लोकसभा चुनाव को लेकर यूएन के अधिकारी की इस टिप्पणी से नाराज़ क्यों हुआ भारत?

वोल्कर टुर्क

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भारत ने आगामी लोकसभा चुनाव पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टुर्क के बयान पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा है कि ये बयान 'अनावश्यक' हैं और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की वास्तविकता को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं.

भारत ने अपने बयान में ये भी कहा कि कई देश तो भारत के चुनावी अनुभव से सीखना चाहते हैं और इसका अनुकरण करने की इच्छा रखते हैं.

भारत का ये बयान जिनेवा में ह्यूमन राइट्स काउंसिल के 55वें सेशन के दौरान ग्लोबल अपडेट पर आया.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्तवोल्कर टुर्क ने इस सेशन में दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध को रोकने के लिए हो रही शांति की कोशिशें और समाज को फलने-फूलने के लिए 'ओपन स्पेस' की ज़रूरत पर बात की.

नागरिकों के लिए खुले माहौल की बात करते हुए उन्होंने कहा कि ये तब और भी ज़रूरी हो जाता है जब कई देशों में चुनाव हो रहे हों.

टुर्क ने अपने बयान में ये बातें कहीं

मानवाधिकार काउंसिल में टुर्क

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मानवाधिकार मामलों पर यूएन के प्रमुख अधिकारी वोल्कर टुर्क ने अपने बयान में रूस, ईरान, सेनेगल, घाना, पाकिस्तान समेत कई देशों में चुनाव पर बात की. इस दौरान उन्होंने भारत का भी ज़िक्र किया.

टुर्क ने कहा, "96 करोड़ मतदाताओं के साथ भारत का आगामी चुनाव अनोखा है. वो इस देश की धर्मनिरपेक्षता, लोकतांत्रिक परंपराओं और इसकी महान विविधता की सराहना करते हैं. लेकिन उनकी कुछ चिंताएं भी हैं. "

टुर्क ने नागरिकों के अधिकारों पर ‘बढ़ती पाबंदियों’ के साथ-साथ, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और आलोचकों को 'निशाना बनाए जाने' तथा अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुसलमानों के ख़िलाफ़ 'नफ़रती भाषण और भेदभाव' के बारे में चिंता व्यक्त की.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टुर्क के बयान पर अरिंदम बागची का जवाब

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि चुनाव से पहले सभी की अर्थपूर्ण भागीदारी के लिए एक खुला माहौल होना बेहद अहम हो जाता है.

हालांकि, इस दौरान उन्होंने इलेक्टोरल बॉन्ड के बारे में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत किया.

बीते महीने सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने इलेक्टोरल बॉन्ड को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया था और स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया जो इलेक्टोरल बॉन्ड बेचने वाला अकेला अधिकृत बैंक है, उसे निर्देश दिया था कि वो 12 अप्रैल, 2019 से लेकर अब तक ख़रीदे गए इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी चुनाव आयोग को दे.

टुर्क ने कहा कि इस साल 60 से अधिक देशों में चुनाव होंगे और इस नज़रिये से 2024, एक महा चुनावी साल है.

टुर्क के बयान पर भारत की आपत्तियां

अरिंदम बागची

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संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि अरिंदम बागची ने इस सेशन के दौरान भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने टुर्क के बयान को संज्ञान में लिया है.

उन्होंने टुर्क के बयान को 'अनावश्यक' क़रार देते हुए कहा कि उनके बयान दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की वास्तविकता को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं.

बागची ने कहा, "किसी भी लोकतंत्र में, तर्क-वितर्क स्वाभाविक है. यह ज़रूरी है कि अथॉरिटी के पदों पर बैठे लोग अपने फ़ैसले को प्रोपेगेंडा से प्रभावित न होने दें. बहुलता, विविधता, समावेशिता हमारे लोकतंत्र की मुख्य नीति का हिस्सा हैं और संवैधानिक मूल्यों में निहित है."

उन्होंने कहा, "इसके लिए मज़बूत न्यायपालिका के साथ ही स्वतंत्र संस्थाएं हैं जो सभी के अधिकारों की रक्षा करती हैं. इन मूल्यों के प्रति भारत का रुख़ इसकी सभ्यता के उस मूल्य से आता है कि समस्त पृथ्वी एक परिवार है."

बागची ने कहा कि भारत की ये प्रतिबद्धता कोविड-19 महामारी से निपटने में अपने मित्र देशों और सहयोगियों की मदद में भी झलका था और भारत संकट के समय मदद के लिए तैयार रहने वाला देश है.

उन्होंने कहा, "आज जब दुनिया संघर्ष और युद्ध से घिरी हुई है तो भारत लगातार वार्ता और कूटनीति के माध्यम से हल तलाशने पर ज़ोर देता है.

बागची ने कहा, "हमें इसमें कोई संदेह नहीं है कि अतीत में कई मौकों की तरह, भारत के लोग एक ऐसी सरकार चुनने के लिए स्वतंत्र रूप से अपने वोट का प्रयोग करेंगे, जिसके बारे में उनका मानना है कि यह उनकी आकांक्षाओं को आवाज़ और उड़ान दे सकती है."

भारत के पड़ोसी देशों के बारे में क्या कहा

पाकिस्तान में चुनाव

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टुर्क ने पाकिस्तान में पिछले महीने हुए चुनाव का ज़िक्र करते हुए इसमें बड़ी संख्या में मतदाताओं की भागीदारी का स्वागत किया और कहा कि ये दर्शाता है कि पाकिस्तान के लोग लोकतंत्र में हस्तक्षेप को ख़त्म करना चाहते हैं.

टुर्क ने कहा कि वो 'पाकिस्तान की नई सरकार से अपील करते हैं कि विपक्षी पार्टियों के उम्मीदवारों, पत्रकारों और अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों और अन्य को मनमाने तरीके से हिरासत में लिए जाने जैसी चीज़ें ख़त्म करें. कई हफ़्तों तक उनके बारे में जानकारियां न मिल पाने जैसी चीज़ें भी ख़त्म होनी चाहिए.'

वहीं, उन्होंने बांग्लादेश में हज़ारों की संख्या में विपक्षी पार्टी के उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी पर चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि अक्टूबर से अब तक हिरासत में कई मौतों की भी ख़बरें आई हैं.

टुर्क ने कहा, "मैं किसी भी तरह की राजनीतिक हिंसा की निंदा करता हूं और सभी मामलों की तेज़ी से समीक्षा किए जाने की वकालत करता हूं."

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