मोहित पांडे की लखनऊ में पुलिस हिरासत में मौत पर छिड़ा सियासी घमासान, पुलिस पर उठे गंभीर सवाल

- Author, सैय्यद मोज़िज़ इमाम
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लखनऊ
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस की हिरासत में एक व्यक्ति की मौत के बाद सियासी घमासान मचा हुआ है.
मोहित पांडे की पुलिस हिरासत में मौत के बाद प्रभारी निरीक्षक को निलंबित कर दिया गया है.
मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि हिरासत में पुलिस की पिटाई के कारण मोहित पांडे की मौत हुई है.
इस घटना के बाद विपक्ष ने योगी आदित्यनाथ की सरकार और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं.
एक पखवाड़े के अंदर पुलिस हिरासत में मौत की ये दूसरी घटना है.

हुआ क्या था
दरअसल रुपए के लेन-देन को लेकर मोहित पांडे का आदेश नाम के व्यक्ति के साथ विवाद हुआ था.
इसके बाद लखनऊ की चिनहट पुलिस उन्हें अपने साथ लेकर गई थी.
मोहित के परिजनों का आरोप है कि आदेश के रिश्तेदार नेता हैं, इसलिए पुलिस ने मोहित के साथ ज़्यादती की.
परिवार वालों का ये भी आरोप है कि जब मोहित के भाई उनसे मिलने थाने गए, पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में ले लिया.
आरोप है कि इस दौरान मृतक की पिटाई की गई और जब हालत ख़राब हो गई तो उसको अस्पताल में भर्ती किया गया लेकिन जान नहीं बच सकी.
लखनऊ पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर कहा कि मामले की जाँच के लिए मामला गोमती नगर विस्तार के प्रभारी निरीक्षक को सौंपा गया है.
पुलिस ने 103(1) और 61(2) के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया है.
पुलिस के मुताबिक़ पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं है इसलिए आगे की जाँच के लिए के लिए मृतक का विसरा सुरक्षित रखा गया है.
मौत के बाद घरवालों ने शव के साथ लोहिया हॉस्पिटल के सामने प्रदर्शन किया, जिसके बाद सरकार ने थाने के इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया है .
राज्य के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि ये घटना दुखद है और सरकार इस पर सख़्ती से कार्रवाई करेगी.
पीड़ित परिवार के लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाक़ात की.
उत्तर प्रदेश सरकार ने मोहित के परिजनों को 10 लाख रुपए का मुआवज़ा, एक आवास, बच्चों को मुफ़्त शिक्षा और दूसरी सरकारी सुविधाएँ देने का निर्देश दिया है.
600 रुपये को लेकर हुआ था विवाद

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मृतक के परिवार वालों का कहना है कि पूरा विवाद मोहित पांडे और आदेश के बीच 600 रुपए के लेन देने के लिए हुआ.
आदेश ने पुलिस बुला ली और पुलिस मोहित को पकड़ कर ले गई.
मोहित पांडे का स्कूल यूनिफ़ॉर्म बनाने का कारोबार था और आदेश उनके यहाँ ड्राइवर का काम करता था.
बाद में जब उसका भाई शोभाराम उससे मिलने गया, तो उसको भी हिरासत में ले लिया. घर वालों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने पिटाई की जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई.
मोहित के परिवार में पत्नी और तीन बच्चे भी हैं.
मोहित की माँ तापेश्वरी देवी की तहरीर पर तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक अश्विनी कुमार चतुर्वेदी ,आदेश और अज्ञात के ख़िलाफ़ मुक़दमा लिखा गया है.
राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल के सीएमएस डॉक्टर विक्रम सिंह ने मीडिया को बताया कि शनिवार को मोहित पांडे को अपराह्न 2.30 बजे लाया गया, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी
इस घटना में 103(1) और 61(2) के तहत हत्या का मुक़दमा दर्ज किया गया है.
इस मामले में प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह का कहना है कि हिरासत में मौत पुलिस पर एक धब्बा है और ज़िम्मेदारी उस थाने की बनती है.नए बीएनएस अधिनियम में भी यही कहा गया है.
विक्रम सिंह ने कहा कि इस तरह के मामलों में डयूटी पर रहे सभी पुलिस वालों को जाँच पूरी होने तक निलंबित किया जाना चाहिए, क्योंकि पुलिस ये नहीं कह सकती है कि उसने कुछ नहीं किया है.
पुलिस-सरकार पर विपक्ष के सवाल

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समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सरकार और पुलिस पर सवाल उठाए हैं.
उन्होंने कहा, "उप्र की राजधानी में पिछले 16 दिनों में पुलिस हिरासत में मौत (हत्या पढ़ा जाए) का दूसरा समाचार मिला है. नाम बदलने में माहिर सरकार को अब 'पुलिस हिरासत' का नाम बदलकर 'अत्याचार गृह' रख देना चाहिए. पीड़ित परिवार की हर माँग पूरी की जाए,हम उनके साथ हैं."
वहीं वायनाड से लोकसभा का चुनाव लड़ रही कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने एक्स पर लिखा,"लखनऊ, यूपी में पुलिस ने दो युवकों को हिरासत में लिया और अगली सुबह एक की मौत हो गई. एक पखवाड़े में यूपी पुलिस की हिरासत में यह दूसरी मौत है. परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने उनके बेटे की हत्या कर दी."
प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि यूपी हिरासत में होने वाली मौतों के मामले में पूरे देश में पहले स्थान पर है.
उन्होंने कहा कि प्रदेश में बीजेपी ने ऐसा जंगलराज क़ायम किया है, जहाँ पुलिस क्रूरता का पर्याय बन चुकी है ‘जहाँ क़ानून के रखवाले ही जान ले रहे हों, वहाँ जनता न्याय की उम्मीद किससे करे?’
इस मामले को लेकर सवालों से घिरी योगी सरकार में उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने मोहित पांडे के परिवार वालों से मुलाक़ात की और परिजनों को सांत्वना दी.
पाठक ने कहा, "दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने हेतु परिजनों को आश्वस्त किया. मैं हर परिस्थिति, हर क़दम पर उनके साथ हूँ. सरकार पूरी तत्परता के साथ पीड़ित परिजनों के साथ है. किसी भी दोषी को बख़्शा नहीं जाएगा."
लखनऊ में एक पखवाड़े में हिरासत में दूसरी मौत

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उत्तर प्रदेश पुलिस पर फ़र्जी मुठभेड़ के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन अब हिरासत में मौत को लेकर हंगामा खड़ा हुआ है, क्योंकि लखनऊ पुलिस की हिरासत में एक पखवाड़े में दूसरी मौत है.
इससे पहले 11 अक्तूबर को विकासनगर के आंबेडकर पार्क के पास रात को जुआ खेलने के आरोप में दलित युवक अमन कुमार गौतम और सोनू बंसल को पुलिस ने हिरासत में लिया था. बाद में अमन की तबीयत बिगड़ गई और फिर मौत हो गई.
परिजनों ने कॉन्स्टेबल शैलेंद्र सिंह और कुछ अन्य पुलिस वालों पर आरोप लगाया था. जिसके बाद पीआरवी (पुलिस रेस्पांस व्हीकल) के तीन सिपाहियों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया था.
परिजनों का कहना था कि अमन जागरण के लिए चंदा जुटा रहा था.अमन गौतम की बहन सुधा गौतम ने आरोप लगाया था कि उनके भाई के शरीर पर चोट के निशान थे.
हालांकि पुलिस की ओर से मौत की वजह हार्ट अटैक बताई गई है.
हालांकि एनसीआरबी के 2022 के आँकड़ों के मुताबिक़ हिरासत में मौत के मामले में गुजरात पहले नंबर पर है.
वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के आँकड़ों के मुताबिक़ देश भर में रोज़ पाँच व्यक्तियों की मौत या तो पुलिस हिरासत में या फिर न्यायिक हिरासत में हो रही है.
एनएचआरसी का ये आँकड़ा 2010-2020 तक का है, जिसमें 17146 व्यक्तियों की मौत हुई है.
संसद में अगस्त 2023 में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया था कि साल 2018 से मार्च 2023 तक 687 व्यक्तियों की मौत पुलिस हिरासत में हुई है.जिसमें 41 व्यक्तियों की मौत उत्तर प्रदेश में हुई है.
डीजीपी की गाइडलाइंस

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उत्तर प्रदेश के पुलिस महा निदेशक प्रशांत कुमार ने इस साल जुलाई में पुलिस हिरासत में रखने को लेकर गाइडलाइन जारी की थी.
इस गाइडलाइन के मुताबिक़
1. किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेने से पहले उसकी स्वास्थ्य संबधी जानकारी लेनी ज़रूरी है. हिरासत में लिए गए व्यक्ति के बारे में जीडी में एंट्री की जाए और एसएचओ को बताया जाए.
2. अगर कोई व्यक्ति बीमार हो, तो फ़ौरन अस्पताल में भर्ती कराया जाए, चाहे उसकी कोई पहले स्वास्थ्य में गड़बड़ी ना रही हो.
3. किसी व्यक्ति का स्वास्थ्य खराब होने पर वीडियोग्राफी कराई जाए.
4. सिर्फ़ जाँच अधिकारी या एसएचओ ही पूछताछ कर सकते हैं. मारपीट की जगह साइकोलॉजी के तौर- तरीक़े इस्तेमाल किए जाने चाहिए.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित















