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इसराइल ने ग़ज़ा में हमास के कितने लड़ाकों को अब तक मारा है?
- Author, मर्लिन थॉमस और जेक हॉर्टन
- पदनाम, बीबीसी वेरिफाई
सात अक्तूबर के बाद ग़ज़ा पर इसराइल के हमले में मारे गए फलस्तीनियों की संख्या कथित तौर पर 30,000 से अधिक बताई जा रही है.
ग़ज़ा में नागरिकों की मौतों की बढ़ती संख्या ने इसराइल की चिंताएं बढा दी हैं. उस पर यह दिखाने का दबाव है कि वह हमास का खत्मा कर रहा है, जैसा सात अक्टूबर के बाद उसने वादा किया था.
बीबीसी वेरिफाई ने इस लड़ाई में मारे गए हमास के लड़ाकों की संख्या की पड़ताल की.
इसराइली सेना का दावा है कि उसके हवाई हमलों और ज़मीनी कार्रवाइयों में हमास के 10,000 से अधिक लड़ाकों की मौत हुई है.
इसराइल सात अक्टूबर को हुए हमास के हमले के बाद से ग़ज़ा को निशाना बना रहा है. हमास के हमले में करीब 1,200 लोग मारे गए थे.
इसराइल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) ने लगातार अपनी रणनीति का बचाव किया है.
वो इस बात पर जोर देता है कि वह नागरिक मौतों को कम करने की कोशिश करते हुए हमास के लड़ाकों और उसके बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की कोशिश कर रहा है.
कहीं नहीं हैं लड़ाकों की मौतों का आधिकारिक आंकड़ा
हमास अपने लड़ाकों की मौतों का कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराता है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक खबर के मुताबिक एक अधिकारी ने स्वीकार किया था कि 6,000 लड़ाके मारे गए थे, लेकिन हमास ने बीबीसी से इस आंकड़े का खंडन किया.
ग़ज़ा में हमास की ओर से संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों को विश्व स्वास्थ्य संगठन भी विश्वसनीय मानता है.
यह स्वास्थ्य मंत्रालय मरने वालों की संख्या में नागरिकों और लड़ाकों को अलग-अलग नहीं बताता है. युद्ध शुरू होने के बाद के आंकड़े बताते हैं कि मारे गए लोगों में कम से कम 70 फीसदी महिलाएं और बच्चे थे.
बीबीसी वेरिफाई ने आईडीएफ से बार-बार यह बताने के लिए कहा कि हमास लड़ाकों की मौतों की गिनती कैसे करता है, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया है.
हमने आईडीएफ की प्रेस विज्ञप्तियों और इसके सोशल मीडिया चैनलों पर लड़ाकों की हत्या के संदर्भों की जांच की.
'टाइम्स ऑफ इसराइल' ने 19 फरवरी को आईडीएफ के हवाले से खबर दी कि 12,000 लड़ाके मारे गए थे.
हमने इस आंकड़े को आईडीएफ के सामने रखा. आईडीएफ ने दो अलग-अलग प्रतिक्रियाओं में कहा कि यह आंकड़ा करीब 10,000 और इससे अधिक है.
प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू का दावा
जनवरी के मध्य में प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने दावा किया कि इसराइल ने ग़ज़ा में हमास की दो-तिहाई लड़ाकू रेजिमेंटों को तबाह कर दिया है, लेकिन उन्होंने मारे गए लड़ाकों का कोई आंकड़ा नहीं दिया.
इस युद्ध से पहले आईडीएफ के एक अनुमान में ग़ज़ा में हमास के लड़ाकों की संख्या करीब 30,000 बताई गई थी.
बीते साल दिसंबर में आईडीएफ ने युद्ध के मैदान में मिलने वाली चुनौतियों को देखते हुए इस आकलन को सकारात्मक बताया था कि वह हमास के हर लड़ाके के लिए दो नागरिकों को मार रहा है.
युद्ध शुरू होने के करीब एक महीने बाद 14 नवंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर आईडीएफ चैनल ने डिवीजन बलों द्वारा 1,000 चरमपंथियों के मारे जाने का उल्लेख किया.
उस समय ग़ज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने 11,320 मौतें होने की जानकारी दी थी. यह बताता है कि युद्ध में नागरिकों की मृत्यु का अनुपात 10:1 से थोड़ा अधिक है.
बीबीसी वेरिफाई ने 7 अक्टूबर से 27 फरवरी के बीच आईडीएफ के यूट्यूब चैनल पर पोस्ट किए गए सभी 280 वीडियो की भी समीक्षा की.
इसमें पाया गया कि बहुत कम वीडियो में बड़ी संख्या में लड़ाकों के मारे जाने के वीडियो सबूत थे.
इनमें से केवल 13 दिसंबर को पोस्ट किए एक वीडियो में हमास के लड़ाकों का शव दिखाया गया है. वहीं कुछ अन्य वीडियो में लड़ाकों को गोली मारते हुए दिखाया गया है.
सोशल मीडिया पर आईडीएफ का दावा
हमने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर आईडीएफ के मुख्य चैनल पर हमास के मारे गए लड़ाकों के संदर्भ में व्यक्तिगत दावों में मरने वालों की संख्या गिनने का प्रयास किया.
इस कोशिश में हमें 160 पोस्ट मिलीं, जिनमें एक विशिष्ट संख्या में लड़ाकों को मारने का दावा किया गया. इस तरह कुल मिलाकर 714 मौतों का दावा किया गया है.
वहीं 247 ऐसे संदर्भ भी थे जिनमें 'कई', 'दर्जनों' और 'सैकड़ों' मारे गए जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था. इनसे किसी तरह का अनुमान लगा पाना संभव नहीं है.
किसी भी युद्ध क्षेत्र में होने वाली लड़ाकों की मौतों की गिनती करना कठिन काम होता है. ग़ज़ा में कई लड़ाके सामान्य कपड़े पहनते हैं. वे बड़े पैमाने पर सुरंग नेटवर्क में भूमिगत रहकर काम करते हैं. अधिकांश लड़ाकों की मौत हवाई हमलों से होती है.
ग़ज़ा में कार्रवाई शुरू करने के बाद से आईडीएफ, हमास पर नागरिकों को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाता रहा है.
लेकिन कुछ विशेषज्ञों को इस बात की चिंता है कि आईडीएफ कुछ गैर-लड़ाकों की गिनती केवल इसलिए लड़ाकों में कर रहा है, क्योंकि वे हमास की ओर से संचालित प्रशासन का हिस्सा हैं.
कौन हैं हमास के लड़ाके
एंड्रियास क्रेग लंदन के किंग्स कॉलेज में सुरक्षा अध्ययन पढ़ाते हैं. उन्होंने कहा, "इसराइल 'हमास की सदस्यता' के लिए एक व्यापक नजरिया अपनाता है, वो सिविल सेवकों या प्रशासनिक अधिकारियों समेत संगठन के साथ किसी भी तरह की संबद्धता को सदस्यता से जोड़ता है."
ग़ज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक मौजूदा लड़ाई के आंकड़े बताते हैं कि पिछली लड़ाइयों की तुलना में मरने वालों में महिलाओं और बच्चों का अनुपात तेजी से बढ़ा है.
राचेल टेलर यूके स्थित एवरी कैजुअल्टी काउंट्स नाम के एक संगठन के कार्यकारी निदेशक हैं. उनके मुताबिक, "यह नागरिकों मृत्यु दर बहुत अधिक होने का संकेत देता है."
एवरी कैजुअल्टी काउंट्स हिंसक संघर्षों के पीड़ितों की संख्या को दर्ज करता है.
गज़ा की करीब आधी आबादी 18 साल से कम की है. युद्ध में मरने वालों में करीब 43 फीसदी बच्चे हैं.
टेलर कहती हैं, ''तथ्य यह है कि ये मौतें सामान्य आबादी की जनसांख्यिकी को बारीकी से ट्रैक करती हैं और अंधाधुंध हत्याओं का संकेत देती हैं."
वो कहती हैं, "इसके उलट 2014 की लड़ाई में मरने वालों में लड़ाई की उम्र वाले पुरुषों का फीसद काफी अधिक था, लेकिन आज यह स्पष्ट रूप से बहुत कम है."
ग़ज़ा में हर दिन कितनी मौतें हुई
ग़ज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि लड़ाई शुरू होने के बाद से हर दिन औसतन 200 से अधिक लोग मारे गए.
ऐसा लगता है कि हत्या की दर, अक्टूबर से दिसंबर तक यानी संघर्ष के पहले चरण की तुलना में धीमा हो गई है, लेकिन विशेषज्ञों ने बीबीसी को बताया कि इसराइली हमले में मारे गए लोगों की वास्तविक संख्या काफी अधिक हो सकती है, क्योंकि कई अस्पताल, जहां आमतौर पर मौतें दर्ज की जाती हैं, वे अब काम नहीं कर रहे हैं.
इन आंकड़ों में केवल सैन्य हमलों में होने वाली मौतें शामिल हैं. इनमें वे मौतें शामिल नहीं हैं जो भुखमरी या बीमारी की वजह से होती हैं. ये मौतें अंतरराष्ट्रीय सहायता संगठनों को चिंतित कर रही हैं.
यरूशलम स्थित मानवाधिकार संगठन बत्सेलम ने कहा कि मौजूदा युद्ध इसराइल और ग़ज़ा के बीच हुई पिछली लड़ाइयों की तुलना में कहीं अधिक घातक है.
इसके प्रवक्ता ड्रोर सैडोट ने कहा, "ये वे संख्याएं हैं जो हमने ग़ज़ा या किसी दूसरे इलाके में पिछले युद्धों और हमलों में नहीं देखीं."
उन्होंने कहा कि मरने वालों की संख्या युद्ध के शुरुआती दिनों में आईडीएफ के प्रवक्ता की ओर से बताए गए दृष्टिकोण को दर्शाती हैं.
प्रवक्ता ने कहा था कि अभी हम इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि किस कारण से अधिकतम नुकसान होता है."
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