स्नैक्स ने किस तरह हमारे खाने के तरीक़े को बदल दिया है?

स्नैक्स

इमेज स्रोत, Getty Images

    • Author, द फ़ूड चेन
    • पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस

भुनी मूंगफली, चिप्स, मिठाइयाँ, चॉकलेट, चावल के क्रैकर्स, बॉम्बे मिक्स, कुकीज़, डोनट्स, केक , मीठे हों या नमकीन, दुनिया में कई तरह के स्नैक्स हैं.

हज़ारों सालों से इंसान स्नैक्स खाते आ रहे हैं, लेकिन आजकल तो ये एक बड़ा उद्योग बन गया है जिसकी सालाना कीमत लाखों करोड़ों से भी ज़्यादा है.

अब तो बहुत से लोग दिन में या रात में खाने के मुक़ाबले स्नैक्स से ही ज़्यादा कैलोरी ले लेते हैं.

लेकिन इस बड़ी इंडस्ट्री बनने के पीछे सिर्फ़ हमारी भूख या समय की कमी ही ज़िम्मेदार नहीं है. खाना बनाने वाली कंपनियों की चालाक मार्केटिंग ने भी हमारी डाइट में स्नैक्स को शामिल करने में अहम भूमिका निभाई है.

बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें.

सबसे पुराना स्नैक कौन सा है?

कैंब्रिज इंग्लिश डिक्शनरी के मुताबिक़, स्नैक मतलब "खाने के बीच में थोड़ा-सा खाना या बहुत छोटा मील".

यानी स्नैक ज़रूरी नहीं कि जंक फ़ूड ही हो, या फिर पैकेट वाला तैयार कम पौष्टिक खाना हो.

ब्रिटिश फ़ूड इतिहासकार और लेखिका डॉक्टर ऐनी ग्रे का कहना है कि आज के समय में हम स्नैक को काफ़ी बुरा मानते हैं.

स्नैक्स

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, लोगों को जब भी भूख लगती है वह स्नैक्स खा लेते हैं

वह कहती हैं, "हम आमतौर पर स्नैक फ़ूड को ऐसी चीज़ मानते हैं जिसे हम आसानी से उठा लेते हैं और खाने के बीच खा लेते हैं. मुझे लगता है कि इसके साथ अक्सर एक तरह का गिल्ट जुड़ा होता है."

डॉक्टर ग्रे बताती हैं कि स्नैकिंग कोई नई बात नहीं है बल्कि ये बहुत पुरानी आदत है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हज़ारों साल पहले लोग स्नैक्स में क्या खाते थे?

डॉक्टर ग्रे के अनुसार, "सबसे पुराने स्नैक्स तो नट्स (मेवे), बेरीज़ और फल थे. लेकिन आज के मॉडर्न स्नैक्स में सबसे पुराना शायद पॉपकॉर्न है. आर्कियोलॉजिस्ट को दक्षिण अमेरिका की गुफाओं में पॉप किए हुए मक्के के दाने मिले हैं, जो करीब 7,000 साल पुराने हैं."

वे आगे कहती हैं, "इतिहास में दुनिया भर के बहुत से लोग बैठकर खाने के लिए टाइम नहीं निकाल पाते थे, तो उन्हें जब भूख लगती थी वे कुछ खा लेते थे."

पुराने ज़माने में स्नैकिंग

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

अगर इंसानों के ज़्यादातर इतिहास में स्नैकिंग ही नॉर्मल था, तो हमने इसे "खाने के बीच का" कब से मानना शुरू किया?

डॉक्टर ग्रे कहती हैं, "स्नैक शब्द की जड़ें शुरुआती आधुनिक दौर में मिलती हैं और जब यह पहली बार अंग्रेज़ी में इस्तेमाल हुआ, तो इसका मतलब था- 'किसी चीज़ का एक हिस्सा'."

वह कहती हैं, "इसमें पहले से ही शेयर करने का भाव जुड़ा हुआ है. यह सिर्फ़ खाने का हिस्सा नहीं होता था, बल्कि आप पैसे का स्नैक या मुनाफ़े का स्नैक भी ले सकते हैं."

इसके बाद यह शब्द बहुत तेज़ी से खाने से जुड़ गया. डॉक्टर ग्रे आगे बताती हैं, "खेत में काम करने वाला कोई मज़दूर कह सकता था, ओह, मुझे भूख लगी है, मैं केक का एक स्नैक खा लेता हूँ".

वह कहती हैं, "अठारहवीं सदी के बीच में आते-आते 'स्नैक' शब्द पूरी तरह खाने से जुड़ गया और औपचारिक खाने की आदतों से एक अलग चीज़ बन गया."

सैंडविच जैसा एक बड़ा स्नैक इसी ज़माने में जन्मा.

कहानी है कि 1762 में एक शाम 'फ़ोर्थ अर्ल ऑफ सैंडविच' जॉन मॉन्टेग्यू कार्ड्स खेल रहे थे. खेलने के दौरान उन्हें भूख लगी लेकिन जॉन मॉन्टेग्यू का खेल छोड़ने का मन नहीं था. तो उन्होंने नौकर से दो ब्रेड के बीच में मीट रखकर लाने के लिए कहा.

बस, यहीं से सैंडविच का जन्म हुआ. जो आज स्नैक की सही परिभाषा बन गया है.

जॉन मॉन्टेग्यू

इमेज स्रोत, Universal History Archive/Getty Images

इमेज कैप्शन, जॉन मॉन्टेग्यू की सैंडिविच को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका थी

औद्योगिक दौर के शुरुआती समय में अमेरिका में स्नैक बनाने वाली कंपनियों ने फैक्ट्री वर्कर्स को टारगेट किया. फ़ैक्ट्री के गेट पर छोटे-छोटे स्नैक बार लगे, जहाँ ऑयस्टर, अचार और सैंडविच बिकते थे.

19वीं सदी में अमेरिका में पॉपकॉर्न लोकप्रिय हो गए. उसके बाद और भी कई चीज़ें आईं.

डॉक्टर ग्रे बताती हैं, "1910 में पहली बार क्रिस्प्स (चिप्स) व्यावसायिक रूप से बनने लगे. उस दौर में बहुत सारे बने-बनाए और इंडस्ट्रियल फ़ूड बाजार में आए."

दूसरे विश्व युद्ध के बाद फ़ूड प्रोसेसिंग और पैकेजिंग में बड़ी तरक्की हुई. लोगों की आय बढ़ने लगी, जिससे स्नैक्स आसानी से घर-घर पहुँचने लगे.

डॉक्टर ग्रे कहती हैं, "अब ज़्यादा लोग घर से बाहर काम करते थे, शिफ़्ट में काम करने वाले लोग फ़ुल मील के लिए टाइम नहीं निकाल पाते थे. इंडस्ट्री बढ़ी, मिडिल क्लास की आबादी बढ़ी, लोगों के पास एक्स्ट्रा पैसे आए, जिससे स्नैक्स पर ख़र्च बढ़ता गया."

स्नैक्स

इमेज स्रोत, AFP via Getty Images

इमेज कैप्शन, दुनिया भर में कई तरह के स्नैक्स प्रचलित और लोकप्रिय हैं

आज स्नैक मार्केट कितना बड़ा है?

इसी दौर में पैकेजिंग टेक्नोलॉजी भी आगे बढ़ी. जैसे क्रिस्प्स के बैग में नाइट्रोजन गैस भरना शुरू हुआ, जिससे चिप्स टूटते नहीं और ट्रांसपोर्ट में सुरक्षित रहने लगे.

इसकी वजह से मैन्युफ़ैक्चरिंग एक ही जगह पर करना आर्थिक तौर पर फ़ायदेमंद हुआ और कम जगहों पर बड़े-बड़े कारखाने खुलने लगे.

1979 में जब पॉल पोलमैन ने अमेरिकी कंपनी प्रोक्टर एंड गैंबल जॉइन किया, तब तक साधारण क्रिस्प्स स्नैकिंग की दुनिया का बड़ा खिलाड़ी बन चुका था.

पोलमैन ने एक नए प्रोडक्ट पर काम किया जो डिहाइड्रेटेड (सूखे) आलू से बना कैन वाला चिप्स था.

स्नैक्स

इमेज स्रोत, AFP via Getty Images

इमेज कैप्शन, दुनिया भर में स्नैक्स को लेकर चलन बहुत ही तेज़ी से फैला है

उस दौर में, बड़ी-बड़ी कंपनियाँ छोटे व्यवसायों पर कब्ज़ा कर रही थीं और ब्रांड बनाने और विज्ञापन में पैसा लगा रही थीं.

आज के समय में पोलमैन इस इंडस्ट्री की तुलना 'मिलिट्री ऑपरेशन' से करते हैं.

वह कहते हैं, "सफलता बहुत तेज़ी से मिल सकती है, लेकिन उतनी ही तेज़ी से ख़त्म भी हो सकती है. इसलिए परफ़ेक्ट एक्ज़ीक्यूशन चाहिए होता है."

"आपके प्रोडक्ट की क्वालिटी और कीमत सही होनी चाहिए. साथ ही अच्छी पैकेजिंग, दुकान में सही जगह और अगर ज़रूरत पड़े तो अच्छा प्रमोशन भी चाहिए होता है."

इसका इनाम भी बहुत बड़ा हो सकता है, क्योंकि स्नैक्स की खपत लगातार बढ़ती जा रही है.

दुनिया भर में लोगों के पसंदीदा स्नैक्स कौन से हैं

स्नैक्स

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, स्नैक्स आमतौर पर सस्ते होते हैं और इन्हें आपस में बाँटा जा सकता है

दुनिया भर में लोगों के पसंदीदा स्नैक्स बहुत अलग-अलग हैं. कुछ घर पर बने, कुछ पैकेट वाले, मीठे, नमकीन, चटपटे.

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ने दुनिया भर के लोगों से पूछा कि भूख लगने पर वो क्या खाते हैं.

अर्जेंटीना से बारबरा ओयेवारी का फेवरेट स्नैक चिपा है. ये कैसावा (साबूदाना जैसा), चीज़, बटर, दूध और नमक से बना छोटा-सा गोल बन है. इसे गोल्फ़ बॉल जैसा बनाकर बेक करते हैं.

बारबरा यह स्नैक ख़ुद बनाती हैं, लेकिन उनके बेटे को रेडीमेड स्नैक्स ज़्यादा पसंद हैं.

वह बताती हैं, "दिलचस्प बात यह है कि मेरा बेटा भी चीज़ से बनी बेक की हुई चीज़ें ही पसंद करता है, जो काफ़ी हद तक वैसी ही है जैसी मुझे पसंद है. यह मज़ेदार है कि उसे नमकीन, चीज़ वाले स्नैक्स पसंद हैं, जो मुझे बचपन में पसंद थे."

डॉक्टर स्वाति मिश्रा नई दिल्ली में रहती हैं. वह उबले आलू, ढेर सारा धनिया, प्याज़ और मटर से भरे समोसे खाना पसंद करती हैं.

वह कहती हैं, "कोई पार्टी या शादी बिना समोसे के पूरी नहीं होती."

डॉक्टर स्वाति मिश्रा मानती हैं कि ताज़ा बने स्नैक्स की जगह रेडी-टू-ईट खाने की चीज़ें आ रही हैं. उनका कहना है कि बच्चों को पैकेट वाले खाने से दूर रखना मुश्किल हो गया है.

नाइजीरिया से स्टेला ओसिएग्बु रोज़ लोकल मार्केट से फिश रोल खरीदती हैं. वह कहती हैं, "फिश रोल मैदा, मछली और नमक से बनता है, और इसके साथ मदीगा होती है, जो कसावा के आटे, नमक और चीनी से बनाई जाती है."

स्टेला ओसिएग्बु

इमेज स्रोत, Stella Osiegbu.

इमेज कैप्शन, स्टेला ओसिएग्बु को फिश रोल खाना बहुत पसंद है

ओसिएग्बु बताती हैं, "मदीगा नाइजीरिया के दक्षिण-पश्चिम हिस्से की बहुत लोकप्रिय स्थानीय ब्रेड है. यह अपनी सख़्त बनावट और अच्छे स्वाद के लिए जानी जाती है."

बैंकॉक की रहने वाली पापाचाया निपानन कहती हैं, "मैं हर दिन स्नैक्स खाती हूँ. आमतौर पर कुछ कुरकुरा होता है या कभी-कभी चॉकलेट, लेकिन कभी-कभी मैं नाचोज़ भी खाती हूँ."

वह अपनी छुट्टी के दिन स्नैक्स जमा कर लेती हैं और काम के दिनों में जब भी थोड़ा वक्त मिलता है, उन्हें खा लेती हैं.

तेज़ी से बढ़ता चलन

आइसक्रीम

इमेज स्रोत, AFP via Getty Images

इमेज कैप्शन, गर्मियों में आइसक्रीम खाने का खूब चलन है

मार्केट रिसर्च कंपनी सर्काना के आँकड़ों के अनुसार, अमेरिका में लगभग आधे वयस्क हर दिन तीन या उससे ज़्यादा स्नैक्स खाते हैं.

यह चलन कई दूसरे देशों में भी देखा जा रहा है और ऐसा लगता है कि स्नैक्स के लिए लोगों की चाह कभी ख़त्म नहीं होगी.

पोलमैन कहते हैं, "जब मैंने स्नैक मार्केट में काम शुरू किया था, तब यह काफ़ी छोटा था, लगभग 300 अरब डॉलर से भी कम."

पोलमैन आगे चलकर स्नैक्स इंडस्ट्री की दिग्गज कंपनी यूनिलीवर के सीईओ बने.

वह कहते हैं, "आज मैं कहूँगा कि स्नैक्स इंडस्ट्री में 1.2 से 1.5 ट्रिलियन डॉलर (क़रीब 100-125 लाख करोड़ रुपये) तक का सामान बिक रहा है."

पोलमैन को उम्मीद है कि यह बड़ी इंडस्ट्री साल 2035 तक दोगुनी हो जाएगी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)