग पाई.
कांग्रेस के नेताओं से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई लेकिन कोई भी अभी इस पर बात नहीं करना चाह रहा है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक़, खजुराहो के बाद इंदौर दूसरी लोकसभा सीट है जहां पर अब इंडिया गठबंधन का कोई भी प्रत्याशी नहीं बचा है.
खजुराहो सीट गठबंधन के तहत समाजवादी पार्टी को दी गई थी लेकिन वहां की प्रत्याशी मीरा यादव का नामांकन निरस्त हो गया था.
सूरत की हो रही है चर्चा

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बीते सप्ताह गुजरात की सूरत लोकसभा सीट से बीजेपी के मुकेश दलाल चुनाव होने से पहले ही जीत गए.
उनके ख़िलाफ़ कांग्रेस उम्मीदवार नीलेश कुंभानी का पर्चा रद्द हो चुका था और बाकी निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस ले लिए थे. इसलिए उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया.
सूरत लोकसभा सीट के सात दशक के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है. सूरत में कुल 15 नामांकन पत्र भरे गए. इनमें कांग्रेस के नीलेश कुंभानी समेत 6 फॉर्म रद्द हो गए.
इस तरह बीजेपी उम्मीदवार मुकेश दलाल को छोड़कर आठ उम्मीदवारों के फॉर्म बचे थे. लेकिन इन आठ उम्मीदवारों ने भी अपने फॉर्म वापस ले लिए. लिहाज़ा मुकेश दलाल को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया.
कांग्रेस का आरोप है कि पूरी घटना बीजेपी के इशारे पर हुई है, जबकि बीजेपी ने इससे इनकार किया है.
23 अप्रैल को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने स्वीकार किया कि कांग्रेस उम्मीदवार का फॉर्म रद्द होने के बाद बीजेपी ने निर्दलीय और अन्य उम्मीदवारों से संपर्क किया था और उन्हें फॉर्म वापस लेने के लिए कहा था.
कांग्रेस उम्मीदवार का पर्चा रद्द करने के पीछे प्रस्तावकों के फर्जी हस्ताक्षर को वजह बताया गया. कांग्रेस उम्मीदवार नीलेश के समर्थक के रूप में रमेशभाई बलवंतभाई पोलारा, जगदीश नागजीभाई सावलिया और ध्रुविन धीरूभाई धमेलिया ने हस्ताक्षर किए थे.
जगदीश सावलिया नीलेश कुम्भानी के जीजा हैं, वहीं ध्रुविन धमेलिया उनके भतीजे हैं और रमेश पोलारा उनके बिज़नेस पार्टनर रहे हैं.
चूंकि ये तीन लोग नीलेश कुंभानी के सबसे निजी व्यक्तियों में से हैं, इसलिए सवाल उठाए जा रहे हैं कि उन्होंने कलेक्टर कार्यालय में जाकर एक हलफनामा क्यों दायर किया कि कुंभानी के नामांकन पत्र में उनके हस्ताक्षर झूठे थे.
इस घटना के बाद ये समर्थक भी संपर्क से बाहर हो गए, जिसे लेकर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि समर्थकों का अपहरण कर लिया गया है.
इसकी शिकायत कांग्रेस उम्मीदवार ने पुलिस से भी की थी.
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