ईरान और इसराइल ने मध्य पूर्व में क्या युद्ध की आहट बढ़ाई

पश्चिमी देशों ने ईरान से कहा कि वो इसराइल पर जवाबी कार्रवाई ना करे. अब ईरान ने अमेरिका समेत पांच देशों की इस मांग को ख़ारिज कर दिया है.

जुलाई 2024 में तेहरान में हमास नेता इस्माइल हनिया की हत्या कर दी गई थी. ईरान और हमास इस हत्या के पीछे इसराइल का हाथ बताते हैं.

इस्माइल हनिया के ईरान में मारे जाने के बाद से मध्य-पूर्वी क्षेत्र में कायम तनाव युद्ध के ख़तरे से जुड़ी आशंकाओं को बढ़ा रहा है.

युद्ध की इसी आशंका को भांपते हुए अमेरिका, ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी और इटली ने एक साझा बयान जारी किया था.

इससे पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से फोन पर बात की और उनसे इसराइल पर हमले से 'बचने' को कहा है.

लेकिन ईरानी मीडिया की ख़बरों के अनुसार पेज़ेश्कियान ने जवाब में कहा कि बदला लेना ही 'अपराध रोकने का रास्ता' है और ईरान के पास इसका 'वैध अधिकार' है.

अलर्ट पर इसराइल

इसराइल ने इस्माइल हनिया की मौत में शामिल होने की बात नहीं कबूली है.

हालांकि बढ़ते तनाव को देखते हुए इसराइल ने अपनी सेना को हाई अलर्ट पर रख दिया है.

इसराइल के रक्षा मंत्री याओव गैलेंट ने कहा है कि उनकी सेना ख़ुफ़िया जानकारियों के आधार पर ईरान और बेरुत में हो रही गतिविधियों पर नज़र रख रही है. साथ ही किसी भी तरह के ख़तरे को टालने के लिए सेना दिन-रात काम कर रही है और किसी संभावित हमले का जवाब देने की तैयारी भी चल रही है.

अमेरिका ने चेतावनी दी है कि वह ईरान और उसकी प्रॉक्सियों की ओर से 'बड़े हमले' से निपटने के लिए तैयारी कर रहा है. अमेरिका ने बढ़ते तनाव को देखते हुए इसराइल की सुरक्षा के लिए मध्य पूर्व क्षेत्र में कुछ गाइडेड मिसाइल पनडुब्बियां भेजने की बात कही है.

लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह ने भी एक हवाई हमले में अपने शीर्ष कमांडरों में से एक को गंवाने के बाद इसराइल से बदला लेने की धमकी दी है.

इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने मंगलवार से शुरू होने वाले अपने मध्य-पूर्वी देशों के दौरे को भी टाल दिया है.

जानकार ताज़ा हलचल को किसी बड़े हमले की आहट के तौर पर भी देख रहे हैं.

ईरान की चेतावनी के बाद मंडराते ख़तरे के बादल

हमास ने बताया था कि 31 जुलाई को ईरान के तेहरान में इस्माइल हनिया की हत्या उस वक्त हुई, जब वह ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के शपथग्रहण समारोह में शिरकत करने पहुंचे थे.

ईरान ने इस हत्या के पीछे इसराइल का हाथ बताया. हालांकि, इसराइल ने इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी.

इसके बाद ईरान के सर्वोच्च धर्मगुरु अयातोल्लाह अली ख़ामेनेई ने हनिया की मौत का बदला लेने का एलान किया था.

इस्माइल हनिया अकेले ऐसे हमास नेता नहीं थे जिन्हें हाल के दिनों में मारा गया हो.

इसराइल ने हाल ही में हमास के मिलिट्री चीफ़ मोहम्मद दिएफ़ को ग़ज़ा पट्टी में एक हवाई हमले में मारने का दावा किया था.

ईरान समर्थित लेबनानी समूह हिज़बुल्लाह ने भी ये एलान किया था कि वह अपने सीनियर कमांडर फुआद शुक्र की मौत का बदला लेगा.

इसके बाद अमेरिका के विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन ने जी 7 देशों में अपने समकक्षों को ये चेतावनी भी दी थी कि ईरान और हिज़बुल्लाह किसी भी वक्त इसराइल पर हमला बोल सकते हैं.

हालांकि, अभी तक ये बड़ा हमला हुआ नहीं है लेकिन पाँच देशों का साझा बयान ये संकेत देता है कि ख़तरा लगातार बना हुआ है.

संयुक्त बयान में कहा गया, "जितना जल्दी संभव हो, हमने एक समझौते तक पहुंचने के उद्देश्य से इस हफ्ते के अंत में वार्ता फिर से शुरू करने के लिए राष्ट्रपति बाइडन, मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फ़तह अल सिसी और क़तर के अमीर तमीम के संयुक्त आह्वान का समर्थन किया है."

इसमें कहा गया है, "सभी पक्षों को अपनी ज़िम्मेदारी निभानी चाहिए. साथ ही ग़ज़ा तक बिना रुकावट मदद पहुंचाया जाना ज़रूरी है."

पांचों देशों ने ईरानी आक्रामकता और उसके समर्थन वाले चरमपंथी संगठनों के खिलाफ इसराइल की रक्षा के लिए अपना समर्थन जताया है.

बयान में ईरान की तरफ से इसराइल के खिलाफ सैन्य हमलों की लगातार मिल रही धमकियों को रोकने का आह्वान किया गया है.

ब्रिटेन ईरान की बातचीत

इस बयान से इतर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने ईरान के राष्ट्रपति से फ़ोन पर हुई बातचीत में कहा है कि वह इसराइल पर हमला करने से बचे और ये वक्त शांति से सोच-समझकर कदम उठाने का है. उन्होंने ये भी कहा कि युद्ध से किसी को फ़ायदा नहीं होगा.

मार्च 2021 के बाद ये ईरान और ब्रिटेन के नेताओं के बीच हुई ये पहली बातचीत है.

इससे पहले ब्रिटेन के तत्कालीन पीएम बोरिस जॉनसन ने ईरान के राष्ट्रपति रहे हसन रूहानी से बात की थी.

स्टार्मर और मसूद पेज़ेश्कियान के बीच ये बातचीत 30 मिनट तक चली.

इसके बाद ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ईरना ने बताया कि पेज़ेश्कियान ने किएर को ये कहा कि इसराइल को पश्चिमी देशों के समर्थन ने ही उसे 'अत्याचार जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया है.' इससे शांति और सुरक्षा को ख़तरा पहुंचा है.

पेज़ेश्कियान ने कहा, "ईरान के लिहाज़ से दुनिया के किसी भी हिस्से में जंग किसी भी देश के हित में नहीं है. आक्रामकता दिखाने वालों को जवाब देना देशों का कानूनी हक है और यही अपराध और इस आक्रामकता को रोकने का तरीका है."

वहीं ईरान के विदेश मंत्री ने एक अलग बयान में ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी की ओर से की गई मांग को ख़ारिज कर दिया है.

उन्होंने कहा, "ऐसी मांगों में राजनीतिक तर्क नहीं होते और ये अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के सिद्धांतों और नियम के एकदम विपरीत हैं."

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युद्ध का कितना बड़ा ख़तरा?

हिज़बुल्लाह और हमास नेताओं की हत्या के बाद से ही मध्य-पूर्व क्षेत्र में जारी संघर्ष के और बड़े स्तर पर फैलने का जोख़िम बढ़ा है.

अमेरिका ने ईरान के सहयोगियों से भी कहा है कि वह इस हमले की आशंका को टालने में मदद करें.

तुर्की में अमेरिकी राजदूत जेफ़ फ्लेक ने इस बारे में प्रतिक्रिया दी है.

उन्होंने कहा कि अमेरिका ने तुर्क़ी समेत उन सभी देशों से मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव को कम करने की कोशिश के लिए कहा है जिनके ईरान से अच्छे संबंध हैं.

फ्लेक ने कहा, "हम ईरान से भी संबंध रखने वाले अपने सभी सहयोगियों से कहते हैं कि वे उसे (ईरान) को पीछे हटने के लिए कहे. इसमें तुर्की भी शामिल है. ये सभी देश वो सब कर रहे हैं जिससे परिस्थितियां और न बिगड़े."

इस बीच रविवार को ही अमेरिका ने ये पुष्टि कर दी थी कि उसने इस तनाव के बढ़ने की आशंकाओं के मद्देनज़र इस क्षेत्र में एक गाइडेड मिसाइल सबमरीन (पनडुब्बी) भेजी है.

ये पनडुब्बी एक बार में 154 टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइलें लाई-ले जाई जा सकती हैं. इन मिसाइलों का इस्तेमाल ज़मीनी ठिकानों पर हमला करने के लिए किया जा सकता है.

इतना ही नहीं बाइडन प्रशासन ने एफ़-35सी लड़ाकू विमानों को मध्य पूर्व की ओर ले जा रहे यूएसएस अब्राहम लिंकन जहाज़ को भी गति बढ़ाने का आदेश दिया है. ये जहाज़ वहां पहले मौजूद जहाज़ की जगह लेगा.

हालांकि, समाचार एजेंसी रॉयटर्स को एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि अब्राहम लिंकन जहाज़ फिलहाल दक्षिण चीन सागर के पास है और उसे मध्य-पूर्व तक पहुंचने में एक सप्ताह का समय लगेगा.

व्हाइट हाउस के नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा कि "आने वाले दिनों में ईरान और उसकी प्रॉक्सीज़ की ओर से इसराइल पर हमले का ख़तरा बढ़ गया है. इसलिए हम लगातार अपने इसराइली और इस इलाके में दूसरे समकक्षों से संपर्क में बने हुए हैं."

उन्होंने कहा कि हमें संभावित बड़े हमले के लिए तैयार रहना चाहिए.

क़तर की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर मेहरान कमरावा ने बीबीसी न्यूज़ से बातचीत में कहा कि अमेरिका का यूं खुलेआम पनडुब्बियां भेजने का मतलब है कि ये 'ईरान और हिज़बुल्लाह को डराने के मकसद से हो रहा है.'

लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि हो सकता है कि कहीं न कहीं ऐसे संकेत हों कि ईरान कुछ करने वाला है या फिर वह हमला ही कर देगा.

ख़तरे को देखते हुए एयर इंडिया समेत कई एयरलाइन्स ने इस इलाके में अपनी उड़ानों को रद्द कर दिया है.

कैसे लगेगा विराम?

माना जा रहा है कि ये मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष की वजह से कच्चे तेल की आपूर्ति पर असर पड़ सकता है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी एक रिपोर्ट में इस सेक्टर के विशेषज्ञों से बात की है. इनमें से एक ने कहा कि अगर हमला होता है तो इससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति घटेगी और नतीजतन कीमतें बढ़ेगी.

इस हमले की वजह से अमेरिका की ओर से ईरान के तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे और इससे संभावित तौर पर रोज़ाना करीब 15 लाख बैरल तेल की सप्लाई पर असर होगा.

अमेरिका का मानना है कि ग़ज़ा में सीज़फ़ायर को लेकर नई डील और इसराइली बंधकों की रिहाई ही इस क्षेत्र में तनाव कम करने का तरीका है. अमेरिका ने गुरुवार से वार्ता बहाल करने की भी बात कही है.

इसराइल का कहना है कि उसने डील फ़ाइनल करने के लिए अपनी एक टीम भेजी है. वहीं हमास ने इस समझौते को लेकर सैद्धांतिक तौर पर सहमत होने के संकेत दिए हैं.

हमास ने कहा है कि डेढ़ महीने पहले जहां वार्ता रुकी थी, ये समझौता उन्हीं पहलुओं पर आधारित होना चाहिए. इसके लिए नए सिरे से वार्ताओं का दौर नहीं शुरू होना चाहिए.

बीती सात अक्टूबर को हमास ने दक्षिणी इसराइल के इलाकों पर एक बड़ा हमला किया था, जिसमें करीब 1200 लोगों की मौत हुई थी. इसी हमले में 251 लोगों को बंधक बनाकर ग़ज़ा ले जाया गया था.

इसके जवाब में इसराइली हमले अभी भी जारी हैं और हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार गज़ा में अब तक 39 हज़ार से ज़्यादा फ़लस्तीनियों की मौत हो चुकी है.

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