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इसराइल ने वेस्ट बैंक में क्यों शुरू की पिछले दो दशकों में सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई
कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक इलाके़ में इसराइली सशस्त्र सैनिकों की कार्रवाई के दौरान कम से कम 9 फ़लस्तीनी नागरिकों की मौत हुई है.
इसराइल ने यहां के चार शहरों में सैन्य कार्रवाई की है. उसका कहना कि वो "आतंकरोधी अभियान" चला रहा है.
माना जा रहा है कि पिछले बीस वर्षों सालों में वेस्ट बैंक में किया गया ये इसराइल का सबसे बड़ा अभियान है.
वेस्ट बैंक कहां है और यहां किसका नियंत्रण है?
वेस्ट बैंक जॉर्डन नदी के पश्चिम में और येरूशलम के पूर्व मेंं मौजूद है.
फ़लस्तीन के सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ स्टैटिस्टिक्स के अनुसार इस इलाक़े में 32 लाख से अधिक लोग रहते हैं. यहां पर रहने वाले अधिकांश लोग फ़लस्तीनी हैं, हालांकि इस इलाके़ में बनी बस्तियों में कई यहूदी भी रहते हैं. अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार यहां बनाई गई इसराइली बस्तियां अवैध हैं.
1947 में आधुनिक इसराइल के संस्थापक इस बात पर सहमत हुए थे कि वेस्ट बैंक वाले इलाके़ के अधिकांश हिस्से को भविष्य में फ़लस्तीन का हिस्सा बनाया जाएगा. हालांकि अरब देशों के हमला करने के बाद इसराइल ने इस योजना को स्थगित कर दिया था.
एक संधि के बाद जॉर्डन ने 1950 में इस इलाक़े पर कब्जा कर लिया था. 1967 में छह दिन तक चले युद्ध के बाद इसराइल ने इस इलाक़े को जॉर्डन से छीन लिया और इसे सेना के कब्ज़े में रख दिया.
1970 और 80 के दशक के बीच इसराइल ने इस इलाक़े में अपनी बस्तियां बनाईं जिसके कारण अरब के लोगों में नाराज़गी बढ़ी. अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी इसके लिए इसराइल का विरोध किया.
1987 से 1993 के बीच और 2000 से 2005 के बीच वेस्ट बैंक में फ़लस्तीनी नागरिकों ने विद्रोह भी किया.
1988 में जॉर्डन ने वेस्ट बैंक पर अपना दावा छोड़ दिया था. 1993 के ओस्लो समझौते के मुताबिक़ वेस्ट बैंक के एक हिस्से पर फ़लस्तीनी प्रशासन का नियंत्रण हो गया जबकि बचा हुआ हिस्सा इसराइल के नियंत्रण में आ गया.
इसराइल और फ़लस्तीनी दोनों ही इस क्षेत्र पर अपना-अपना अधिकार होने का दावा करते हैं लेकिन दशकों की लंबी वार्ता के बाद भी अब तक यह तय नहीं हो सका है कि इस इलाक़े पर किसका अधिकार है.
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इसराइली सेना ने कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक के चार फ़लस्तीनी शहर- जेनिन, तुलकर्म, नबुलस, तुबास और इनके पास मौजूद शरणार्थियों के शिविरों पर एक साथ सैन्य कार्रवाई की है.
फ़लस्तीनी मीडिया का कहना है कि जेनिन शहर की मुख्य सड़कों को बंद कर दिया गया है और शरणार्थी कैंपों में सशस्त्र संघर्ष की रिपोर्ट सामने आई हैं. इसराइली सेना के प्रवक्ता ने कहा है कि शहर में "भारी संख्या में सुरक्षाबलों" ने प्रवेश किया है.
फ़लस्तीनी सूत्रों का कहना है कि इसराइली सैनिक जेनिन के एक अस्पताल में घुस आए हैं और तुलकर्म के दो अस्पतालों का उन्होंने रास्ता रोक दिया है.
नबुलस शहर में इसराइली सैनिकों की कार्रवाई वहां मौजूद दो शरणार्थी शिविरों के आसपास क्रेंद्रित थी.
तुबास के पास मौजूद फ़रा शिविर में इसराइली सेना के किए कथित ड्रोन हमले में कई लोग घायल हुए हैं. वहीं ख़बरों के मुताब़िक वहां मौजूद रेड क्रिसेंट मेडिकल केंद्र में इसराइल सैनिक घुस गए हैं.
इसराइल के अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान में नौ फ़लस्तीनियों की मौत हुई है, जो "हथियारबंद आतंकी" थे.
इसराइली सैनिकों ने कथित तौर पर तुलकर्म के पास मौजूद नूर शम्स शिविर को घेर लिया है. एक स्थानीय निवासी का कहना है कि वहां पर "कई जगहों पर झड़पें हुई हैं."
एक और स्थानीय निवासी का कहना है कि इसराइली सैनिकों ने शिविर से बाहर निकलने का रास्ता बंद कर दिया है और शिविर से बाहर जाने वाले हर व्यक्ति के पहचान पत्रों की जांच कर रहे हैं.
इसराइल के विदेश मंत्री इसराइल काट्ज़ का कहना है कि "इसराइली डिफेंस फ़ोर्सेस (आईडीएफ) बुधवार रात से जेनिन और तुलकर्म के शिविरों में ईरानी-इस्लामिक आतंकी ढांचों को ख़त्म करने के लिए पूरी ताकत के साथ अभियान चला रही है."
वहीं इसराइली सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल नदाव शोशानी ने कहा है कि नागरिकों को हमले से बचाने के लिए इसराइली सैनिक जेनिन और तुलकर्म में "ख़ुफ़िया जानकारी के आधार पर आतंकरोधी अभियान" चला रहे हैं.
सात अक्टूबर को इसराइल पर हुए हमास के हमले के बाद से इसराइल लगभग हर दिन वेस्ट बैंक में सैन्य कार्रवाई कर रहा है.
इसराइली कार्रवाई पर क्या कह रहे फ़लस्तीनी
फ़लस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से जेनिन, तुलकर्म और तुबास में मौजूद अस्पतालों को बचाने की अपील की है.
गुरुवार सुबह जारी किए गए बयान में स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसराइली सैनिकों पर एंबुलेंस के प्रवेश को रोकने का आरोप लगाया है और "अंतरराष्ट्रीय समुदाय और रेड क्रॉस" से मदद की गुहार लगाई है. मंत्रालय ने इसे मानवीय क़ानूनों का "खुला उल्लंघन बताया" है.
स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि इसराइली सेना ने इब्न सिना अस्पताल की ओर जाने वाली सड़क को बंद कर दिया है और खलील सुलेमान अस्पताल, रेड क्रिसेंट के मुख्यालय और फ्रेंड्स ऑफ़ द पेशेन्ट्स सोसायटी को चारों ओर से घेर लिया है.
फ़लस्तीनी मीडिया के अनुसार फ़लस्तीनी प्रशासन के प्रमुख राष्ट्रपति मोहम्मद अब्बास ने वेस्ट बैंक की स्थिति पर नज़र रखने के लिए अपनी सऊदी अरब की यात्रा को छोटा कर दिया है.
क्या रही है अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया?
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (ओएचसीएचआर) ने वेस्ट बैंक में "बढ़ रही सैन्य कार्रवाई" को लेकर इसराइली सुरक्षाबलों की निंदा की है.
ओएचसीएचआर का कहना है कि वेस्ट बैंक में इसराइली सेना की हालिया कार्रवाई "इस तरीके से की गई है जिससे अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन हुआ है और पहले तनावपूर्ण स्थिति को भड़काने का काम किया है."
ओएचसीएचआर के बयान के मुताबिक़ "इसराइली डिफेंस फ़ोर्सेस और हथियारबंद फ़लस्तीनियों के बीच वेस्ट बैंक में हो रही हिंसा अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानूनों के तहत सशस्त्र संघर्ष नहीं है." बयान में कहा गया है कि "वेस्ट बैंक में बल का प्रयोग मानवाधिकार के नियमों के अनुसार होना चाहिए."
पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र ने कहा था सात अक्टूबर के बाद से वेस्ट बैंक में हुए इसराइली हवाई हमलों में 128 फ़लस्तीनियों की मौत हुई है जिसमें 26 बच्चे भी शामिल हैं.
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार इसी अवधी के दौरान पूर्वी यरूशलम सहित वेस्ट बैंक में कुल 607 फ़लस्तीनी नागरिकों की मौत हुई है, जिनमें से 11 लोगों की मौत यहां बसे इसराइली नागरिकों के हाथों हुई है.
वेस्ट बैंक के शरणार्थी कैंपों में कैसे बढ़ रही मुश्किलें?
वेस्ट बैंक में कई शरणार्थी कैंप बनाए गए हैं जहां मौजूदा दौर के इसराइल से विस्थापित हुए हजारों फ़लस्तीनी नागरिक रहते हैं.
इस शिविरों में रहने वाले युवाओं के बीच ग़रीबी और बेरोज़गारी काफी अधिक है.
कूटनीतिक मामलों के बीबीसी संवाददाता पॉल एडम्स का कहना है कि सभी कैंप ख़ास तौर से जेनिन कैंप कई फ़लस्तीनी आतंकी समूहों का गढ़ बन गया है और इसराइल की हालिया कार्रवाई उन्हीं समूहों पर नकेल कसने के लिए थी.
पॉल एडम्स का कहना है कि इसराइल को लगता है कि ईरान वित्तीय सहयता देकर और हथियार मुहैया कराकर वेस्ट में नए सशस्त्र गुटों को खड़ा करने में मदद कर रहा है ताकि इसराइल को विभिन्न मोर्चों पर घेरा जा सके.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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