पुतिन बार-बार रूस में राष्ट्रपति का चुनाव कैसे जीत जाते हैं?

पुतिन

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    • Author, पॉल किर्बी
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

व्लादिमीर पुतिन का पांचवीं बार राष्ट्रपति बनना हमेशा से तय था. उनके सामने तीन उम्मीदवार थे और वो तीनों ही क्रेमलिन की ओर से खड़े किए गए लोग थे.

लेकिन जब उनकी जीत हुई और कुल वोट का 87 फ़ीसदी हिस्सा पुतिन को मिला तो उन्होंने कहा कि रूस का लोकतंत्र कई पश्चिमी देशों के लोकतंत्र से कई ज़्यादा मज़बूत है.

लेकिन सच ये है कि इस चुनाव में एक भी ऐसा उम्मीदवार नहीं था, जिसकी विश्वसनीयता हो.

पुतिन के विरोधी एलेक्सी नवेलनी के समर्थकों ने प्रतीकात्मक रूप से विरोध प्रदर्शन दर्ज किया.

‘नून अगेन्स्ट पुतिन’ मुहिम के तहत रूस के मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग सहित कई रूसी शहरों और कई देशों के रूसी दूतावासों से सामने लोग जुटे और विरोध दर्ज कराते हुए वोटिंग की जिसे- 'प्रोटेस्ट वोटिंग' कहा जा रहा है. हालांकि इन प्रदर्शनों का चुनाव पर कोई असर ना होने वाला था और ना ही हुआ.

मॉनिटरिंग ग्रुप ओवीडी-इन्फ़ो ने कहा है कि रूस में कम से कम 80 लोगों को गिरफ़्तार किया गया. शुक्रवार को कुछ पोलिंग बूथ पर हमले की ख़बरे भी सामने आईं.

पश्चिमी देशों ने रूस के चुनाव की निंदा करते हुए कहा है, “ये चुनाव ना तो स्वतंत्र थे ना ही निष्पक्ष.”

जर्मनी ने इस चुनाव को सेंसरशिप, दमन और हिंसा के बीच का "छद्म चुनाव" कहा है.

ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड कैमरून ने रूस के चुनाव की निंदा करते हुए कहा है, “यूक्रेन के क्षेत्र में ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से चुनाव कराए गए.”

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा, “रूसी तानाशाह एक और चुनाव करा रहे हैं.”

नेवेलनी के साथी लियोनिड वोल्कोफ़ जो लिथुआनिया में शरण लेकर रह रहे हैं, उन्हें एक हफ़्ते पहले बुरी तरह हथौड़े से मारा गया था.

उन्होंने इस चुनाव पर कहा है कि "पुतिन को जिस प्रतिशत में वोट मिले हैं, उसका वास्तिवकता से कोई ताल्लुक नहीं है."

रूस में वोटिंग

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घरों तक बैलेट बॉक्स लेकर पहुँचे

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रूस में तीन दिन तक चुनाव चले और रूस के क़ब्ज़े वाले यूक्रेनी इलाक़ों में और भी लंबी अवधि तक चुनाव चले. कोशिश थी कि लोगों को घरों से बाहर निकाला जाए और चुनाव में हिस्सा लेने के लिए राज़ी किया जाए.

रविवार को रूस के कब्ज़े वाले शहर बर्डियांस्क में चुनाव आयोग के एक अधिकारी के मारे जाने की ख़बर सामने आई.

स्थानीय लोगों का कहना है कि रूस के समर्थक जिनके साथ सेना के लोग भी थे वो बैलेट बॉक्स लेकर लोगों के घरों तक जा रहे थे और वोट ले रहे थे.

लेकिन जब नतीजे आए तो रूस के टीवी चैनल ने पुतिन की जीत को बहुत बड़ी जीत बताया.

रूस के एक चैनल पर एक पत्रकार ने कहा, “व्लादिमीर पुतिन के लिए ये बड़ा समर्थन है और पश्चिमी देशों को एक बड़ा संदेश हैं.”

जब जीत के बाद पुतिन ने पत्रकारों से बात की तो उन्होंने रूसी राष्ट्रपति कैंपेन की जमकर तारीफ़ की और कहा कि ये अमेरिका से भी बेहतर है. रूस ने ऑनलाइन वोटिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया. अधिकारियों का कहना है कि उसे इस प्रक्रिया के तहत 80 लाख वोट मिले.

उन्होंने कहा, “ये पारदर्शी और बिल्कुल सही है. अमेरिका की तरह नहीं जहाँ 10 डॉलर में वोट ख़रीदा जा सकता है.”

स्वतंत्र वॉचडॉग गोलोज़ को वोटिंग प्रक्रिया के पर्यवेक्षण से रोक दिया गया था. लेकिन कई रिपोर्ट्स सामने आई हैं, जिसमें चुनाव में गड़बड़ी की बात कही जा रही है. यहां तक कि ये भी कहा गया कि सरकारी क्षेत्र में काम कर रहे कर्मचारियों पर दबाव था कि वो वोटिंग में हिस्सा लें या तो वो पोलिंग बूथ पर जाकर वोट दें या तो ऑनलाइन वोट दें, लेकिन वोट ज़रूर करें.

नवेलनी

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पहली बार पुतिन ने लिया नवेलनी का नाम

पुतिन ने चुनाव में अपने प्रतिद्वंद्वियों की भी भी तारीफ़ की और कहा कि उन्होंने ज़्यादा से ज़्यादा वोटर्स को चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित किया.

पहली बार उन्होंने एलेक्सी नवेलनी का खुलकर नाम लिया. वो भी तब जब एक महीने पहले उनकी ऑर्कटिक की जेल में मौत हो गई है.

संभवतः वो आरोपों का जवाब देना चाह रहे थे, जिसमें कहा जा रहा था कि पुतिन ने नवेलनी की हत्या करायी है.

नवेलनी पर बात करते हुए उन्होंने उन रिपोर्ट्स पर मुहर लगाई, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने पश्चिमी देशों में बंद रूसी क़ैदियों के बदले नवेलनी को विदेश जाने के विकल्प के बारे में विचार किया था लेकिन शर्त थी कि वह वापस रूस नहीं लौटेंगे.

पुतिन ने कहा, “मैंने कहा था कि मैं इसके लिए तैयार हूं लेकिन दुर्भाग्य से जो हुआ वो हुआ. क्या कर सकते हैं. यहीं ज़िंदगी है. ”

यूलिया नवेलनाया

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इमेज कैप्शन, यूलिया नवेलनाया, जो बर्लिन में रूसी दूतावास के सामने प्रोटेस्ट वोटिंग की.

प्रोटेस्ट वोट और इसके मायने

यूलिया नवेलनाया बर्लिन में रूसी दूतावास के बाहर छह घंटे तक खड़ी रहीं और प्रोटेस्ट वोटिंग यानी चुनाव के विरोध में वोटिंग में हिस्सा लिया.

उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने बैलेट पेपर पर अपने पति नवेलनी का नाम लिखा. उन्होंने विरोध में शामिल होने आए लोगों की तारीफ़ करते हुए कहा, “इससे उम्मीद जगती है कि सब कुछ ख़त्म नहीं हुआ है.”

लंदन में एक प्रदर्शनकारी मतदाता ने कहा कि मतदान करने से पहले वह सात घंटे से अधिक समय तक क़तार में खड़ी रहीं.

कार्यकर्ता और वकील लियोबोफ़ सोबोल ने वॉशिंगटन डीसी में कहा कि विरोध में जो वोट किए जा रहे हैं वो क्रेमलिन के नतीजों में दिखायी नहीं देंगे. लेकिन यह एकजुटता का प्रतीक है और इसलिए ये ज़रूरी है.”

रूस का चुनाव कभी भी ‘लेवल प्लेइंग फील्ड’ नहीं होने वाला था. यानी ऐसा नहीं होने वाला था, जिसमें सबको समान अवसर मिल सके.

कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार निकोलाई खारितोनोफ़ को चार फ़ीसदी से थोड़ा अधिक वोट मिला और उनके साथी उम्मीदवारों को इससे भी कम वोट मिला.

तीनों ही उम्मीदवार गंभीर नहीं थे और खारितोनोफ़ तो पुतिन की अपने कैंपेन में तारीफ़ करते हुए कह चुके हैं कि “पुतिन सभी क्षेत्रों में देश को एकजुट करने और जीत दिलाने के लिए काम कर रहे हैं.”

लाखों लोगों ने इसलिए पुतिन को उनके पांचवे कार्यकाल के लिए वोट दिया क्योंकि उनके पास कोई विकल्प नहीं था.

इसकी सबसे बड़ी वजह है, क्रेमलिन ने पूरे राजनीतिक परिदृश्य से कोई भी क्रेडिबल प्रतिद्वंद्वी रहने ही नहीं दिया, या तो पुतिन के विरोधियों को जेल में डाल दिया जाता है या तो निर्वासन में रह रहे हैं.

कुछ हफ़्तों तक ये भी ख़बर चलती रही कि एक युद्ध-विरोधी नेता बोरिस नादेज़दीन को चुनाव में खड़े होने की इजाज़त मिल सकती है.

लेकिन पिछले महीने चुनाव आयोग ने उनकी उम्मीदवारी ख़ारिज कर दी क्योंकि ऐसा लग रहा था कि बड़ी संख्या में रूसी अपना समर्थन उनके लिए दर्ज करा सकते हैं.

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