राजस्थानः बोरवेल में गिरे आर्यन की मौत, परिवार की कैसे टूट गई आस

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- Author, मोहर सिंह मीणा
- पदनाम, जयपुर से बीबीसी हिंदी के लिए
राजस्थान में दौसा ज़िले के कालीखाड गांव में तीन दिन पहले बोरवेल में गिरे पांच साल के आर्यन को बचाने की तमाम कोशिशें नाकाम रहीं.
ग्यारह दिसंबर की देर रात आर्यन को अचेत अवस्था में बोरवेल से निकाल कर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
दौसा ज़िला अस्पताल के डॉक्टरों की एक टीम ने बारह दिसंबर की सुबह शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों के सुपुर्द कर दिया है.
कालीखाड गांव में ही शव का अंतिम संस्कार होगा, ज़िला प्रशासन समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर मौजूद हैं.

पांच साल के मासूम आर्यन को अपनी आंखों के सामने बोरवेल में गिरते हुए देखने वाली मां गुड्डी देवी बात करने की स्थिति में नहीं हैं.
दौसा ज़िला अस्पताल के प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर दीपक कुमार शर्मा ने बीबीसी से बच्चे की मौत का कारण बताते हुए कहा, "किसी एक समय पर ऐसा हुआ कि पानी का लेवल ऊपर आया है और बच्चे के मुंह या नाक से पानी शरीर के अंदर जाने के कारण मृत्यु हुई है."
डेढ़ सौ फ़ीट पर अटका था आर्यन

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दौसा ज़िला मुख्यालय से करीब बीस किलोमीटर दूर कालीखाड गांव में नौ दिसंबर की दोपहर लगभग तीन बजे पांच साल का आर्यन 160 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया.
आर्यन की मां गुड्डी देवी ने मीडिया को बताया था, "आर्यन पास ही खेल रहा था, अचानक पैर फिसलने के कारण बोरवेल में गिर गया."
कालीखाड के पटवारी हरि नारायण ने बीबीसी से कहा, "यह बोरवेल आर्यन के घर से कुछ ही मीटर दूरी पर खेत में बना हुआ था."
घटना की जानकारी मिलने पर स्थानीय प्रशासन और बचाव टीम मौक़े पर पहुंची. चार बजे पाइप के ज़रिए बोरवेल में ऑक्सीजन सप्लाई दी गई.
जयपुर से एसडीआरएफ की टीम बुली गई और बोरवेल के पास ही आधा दर्जन जेसीबी मशीनों से खुदाई शुरू की गई.
बोरवेल में कैमरा डाल कर बच्चे के मूवमेंट को भी देखा गया. रात करीब साढ़े नौ बजे एनडीआरएफ की टीम भी मौके पर पहुंची और अलग-अलग तरीकों से बच्चे को निकालने के प्रयास किए गए.
दस तारीख की सुबह दौसा कलेक्टर देवेंद्र कुमार ने मीडिया को बताया था, "बोरवेल में एनडीआरएफ की टीम ने अंब्रेला नुमा उपकरण को बच्चे के नीचे लगाया, जिससे बच्चा नीचे की ओर न खिसके. उन्होंने यह भी बताया कि देर रात बाद बच्चे की मूवमेंट नहीं देखी जा सकी है और बच्चा एक सौ साठ फीट गहरे बोरवेल में करीब डेढ़ सौ फीट पर फंसा हुआ है."
तीन दिन बाद निकाला गया आर्यन

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बच्चे के किसान पिता जगदीश प्रसाद ने 'दैनिक भास्कर' से बातचीत में कहा था, "बोरवेल ढका हुआ था. लेकिन, उसमें फंसी हुई मशीन को निकालने के लिए बोरवेल को खोला था. पता नहीं था कि किस्मत को क्या मंजूर है."
देर रात तक मशीनों से खुदाई जारी रही और टीमों ने देसी तरीक़ों से भी आर्यन को निकालने के प्रयास जारी रखे.
ग्यारह तारीख की सुबह पाइलिंग मशीनों से करीब सवा सौ फीट तक गहरी खुदाई की जा चुकी थी. लेकिन, मशीन में तकनीकी ख़राबी आने के कारण फिर शाहपुरा से मशीन मंगवाई गई.

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देर रात करीब पौने बारह बजे बच्चे को बोरवेल से निकाल कर मौक़े पर मौजूद एंबुलेंस से सीधा ज़िला अस्पताल ले जाया गया. जहां, जांच के बाद डॉक्टरों ने आर्यन को मृत घोषित कर दिया.
प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर डॉ दीपक कुमार ने बीबीसी को बताया, "बच्चे को जब अस्पताल लाया गया था वह जीवित नहीं था. हमने पोस्टमार्टम करवा दिया है रिपोर्ट आने पर मालूम होगा कि मृत्यु कब हुई थी."
हालांकि डॉ. दीपक कुमार ने मृत्यु के कारण भूजल स्तर बढ़ने पर बच्चे के मुंह या नाक से पानी अंदर जाना बताया है.
आर्यन की मौत का ज़िम्मेदार कौन

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राज्य में कई बार बोरवेल में बच्चों के गिरने की घटनाएं सामने आती रही हैं. लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर इससे निपटने की कोशिशें नहीं दिखती हैं.
आर्यन की तरह की कई मासूम बच्चों की जान जाने के बाद भी प्रशासन और राज्य सरकार इन मामलों को लेकर सख्त नहीं हुई है.
नांगल राजावतान तहसील के गांव कालीखाड में हुई घटना पर तहसीलदार महेश चंद शर्मा बीबीसी से कहते हैं, "राज्य सरकार कई बार आदेश जारी करती है, पटवारी और गिरदावरों को बोरवेल की सूचना देनी होती है."
क्या आपको सूचना दी गई थी कि बोरवेल खुले हुए हैं.
इस सवाल का जवाब नायब तहसीलदार श्रीराम मीणा देते हैं. वह कहते हैं, "इस बोरवेल की जानकारी नहीं है कि कब हुआ था. हमने जांच के आदेश दिए हैं और ज़िम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई करेंगे."
क्या आपने खुले में बोरवेल को ढकने या बंद करने के लिए कार्रवाई की थी?

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इस सवाल पर कालीखाड ग्राम पंचायत के पटवारी हरि नारायण कहते हैं, "परमिशन लेकर बोर करते हैं उनका तो मालूम रहता है. यह बोर कब करवाया गया था इसकी जानकारी नहीं है. कई लोगों ने बिना परमिशन खेतों में बोर करा रखे हैं उनका पता नहीं चलता है."
एसडीएम यशवंत मीणा बीबीसी से कहते हैं, "मैंने हाल ही में ज्वाइन किया है यहां, मालूम करवाएंगे कि बोरवेल की सूचना आई थी या नहीं. हम जांच कराएंगे."
कई हादसे हुए, लेकिन नहीं लिया सबक

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राजस्थान ही नहीं बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी कई बार खुले बोरवेल में गिरने से बच्चों की मौत की ख़बरें आती रही हैं.
25 अक्टूबर को दौसा के मंडावरी में 44 साल के हेमराज गुर्जर करीब डेढ़ सौ फीट गहरे बोरवेल में गिर गए. इस हादसे में वह 32 फीट नीचे दब गए और रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म होने तक वह जीवित नहीं बचे.
18 सितंबर को दौसा ज़िले के बांदीकुई में दो साल की बच्ची नीरू भी बोरवेल में गिर गई थी.
करीब साठ फीट गहरे बोरवेल में गिरने के बाद अठारह घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर बच्ची को सकुशल बाहर निकाला गया.
बीते नवंबर महीने में बाड़मेर के गुड़ामालानी में एक चार साल का बच्चा नवीन बोरवेल में गिर गया. करीब छह घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद नवीन को बाहर निकाला गया, लेकिन उसकी मृत्यु हो चुकी थी.
ठीक इसी तरह मई 2023 में जयपुर के जोबनेर के पास एक खुले बोरवेल में करीब आठ साल का बच्चा गिर गया था. बोरवेल में सत्तर फीट की गहराई में फंसे बच्चे को रेस्क्यू कर बचाया जा सका.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित












