You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
चुनाव आयुक्त अरुण गोयल का इस्तीफ़ाः क्या चुनाव आयोग में सब कुछ ठीक है?
- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत के चुनाव आयुक्त अरुण गोयल ने शनिवार को अचानक अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया. इससे पहले 8 मार्च को हुई चुनाव से जुड़ी एक अहम बैठक में वो नहीं पहुंचे थे.
2024 में भारत में आम चुनाव होने हैं जिनका कार्यक्रम अगले कुछ दिनों में ही जारी किया जा सकता है.
चुनावी कार्यक्रम की घोषणा से ठीक पहले अरुण गोयल के इस्तीफ़े से सवाल उठा है कि क्या भारत के चुनाव आयोग में सब ठीक चल रहा है?
क़ानून मंत्रालय की एक अधिसूचना के मुताबिक़ शनिवार, 9 मार्च को भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अरुण गोयल के इस्तीफ़े को स्वीकार कर लिया है और यह तुरंत प्रभाव से लागू भी हो गया है.
अपने इस्तीफ़े में अरुण गोयल ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है. हालांकि ये माना जा रहा है कि अरुण गोयल के इस्तीफ़े की वजह कुछ और है.
भारत के चुनाव आयोग में तीन चुनाव आयुक्त होते हैं, जिनमें से एक मुख्य चुनाव आयुक्त यानी सीईसी होते हैं. राजीव कुमार इस समय भारत के चुनाव आयुक्त हैं.
फ़रवरी में अनूप चंद्र पांडे चुनाव आयुक्त के पद से रिटायर हुए हैं. उनकी जगह अभी कोई नियुक्ति नहीं हुई है.
वहीं अरुण गोयल ने अचानक इस्तीफ़ा दे दिया है. अब सिर्फ़ मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ही चुनाव आयोग में एकमात्र आयुक्त बचे हैं.
‘सामान्य परिस्थितियों में नहीं हुआ इस्तीफ़ा’
अरुण गोयल के अचानक चुनाव आयुक्त के पद से इस्तीफ़ा देने के कारण अभी स्पष्ट नहीं हैं. हालांकि उन्होंने इस्तीफ़े की वजह व्यक्तिगत बताई है.
विश्लेषक मानते हैं कि इस्तीफ़े का कारण जो भी रहा है लेकिन ये इस्तीफ़ा साधारण परिस्थितियों में नहीं हुआ है.
भारत में चुनावों में पारदर्शिता के लिए काम करने वाली संस्था एडीआर के सदस्य जगदीप चोकर कहते हैं, “अस्पष्ट परिस्थितियों में चुनाव आयुक्त का इस्तीफ़ा होना सामान्य बात नहीं है. ये असामान्य बात है, जिसके वास्तविक कारण शायद ही पता चलें.”
जगदीप चोकर कहते हैं, “हमें नहीं पता कि उनके इस्तीफ़ा देने के व्यक्तिगत कारण क्या हैं, उनकी बात चुनाव आयोग में नहीं सुनी जा रही थी, ये भी व्यक्तिगत कारण ही है. हो सकता है वो बहुत बीमार हों, ये भी एक वजह हो सकती है. जब तक इस इस्तीफ़े की असली वजह पता नहीं चलती, तब तक कुछ नहीं कहा जाता सकता है.”
वरिष्ठ पत्रकार हेमंत अत्री भी मानते हैं कि अरुण गोयल का इस्तीफ़ा सामान्य नहीं है.
हेमंत अत्री कहते हैं, “अरुण गोयल बहुत महत्वाकांक्षी व्यक्ति थे, चुनाव आयुक्त बनने से पहले वो हाई प्रोफ़ाइल अफ़सर थे. अभी उनका कार्यकाल क़रीब पौने तीन साल का बचा था, ऐसे में उनका अचानक इस्तीफ़ा देना सामान्य नहीं है.”
उनका कहना है, "ऐसा लगता है कि अरुण गोयल के मतभेद केवल मुख्य चुनाव आयुक्त से नहीं बल्कि सरकार से भी थे. इसलिए उन्हें समय पूर्व इस्तीफ़ा देना पड़ा. वर्ना सीईसी से मतदेभ तो सरकारी हस्तक्षेप से तत्काल सुलझ सकते हैं."
नियुक्ति पर उठे थे सवाल
अरुण गोयल पंजाब काडर के रिटायर आईएएस अधिकारी हैं. गोयल नवंबर 2022 में भारत के चुनाव आयुक्त बनें थे.
अरुण गोयल की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. अरुण गोयल ने 37 साल तक आईएएस के रूप में काम किया.
31 दिसंबर 2022 को अरुण गोयल रिटायर होने वाले थे, लेकिन इससे महीनाभर पहले 18 नवंबर 2022 को उन्होंने वॉलंटरी रिटायरमेंट ले लिया.
सेवानिवृत्त होने के एक दिन बाद ही भारत की राष्ट्रपति ने उन्हें चुनाव आयुक्त के पद पर नियुक्त कर दिया था.
5 मई 2022 से खाली पड़े चुनाव आयुक्त के पद पर नियुक्त होने के अगले ही दिन अरुण गोयल ने कार्यभार संभाल लिया था.
हालांकि, अरुण गोयल की नियुक्ति के समय सुप्रीम कोर्ट मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर याचिकाओं की सुनवाई कर रहा था.
अरुण गोयल की नियुक्त को चुनावों में पारदर्शिता के लिए काम करने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. हालांकि ये याचिका अदालत ने ख़ारिज कर दी थी.
एडीआर की दलील थी कि अरुण गोयल को चुनाव आयोग में नियुक्ति की जानकारी रही होगी और इसलिए ही उन्होंने एक दिन पहले स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति ले ली थी.
चुनाव आयुक्त को नियुक्त करने के पैनल ने जिन चार अधिकारियों को शॉर्टलिस्ट किया था उनमें अरुण गोयल के पास सबसे कम अनुभव था.
गोयल की नियुक्ति के समय मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ती की प्रक्रिया को लेकर याचिकाएं सुन रहे सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में टिप्पणी की थी कि जिस दिन नियुक्ति पैनल ने गोयल का नाम शार्टलिस्ट किया उसी दिन गोयल ने स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति का आवेदन किया था और उसे स्वीकार भी कर लिया गया था,
सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी, “"इस बात को लेकर थोड़ा आश्चर्य हुआ कि अधिकारी ने 18.11.2022 को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन कैसे किया था, अगर उसे उसे नियुक्त करने के प्रस्ताव के बारे में जानकारी नहीं थी.”
विरोध और सवालों के बावजूद अरुण गोयल ने पद से इस्तीफ़ा नहीं दिया था. हालांकि अब अचानक उन्होंने इस्तीफ़ा देकर सबको चौंका दिया है.
हेमंत अत्री कहते हैं, “केंद्र सरकार ने इन्हें नियुक्त करने के लिए सभी कायदे क़ानून नज़रअंदाज़ कर दिए थे, सुप्रीम कोर्ट ने भी सख़्त टिप्पणियां की थीं. अब इन्होंने अचानक इस्तीफ़ा दे दिया है. इससे ये स्पष्ट हो गया है कि चुनाव आयोग में सब कुछ ठीक न हीं चल रहा है
किन परिस्थितियों में दिया गोयल ने इस्तीफ़ा
भारत में अप्रैल-मई में आम चुनाव होते हैं, हालांकि अभी तक 2024 आम चुनावों का चुनावी कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है.
साल 2014 के चुनावी कार्यक्रम की घोषणा 5 मार्च 2014 को हो गई थी जबकि 2019 के चुनावी कार्यक्रम की घोषणा 10 मार्च को कर दी गई थी.
ऐसे में ये माना जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनावों का कार्यक्रम जल्द ही घोषित किया जा सकता है.
अरुण गोयल 5 मार्च को समीक्षा बैठक में हिस्सा लेने के लिए पश्चिम बंगाल गए थे लेकिन बीच में ही अचानक सेहत का हवाला देकर दिल्ली वापस आ गए.
8 मार्च को चुनावों के दौरान अर्धसैनिक बलों की तैनाती को लेकर बैठक थी, वो उस बैठक में नहीं गए बल्कि सीधे इस्तीफ़ा दे दिया.
विश्लेषक ये भी मानते हैं कि अरुण गोयल के इस्तीफ़े के तार चुनावी कार्यक्रम से भी जुड़े हो सकते हैं.
हेमंत अत्री कहते हैं, “अगले कुछ दिनों में चुनावों का कार्यक्रम घोषित होना था. मुझे ऐसा लगता है कि निश्चित रूप से इसके तार कहीं ना कहीं पश्चिम बंगाल चुनाव से जुड़े हुए हैं. हो सकता है पश्चिम बंगाल में चुनावों की तिथि को लेकर विरोधाभास रहा हो.”
‘सवालों में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता’
भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र हैं. भारत के आम चुनाव, दुनियाभर में लोकतंत्र का सबसे बड़ा कार्यक्रम होते हैं.
हालांकि, चुनावों में पारदर्शिता का सवाल उठता रहा है. हाल के महीनों में ईवीएम के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठे हैं.
विश्लेषक मानते हैं कि इससे भारत के चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर भी सवाल उठेंगे.
हेमंत अत्री कहते हैं, “इस अचानक हुए इस्तीफ़े से सबसे बड़ा नुक़सान चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को हुआ है. चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पिछले दस साल में अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है.”
हालांकि एडीआर के सदस्य जगदीप चोकर का मानना है कि इस इस्तीफ़े का चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर असर नहीं पड़ेगा.
जगदीप चोकर कहते हैं, “चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पहले से ही सवालों में है. जब तक इस्तीफ़े का वास्तविक कारण सामने नहीं आएगा, मुझे नहीं लगता इसका चुनाव आयोग पर असर होगा.”
नए क़ानून के तहत नियुक्त होंगे आयुक्त
चुनाव आयोग में दो चुनाव आयुक्तों के पद अब खाली हैं और अब सिर्फ़ मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ही रह गए हैं.
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम की व्यवस्था करने के लिए कहा था. हालांकि केंद्र सरकार नियुक्ति के लिए नया क़ानून ले आई थी.
इसके तहत चयन समिति को चुनाव आयोग को नियुक्त करना है. इसमें भारत के प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री की तरफ़ से नामित केंद्रीय कैबिनेट के एक मंत्री शामिल होंगे.
लेकिन विश्लेषक ये सवाल उठा रहे हैं कि अगर नए आयुक्त तुरंत नियुक्त भी कर दिए जाएं तो क्या उन्हें अपनी ज़िम्मेदारी निभाने के लिए पर्याप्त समय मिल पाएगा.
वरिष्ठ पत्रकार हेमंत अत्री कहते हैं, “देखा जाए तो अब सिर्फ़ राजीव कुमार ही चुनाव आयोग में फ़ैसले लेंगे. अगर दो नए आयुक्त नियुक्त भी कर दिए जाएं तो उन्हें काम समझने में भी वक़्त लगेगा.”
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)