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युद्ध की आड़ में फ़लस्तीनियों की ज़मीन पर कब्ज़ा करते इसराइली
- Author, योलांद नेल, मध्य पूर्व संवाददाता
- पदनाम, टोबी लकहर्स्ट, यरुशलम से
प्राकृतिक झरनों के पानी से सिंचाई करने वाले पुराने फ़लस्तीनी गांव बतिर में आम ज़िदगी सैंकड़ों सालों से शांत ही रही है.
यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल बतिर गांव को जैतून के बाग़ों और अंगूर के खेतों लिए जाना जाता है. लेकिन मौजूदा वक्त में यह कब्ज़ा किए गए वेस्ट बैंक वाले इलाके़ में बस्तियों को लेकर चर्चा में है.
इसराइल ने इस इलाके़ में नई यहूदी बस्तियों को मान्यता दी है. लेकिन इसराइल की अनुमति के बिना यहां नई यहूदी बस्तियों के लिए फ़लस्तीनियों के लोगों की निजी स्वामित्व वाली ज़मीन को छीन लिया गया है और वहां सैन्य चौकियां बना दी गई हैं.
घासन ओल्यान उन लोगों में से हैं जिनकी ज़मीन पर कब्ज़ा किया गया है. ओल्यान कहते हैं, "हमारी त्रासदी पर अपने सपने बनाने के लिए वो हमसे हमारी ज़मीनें छीन रहे हैं."
यूनेस्को का कहना है कि बतिर के आसपास नई बस्ती और लोगों को लेकर वो चिंतित है. सभी बस्तियां अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के हिसाब से अवैध हैं, हालांकि इसराइल इस बात से सहमत नहीं है.
ओल्यान यहां बस रहे नए लोगों को लेकर कहते हैं, "उन्हें अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों, स्थानीय क़ानूनों और ईश्वर के क़ानूनों की भी कोई परवाह नहीं है."
इसराइल के खुफ़िया प्रमुख रोनेन बार ने पिछले हफ्ते मंत्रियों को पत्र लिखकर चेतावनी दी थी कि वेस्ट बैंक क्षेत्र में मौजूद यहूदी चरमपंथी फ़लस्तीनियों के ख़िलाफ़ आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं और देश को नुक़सान पहुंचा रहे हैं.
ग़ज़ा में युद्ध शुरू होने के बाद से कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक के क्षेत्र में नई यहूदी बस्तियों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है.
इसराइली सरकार में मौजूद कट्टरपंथियों का मानना है कि इस तरह के बदलाव एक स्वतंत्र फ़लस्तीनी राष्ट्र बनने की संभावना को कम करेंगे.
इस बात की भी आशंका है कि अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए वो ग़ज़ा में जारी युद्ध और लंबा खींच सकते हैं.
यहूदी बस्तियों की बढ़ती संख्या पर नज़र रखने वाली इसराइली संस्था पीस नाउ के योनातन मिज़राही कहते हैं कि वेस्ट बैंक में मौजूद इसराइली कट्टरपंथी पहले से मौजूद तनावपूर्ण स्थिति को और बढ़ा रहे हैं और इसराइल फ़लस्तीन संघर्ष के ख़त्म होने की संभावनाओं को मुश्किल बना रहे हैं.
उनका मानना है कि सात अक्टूबर को हुए हमले के बाद इसराइल के लोगों में "गुस्सा और डर दोनों है". हमास के हमले में 1200 लोगों की मौत हुई थी. उनके अनुसार इस कारण भी लोग अधिक ज़मीनों पर कब्ज़ा कर रहे हैं और उनसे बहुत कम लोग इस मुद्दे पर सवाल कर रहे हैं.
प्यू रिसर्च सेंटर के जून में किए गए एक सर्वे के मुताबिक़ 40 प्रतिशत यहूदियों का मानना है कि नई बस्तियों ने देश को सुरक्षित बनाया है. 2013 में ऐसा मानने वालों की संख्या 27 प्रतिशत थी. वहीं दूसरी तरफ 35 प्रतिशत लोगों का मानना है कि इन बस्तियों से इसराइली की सुरक्षा को नुक़सान पहुंचा है. ऐसा मानने वालों की संख्या इससे पहले 42 प्रतिशत थी.
मिज़राही को इस बात की चिंता है कि वेस्ट बैंक में मौजूद कट्टरपंथी यहूदी पहले से तनावपूर्ण और अस्थिर स्थिति को और बढ़ा रहे हैं. वो कहते हैं, "यह बहुत ख़तरनाक है" और दोनों पक्षों के बीच नफ़रत को और बढ़ा रहा है.
जंग शुरू होने के बाद से वेस्ट बैंक में फ़लस्तीन के लोगों के ख़िलाफ़ नए बसे लोगों (सेटलर्स) की तरफ से हिंसा के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
हालांकि हिंसा में पहले भी वृद्धि देखी जा रही थी. लेकिन पिछले 10 महीनों में यूएन ने हिंसा के 1270 मामलों को दर्ज किया है जबकि 2022 में कुल 856 हमलों के मामले सामने आए थे.
इसराइल की मानावधिकार संस्था बी’त्सेलेम के अनुसार इसी अवधि में नए बसने वाले इसराइलियों के उत्पीड़न के कारण वेस्ट बैंक में कम से कम 18 गांवों से फ़लस्तीनियों को बाहर निकलने पर मजबूर होना पड़ा है.
1967 में मध्य पूर्व में जंग के दौरान इसराइल और जॉर्डन के बीच मौजूद फ़लस्तीनी क्षेत्र पर इसराइल ने कब्ज़ा कर लिया था. तब से लेकर अब तक यह क्षेत्र इसराइल के ही कब्ज़े में है.
यूएन के अनुसार सात अक्टूबर से लेकर अगस्त 2024 तक वेस्ट बैंक में 589 फ़लस्तीनी नागरिक मारे गए हैं. इनमें कम के कम 570 लोग इसराइली सैनिकों के हाथों मारे गए हैं और 11 इसराइली बस्तियों में रहने वाले लोगों के हाथों. इस दौरान फ़लस्तीनियों ने 11 इसराइली सेटलर्स को और इसराइली सुरक्षा बल से जुड़े 9 लोगों को मारा है.
इसी हफ्ते बेथलेहम के निकट मौजूद वादी एल राहेल में इसराइली सुरक्षा बलों और इसराइली सेटलर्स के घुसने के बाद कथित तौर पर एक 40 वर्षीय फ़लस्तीनी नागरिक की गोली मारकर हत्या कर दी गई. इसराइली सेना का दावा है कि पहले इसराइली वाहन पर पत्थर फेंके गए थे.
पिछले महीने जित नाम के एक गांव में इसराइलियों के घुसने और वहां तोड़फोड़ करने के दौरान एक 22 वर्षीय फ़लस्तीनी युवक की मौत हो गई थी. इस घटना की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना की गई. इसराइली सुरक्षा बलों ने चार लोगों को गिरफ्तार किया था और इस घटना को "गंभीर आतंकी घटना" बताया था.
लेकिन इस तरह के मामलों को देखा जाए तो सज़ा मिलने में कमी देखी जा रही है. इसराइली नागरिक अधिकार समूह येश दिन ने पाया है कि 2005 से लेकर 2023 तक इसराइली प्रवासियों की ओर से की गई हिंसा के मामले में सिर्फ 3 प्रतिशत मामलों में ही आधिकारिक जांच में सज़ा मिली है.
इसराइल के खुफ़िया प्रमुख रोनन बार की लिखी चेतावनी वाली चिट्ठी को इसराइली मीडिया को लीक कर दिया गया था. इसमें उन्होंने कहा था कि कट्टरपंथी इसराइली सेटलर्स को क़ानून में ढिलाई के ज़रिए एक तरह से प्रोत्साहित किया गया था.
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'अत्यधिक ख़तरनाक'
वेस्ट बैंक के हिस्सों में नए सेटलर्स को ख़ास बनाए गए यहूदी समुदायों में बसाया गया है.
इनमें से अधिकतर बस्तियों को इसराइली सरकार की तरफ से क़ानूनी मदद मिलती है. अन्य बस्तियों को चौकियों के रूप में जाना जाता है जिन्हें तंबुओं और गाड़ियों में बने घरों के रूप में बनाया गया है. ये बस्तियां इसराइली क़ानून के अनुसार अमान्य हैं. लेकिन कट्टरपंथी और ज़मीनों पर कब्ज़ा करने के लिए इन बस्तियों का निर्माण करते रहते हैं.
जुलाई महीने में जब यूएन के उच्चतम कोर्ट को पहली बार यह पता चला था कि पूर्वी यरुशलम सहित वेस्ट बैंक के इलाके़ पर इसराइल का अवैध कब्ज़ा था, तब कोर्ट ने कहा था कि इसराइल को नई बस्तियां बसाने की कार्रवाई को रोकना होगा और जल्द से जल्द पीछे हटना होगा.
इसराइल के पश्चिमी सहयोगी इन नई बस्तियों को शांति की राह में रुकावट के रूप में देखते हैं. लेकिन इसराइल इस दलील को ख़ारिज करता है. वो कहता है, "यहूदी लोग कब्ज़ा नहीं कर रहे हैं, यह उनकी अपनी ही ज़मीन है."
अब इस बात को लेकर आशंका जताई जा रही है कि इसराइली कट्टरपंथी बस्तियों को स्थायी बनाने के लिए काम कर रहे हैं.
इसराइल के इतिहास की अब तक की सबसे ज़्यादा दक्षिणपंथी सरकार के सहयोग से ये लोग क्षेत्र में अपने नियंत्रण को बढ़ा रहे हैं. ये कट्टरपंथी वेस्ट बैंक पर अपने कब्ज़े की योजना को तो बढ़ा ही रहे हैं, युद्ध ख़त्म होने के बाद ग़ज़ा में बसने की बात भी खुलेआम कर रहे हैं. ये इसराइली सरकार के महत्वपूर्ण मंत्रालयों में भी काम कर रहे हैं.
एक तरफ विश्व के नेता "टू स्टेट समाधान" पर ज़ोर दे रहे हैं और नई बस्तियां बसाने का विरोध कर रहे हैं जिससे स्थायी शांति का रास्ता निकल सकेगा और एक अलग फ़लस्तीनी राष्ट्र बन सकेगा. दूसरी तरफ इसराइल के धार्मिक राष्ट्रवादिों का मानना है कि सारी ज़मीन पर इसराइल का हक़ है.
विश्लेषकों का मानना है कि शायद इसीलिए कुछ नेता युद्धविराम के किसी भी समझौते को मानने से इनकार कर रहे हैं.
'द टाइम्स ऑफ़ इसराइल' की राजनीतिक संवाददाता ताल श्नाइडर का कहना है कि वे लोग इस कारण से भी संघर्ष ख़त्म नहीं करना चाहते या बंधक रिहाई समझौते पर नहीं पहुंचना चाहते क्योंकि उनका मानना है कि इसराइल को तब तक युद्ध लड़ना चाहिए जब तक कि संघर्ष ग़ज़ा के अंदर सिमट कर न रह जाए.
ताल श्नाइडर कहती हैं, "वो सोचते हैं कि लंबी अवधि में उनकी विचारधारा ज़्यादा सही है. यह उनका अपना तर्क है."
इस बीच इसराइली प्रशासन ने पांच नई बस्तियां बसाने की घोषणा की है. इनमें से एक बस्ती बतिर गांव में भी बसाई जाएगी. यह बस्तियां 23 वर्ग किलोमीटर इलाके़ में बसाई जाएंगी. इसका मतलब यह है कि इसराइल इसे अपनी ज़मीन मानता है, भले ही यह ज़मीन कब्जे़ वाले इलाके़ में हो और फ़लस्तीनी लोगों की निजी ज़मीन हो.
इसराइली सेटलर्स इस बात की उम्मीद करते हैं कि वे लोग अधिक से अधिक संख्या में इसराइली लोगों को इस जमीन पर बसाएंगे. उन्हें उम्मीद है कि आख़िर में इसराइल औपचारिक रूप से इस जमीन पर कब्जा कर ही लेगा.
सेटेलाइट इमेज में युद्ध शुरु होने के बाद हेब्रोन के उत्तर में अल कानूब में गाड़ियों में बने घर (कैरेवान) और नई सड़के देखी जा सकती हैं.
हम 50 वर्षीय शालल्दा और उनके 80 वर्षीय चाचा मोहम्मद के साथ अल कानूब गए. उन्होंने बताया कि पिछले साल नवंबर में इसराइली सेटलर्स ने उनके घरों को तबाह कर दिया था.
जैसे ही हम करीब पहुंचे एक चरमपंथी ने अपनी कार से हमारे रास्ते को रोक दिया.
जल्ह ही वहां पर बंदूकधारी इसराइली सैनिक आ गए. समूह में कुछ इसराइली डिफेंस फोर्सेस के सैनिक थे जिनके वर्दी पर प्रतिक चिन्ह लगे हुए था. सैनिकों में से एक उस बस्ती का अधिकारी था जिसने हमें जांच के लिए रोका.
बस्ती के सुरक्षाकर्मी ने कार से दोनों फलस्तीनी नागरिकों को उतारकर उनकी तलाशी ली. दो घंटों के बाद सैनिकों ने सेटलर्स को वहां से हटा दिया और बीबीसी की कार को जाने की अनुमति दी.
पचास दशक से भी अधिक समय पहले वेस्ट बैंक पर कब्जा करने और जॉर्डन से वेस्ट बैंक पर छीनने के बाद के बाद इसराइल ने वहां पर बस्तियां बसानी शुरू कर दी थी. तब से आने वाली सरकारों ने लगातार ने बस्तियों के विस्तार को बढ़ाया है.
इसराइल के कब्जे वाले पूर्वी यरूशलम को छोड़कर वहां पर आज लगभग 30 लाख फलस्तीनी रहते हैं. साथ ही 130 बस्तियों में लगभग पांच लाख यहूदी भी वहां पर रहते हैं.
2022 से सत्ता में आने के बाद इसराइल की दक्षिणपंथी सरकार ने इन बस्तियों में लोगों की संख्या बढ़ाकर 10 लाख करने का वादा किया था.
बेजेलेल स्मोट्रिच का मानना है कि यहूदियों का इस जमीन पर ईश्वर की ओर से दिया गया अधिकार है. स्मोट्रिच इसराइल की दो दक्षिणपंथी पार्टियों में से एक के प्रमुख हैं. प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने 2022 में स्मोट्रिच की पार्टी में गठबंधन में लाकर उनकी सत्ता में वापसी कराई थी.
स्मोट्रिच इसराइल के वित्त मंत्री हैं लेकिन उनके पास रक्षा मंत्रालय में भी पद है जो उन्हें वेस्ट बैंक को लेकर इसराइल की नीतियों में बदलाव लाने में मदद करता है.
उन्होंने नई बसाई जा रही बस्तियों में आधारभूत ढांचे को खड़ा करने और रोड बनाने में काफी सरकारी निवेश किया है. उन्होंने एक नई नौकरशाही का भी निर्माण किया है जो सेना की सहायता से बस्तियों का निर्माण तेजी से कर रही है.
'मेरे जीवन का उद्देश्य'
दशकों से धार्मिक राष्ट्रवादी विचारधारा के लोग इसराइली राजनीति के हाशिए पर थे.
लेकिन उनकी विचारधारा धीरे धीरे लोकप्रिय हो गई है. 2022 के चुनाव में इन पार्टियों ने 120 सीटों में से 13 सीटें हासिल की थी और बिन्यामिन नेतन्याहू के राइट विंग गठबंधन सरकार में किंग मेकर की भूमिक में आ गई थी.
युद्ध के दौरान बेज़ेलेल स्मोट्रिच और उनके सहयोगी कंट्टरपंथी इतामार बेन-गाविर ने बार बार सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देने वाली और इसराइल के पश्चिमी सहयोगियों को भड़काने वाली टिप्पणियां की. अभी यह दोनों इसराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री हैं.
इसराइली सेना की ओर से फलस्तीन के बंदियों के साथ यौन उत्पीड़न करने वाले आरक्षियों को गिरफ्तार किए जाने के बाद बेन ग्विर ने कहा था, “हमारे सर्वश्रेष्ठ नायकों को गिरफ्तार करना शर्मनाक है.” इसी महीने बेज़ेलेल स्मोट्रिच ने कहा था कि ग़ज़ा के लोगों को भूखा मारना “उचित और नैतिक” हो सकता है.
इसराइली पत्रकार और द इकोनॉमिस्ट के संवाददाता अंशेल फेफेर कहते हैं, “इसराइलियों का यह समूह फलस्तीनियों और पड़ोसी अरब देशों के साथ किसी भी प्रकार के समझौते के हमेशा खिलाफ रहा है.”
ग़ज़ा में हो रहे युद्ध को यह दक्षिणपंथी एक अवसर के रूप में देखते हैं. स्मोट्रिच ने फलस्तीनी नागरिकों को वहां से चले जाने के लिए कहा है जिससे इसराइल के लोगों के लिए रास्ता बन सके.
हालांकि नेतन्याहू ने ग़ज़ा में यहूदी बस्तियों को बसाने से इनकार कर दिया है. लेकिन वह धुर दक्षिणपंथी पार्टियों के दबाव में हैं जो बंधकों को घर लाने के लिए किसी लापरवाह युद्धविराम के समझौते पर हस्ताक्षर करने पर उनकी सरकार को गिराने की धमकियां देती हैं.
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