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इसराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने क्यों मांगी माफ़ी, इधर हमास ने दी नई धमकी
- Author, जेक बर्गीज़
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
ग़ज़ा में शनिवार को मृत पाए गए छह इसराइली बंधकों को वापस लाने में नाकाम रहने पर प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने इसराइली जनता से माफ़ी मांगी है.
उधर हमास ने चेतावनी दी है कि अगर युद्धविराम पर समझौता नहीं हुआ तो अन्य बंधक भी ‘कफ़न में अपने घर लौटेंगे.’
नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है, जब समझौता वार्ता को अंजाम देने के उनके तरीक़े को लेकर इसराइल में दूसरी रात भी विरोध प्रदर्शन जारी रहा.
दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दबाव बढ़ रहा है क्योंकि ब्रिटेन ने ये कहते हुए इसराइल को और हथियार देने पर रोक लगा दी है कि उनका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय क़ानून के उल्लंघन के लिए हो सकता है.
लेकिन इसराइली प्रधानमंत्री अब भी अपने रुख़ पर अड़े हुए हैं और उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ग़ज़ा के फिलाडेल्फी कॉरिडोर पर इसराइली सेना का नियंत्रण ज़रूरी है. हमास के साथ समझौता वार्ता में यह कॉरिडोर प्रमुख मुद्दा बना हुआ है.
बंधकों की रिहाई की मांग
सोमवार को ताज़ा विरोध-प्रदर्शनों में हज़ारों इसराइली जनता सड़कों पर उतर आई.
बंधकों के परिवार ने 11 महीने बाद भी उनके प्रियजनों को घर वापस लाने में नेतन्याहू की विफलता के ख़िलाफ़ ग़ुस्से का इजहार करने के लिए इस प्रदर्शन का आह्वान किया था.
टाइम्स ऑफ़ इसराइल ने लिखा है कि यरूशलम में प्रधानमंत्री आवास के बाहर हो रहे प्रदर्शन में पुलिस ने बड़े पैमाने पर बल प्रयोग किया और प्रदर्शनकारियों को बलपूर्वक पीछे धकेला. कुछ को ज़मीन पर गिरा दिया और कई प्रदर्शनकारियों को घसीटते हुए ले गए.
अख़बार के अनुसार, एक पुलिसकर्मी ने टाइम्स ऑफ़ इसराइल के एक रिपोर्टर का गला दबाने की कोशिश की.
रविवार को पूरे इसराइल में लाखों लोग सड़कों पर उतरे. इनमें से कुछ प्रदर्शनकारियों ने तेल अवीव के मुख्य हाईवे को बंद कर दिया.
प्रदर्शनकारी इसराइली झंडे लिए हुए थे और पीले रंग का रिबन बांध रखा था. यह रिबन बंधकों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने का प्रतीक है.
पिछले साल सात अक्टूबर को अपहरण के बाद अब भी कुल 97 इसराइली बंधकों का पता नहीं चल पाया है.
सोमवार को हमास ने कहा था कि अगर इसराइल की ओर से सैन्य दबाव जारी रहेगा तो बंधकों को ताबूत में वापस भेजा जाएगा.
साथ ही उसने ये भी कहा है कि अगर इसराइली सेना क़रीब पहुंचती है तो इसके लिए बंधकों की निगरानी कर रहे चरमपंथियों को नए निर्देश दे दिए गए हैं.
हमास के एक प्रवक्ता ने इन निर्देशों के बारे में और कोई जानकारी न देते हुए कहा, “समझौते की बजाय सैन्य दबाव के मार्फ़त क़ैदियों को रिहा करने की नेतन्याहू की ज़िद का मतलब है कि वे अपने घर कफ़न में लौटेंगे. उनके परिवारों को चुनना है कि वे उन्हें ज़िंदा चाहते हैं या मृत.”
नेतन्याहू को समझौते का 'अंतिम' प्रस्ताव
इससे पहले सोमवार को इसराइल के सबसे बड़े ट्रेड यूनियन ने कहा कि ग़ज़ा में संघर्ष विराम और बंधकों की रिहाई के लिए सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है. इसी के तहत सोमवार को लाखों की संख्या में लोग विरोध-प्रदर्शन में शामिल हुए.
इसके बावजूद, तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट ने बयान में कहा कि वहाँ इसका कोई ख़ास असर नहीं हुआ. ज़्यादातर रेस्तरां खुले थे और सेवा क्षेत्रों में कामकाज़ सामान्य रहा.
धुर कट्टरपंथी वित्त मंत्री बेज़ालेल स्मोट्रिच ने कहा कि इसराइली “समूहों में काम पर गए” थे और उन्होंने साबित कर दिया कि वो अब “राजनीतिक उद्देश्यों” के ग़ुलाम नहीं हैं.
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि बंधकों को छुड़ाने के लिए समझौते और हमास के साथ संघर्ष विराम के समझौते को लेकर नेतन्याहू ने पर्याप्त कोशिश नहीं की.
इस बीच कुछ रिपोर्टें आई हैं, जिनमें दावा किया गया है कि एक नया “अंतिम” प्रस्ताव इसराइली प्रधानमंत्री को भेजा जाएगा.
बहुत से लोग नेतन्याहू पर आरोप लगाते हैं कि वो अपनी राजनीतिक अहमियत बनाए रखने के लिए समझौते में अड़ंगा लगा रहे हैं. हालांकि वो इन आरोपों को ख़ारिज करते हैं.
नेतन्याहू के धुर दक्षिणपंथी सहयोगियों ने धमकी दी है कि हमास को पूरी तरह ख़त्म करने से पहले किसी भी स्थायी संघर्ष विराम को लेकर किसी समझौते को अगर वो स्वीकार करते हैं तो वे गठबंधन सरकार से अलग हो जाएंगे. इसका मतलब है कि सत्ता में नेतन्याहू का टिकना मुश्किल हो जाएगा.
समझौते का दबाव बढ़ा
अमेरिका, मिस्र और क़तर के मध्यस्थ एक ऐसे संघर्ष विराम समझौते की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें इसराइली जेलों में बंद फ़लस्तीनी क़ैदियों के बदले हमास के कब्ज़े में रह रहे 97 बंधकों को रिहाई हो, जिनमें 33 लोग संभावित रूप से मारे जा चुके हैं.
ब्रिटेन के विदेश सचिव डेविड लैमी ने सोमवार को कहा कि ब्रिटेन ने इसराइल के 350 हथियार निर्यात लाइसेंसों में से 30 को निलंबित कर दिया है.
उन्होंने इसका कारण बताते हुए कहा कि इन हथियारों के अंतरराष्ट्रीय क़ानून के गंभीर उल्लंघन में इस्तेमाल होने का ‘साफ़ ख़तरा” है.
रोके गए निर्यात में फ़ाइटर जेट, हेलिकॉप्टर और ड्रोन के पार्ट्स शामिल हैं.
लैमी ने कहा कि ब्रिटेन ने इसराइल की आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन जारी रखा है और ताज़ा प्रतिबंधों का मतलब अन्य हथियारों पर प्रतिबंध नहीं है.
इसराइल के रक्षा मंत्री योआव गैलेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा कि वो इस क़दम से "गहरे तौर पर निराश" हैं जबकि इसराइल के विदेश मंत्री काट्स ने कहा कि इस फ़ैसले ने हमास और ईरान को "बहुत ग़लत संदेश" दिया है.
इस बीच, मारे गए बंधकों में से कुछ का शनिवार को अंतिम संस्कार किया गया.
शनिवार को बरामद हुए बंधकों के शवों में एक बंधक हेर्श गोल्डबर्ग-पोलिन की मां ने अंतिम संस्कार के दौरान कहा कि वो महीनों तक उन्हें लेकर बहुत चिंतित रही थीं.
राचेल गोल्डबर्ग-पोलिन ने कहा कि अपने बेटे की मां होने का उन्हें गर्व है. अपहरण के समय, हेर्श ने अपने परिवार को दो टेक्स्ट मैसेज किए थे. इसमें उन्होंने लिखा था: "आप सभी को प्यार" और "मुझे माफ़ कर देना."
यरूशलम की सड़कों पर शोक मनाने वाले क़तार में खड़े थे और अंतिम संस्कार के दौरान इसराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग ने परिजनों से बात की.
पिछले साल सात अक्टूबर को इसराइल में घुसकर हमास ने हमला किया था और 1200 लोगों की हत्या कर दी थी जबकि 251 लोगों को बंधक बनाकर ग़ज़ा में ले जाया गया था.
इसके जवाब में इसराइली सेना ने हमास को ख़त्म करने के लिए सैन्य अभियान शुरू किया था.
हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, तब से लेकर अब तक ग़ज़ा में 40,000 से अधिक फ़लस्तीनी मारे गए हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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