भारत बांग्लादेश के बीच विवाद का कारण बने डंबूर बांध में आख़िर क्या हुआ है?

डंबूर बांध बांध स्लुइस गेट - फाइल फोटो

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    • Author, अमिताभ भट्टासाली
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज बांग्ला, कोलकाता

पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा बीते तीन दशकों से भी ज्यादा अरसे में आने वाली सबसे भयावह बाढ़ से जूझ रहा है. राज्य सरकार ने इसकी जानकारी दी है.

त्रिपुरा सरकार के एक मंत्री ने बीबीसी बांग्ला से कहा है कि अगस्त महीने के दौरान अब तक सामान्य से 151 प्रतिशत ज्यादा बारिश हो चुकी है.

राज्य प्रशासन ने बताया है कि इस बाढ़ के कारण अब तक कम से कम 24 लोगों की मौत हो चुकी है और दो लोग लापता हैं.

राज्य सरकार ने बृहस्पतिवार की शाम को बताया है कि विभिन्न इलाकों में करीब 17 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं. राज्य में बीते चार दिनों से लगातार भारी बारिश हो रही है.

त्रिपुरा के बिजली मंत्री रतन लाल नाथ ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि सिर्फ गोमती जिले में ही इस महीने के दौरान 656.6 मिमी बारिश हो चुकी है. यह स्वाभाविक बारिश (196.5 मिमी) के मुकाबले 234 प्रतिशत ज्यादा है. गोमती पनबिजली केंद्र के तहत दम्बुर बैराज उसी जिले में है.

राजधानी अगरतला समेत राज्य के ज्यादातर इलाके पानी में डूबे हैं. इसके साथ ही हावड़ा, खोवाईस मुहूरी और ढालाई समेत राज्य की तमाम नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं.

भारतीय मौसम विभाग ने राज्य के तीन जिलों में रेड अलर्ट और बाकी में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है.

डंबूर बांध में क्या हुआ है ?

त्रिपुरा के ऊर्जा मंत्री रतन लाल नाथ (बाएं)

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त्रिपुरा की ओर से ये बयान ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले ही भारत सरकार ने भी बांग्लादेश के बाढ़ से त्रिपुरा के बांध को जोड़ने पर अपना पक्ष रखा था.

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कई बांग्लादेशी संगठन अपने देश में आई बाढ़ के पीछे भारत को ज़िम्मेदार ठहरा रहे थे.

इन संगठनों का दावा था कि त्रिपुरा के दम्बुर जलविद्युत परियोजना के बांध को खोल दिया गया, इस कारण बांग्लादेश में बाढ़ आई.

इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया, “बांग्लादेश में बाढ़ की मौजूदा स्थिति पर यह चिंता जताई गई है कि यह त्रिपुरा में गुमती नदी पर बने दम्बुर बांध के खोलने से पैदा हुई है. यह पूरी तरह से सही नहीं है.”

विदेश मंत्रालय के मुताबिक़, "भारत और बांग्लादेश से होकर बहने वाली गुमती नदी के तटीय इलाक़ों में इस साल भारी बारिश हुई है."

भारत का कहना है कि बांग्लादेश में बाढ़ इन इलाक़ों से नीचे की ओर जाने वाले पानी की वजह से आई है.

विदेश मंत्रालय ने बतायाकि त्रिपुरा दम्बुर बांध बांग्लादेश की सीमा से 120 किलोमीटर दूर है. यह एक छोटी ऊंचाई वाला बांध है जो बांग्लादेश को भी 40 मेगावॉट की बिजली सप्लाई करता है.

मौजूदा बाढ़ के कारण जिन जिलों में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, उनमें गोमती भी शामिल है. बांग्लादेश के मीडिया ने दावा किया गया है कि इसी जिले में गुमती पनबिजली केंद्र के डंबूर स्लूइस गेट को खोल देने के कारण बांग्लादेश के कई इलाकों में भारी बाढ़ आ गई है.

वह पनबिजली परियोजना त्रिपुरा के बिजली विभाग के तहत है.

बिजली मंत्री रतन लाल नाथ ने बीबीसी बांग्ला से कहा, "डंबूर बांध के गेट को खोलने के मुद्दे पर जो कुछ लिखा जा रहा है वह महज कुप्रचार है. ऐसी खबरें निराधार हैं. गोमती पनबिजली केंद्र के तहत बने डंबूर बांध का कोई गेट नहीं खोला गया है."

उन्होंने कहा, "इस केंद्र में बने जलाशय की अधिकतम भंडारण क्षमता 94 मीटर है. जलस्तर इससे ज्यादा होने की स्थिति में अतिरिक्त पानी स्वचालित रूप से गेट से बाहर निकल जाता है. जलस्तर कम होने पर गेट खुद से बंद हो जाते हैं."

"फिलहाल जलस्तर भंडारण क्षमता से ज्यादा होने के कारण दो गेटों से पानी बाहर निकल रहा है. इनमें से एक गेट से 50 प्रतिशत की दर से पानी बाहर निकल रहा है. संबंधित इलाके के लोगों को लाउडस्पीकर के जरिए पहले से ही इस बारे में सतर्क कर दिया गया था."

उनका कहना था कि त्रिपुरा ने बीते तीन दशकों में ऐसी भयावह बाढ़ नहीं देखी है.

गोमती जिला बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक है

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त्रिपुरा के मंत्री रतन लाल कहते हैं, "वर्ष 1993 में 21 अगस्त को राज्य के सबरूम जिले में एक दिन में सबसे ज्यादा 247 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई थी. इसके मुकाबले इस साल 20 अगस्त को एक ही दिन में 375.8 मिमी बारिश हुई थी. ठीक 31 साल बाद चौबीस घंटों के दौरान इतनी ज्यादा बारिश हुई है."

मंत्री का कहना था कि अगर महीने भर का हिसाब देखें तो अगस्त के पहले 21 दिनों के दौरान आम तौर पर 214 मिमी बारिश होनी चाहिए थी. लेकिन इसकी जगह 538.7 मिमी बारिश हो चुकी जो 151 प्रतिशत ज्यादा है.

उनका कहना था कि इतनी ज्यादा बारिश के कारण तीन दशक के बाद ऐसी भयावह बाढ़ आना स्वाभाविक है.

हेलीकॉप्टर से बचाव

बचाव कार्य के लिए दो हेलीकॉप्टरों का उपयोग किया जा रहा है

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त्रिपुरा के मुख्यमंत्री मानिक साहा ने बृहस्पतिवार को राजधानी अगरतला में पत्रकारों को बताया कि राज्य प्रशासन युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य में जुट गया है.

राज्य के राहत, पुनर्वास और आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में खोले गए 450 राहत शिविरों में फिलहाल 65 हजार से ज्यादा लोग रह रहे हैं.

मुख्यमंत्री ने बताया कि बचाव कार्य के लिए दो हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन की कई अतिरिक्त टीमें भी राज्य में पहुंच गई हैं.

उसके अलावा राज्य आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें, असम राइफल्स और त्रिपुरा स्टेट राइफल्स के जवान भी राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं.

भारतीय मौसम विभाग ने शुक्रवार को भी राज्य में भारी से अति भारी बारिश और कुछ जगहों पर वज्रपात के साथ बारिश की भविष्यवाणी की है.

विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि बांग्लादेश के उत्तरी इलाके में पैदा होने वाले हवा के निम्न दबाव की वजह से त्रिपुरा और मिजोरम के कुछ इलाकों में अति भारी बारिश हो सकती है. इसकी वजह से पूर्वोत्तर के कई राज्यों में फ्लैश फ्लड (अचानक आने वाली बाढ़) की भी आशंका बनी हुई है.

तीस्ता-फरक्का

अगरतला में सड़क पर त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा (बीच में, नारंगी कपड़े में)

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बांग्लादेश के अखबारों में छपी खबरों में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल से सटे पर्वतीय राज्य सिक्किम से निकलने वाली तीस्ता नदी का जलस्तर भी खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है.

लेकिन, पश्चिम बंगाल के उत्तरी इलाके में बहने वाली नदियों के विशेषज्ञ और इलाके में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ता राजू बसु ने कहा है कि सिक्किम में दो दिन पहले बड़े पैमाने पर भूस्खलन की घटना जरूर हुई है, लेकिन फिलहाल तीस्ता के बेसिन में भारी बारिश नहीं हो रही है.

बसु बीबीसी बांग्ला से कहते हैं, "फिलहाल किसी दिन धूप हो रही है तो किसी दिन बारिश. इसके कारण भूस्खलन की आशंका बढ़ रही है. लेकिन नदी के बेसिन या गजलडोबा बैराज में अब तक खतरे के संकेत नहीं नज़र आए हैं."

पश्चिम बंगाल सरकार के सिंचाई विभाग के सूत्रों ने बताया है कि तीस्ता पर बने दो बांधों- गजलडोबा और कालीझोड़ा में जलस्तर स्वाभाविक है.

बराज प्रबंधन ने बताया है कि बृहस्पतिवार को दोपहर करीब 12 बजे गजलडोबा बराज से 1045.92 क्यूसेक और कालीझोड़ा बैराज से 1027 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है.

राज बसु का कहना है कि तीस्ता की समस्या बेहद पुरानी है. वह कहते हैं, "बीते साल अक्तूबर में ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड के कारण भारी मात्रा में पत्थर, मिट्टी और मकानों का मलबा तिस्ता नदी में जम गया है. इसकी वजह से नदी की गहराई कम हो गई है."

"यही कारण है कि हल्की बारिश होते ही पानी नदी तट से बाहर निकल आता है. लेकिन फिलहाल वैसी कोई स्थिति नहीं पैदा हुई है."

उन्होंने कहा, "इस समस्या का एक दिन में समाधान नहीं किया जा सकता है. इसके लिए दीर्घकालिक परियोजना तैयार करनी होगी. लेकिन केंद्र या दोनों राज्य सरकार- सिक्किम और पश्चिम बंगाल- की ओर से फिलहाल ऐसी कोई पहल नहीं नजर आ रही है."

दूसरी ओर, फरक्का बराज के सूत्रों ने बताया है कि वहां बुधवार से नदी के जलस्तर में कुछ वृद्धि के कारण बैराज के कुछ गेट खोल दिए गए हैं. इस बारे में पुष्टि के लिए कोशिश करने के बावजूद फरक्का प्रबंधन से संपर्क नहीं हो सका है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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