डोनाल्ड ट्रंप ने ईसाइयों से जो अपील की उसे लेकर बढ़ा संशय

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अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान चर्चा में बना हुआ है. इस पर जमकर बहस भी हो रही है.
पिछले हफ़्ते ट्रंप ने फ्लोरिडा की एक चुनावी रैली में कहा था, ''ईसाइयों बाहर निकलो और सिर्फ़ इस बार वोट कर दो. फिर आपको वोट डालने की ज़रूरत ही नहीं होगी. चार साल में सब सही कर दिया जाएगा. मेरे प्यारे ईसाइयों, आपको फिर वोट डालने की ज़रूरत नहीं होगी. मैं आपसे प्यार करता हूँ.''
अपने चुनावी प्रचार में डेमोक्रेटिक पार्टी ट्रंप को लोकतंत्र के लिए ख़तरा बताती रही है.
साल 2020 में राष्ट्रपति चुनाव में मिली हार के बाद ट्रंप ने काफ़ी आक्रामक रुख़ अपनाया था. ट्रंप के समर्थकों ने वॉशिंगटन के कैपिटल हिल पर धावा बोल दिया था.
ऐसे में ईसाइयों को लेकर दिए गए इस बयान पर चर्चाएं शुरू हो गई हैं कि आख़िर ट्रंप क्या कहने की कोशिश कर रहे थे?

ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रियाएं
ट्रंप के चुनावी अभियान के प्रवक्ता स्टीवेन चेंग से जब इस बयान पर स्पष्टीकरण मांगा गया तो वो सीधे तौर पर कुछ नहीं बोले.
स्टीवेन ने कहा, ''ट्रंप देश को जोड़ने की बात कर रहे थे.''
स्टीवेन ने बात बदलते हुए ट्रंप पर दो हफ़्ते पहले हुए हमले पर राजनीति करने के आरोप लगाए.
जांचकर्ता अब तक ट्रंप पर हमला किए जाने की वजह के बारे में नहीं बता पाए हैं.
ट्रंप के बयान पर वकील एंड्र्यू सिडल ने प्रतिक्रिया दी है. एंड्रयू ने सोशल मीडिया पर लिखा, ''ये ईसाई राष्ट्रवाद नहीं है. ट्रंप हमारे लोकतंत्र को ख़त्म करने और ईसाई देश बनाने की बात कर रहे हैं.''
एक्टर मॉरगन फेयरचाइल्ड ने सोशल मीडिया पर कहा, ''लेकिन अगर मैं फिर से वोट डालना चाहूं तो? मैंने हमेशा कहा है कि हमें दोबारा मतदान करने का मौक़ा मिले. ये अमेरिका है.''
एनबीसी की लीगल कमेंटेटर कैटी फांग कहती हैं, ''दूसरे शब्दों में कहें तो अगर ट्रंप राष्ट्रपति चुने गए तो वो व्हाइट हाउस कभी नहीं छोड़ेंगे.''
राजनीतिक टिप्पणीकार कीथ ओलबरमेन ने कहा, ''ओह. ट्रंप ने 2028 चुनाव को रद्द कर दिया.''
डेमोक्रेट सीनेटर मार्टिन हेनरिच की कम्युनिकेशन डायरेक्टर कैटी पेटी ने कहा, ''जब हम ये कहते हैं कि ट्रंप लोकतंत्र के लिए ख़तरा हैं तो हम यही बताने की कोशिश कर रहे होते हैं, जो ट्रंप ने अब कहा है.''
कमला हैरिस के चुनावी प्रचार के प्रवक्ता जेसन सिंगर ने ट्रंप के दोबारा वोट ना देने वाले बयान को हैरान करने और पीछे ले जाने वाला बताया.
पॉडकास्टर एलिसन गिल ने कहा- ये ड्रिल नहीं है, लोकतंत्र ख़तरे में है.


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ट्रंप के बयान चिंताजनक क्यों?
ट्रंप के वोट ना दिए जाने वाले बयान को कुछ लोग उनके पुराने बयान से जोड़कर देख रहे हैं.
दिसंबर 2023 में ट्रंप ने फॉक्स न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में कहा था कि अगर वो राष्ट्रपति चुनाव जीते तो सिर्फ़ पहले दिन के लिए तानाशाह बनेंगे ताकि मेक्सिको के साथ दक्षिणी बॉर्डर बंद करें और तेल खनन को विस्तार दे सकें.
डेमोक्रेट्स ने जब इस बयान की आलोचना की तो ट्रंप ने इसे मज़ाक बताया था.
इससे पहले कई ऐसे मौक़े रहे जब ट्रंप ने निरंकुश शासकों की तारीफ़ की थी. इन शासकों में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, हंगरी के विक्टर ओरबन और उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन का नाम शामिल है.
द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक़, व्हाइट हाउस के एक पूर्व कर्मचारी ने दावा किया था कि एक बार ट्रंप ने कहा था कि हिटलर ने कुछ अच्छी चीज़ें भी कीं.
हिटलर के नाज़ी शासन के दौरान 60 लाख यहूदियों की हत्या की गई थी.

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ईसाइयों पर ट्रंप का ज़ोर क्यों?
अमेरिका में जनगणना विभाग लोगों के धर्म के आंकड़े नहीं जुटाता है.
थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेंटर का अनुमान है कि अमेरिका की आबादी में ईसाइयों की तादाद क़रीब 70 फ़ीसदी है.
जनवरी 2021 में कैपिटल हिल पर ट्रंप के समर्थकों ने जब धावा बोला था, तब भी वहां ईसाई धर्म से जुड़े झंडे देखे गए थे. कुछ झंडों पर जीसस 2020 भी लिखा हुआ था.
कैपिटल हिल की तरफ़ बढ़ने से पहले कुछ लोग घुटने के बल बैठकर प्रार्थना करते भी दिखे थे.
कुछ लोगों ने हाथ में लकड़ी का बड़ा क्रॉस लिया हुआ था. तब कुछ समर्थकों ने ट्रंप को ईसाई धर्म को बचाने वाला बताया था.
2020 चुनाव में अमेरिका की राजनीति किस तरह से बँटी हुई है, ये भी सामने आया था.
एग्जिट पोल्स में पता चला था कि एक चौथाई गोरे अमेरिकी ईसाई ट्रंप के समर्थक थे. वहीं 90 फ़ीसदी काले ईसाइयों ने बाइडन का साथ देने की बात कही थी.
ट्रंप पिछले चुनावों में भी ईसाई धर्म की रक्षा की बातें कर रहे थे. ट्रंप के चुनावी अभियान 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' को कुछ समर्थक 'मेक अमेरिका क्रिश्चियन अगेन' के तौर पर भी देखते रहे हैं.
साल 2020 में ओहायो की एक चुनावी रैली में ट्रंप ने कहा था- बाइडन को चुने जाने का मतलब है कोई धर्म नहीं. बाइबल को नुक़सान पहुंचाओ, ईश्वर को नुक़सान पहुँचाओ. बाइडन ईश्वर और बंदूकों के ख़िलाफ़ हैं.
अब 2024 राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप एक बार फिर ईसाई धर्म को लेकर सक्रिय हुए हैं.
हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने ईसाई विरोधी विचारों के ख़िलाफ़ एक टास्क फोर्स बनाने की बात कही थी.
ट्रंप ने कहा था कि वो अमेरिकी में ईसाइयों के ख़िलाफ़ हुए उत्पीड़न, भेदभाव की जांच करवाएंगे.

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ट्रंप का बयान और संविधान
अमेरिका में कोई व्यक्ति सिर्फ़ दो बार राष्ट्रपति बन सकता है यानी कुल आठ साल शासन कर सकता है. ट्रंप 2016-2020 में राष्ट्रपति रह चुके हैं.
अमेरिका में सिर्फ़ फ्रेंकलिन रूज़वेल्ट दो बार से ज़्यादा राष्ट्रपति पद पर रह चुके थे.
रूजवेल्ट 1932 से 1945 में अपनी मौत होने तक चार बार अमेरिका के राष्ट्रपति रहे थे.
ट्रंप ने इस बारे में एक चुनावी रैली में कहा, ''आपको पता है कि फ्रेंकलिन 16 साल तक राष्ट्रपति रहे, चार बार. मुझे नहीं पता कि क्या हम तीन बार के कार्यकाल पर विचार करेंगे या दो बार के?''
द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक़, जानकारों ने आगाह किया है कि ट्रंप के बयान को गंभीरता से लेने की ज़रूरत है.
अखबार लिखता है कि अगर ट्रंप दोबारा जीतते हैं तो अमेरिकी संविधान के 22वें संशोधन के मुताबिक़, वो जनवरी 2029 के बाद राष्ट्रपति पद पर नहीं रह पाएंगे.
हां अगर इस संशोधन में कोई बदलाव लाना है तो इसके लिए अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई सदस्यों की मंज़ूरी चाहिए होगी.
इसके बाद तीन चौथाई अमेरिकी राज्यों को इस बदलाव को मंज़ूरी देनी होगी.
इस वक़्त अमेरिकी संसद में रिपब्लिकन सांसदों की संख्या कम है. सीनेट में डेमोक्रेट सांसदों की भी संख्या बहुत ज़्यादा नहीं है.
ऐसे में ट्रंप के लिए राह आसान नहीं है.
ख़ासकर तब जब बाइडन के पीछे हटने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में कमला हैरिस की एंट्री हो चुकी है.
रिपब्लिक पार्टी की तरफ झुकाव रखने वाले फॉक्स न्यूज़ नेटवर्क के एक पोल में कहा गया है कि ट्रंप कमला हैरिस के साथ कड़े मुकाबले में हैं.
बाइडन के पीछे हटने से पहले पोल्स में ट्रंप को बढ़त बताई गई थी.
शायद इस वजह से भी ट्रंप के कमला हैरिस पर हमले बढ़े हैं. ट्रंप कमला को नाकाम उप-राष्ट्रपति बताते रहे हैं और हाल ही में रिपब्लिकन पार्टी की ओर से हैरिस पर उनकी पहचान से जुड़े हमले भी बढ़े हैं.
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