बदायूं में मरने वाले बच्चों के पिता और मारे गए अभियुक्त की मां ने क्या कहा

- Author, अनंत झणाणें
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, बदायूं से
उत्तर प्रदेश के बदायूं में दो बच्चों की हत्या और उसके बाद एक कथित एनकाउंटर में अभियुक्त साजिद की मौत से हलचल मच गयी है.
पुलिस ने इस मामले में एफ़आईआर दर्ज करके साजिद और जावेद के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज किया है.
बीबीसी की टीम ने मौके पर पहुंचकर दोनों परिवारों से बात करके उनका पक्ष समझने की कोशिश की है.
पीड़ित पक्ष जहां एक ओर अपने लिए सुरक्षा की मांग कर रहा है.
वहीं, दूसरी ओर जावेद को जल्द से जल्द पकड़ने की मांग भी कर रहा है ताकि हत्या करने की वजह स्पष्ट हो सके.
क्या कहते हैं पीड़ित पक्ष

बीबीसी ने इस हत्याकांड का शिकार हुए बच्चों के पिता विनोद कुमार से बात की है जो इस घटना के बाद अपने परिवार के लिए सुरक्षा की मांग कर रहे हैं.
वह कहते हैं, "अगर हमें सुरक्षा नहीं मिलती है. या हमें ये पता नहीं चल पाता है कि हमारे बच्चे किस वजह से मारे गए हैं, तो हम खुद वहीं जाकर आत्मदाह कर लेंगे. सबको लेकर जाऊंगा. मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं कि जब कोई बच्चों को मार सकता है आकर तो कोई हमें भी मार सकता है."
"जब उसने हमारे घर में घुसकर बच्चे मार डाले तो इसकी कोई साजिश तो होगी. उससे मेरी कोई दुश्मनी नहीं थी. मेरा उससे कोई मतलब ही नहीं था. जब मिलता था तो भइया नमस्ते बोलता था. इस जगह ऐसा कोई लड़का नहीं है जो उसको नहीं जानता हो."
"हम चाहते हैं कि इस मामले में पूरी तरह से कार्रवाई हो. उसे पकड़वाया जाए. उसके घर-परिवार पकड़ा जाए. रिश्तेदार पकड़े जाएं. जब उन पर लाठीचार्ज होगा तो अपने आप कबूलकर आ जाएगा वो."
क्या कहती हैं अभियुक्तों की मां?

बीबीसी ने इस हत्याकांड के दूसरे पक्ष अभियुक्त की माँ नाज़नीन से भी बात की है जिन्होंने उन तमाम चीज़ों का खंडन किया है जो अब तक सामने आई हैं.
साजिद और जावेद की माँ नाज़नीन ने बताया है कि उनके बेटे साजिद और जावेद पिछले दस सालों से इस इलाक़े में दुकान चला रहे थे.
वह साजिद की उम्र 28 और जावेद की उम्र 24 साल बताती हैं. लेकिन अब तक साजिद की उम्र 22 साल बताई जा रही थी.
वह कहती हैं, "पुलिस जब साजिद को तलाशते हुए घर पहुंची तब हमें इस बारे में पता चला. उन्होंने कहा कि 'साजिद ने इन बच्चों को मारा है अब तुम सुबह तक कफ़न का इंतज़ाम कर लेना. वो भी मारा जाएगा.' फिर पुलिस वाले ही कहने आए कि तुम्हारा लड़का साजिद भी गोली से मारा गया है."
इस मामले में दर्ज एफ़आईआर के मुताबिक़, साजिद अपनी पत्नी की डिलीवरी के लिए पांच हज़ार रुपये लेने के लिए विनोद कुमार के घर गया था.
इस सवाल पर नाज़रीन कहती हैं, "ये ग़लत ख़बर है. वो गर्भवती नहीं है. वह अपने मायके गयी है. ये सुबह जाते थे और शाम तक वापस आ जाते थे. कल भी दोनों घर वापस आ गए थे. फिर किसी का फोन आया तो साजिद मोटरसाइकिल से गया. जाविद घर पर ही मिट्टी डाल रहा था. उसे (जावेद) फंसाया जा रहा है."
बदायूं में दो बच्चों की हत्या फिर 'एनकाउंटर', अब तक क्या पता चला है

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उत्तर प्रदेश के बदायूं ज़िले में मंगलवार रात दो बच्चों की हत्या के बाद हुए कथित एनकाउंटर में अभियुक्त की मौत हो गई है.
इसके बाद से इलाक़े में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं.
स्थानीय प्रशासन ने कुछ दुकानों में आग लगाए जाने के बाद क़ानून व्यवस्था संभालने के लिए इलाक़े में अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किया है.
इस मामले में दर्ज एफ़आईआर में अभियुक्त साजिद और उसके भाई जावेद के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है.
इस हत्याकांड और उसके बाद हुए कथित एनकाउंटर पर लगातार नए सवाल खड़े हो रहे हैं. इसी बीच राजनीतिक दलों की ओर से एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया है.
हमले में ज़िंदा बचा तीसरा बच्चा

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समाचार एजेंसी पीटीआई ने इस मामले में दर्ज एफ़आईआर के आधार पर नयी जानकारी दी है.
इस एफ़आईआर के मुताबिक़, इस हत्याकांड में मरने वाले बच्चे हनी और आयुष थे जिनकी उम्र क्रमश: आठ और 12 साल थी.
वहीं, इस हमले में ज़िंदा बचने वाले बच्चे युवराज की उम्र दस साल बताई जा रही है.
युवराज ने मीडिया से बात करते हुए कहा है, "वो सैलून वाले भइया थे. वो लोग आए थे. फिर मेरे छोटे-बड़े वाले भाई को ऊपर ले गए. पता नहीं क्यों मारा. फिर मुझे भी मारने लगे. मैं उनका चाकू हटाकर उनको धक्का देकर भागा."
बच्चों के पिता विनोद कुमार ने इस मामले में एफ़आईआर दर्ज कराई है.
इस एफ़आईआर में दावा किया गया है कि "अभियुक्त साजिद ने मेरी पत्नी संगीता से अपनी पत्नी की डिलीवरी के लिए पांच हज़ार रुपये मांगे. जब मेरी पत्नी पैसे लेने के लिए अंदर गयी तो साजिद छत पर गया. थोड़ी देर बाद जावेद भी छत पर पहुंच गया और उन्होंने मेरे बेटों आयुष और हनी को छत पर बुलाया."
"जब मेरी पत्नी पैसे लेकर बाहर आई तो उसने साजिद और जावेद को चाकू के साथ नीचे आते देखा. मेरी पत्नी को देखकर उन्होंने कहा – 'मैंने आज अपना काम कर दिया है.' इसके बाद उन्होंने मौका-ए-वारदात से भागने की कोशिश की."
अभियुक्त ने पानी लेने के लिए ऊपर गए बच्चे युवराज पर भी हमला किया. इस घटना के वक़्त बच्चों की दादी भी घर पर मौजूद थीं.
पुलिस ने अब तक इस हत्या की वजह और दूसरे अभियुक्त जावेद की लोकेशन की जानकारी नहीं दी है.
हालांकि, पुलिस ने साजिद के पिता और चाचा को हिरासत में ले लिया है. और बच्चों के शव पोस्टमॉर्टम के बाद घरवालों को सौंप दिए हैं.
हत्या कैसे हुई, पुलिस ने बताया

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बदायूं के एसएसपी आलोक प्रियदर्शी ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए इस हत्याकांड से जुड़ी जानकारी साझा की है.
प्रियदर्शी कहते हैं, "साजिद नामक के इस अभियुक्त का इस घर में आना-जाना था. कल शाम साढ़े सात बजे, ऐसा बताया गया है कि वह सीढ़ियों से घर में आया. इसके बाद वह छत पर सीधा चला गया. वहां जाकर उसने वहां खेल रहे दोनों बच्चों पर आक्रमण किया. और उनकी हत्या कर दी."
"वहां से नीचे निकलकर आया. जब वह जाने लगा तो भीड़ ने उसे पकड़ने की कोशिश की. लेकिन वह भीड़ से निकलकर भाग गया. इसकी सूचना मिलते ही पुलिस ने स्थिति को संभाला."
इस हत्याकांड के कुछ घंटे बाद ही साजिद की एक कथित एनकाउंटर में मौत हुई है.
पुलिस ने इस मामले में भी जानकारी दी है.
कैसे हुआ एनकाउंटर?

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आलोक प्रियदर्शी ने बताया है, "जब ये पता चला कि वो (अभियुक्त) भाग गया है तो उसकी तलाश में टीमें निकाली गयीं. थोड़ी देर में ही पता चला कि शेखूपुर के जंगल में खून से सने कपड़ों में कोई व्यक्ति भाग रहा है. पुलिस ने घेराबंदी की. उसने पुलिस पार्टी पर फायरिंग की. जवाबी फायर में उसकी मृत्यु हो गयी."
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प्रियदर्शी ने बताया है कि "इस हत्याकांड में इस्तेमाल किए गए धारदार हथियार को बरामद कर लिया गया है. और जो कट्टा था वो भी बरामद हो गया है."
शुरू हुई राजनीतिक बयानबाजी

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ये घटना सामने आने के बाद से राजनीतिक दलों के बीच एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने का सिलसिला शुरू हो गया है.
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से लेकर शिवपाल यादव और रामगोपाल यादव की ओर से इस घटना पर टिप्पणी करते हुए बीजेपी को घेरा गया है.
अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, "दो भाइयों की जान चली गयी है. अगर पुलिस पहले से काम करती तो क्या उनकी जान नहीं बचाई जा सकती थी?"
वहीं, बदायूं लोकसभा सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ने जा रहे शिवपाल यादव ने कहा है कि 'ये बहुत दुखद घटना है. इस सरकार की क़ानून व्यवस्था पूरी तरह से फेल है. एनकाउंटर कर दिया गया है अब इस मामले से परदा कैसे हटेगा.'
इसके साथ ही सपा सांसद रामगोपाल यादव ने इसके लिए बीजेपी को ज़िम्मेदार ठहराया है.
उन्होंने कहा है कि ‘बीजेपी वाले हमेशा चुनाव के वक़्त हिंसा करवाते हैं.'
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वहीं, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा है कि "पूरे प्रदेश में जंगल राज कायम है. इससे पहले भी लगातार घटनाएं होती रही हैं."
उन्होंने कहा, "मंत्री के घर के अंदर हत्या होती है. मोहनलाल गंज के सांसद हैं. उनके घर में लड़के की पिस्टल से हत्या होती है. उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई आजतक. उसे फिर मोहनलाल गंज से टिकट भी दे दिया है. जिसके लड़के ने किसानों पर गाड़ी चढ़ाकर उनकी हत्या की, उसे लखीमपुर खीरी से फिर टिकट दे दिया. अजय मिश्रा टेनी को."
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केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता गिरिराज सिंह इस मामले में हुई कार्रवाई पर योगी सरकार की तारीफ़ करते दिखे हैं.
उन्होंने कहा, "योगी जी के उत्तर प्रदेश में हिंदू हो या मुसलमान, जिसने भी क़ानून अपने हाथ में लेने की कोशिश की है. उसको बख़्शा नहीं गया है."
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बीजेपी नेता सिद्धार्थ नाथ सिंह की ओर से भी समाजवादी पार्टी पर पलटवार करने की कोशिश की गयी है.
उन्होंने कहा, "ये दुर्भाग्यपूर्ण है. समाजवादी पार्टी को पीड़ित परिवार के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए. न कि इस पर राजनीति करनी चाहिए. और राजनीति भी सांप्रदायिकता की कर रहे हैं. क्योंकि उनका एक वोटबैंक चलता है."
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