गोल्ड लोन घाटे का सौदा न बन जाए, बेहतर डील के तरीके जान लीजिए

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- Author, दीपक मंडल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत में पिछले कुछ समय से गोल्ड लोन बिज़नेस में कई तरह की गड़बड़ियां सामने आ रही हैं. इसे लेकर सरकार का वित्त मंत्रालय और केंद्रीय बैंक आरबीआई दोनों सतर्क हो गए हैं.
वित्त मंत्रालय ने सभी सरकारी बैंकों को अपने गोल्ड पोर्टफोलियो की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं. वित्त मंत्रालय ने पाया कि गोल्ड लोन देने में नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है.
गोल्ड लोन देने में बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की ओर से मानकों के उल्लंघन का सबसे ज्यादा खमियाजा उन ग्राहकों को हो रहा है, जो अपना गोल्ड लेकर लोन लेने जाते हैं.
अक्सर ये देखा गया है कि गोल्ड लोन देते समय कुछ कंपनियां लोन टु वैल्यु रेश्यो (एलटीवी) में गड़बड़ी करती हैं.
एलटीवी रेश्यो बताता है कि आपको अपने गोल्ड गिरवी रखने के बदले अधिकतम कितना लोन मिल सकता है. आरबीआई ने फिलहाल इसे 75 फीसदी तक निर्धारित कर दिया है.
यानी अगर किसी ने एक लाख रुपये की कीमत की ज्वेलरी गिरवी रखी तो उसे बतौर लोन 75 हजार रुपये ही मिलेंगे.
कहां होती है गड़बड़ी
ग्राहकों के गोल्ड के कैरेट को कम बताया जा सकता है. इससे ग्राहक के गोल्ड की वैल्युएशन कम हो जाती है और उसे कम लोन मिलता है.
गोल्ड लोन के मामले में आरबीआई ने जो जांच की है उससे ये बात सामने आई है कि कुछ कंपनियां ग्राहकों के सोने की कीमत कम आंक रही हैं.
ऐसे में एक तो ग्राहक को कम लोन मिलता है. दूसरा,अगर वो लोन न चुका पाए तो कंपनी उस लोन का ऑक्शन कर फायदा उठा लेती है.
कुछ कंपनियां ग्राहकों के गोल्ड की क्वॉलिटी को लेकर सवाल उठाती हैं. कई बार 22 कैरेट की गोल्ड ज्वेलरी को 20 या 18 कैरेट का बता दिया जाता है.
ऐसे में ग्राहक को कम लोन मिलता है. इससे ग्राहक की लोन चुकाने की क्षमता भी घट जाती है.
सेबी सर्टिफाइड निवेश सलाहकार बलवंत जैन कहते हैं, "देखिये, कंपनियां वजन में तो गड़बड़ी नहीं कर पाएंगी. लेकिन ग्राहकों के गोल्ड के कैरेट को कम बताया जा सकता है. इससे ग्राहक के गोल्ड की वैल्युएशन कम हो जाती है और उसे कम लोन मिलता है. ऐसा करके कंपनियां पहले ही मार्जिन निकाल लेती हैं."
वो कहते हैं, "गोल्ड लोन में बेंच मार्क रेट भी नहीं है. होम लोन रेट की तरह गोल्ड लोन का कोई मानक रेट न रहने से कंपनियां ज्यादा रेट पर गोल्ड लोन दे सकती हैं. कुल मिलाकर, गोल्ड लोन में इंटरेस्ट रेट का स्टैंडर्डाइजेशन नहीं है. ये गोल्ड लोन इको-सिस्टम की सबसे बड़ी कमी है."
गोल्ड लोन में ब्याज दर और प्रोसेसिंग फीस का हिसाब

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कई गोल्ड लोन कंपनियां ग्राहकों से ज्यादा ब्याज दर वसूलती हैं. सरकारी बैंक 8.75 फीसदी से लेकर 11 फीसदी तक इंटरेस्ट रेट पर गोल्ड लोन देते हैं.
लेकिन गोल्ड लोन देने वाली एनबीएफसी कंपनियों का गोल्ड लोन इंटरेस्ट रेट 36 फीसदी तक जा सकता है. प्रोसेसिंग फीस में भी अंतर हो सकता है.
भारतीय स्टेट बैंक और दूसरे सरकारी बैंक 0.5 फीसदी या अधिकतम 5000 रुपये तक प्रोसेसिंग फीस ले सकते हैं.
वहीं एनबीएफसी कंपनियां एक फीसदी या इससे भी ज्यादा प्रोसेसिंग फीस वसूल सकती हैं.
गोल्ड लोन ग्राहक नुकसान से कैसे बचें
गोल्ड लोन इमरजेंसी लोन है. ग्राहक को ये ध्यान में रखना चाहिए कि इमरजेंसी में लिए गए इस लोन को कितनी जल्दी चुका सके चुका दे.
गोल्ड लोन लेते समय सावधानी बरतने की जरूरत है. गोल्ड लेने जाने से पहले ग्राहक को अपने गोल्ड की क्वॉलिटी की जांच करा लेनी चाहिए.
कई ज्वेलर्स बगैर किसी चार्ज के ये सर्विस देते हैं. सर्राफा बाज़ार में ऐसे कियोस्क मिलते हैं जहां सर्टिफाइड जांच होती है.
यहां कैरेटोमीटर से गोल्ड कैरेट की जांच होती है. कैरेट सर्टिफिकेट मिलने से ग्राहक गोल्ड लोन कंपनियों से बेहतर शर्तों के साथ सौदेबाजी कर सकते हैं.
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी प्रमुख अनुज गुप्ता कहते हैं, "अगर ग्राहक के पास हॉलमार्क ज्वेलरी होती है तो लोन लेते समय बेहतर सौदेबाजी की स्थिति में होता है. अगर गोल्ड कैरेट सर्टिफाइड है तो भी कंपनियां इंटरेस्ट रेट कम कर सकती हैं."
अनुज गुप्ता कहते हैं, "गोल्ड लोन ग्राहकों को हमेशा ये याद रखना चाहिए कि ये छोटी अवधि के लिए लिया जाने वाला लोन है. ये एक तरह का इमरजेंसी लोन है. ग्राहक को ये ध्यान में रखना चाहिए कि इमरजेंसी में लिए गए इस लोन को कितनी जल्दी चुका सकें, चुका दें."
"अमूमन गोल्ड लोन की ब्याज दर होम लोन या ऑटो लोन की दरों की तुलना में ज्यादा होती है. इसलिए लोन चुकाने की स्थिति बनते ही इसे चुका देना चाहिए."
भारत में गोल्ड लोन और इसका बढ़ता बाज़ार

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इकनॉमिक टाइम्स ने आरबीआई के आंकड़ों के हवाले से बताया है कि भारत में संगठित गोल्ड लोन बाजार छह लाख करोड़ रुपये का है.
सितंबर 2020 से सितंबर 2022 के बीच गोल्ड लोन का आवंटन लगभग दोगुना बढ़ गया.
सितंबर 2020 में 46,791 करोड़ रुपये का गोल्ड लोन दिया गया. लेकिन सितंबर 2022 तक ये बढ़ कर 80,617 करोड़ रुपये का हो गया..
भारत में गोल्ड लोन बाजार साहूकारों और सोना गिरवी रखने वालों के पास है. इस बाजार में उनकी हिस्सेदारी लगभग 65 फीसदी है.
जबकि बाकी 35 फीसदी हिस्सेदारी बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के बीच है.
गोल्ड लोन मार्केट में पहले एनबीएफसी कंपनियों का वर्चस्व था लेकिन हाल के दिनों में सरकारी बैंकों की इस मार्केट में हिस्सेदारी काफी बढ़ी है. अब लगभग हर सरकारी बैंक गोल्ड लोन मार्केट में उतर आया है.
पिछली कुछ तिमाहियों के दौरान इन बैंकों ने अपना गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में काफी इज़ाफा किया है. मिसाल के तौर पर 2023 की सितंबर तिमाही से पहले की तिमाहियों में एसबीआई के रिटेल गोल्ड लोन सेगमेंट में 21 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी.
बैंक ऑफ बड़ौदा ने इस सेगमेंट में 62 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की जबकि एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक ने क्रमश: 23 और 26 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की.
गोल्ड लोन बाज़ार में रेगुलेशन क्यों जरूरी

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हाल के दिनों में गोल्ड लोन को लेकर जिस तरह की गड़बड़ियां सामने आ रही थी उससे सरकार और आरबीआई दोनों को नियमन से जुड़े कदम उठाने पड़े.
बैंक अपना गोल्ड लोन पोर्टफोलियो बढ़ाने के लिए नियमों को ताक पर रख कर लोन देने लगे थे. निर्धारित मात्रा में गोल्ड गिरवी रखवाए बगैर लोन दिया जा रहा था.
कुछ बैंक टॉप-अप लोन भी दे रहे थे. ऐसे ही मामलों के सामने आने के बाद इस महीने आरबीआई ने आईआईएफएल फाइनेंस के गोल्ड लोन कारोबार पर रोक लगा दी थी.
आरबीआई ने अपनी जांच में पाया था कि आईआईएफएल फाइनेंस के गोल्ड लोन के 67 फीसदी खातों में लोन टू वैल्यू रेश्यो यानी एलटीवी में गड़बड़ी है.
कई मामलों में तो लोन देने के दिन ही या उसके कुछ ही दिनों बाद कैश से लोन वसूली कर अकाउंट बंद कर दिया गया. बैंकों से यह देखने को कहा गया है कि जो लोन दिया गया, उसके एवज में सही मात्रा में गोल्ड गिरवी रखा गया या नहीं. गहनों की कीमत और शुद्धता आरबीआई के नियमों के अनुसार जांची गई थी या नहीं. बैंकों से ये भी कहा गया था कि दो वर्षों में जो लोन अकाउंट क्लोज किए गए, उनकी भी जांच की जाए.
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