गुरुग्राम और दिल्ली में विवादित वीडियो पर भीड़ की हिंसा, गिरफ़्तारी के बाद रिहा हुए लोग लेकिन सवाल बाक़ी

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- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
हरियाणा के गुरुग्राम और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर विवादित वीडियो आने के बाद भीड़ की हिंसा की दो घटनाएँ हुई हैं.
इन घटनाओं से जुड़ी तीन एफ़आईआर और एक एनसीआर (ग़ैर संज्ञेय अपराध) दर्ज की गई हैं.
इन घटनाओं में कुल सात लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया था, लेकिन बाद में सभी को ज़मानत भी मिल गई है.
हरियाणा पुलिस और दिल्ली पुलिस ने बीबीसी से इन मामलों में एफ़आईआर दर्ज किए जाने और संबंधित लोगों की गिरफ़्तारी की पुष्टि की थी.
पहली घटना हरियाणा के गुरुग्राम की है, जहाँ न्यू कॉलोनी इलाके़े में रहने वाले एक युवक ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म प्रिज़्म लाइव पर प्रसारित एक लाइव वीडियो में गाय को चिकन मोमोज़ खिलाने का दावा किया.
इस दावे के बाद हिंदूवादी संगठनों ने इस युवक के घर पहुँचकर उनके साथ मारपीट की.
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गुरुग्राम में क्या हुआ?

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मारपीट की ये घटना आठ दिसंबर की है.
कथित वीडियो आने के बाद हिंदूवादी दलों से जुड़े लोगों ने युवक के घर का घेराव किया और उसके साथ मारपीट की.
सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफ़ार्म के लिए वीडियो बनाने वाला यह युवक अपनी ग़लती के लिए माफ़ी मांगता हुए नज़र आ रहा है.
जबकि आक्रोशित भीड़ इस युवक को गले से पकड़कर खींचते हुए और पीटते हुए दिख रही है.
गुरुग्राम पुलिस के प्रवक्ता संदीप कुमार के मुताबिक़ इन घटनाओं के संबंध में दो मुक़दमे दर्ज किए गए हैं.
संदीप कुमार ने बताया, "गुरुग्राम पुलिस को शिकायत मिली थी कि एक व्यक्ति ने गाय को नॉन वेज मोमोज़ खिलाए हैं. इस शिकायत के बाद 28 वर्षीय युवक को गिरफ़्तार किया गया था. जांच के बाद चार्जशीट दायर की जाएगी."
गुरुग्राम पुलिस ने पहला मुक़दमा गाय को नॉन वेज खिलाते हुए वीडियो बनाने युवक के ख़िलाफ़ किया. गिरफ़्तारी के बाद युवक को ज़मानत पर रिहा कर दिया गया.
वहीं, युवक के साथ मारपीट करने वाले कथित गौरक्षकों में से पाँच के ख़िलाफ़ मारपीट से जुड़ी धाराओं में मुक़दमा दर्ज कर गिरफ़्तार किया गया था.
इन सभी लोगों को भी ज़मानत मिल गई है.
गौरक्षकों का क्या कहना है?

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गौरक्षक चमन खटाना ने बीबीसी से बातचीत में दावा किया कि उनका समूह कथित रूप से आपत्तिजनक वीडियो बनाने वाले युवक को ‘पकड़ने में’ शामिल था.
खटाना ने कहा, “हमें सोशल मीडिया के ज़रिए गाय को नॉन वेज मोमोज़ खिलाए जाने के वीडियो के बारे में पता चला. हमारे सदस्य एक्टिव हुए और वीडियो बनाने वाले युवक की पहचान की गई. हम उसे समझाने के लिए गए थे.”
ख़ुद को गौरक्षक बताने वाले चमन खटाना ने दावा किया, “उस युवक के साथ मारपीट सिर्फ़ हमारे ग्रुप के सदस्यों ने ही नहीं की थी, बल्कि स्थानीय लोगों ने भी की थी. लेकिन मुक़दमा हमसे जुड़े पाँच लोगों पर किया गया.”
हालाँकि, खटाना को इस मुक़दमे का कोई अफ़सोस नहीं है.
वो कहते हैं, “अफ़सोस की बात ये है कि एक हिंदू युवक ने गाय को चिकन खिलाने का वीडियो बनाया और हिंदुओं की भावनाओं को आहत किया. अगर कोई ऐसा कार्य करेगा, तो हिंदू आक्रोशित होंगे ही.”
उनके समूह से ही जुड़े एक और युवक निखिल शर्मा ने भी वीडियो पोस्ट किया था.
बीबीसी से बातचीत में निखिल ने कहा, “मैं घटना के दौरान मौजूद नहीं था, लेकिन हमारे ग्रुप के सदस्यों से ये वीडियो मुझे मिला था और मैंने पोस्ट कर दिया. गाय के साथ इस तरह की किसी भी घटना को हिंदूवादी समूह बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं.”
इस घटना के बाद से ही वीडियो बनाने वाले युवक का मोबाइल फ़ोन बंद है और घटना के संबंध में उनका पक्ष नहीं मिल सका है.
हालाँकि, एक बयान में गुरुग्राम पुलिस ने कहा है, “गाय को नॉन वेज मोमोज़ खिलाने वाले युवक को गिरफ़्तार किया गया. उस पर हमला करने वाले पाँच युवक गिरफ़्तार किए गए. किसी को भी क़ानून को अपने हाथ में नहीं लेने दिया जाएगा.”
दिल्ली में भी यूट्यूबर से मारपीट

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वहीं गुरुग्राम की इस घटना की प्रतिक्रिया में वीडियो बनाने वाले और गौरक्षकों के लिए आपत्तिजनक शब्द इस्तेमाल करने वाले एक और युवा यूट्यूबर के साथ दिल्ली के न्यू अशोक नगर इलाक़े में मारपीट की गई.
उसे वीडियो पर माफ़ी मांगने के लिए मजबूर किया गया. ये वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है.
ये घटना शनिवार शाम क़रीब साढ़े पाँच बजे की है. घटनास्थल पर मौजूद कई लोगों ने बीबीसी से युवक के साथ मारपीट होने की पुष्टि की.
दिल्ली के न्यू अशोक नगर इलाक़े में हिंदूवादी कार्यकर्ताओं ने जिस युवा पर हमला किया, वह भी सोशल मीडिया के लिए कंटेंट बनाता है.
इस युवक के अकाउंट पर पोस्ट किए गए पुराने वीडियो में वह महिलाओं को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए नज़र आ रहे हैं.
हालाँकि, उनके अकाउंट पर पोस्ट अधिकतर वीडियो अब डिलीट कर दिए गए हैं.
मूलरूप से मध्य प्रदेश के रहने वाले इस युवा यूट्यूबर ने गुरुग्राम की घटना के बाद एक वीडियो बनाया था और इसमें गौरक्षकों के लिए भी आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था.
अशोक नगर के प्रॉपर्टी डीलर योगेश कुमार शर्मा के मुताबिक़ उन्होंने हाल ही में इस युवक को किराए पर कमरा दिलवाया था.
योगेश बताते हैं, “सोशल मीडिया पर इस युवक का विवादित वीडियो वायरल होने के बाद अलग-अलग नंबरों से मेरे पास फ़ोन आया और मुझसे कहा गया कि मैंने ऐसे युवक को कमरा क्यों दिया है जो विवादित कंटेंट बनाता है और आपत्तिजनक टिप्पणी करता है.”
योगेश के मुताबिक़, “लोगों की शिकायत के बाद मैंने युवक से कमरा खाली करवा लिया था. वो शनिवार को अपना सामान लेने आया था. इसी दौरान लेनदेन को लेकर उसने मुझे बुलाया और मेरे साथ मारपीट की. उसके कुछ दोस्तों ने भी मुझ पर हमला किया.”
योगेश शर्मा की शिकायत पर इस युवक के ख़िलाफ़ मारपीट के आरोप में मुक़दमा दर्ज किया गया है.
बीबीसी ने इस युवक से फ़ोन पर बात करनी चाही, लेकिन उनकी तरफ़ से कोई जवाब नहीं मिल सका. उन्होंने बीबीसी के भेजे हुए मैसेज का भी जवाब नहीं दिया.
शनिवार शाम को न्यू अशोक नगर इलाक़े के जिस फ्लैट में यह युवक रह रहा था, वहाँ हिंदूवादी कार्यकर्ता दक्ष चौधरी के साथ कुछ युवा पहुँचे और उन्होंने इस युवक के साथ मारपीट की और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया.
एक चश्मदीद ने अपना नाम न ज़ाहिर करते हुए बीबीसी को बताया, “पहले ऊपर फ़्लैट में झगड़ा हुआ था, जिसके क़रीब एक-डेढ़ घंटे बाद कुछ गौरक्षक यहाँ पहुँचे और युवक को खींचते हुए बाहर ले आए. जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, वो यहीं बनाया गया था.”
दक्ष चौधरी पर पहले भी दर्ज हैं मुक़दमे

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इस घटना से जुड़ा एक वीडियो दक्ष चौधरी ने अपने अकाउंट पर शेयर किया है. इस वीडियो में वो युवक को पीट रहे हैं और माफ़ी मांगने के लिए मजबूर कर रहे हैं.
इस दौरान दिल्ली पुलिस के कुछ जवान भी वहाँ खड़े नज़र आ रहे हैं.
बीबीसी ने इन घटनाओं के संबंध में पूर्वी दिल्ली के डीसीपी अभिषेक दहिया से बात करनी चाही लेकिन कोई जवाब नहीं मिल सका.
पूर्वी दिल्ली पुलिस के मीडिया प्रभारी ने बीबीसी से कहा, “इन घटनाओं के संबंध में पुलिस मुख्यालय को सूचित कर दिया गया है.”
हालाँकि दिल्ली पुलिस ने इससे अधिक जानकारी नहीं दी.
न्यू अशोक नगर थाने से जुड़े पुलिसकर्मियों ने भी घटना की संवेदनशीलता का हवाला देते हुए बीबीसी से बात नहीं की.
बीबीसी को पता चला है कि न्यू अशोक नगर थाने में प्रापर्टी डीलर योगेश शर्मा की शिकायत पर युवा यूट्यूबर के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है. उन्हें गिरफ़्तार करने के बाद ज़मानत पर छोड़ दिया गया.
हालांकि, अपने साथ हुई मारपीट को लेकर इस युवक ने थाने में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है.
बीबीसी को पता चला है कि पुलिस ने अपनी तरफ़ से एक एनसीआर दर्ज की है. हालाँकि इस संबंध में न ही किसी से पूछताछ की गई है और ना ही किसी को हिरासत में लिया गया है.
इस युवक पर हमला करने वाले हिंदूवादी कार्यकर्ता दक्ष चौधरी पर इससे पहले भी कई मुक़दमे दर्ज किए गए हैं.
हाल ही में उन्हें उत्तर प्रदेश के वृंदावन में एक शराब की दुकान पर तोड़फोड़ करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.
इसी साल जून में दिल्ली के जाफ़राबाद इलाक़े में भैंस लेकर जा रहे एक मुसलमान व्यापारी पर हमला करने के आरोप में भी दक्ष चौधरी को गिरफ़्तार किया गया था.
अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर दक्ष चौधरी ने जो वीडियो शेयर किया है, उसमें वे युवक के साथ मारपीट करते हुए और उन्हें अपशब्द कहते हुए सुनाई दे रहे हैं.
हालाँकि, दिल्ली पुलिस ने इस ग़ैर संज्ञेय अपराध माना है और दक्ष चौधरी या उनसे जुड़े किसी युवा से ना ही पूछताछ की गई है और ना ही हिरासत में लिया गया.
क़ानून व्यवस्था पर सवाल
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल भी उठाए हैं.
आंबेडकर मिशन के संस्थापक सूरज कुमार बौद्ध ने घटना का वीडियो शेयर करते हुए एक्स पर लिखा, “ये सब पुलिस के सामने हुआ है, क़ानून के शासन की जगह भीड़ तंत्र ने ले ली है.”
बीबीसी से बात करते हुए सूरज बौद्ध ने कहा, “वीडियो बनाने वाले युवाओं ने जिस तरह के कृत्य किए या भाषा का इस्तेमाल किया उसे सही नहीं ठहराया जा सकता है. उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के लिए पुलिस है. लेकिन भीड़ ने जिस तरह से उन पर हमला किया, उससे यही पता चलता है कि भारत में अब भीड़ की हिंसा या लिचिंग की घटनाएँ सामान्य हो गई हैं और पुलिस भी इन्हें गंभीरता से नहीं ले रही है.”
सूरज बौद्ध कहते हैं, “इस तरह की घटनाएँ क़ानून के शासन के लिए चुनौती हैं और उन्हें सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता है.”
बौद्ध कहते हैं, “भीड़ का किसी को इस तरह सार्वजनिक रूप से पीटना और फिर बेख़ौफ़ होकर सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करना दर्शाता है कि क़ानून का डर कम हो रहा है.”
सोशल मीडिया यूज़र जयंत भंडारी ने हालात पर टिप्पणी करते हुए लिखा, "बैकग्राउंड में पुलिस को देखना ना भूलें."
हालाँकि, एक वर्ग ऐसा भी है जो इस तरह की घटनाओं को सही ठहरा रहा है.
सोशल मीडिया पर कई ऐसे पोस्ट किए गए हैं जिसमें हमले का शिकार बनें युवक के सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किए गए विवादित कंटेंट का हवाला देकर गौरक्षकों की कार्रवाई को सही ठहराने का प्रयास किया गया है.
वहीं, न्यू अशोक नगर में घटनास्थल के पास बीबीसी से बात करते हुए एक युवा ने कहा, “अगर धर्म को लेकर, गाय को लेकर कोई ऐसी आपत्तिजनक टिप्पणी करेगा, तो हिंदू तो आक्रोशित होंगे ही.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
















