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इस्माइल हनिया: शरणार्थी शिविर में जन्म से लेकर हमास चीफ़ बनने तक
हमास ने कहा है कि उसके शीर्ष नेता इस्माइल हनिया ईरान की राजधानी तेहरान में मारे गए हैं.
बुधवार को जारी एक बयान में हमास ने कहा कि तेहरान स्थित आवास पर हुए हमले में हनिया और उनके बॉडीगार्ड की हत्या की गई है.
हनिया क़तर में रहते थे और लंबे वक़्त से वो ग़ज़ा नहीं गए थे.
हमास ने बताया कि हनिया ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने तेहरान गए थे. समारोह मंगलवार को आयोजित हुआ था.
इस हमले की ज़िम्मेदारी अभी तक किसी ने नहीं ली है. इसराइल की तरफ़ से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
हमास के एक वरिष्ठ अधिकारी मूसा अबु मरज़ोक ने हमले को कायराना हरक़त बताते हुए बदला लेने की बात कही है.
एएफ़पी न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक़, ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) का कहना है कि "घटना" का कारण स्पष्ट नहीं है लेकिन "जांच" जारी है.
बीती सात अक्टूबर को इसराइली इलाके़ में हमास के हमले के बाद ही इसराइल ने इस समूह के ख़ात्मे का वादा किया था.
62 साल के इस्माइल हनिया हमास की अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़ा चेहरा थे. उनकी हत्या ऐसे वक़्त हुई है जब इसराइल की ओर से ग़ज़ा में हमले जारी हैं.
हमास में हनिया का क़द कैसे बढ़ा?
इस्माइल हनिया जन्म 1962 में ग़ज़ा के पश्चिमी इलाके़ में एक शरणार्थी शिविर में हुआ था. उनके माता-पिता साल 1948 में अरब-इसराइल युद्ध के दौरान अपना घर छोड़कर चले गए थे.
उन्होंने इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ़ ग़ज़ा में अरबी साहित्य की पढ़ाई की. यहीं से हनिया इस्लामिक आंदोलन में शामिल हो गए.
हनिया को 1993 में ग़ज़ा के इस्लामिक विश्वविद्यालय का डीन नियुक्त किया गया.
हमास के संस्थापक अहमद यासीन को साल 1997 में इसराइल ने रिहा किया. इसके बाद हनिया उनके सहायक के रूप में नियुक्त किए गए थे.
दोनों के बीच घनिष्ठता बढ़ी और इसी वजह से हनिया का हमास के भीतर क़द बढ़ता गया और धीरे-धीरे वह फ़लस्तीनी प्राधिकरण में इस समूह के प्रतिनिधि बन गए.
सितंबर 2003 में ग़ज़ा में एक इमारत पर इसराइली हवाई हमले में हनिया और अहमद यासीन मामूली रूप से घायल हो गए थे.
बम गिरने के कुछ सेकेंड पहले दोनों लोग इमारत से बाहर चले गए और इसलिए बाल-बाल बचे.
हालांकि, इसके छह महीने बाद ही अहमद यासीन को मस्जिद से नमाज़ पढ़कर बाहर निकलते समय ही इसराइली गोलीबारी में मार दिया गया.
तीन साल तक इसराइली कै़द में रहे
हनिया 1980 के दशक के आख़िरी सालों में हमास आंदोलन के प्रमुख नेता थे. इसराइल ने उन्हें साल 1989 में तीन साल के लिए कै़द रखा. उन्हें 1992 में हमास के कई नेताओं के साथ मार्ज-अल-ज़ुहुर निर्वासित कर दिया गया था.
ये इसराइल और लेबनान के बीच उजाड़ इलाक़ा है जहां दूर-दूर तक कोई नहीं रहता. हनिया यहां एक साल तक रहे.
एक साल तक निर्वासित रहने के बाद वह ग़ज़ा लौट आए. उन्हें 1997 में हमास आंदोलन के आध्यात्मिक नेता शेख अहमद यासीन के कार्यालय का प्रमुख नियुक्त किया गया. इससे उनकी स्थिति गुट में और मज़बूत हुई.
ग़ज़ा से इसराइली सेना की वापसी के एक साल बाद 2006 में फ़लस्तीनी संसदीय चुनाव हुए. इसमें हमास को जीत मिली.
हनिया को हमास ने 16 फरवरी, 2006 में फ़लस्तीनी प्राधिकरण का प्रधानमंत्री नामित किया. उन्हें राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने इस पद के लिए नियुक्त किया लेकिन एक साल के अंदर ही उन्हें ये पद गंवाना पड़ा. उस दौरान एक सप्ताह तक ग़ज़ा पट्टी में हिंसक घटनाओं की वजह से हमास ने महमूद अब्बास की पार्टी को बर्ख़ास्त कर दिया और इसी के साथ हनिया भी पीएम नहीं रहे.
हनिया ने उन्हें पीएम पद से हटाए जाने को 'असंवैधानिक' क़रार दिया और कहा कि उनकी सरकार फ़लस्तीनी लोगों के प्रति अपने दायित्वों को निभाना नहीं छोड़ेगी और ग़ज़ा में उनकी सत्ता बनी रहेगी.
इसके पीछे की वजह इज़-अल-दीन अल-क़ासम ब्रिगेड का ग़ज़ा पट्टी पर क़ब्ज़ा करना था. उसने अब्बास के फ़हत आंदोलन के प्रतिनिधियों को निकाल दिया था.
हनिया को 6 मई 2017 को हमास के पॉलिटिकल ब्यूरो का प्रमुख चुना गया.
लेकिन साल 2018 में अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने हनिया को आतंकवादी घोषित कर दिया. इसके बाद पिछले कई सालों से हनिया क़तर में रह रहे थे.
हमास के सदस्यों की तुलना में अधिक उदार
ग़ज़ा में इसराइली कार्रवाई में अपने तीन बेटों की मौत के बाद इस्माइल हनिया को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हमास की कूटनीति के अहम चेहरे के तौर पर देखा जा रहा था, जो मज़बूती से इस समूह का पक्ष रख रहे थे.
हालांकि, कई राजनयिकों की नज़र में उन्हें हमास के अन्य कट्टरपंथी सदस्यों की तुलना में उदारवादी नेता के तौर पर देखा गया.
हनिया युद्धविराम के लिए तुर्की से क़तर के बीच लगातार यात्राएं कर रहे थे. वह सीज़फ़ायर और ईरान के साथ वार्ताओं में मध्यस्थ के तौर पर उभरे.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार बीते साल 7 अक्टूबर को हमास के इसराइल पर हमला करने के बाद हनिया ने क़तर के मीडिया हाउस अल-जज़ीरा से बातचीत में कहा था, "रिश्ते सामान्य करने के लिए आपने (अरब देशों) उसके (इसराइल) साथ जिन भी समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, वो भी इस संघर्ष को समाप्त नहीं कर सकेंगे."
इसराइल ने ग़ज़ा पर जवाबी कार्रवाई शुरू की जिसे सैन्य अभियान बताया. हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि अभी तक इसराइली हमलों में ग़ज़ा के 39 हज़ार लोगों की मौत हुई है.
इसी साल मई में इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के प्रॉसिक्यूटर ऑफ़िस ने हनिया समेत हमास के तीन नेताओं के ख़िलाफ़ अरेस्ट वॉरंट जारी करने की मांग की थी. इसके अलावा इसराइली पीएम बिन्यामिन नेतन्याहू को भी कथित युद्ध अपराधों के आरोपों में गिरफ़्तार करने की मांग की गई.
तीन बेटे और चार पोता-पोती मारे गए
हमास के ख़िलाफ़ इसराइली हमलों की चपेट में हनिया का परिवार भी आया.
इसी साल 10 अप्रैल को हनिया के तीन बेटे हाज़म, आमिर और मोहम्मद के साथ उनके चार पोता-पोती भी मारे गए थे. इनकी गाड़ी पर इसराइल ने तीन मिसाइलें दागी थीं.
हनिया ने इसराइल के इस दावे को खारिज कर दिया था कि उनके बेटे हमास के लिए लड़ रहे थे.
उनसे जब पूछा गया कि परिवार के इन सदस्यों की मौत का क्या संघर्षविराम वार्ता पर असर पड़ेगा? तब उन्होंने कहा था कि "फ़लस्तीनी लोगों का हित सभी चीज़ों से ऊपर है."
हनिया और उनसे पहले हमास के नेता रहे खालिद मेशाल ने क़तर की मध्यस्थता में इसराइल संग युद्धविराम समझौते के लिए कई यात्राएं कीं.
इस बातचीत में बंधकों के बदले इसराइली जेलों में कै़द फ़लस्तीनियों की रिहाई और ग़ज़ा को अधिक मदद देने की मांग की गई थी.
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