कौन हैं 'बेहतरीन सर्जन' से विवादों तक का सफ़र तय करने वाले डॉक्टर संदीप घोष

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- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, कोलकाता से
कोलकाता में ट्रेनी डॉक्टर की रेप के बाद हत्या के मामले में मुख्य अभियुक्त को पुलिस ग़िरफ़्तार कर चुकी है लेकिन घटना के बाद से ही आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप कुमार घोष पर लगातार आरोप लगते आए हैं.
ट्रेनी डॉक्टर इसी अस्पताल में कार्यरत थीं.
कोलकाता पुलिस के विशेष जांच दल यानी 'स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम' (एसटीएफ़) ने घोष के ख़िलाफ़ जांच में तेज़ी ला दी है.
इस दल को तय सीमा के अंदर अपनी जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी है. इसका नेतृत्व राज्य के पुलिस महानिरीक्षक प्रणव कुमार कर रहे हैं.
जांच से जुड़े एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि कई बार नोटिस भेजे जाने के बाद भी संदीप घोष जांच दल के सामने पेश नहीं हो रहे हैं.
संदीप घोष पर लगे आरोपों की जांच के लिए दल में शामिल सीआईडी के अधिकारी और दूसरे अधिकारी अस्पताल के रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं.
उनके मातहत रहे कर्मचारी अख़्तर अली ने सरकार और राज्य के सतर्कता आयोग को लिखित तौर पर दिए अपने बयान में घोष पर कई आरोप लगाए हैं, जिनमें वित्तीय अनियमितताओं के भी आरोप हैं.
अख़्तर अली उस अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट रहे हैं. लेकिन फ़िलहाल उनका तबादला मुर्शिदाबाद कर दिया गया है.

संदीप कुमार घोष पर लगे हैं कई आरोप

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नौ अगस्त की रात आरजी कर मेडिकल कॉलेज की छात्रा के साथ रेप के बाद हत्या कर दी गई थी.
छात्रा के परिवार वालों का आरोप है कि अस्पताल के प्रिसिंपल (जो उस वक़्त संदीप घोष थे) और दूसरे प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें फ़ोन पर बताया कि ‘उनकी बेटी ने आत्महत्या’ कर ली है.
अब जांच दल ये पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि संदीप घोष और अस्पताल के 'वाइस प्रिंसिपल' और डीन के अलावा मेडिकल सुपरिटेंडेंट और छात्रा के विभाग के वरिष्ठ डॉक्टरों की इस घटनाक्रम में क्या भूमिका रही थी.
संदीप घोष ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज से ही पढ़ाई भी की है. अख़्तर अली इसी तथ्य का हवाला देकर कहते हैं कि 'संदीप घोष अस्पताल के पूरे सिस्टम को जानते हैं और उन्होंने इसका दुरुपयोग किया.'
अख़्तर अली ने उन पर आर्थिक गड़बड़ियों के आरोप लगाए.
वो दावा करते हैं कि उन्होंने इस संबंध में राज्य सरकार से शिकायत भी की. संदीप घोष का साल 2023 में मुर्शिदाबाद ट्रांसफ़र कर दिया गया.
लेकिन, जल्द ही संदीप घोष को फिर से उनके पद पर बहाल कर दिया गया जबकि अख़्तर अली का ट्रांसफ़र मुर्शिदाबाद कर दिया गया.
कोलकाता के एक क़स्बे से सीबीआई के शिकंजे तक

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संदीप कुमार की पृष्ठभूमि की बात करें तो वो कोलकाता के क़रीब बोनगांव क़स्बे से आते हैं. शुरुआत से ही एक उत्साही युवक के तौर पर जाने गए संदीप पढ़ाई में काफ़ी तेज़ थे.
स्थानीय स्कूलों से हाईस्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद वो मेडिकल की तैयारी में लग गए. संदीप घोष को कोलकाता के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज में दाख़िला मिला और यहां से उनका करियर शुरू हुआ.
आरजी कर मेडिकल कॉलेज से ही एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले संदीप कुमार घोष ने बतौर ऑर्थोपेडिक सर्जन काफ़ी नाम कमाया. वो कोलकाता के सबसे बेहतरीन सर्जन में से एक माने जाते रहे हैं.
साल 2021 में उन्हें कोलकाता के ही एक अन्य मेडिकल कॉलेज- कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का वाइस प्रिंसिपल बनाया गया.
2021 में ही उन्हें आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का प्रिंसिपल बनाया गया. तभी से उनका नाम विवादों से ऐसे जुड़ता रहा कि एक समय 'होनहार छात्र' के टैग से अब सीबीआई के घेरे तक वो पहुंच गए हैं.
बीते शुक्रवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति राजश्री भारद्वाज की एकल खंडपीठ ने डॉक्टर संदीप घोष पर लगे आरोपों की जांच का ज़िम्मा भी सीबीआई को सौंप दिया.
हालाँकि उनके वकील इस आदेश को बड़ी बेंच में चुनौती देने की बात कह रहे हैं. अदालत ने सीबीआई से तीन सप्ताह के अंदर संदीप घोष पर लगे आरोपों की 'स्टेटस रिपोर्ट' पेश करने को कहा है.
घोष को जानने वाले क्या कहते हैं?

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डॉक्टर शम्स मुसाफ़िर भी आरजी कर मेडिकल कॉलेज के छात्र रह चुके हैं और उन्होंने संदीप घोष को एक बेहतरीन सर्जन और फिर प्रशासक के रूप में देखा है.
वो कहते हैं, "प्रशासनिक कुर्सी मिलने के बाद उनके आस-पास ठेकेदार और व्यवसायी घूमने लगे. फिर राजनीतिक लोगों से भी उनकी नज़दीकियां बढ़ने लगीं. फिर उन्होंने अपने पुराने मित्रों और छात्रों से मिलना भी बंद कर दिया. फिर एक के बाद एक विवादों में वह घिरते चले गए और अब वह सीबीआई के चंगुल में जा फंसे हैं. मुझे अफ़सोस है कि एक बेहतरीन डॉक्टर किस तरह अपने लक्ष्य से हट गया."
डॉक्टर बिप्लब चंद्र भी लगभग उसी समय आरजी कर मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे थे जिस समय संदीप घोष छात्र थे.
डॉ. बिप्लब कहते हैं, "एक छात्र के रूप में और एक डॉक्टर के रूप में वो ऐसे थे कि लोग उनकी तरफ़ देखा करते थे. लेकिन बाद में जब से प्रशासनिक कुर्सी उन्हें मिली, तबसे उनके व्यवहार में काफ़ी बदलाव आ गया. बीच में जब उन पर आरोप लगे थे और उनका तबादला कर दिया गया था, तब उन्होंने कुछ छात्रों से इस तबादले का विरोध करवाया था."
ऐसा नहीं है कि संदीप घोष के दोस्त नहीं हैं. उनके दोस्त भी रहे लेकिन उनके आस-पास के लोगों का कहना है कि उनका उठना-बैठना अपने प्रोफ़ेशन के लोगों के साथ कम और राजनेताओं या व्यवसायियों के साथ ज़्यादा होने लगा.
उनके मित्र रह चुके एक डॉक्टर ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि घोष 'राजनीति का शिकार हो गए.'
वो कहते हैं, "अब उनके समर्थन में कोई आगे नहीं आ रहा है. वे लोग भी नहीं, जिन लोगों ने उनसे ख़ूब फ़ायदे लिए. वह अपने दोस्तों से जिन लोगों की वजह से दूर हो गए हैं, वे लोग भी अब कन्नी काट कर निकल चुके हैं. डॉक्टर संदीप घोष अब अकेले रह गए हैं."
संदीप घोष के फ़ैसलों के ख़िलाफ़ जनहित याचिका

कोलकाता रेप केस की जांच कर रही सीबीआई की टीम ने भी जांच में सहयोग के लिए घोष के मातहत रहे अख़्तर अली को बुलाया है और उनसे कई जानकारियां लीं.
इसके अलावा अली ने कलकत्ता हाई कोर्ट में बुधवार को एक जनहित याचिका भी दायर की, जिसमें संदीप घोष द्वारा लिए गए फैसले और कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है.
अख़्तर अली की शिकायत पर राज्य के सतर्कता विभाग के पुलिस उप महानिरीक्षक ने 20 जुलाई 2023 को स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को एक प्रतिवेदन भेजकर आरजी कर मेडिकल कॉलेज में चल रही इन कथित गड़बड़ियों की विस्तृत जांच की अनुशंसा की थी.
संदीप घोष के ख़िलाफ़ अब शुरू हुई जांच में सीबीआई और राज्य पुलिस के विशेष जांच दल ने उन्हें कई बार जांच में ‘सहयोग’ करने के लिए बुलाया है.
इसके अलावा 2021 में भी राज्य के महालेखागार ने भी अस्पताल में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर रिपोर्ट पेश की थी.
महालेखागार का कहना था कि लगातार नोटिस के बावजूद घोष ने इन अनियमितताओं के बारे में कोई स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया था.
जांच से संबंध रखने वाले एक अधिकारी का कहना है कि वर्ष 2021 यानी आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के प्रिंसिपल का पदभार ग्रहण करने से लेकर अब तक उन्होंने जितने टेंडर अलॉट किए हैं या फिर जो भी प्रशासनिक निर्णय लिए गए उनकी सघन जांच की जा रही है.
घोष का इस्तीफ़ा

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नौ अगस्त को रेप और हत्या की इस घटना के बाद संदीप घोष ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.
उन्होंने अपने इस्तीफ़े में लिखा था, "मैं ये अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकता हूँ. मेरे ख़िलाफ़ सारे आरोप बेबुनियाद हैं. छात्रों को मेरे ख़िलाफ़ उकसाया जा रहा है. इसके पीछे राजनीति है."
लेकिन इसके बाद राज्य सरकार ने उनका ट्रांसफ़र 'कोलकाता नेशनल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल' में बतौर प्रिंसिपल कर दिया था.
लेकिन मामले की सुनवाई के दौरान कोलकाता हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने इसका संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार के इस फ़ैसले की आलोचना की और संदीप घोष को छुट्टी पर जाने का आदेश जारी किया था.
अदालत ने सवाल भी उठाए कि सरकार इतनी जल्दबाज़ी में संदीप घोष को किसी दूसरे मेडिकल कॉलेज का प्राचार्य बना सकती है?
इसके बाद पश्चिम बंगाल सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टर सुहिता पाल को आरजी कर मेडिकल कॉलेज का नया प्रिसिंपल नियुक्त किया.
इसके अलावा नए वाइस प्रिंसिपल और मेडिकल सुपरिटेंडेंट की नियुक्ति भी की गई थी. लेकिन छात्रों के विरोध के बाद इन सभी नियुक्तियों को रद्द करने का आदेश बुधवार की देर शाम जारी किया गया.
सरकार के नए अध्यादेश के अनुसार, अब मानस कुमार बनर्जी कॉलेज के नए प्राचार्य होंगे.
संदीप घोष पर तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा के पूर्व सांसद शांतनु सेन समेत कई नेताओं ने भी आरोप लगाए हैं.
जिसके बाद शांतनु को पार्टी प्रवक्ता के पद से हटा दिया गया है.
इसके अलावा मौजूदा राज्य सभा सांसद सुखेंदु रॉय भी घटना के बाद से मांग कर रहे हैं कि संदीप घोष के पूरे कार्यकाल की जांच की जानी चाहिए.
भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता और सांसद शमीक भट्टाचार्य ने बीबीसी से बातचीत के दौरान कहा, “संदीप घोष की सघन पूछताछ होनी चाहिए. उनके ख़िलाफ़ जांच भी होती रही है. जांच रिपोर्ट में उनको दोषी पाया गया. जिसने शिकायत की उसका ट्रांसफ़र कर दिया गया. ये तब तक संभव नहीं है जब तक उनकी सत्ता में बैठे लोगों के साथ सांठगांठ ना हो."
चूँकि सीबीआई संदीप घोष से लगातार पूछताछ कर रही है इसलिए उनसे संपर्क नहीं हो सका. उनकी तरफ़ से कोई जवाब आता है तो उसे इस रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा.
सांठगांठ के आरोप पर टीएमसी का जवाब

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मगर तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता जय प्रकाश मजूमदार ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने संदीप घोष के पूरे कार्यकाल की जांच के लिए एक विशेष दल का गठन किया है.
उनका कहना था कि 'घोष पर जो आरोप लगे हैं वो राज्य के सतर्कता विभाग के पास भी पहुंचे हैं जिस पर पहले से ही कार्यवाही की जा रही थी.'
वो कहते हैं, "ये कहना ग़लत है कि संदीप घोष को राज्य सरकार संरक्षण दे रही है. ये विपक्षी दलों का मनगढ़ंत आरोप है."
"इसलिए दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए सरकार ने इन आरोपों का संज्ञान लेते हुए न सिर्फ उनके ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज की है बल्कि जो भी उनके कार्यकाल में फैसले लिए गए; चाहे वो किसी भी तरह के हों- उनकी जांच शुरू हो गई है और वो भी तय समयसीमा के अंदर इसके परिणाम भी सामने आ जाएंगे."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित


















