ऋषि सुनक का प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा, ब्रिटेन से क्यों मांगी माफ़ी?

ब्रिटेन के आम चुनाव में कंज़र्वेटिव पार्टी की शिकस्त के बाद प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर राष्ट्र को संबोधित किया.
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने बीते कई दशकों में पार्टी के सबसे खराब प्रदर्शन के लिए राष्ट्र से माफी मांगी.
उन्होंने कहा, "मैं हार की ज़िम्मेदारी लेता हूं."
सुनक ने 14 वर्षों के शासन के दौरान कंज़र्वेटिव पार्टी की उपलब्धियों का बखान करते हुए कहा कि ब्रिटेन साल 2010 की तुलना में अधिक समृद्ध और निष्पक्ष है.
ऋषि सुनक ने अपने प्रतिद्वंदी और ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर की भी तारीफ़ की. उन्होंने कहा कि स्टार्मर की सफलताओं को पूरा देश साझा करेगा.
बकिंघम पैलेस ने जानकारी दी है कि ऋषि सुनक के दिए इस्तीफ़े को स्वीकार कर लिया गया है.
ब्रिटेन में लेबर पार्टी 14 साल बाद सत्ता में वापसी कर रही है.
आम चुनाव में लेबर पार्टी को 412 सीटें मिली हैं. संसद में बहुमत के लिए 326 सीटों की ज़रूरत होती है.

इमेज स्रोत, Reuters
हार के बाद क्या बोले थे सुनक
नतीजों के बाद ऋषि सुनक ने और समर्थकों से माफ़ी मांगी थी और कहा कि इस नतीजे से सीख लेने की ज़रूरत है.
उन्होंने कहा, “आज रात की इस मुश्किल घड़ी में मैं रिचमंड और नॉर्थहेलर्टन संसदीय क्षेत्र के लोगों के प्रति शुक्रिया अदा करता हूं, जिन्होंने हमें नियमित रूप से समर्थन दिया. मैं दस साल पहले जब यहां आकर बसा था, तभी से आप लोगों ने मुझे और मेरे परिवार को बेशुमार प्यार दिया और हमें यहीं का होने का अहसास कराया. मैं आगे भी आपके सांसद के रूप में सेवा करने को लेकर उत्साहित हूं. ये मेरे लिए सौभाग्य की बात है. मैं अपने एजेंट और टीम को भी शुक्रिया कहता हूं, और मैं अपने विरोधियों को ऊर्जा से भरा और सकारात्मक चुनावी अभियान चलाने पर मुबारकबाद भी देता हूं.
“मैंने किएर स्टार्मर को फोन कर उन्हें इस जीत की मुबारकबाद भी दी. आज, शांतिपूर्ण तरीक़े से सत्ता का हस्तांतरण होगा. सभी पक्षों में सद्भाव दिखा. इन सभी चीज़ों की वजह से हम सभी को अपने देश की स्थिरता और भविष्य को लेकर आश्वस्त होना चाहिए.”
“ब्रिटिश जनता ने आज रात अपना स्पष्ट फ़ैसला सुना दिया है. काफ़ी कुछ सीखने और देखने के लिए है और मैं इस हार की पूरी ज़िम्मेदारी लेता हूं. जो अच्छे और मेहनती कंज़र्वेटिव उम्मीदवार तमाम कोशिशों और स्थानीय स्तर पर काम करने और अपने समुदायों को लेकर प्रतिबद्धता के बावजूद हार गए हैं, उनसे मैं माफ़ी मांगता हूं.”
“अब मैं लंदन जाऊंगा, जहां प्रधानमंत्री पद छोड़ने से पहले आज रात आए नतीजों के बारे में और विस्तार से बात करूंगा. मैं आने वाले सप्ताह, महीनों और सालों में आप सभी के साथ ज़्यादा समय बिताने को लेकर उत्साहित हूं. शुक्रिया.”

इमेज स्रोत, Reuters
भारतीय मूल के पहले ब्रिटिश पीएम
कंज़र्वेटिव नेता ऋषि सुनक ब्रिटेन के पहले भारतीय मूल के प्रधानमंत्री हैं. 44 साल के सुनक 10 डाउनिंग स्ट्रीट पहुंचने वाले सबसे कम उम्र के शख़्स हैं.
अपने तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े सुनक साउथैंप्टन में पले बढे और देश के सबसे मंहगे बोर्डिंग स्कूल विंचेस्टर से पढ़ाई की .
उन्होंने दर्शन, राजनीति और अर्थशास्त्र की पढ़ाई ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से की और इसके बाद अमेरिका की स्टैंफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई की.
वहां उनकी मुलाक़ात अक्षता मूर्ति से हुई, जो इंफोसिस के फाउंडर नारायण मूर्ति की बेटी हैं.
बाद में दोनों की शादी हुई. साल 2015 में रिचमंड, यॉर्कशायर से सांसद बनने से पहले वह इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स में अरबों डॉलर के हेज फंड मैनेज करते थे.
सत्ता तक कैसे पहुंचे

इमेज स्रोत, Reuters
साल 2020 में ऋषि सुनक को पीएम बोरिस जॉनसन ने वित्त मंत्री बनाया था.
उनकी नियुक्ति कोविड 19 महामारी की शुरुआत के साथ हुई.
उन्होंने नौकरी से निकाले गए लोगों की सहायता के लिए- ईट आउट टू हेल्प आउट योजना की शुरुआत की, इसे हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में काम करने वालों को ध्यान में रख कर लाया गया था.
लेकिन कोविड 19 केस में बड़ी वृद्धि पर इसके प्रभाव को लेकर सुनक को आलोचना का सामना करना पड़ा था.

इमेज स्रोत, Reuters
बोरिस जॉनसन का नाम पार्टीगेट स्कैंडल में सामने आया और इससे उनकी छवि को धक्का लगा.
उन पर पुलिस ने फाइन भी लगाया था. कोविड लॉकडाउन के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के आवास पर पार्टी की गई थी जो लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन था, इसे पार्टीगेट स्कैंडल के नाम से जाना जाता है.
ऋषि सुनक की पत्नी अक्षता टैक्स कारणों से भी चर्चा में रहीं. उनका स्थायी पता या डोमिसाइल यूके से बाहर का है. माना जाता है कि ऐसा करके उन्होंने ब्रिटेन के बाहर की अपनी संपत्ति पर लाखों डॉलर का टैक्स बचाया.
ये जानकारी सामने आने के बाद उन्होंने कहा कि वह यूके के बाहर से अपनी आने वाली आय पर यूके में टैक्स भरेंगी.
जुलाई 2022 में जब कंज़र्वेटिव पार्टी में इस्तीफों की झड़ी लग गई थी तो उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के बाद सुनक ने भी अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.
बोरिस जॉनसन की जगह लिज़ ट्रस ने ली थी. लेकिन 45 दिन में ही ट्रस ने इस्तीफ़ा दे दिया था. चुनाव से पहले कंज़र्वेटिव पार्टी ने सुनक को पीएम बनाया और उन्हें ही अपना उम्मीदवार बनाया.

इमेज स्रोत, Reuters
उनके चुनावी वादे क्या थे
बीते साल उन्होंने पांच वादे किए और कहा कि मतदाता उन्हें उनके इन वादों की कसौटी पर देखें
ये वादे थे-
- मंहगाई कम करना
- अर्थव्यवस्था को बढ़ाना
- क़र्ज़ घटाना
- एनएचएस में इंतज़ार के समय को कम करना
- छोटी नाव के ज़रिए प्रवासियों को आने से रोकना
जुलाई में आम चुनाव कराने के उनके फ़ैसले से ठीक पहले यूके में तीन सालों में मंहगाई अपने निचले स्तर 2.3% पर आ गई थी.
सुनक ने कहा था कि ये इस बात का संकेत हैं कि उनका अर्थव्यवस्था के लिए जो प्लान है ,वो काम कर रहा है और देश मंदी से बाहर निकल रहा है.
हालांकि सांख्यिकी नियामकों ने उनके उस बयान की आलोचना की और जिसमें उन्होंने कहा था कि कर्ज़ कम हो रहा है जबकि वो बढ़ रहा था.
जब सुनक सत्ता में आए, उसके मुक़ाबले आज एनएचएस में वेटिंग का समय और बढ़ गया है. सुनक के कैंपेन के दौरान ही डॉक्टरों ने हड़ताल की थी.
सुनक सरकार की एक और योजना विवादों में रही. उन्होंने छोटी नावों में सवार होकर आने वाले अप्रवासियों को रवांडा भेजने की योजना शुरू की.
लेकिन उनके विरोधियों ने इसका विरोध किया और कहा कि ये काफ़ी महंगा साबित होगा. आलोचनाओं से घिरने के बाद उन्होंने तय किया कि चुनाव से पहले किसी को रवांडा नहीं भेजा जाएगा.
ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने आंकड़े जारी करते हुए बताया कि इस साल के पहले पांच महीनों में छोटी नावों से देश में दाखिल होने वालों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, 10,000 ऐसे आए थे. इस साल इसी समुद्र के रास्ते आने की कोशिश करती एक सात साल की बच्ची सहित पांच लोगों की मौत हो गई थी.
इस अभियान में कंज़र्वेटिव पार्टी ने सभी 18 साल युवाओं के लिए एक साल के लिए अनिवार्य नेशनल सर्विस शुरू करने की बात कही थी. उन्होंने टैक्स फ्री पेंशन को बढ़ाने और का वादा किया था.

इमेज स्रोत, Reuters
सुनक ने किस हाल में कंज़र्वेटिव को संभाला
जब सुनक ने पार्टी की कमान संभाली को कंज़र्वेटिव बहुत ही बिखरी हुई हालत में थी.
सुनक ने बिखरी हुई कंजर्वेटिव पार्टी को एकजुट करने कोशिश की, जिसमें उन्हें एक हद तक सफलता मिली. ख़ास कर वो उन लोगों को शांत कर पाए जो जो उनकी टीम पर टैक्स को 70 सालों के सबसे ऊंचे स्तर पर ले जाने को लेकर हमलावर हो रहे थे.
नवंबर से ही पार्टी सभी सर्वे में लेबर से लगातार 20 अंक पीछे चल रही थी.
मार्च से लेकर अब तक लेबर और रिफॉर्म यूके पार्टी के नेता उन योजनाओं को लेकर सुनक को लागातर घेर रहे थे.
इसके अलावा, इस चुनाव से पहले दर्जनों कंज़र्वेटिव सांसद अपने पद से इस्तीफा दे रहे थे.
अधिकतर ऑब्ज़र्वर और टोरी सांसदों का मानना था कि सुनक सितंबर-अक्टूबर के बीच चुनाव का एलान करेंगे लेकिन जब उन्होंने चार जुलाई को चुनाव कराने का फै़सला किया तो वो इससे हैरान थे.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















