चीन की वो 5 चुनौतियां जो 2025 में तय करेंगी उसकी तरक्की का रास्ता

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग.

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इमेज कैप्शन, पांच सेक्टर ऐसे हैं, जो साल 2025 में चीन के लिए चुनौती बन सकते हैं
    • Author, टॉम हार्पर
    • पदनाम, प्रोफ़ेसर , यूनिवर्सिटी ऑफ़ ईस्ट लंदन

साल 2024 चीन के लिए एक कठिन वर्ष रहा.

शी जिनपिंग की सरकार एक तरफ देश में आर्थिक समस्याओं से जूझी तो दूसरी तरफ उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस के साथ गठबंधन की जटिलताओं से निपटना पड़ा.

इसके बावजूद चीन ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक अहम भूमिका निभाना जारी रखा है.

ऐसे में पाँच सेक्टर हैं, जो साल 2025 में चीन के मंसूबों पर पानी फेर सकते हैं.

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1. अमेरिका के साथ नए सिरे से प्रतिद्वंदिता

डोनाल्ड ट्रंप

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इमेज कैप्शन, अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप सत्ता में आने के बाद चीन की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं.

जनवरी में अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद चीन की सबसे बड़ी चिंता चीन के प्रति अमेरिका के अति आक्रामक रवैये की शुरुआत होने से जुड़ी है.

ट्रंप ने पहले ही चीन सहित अन्य देशों को 60 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाने की धमकी दी है. यह इस बात का संकेत है कि ट्रंप के पिछले कार्यकाल में शुरू हुआ ट्रेड वॉर इस बार भी जारी रहेगा.

अमेरिका के साथ टकरावपूर्ण संबंध चीन के लिए अहम चुनौती साबित होंगे. हालांकि, ऐसा नहीं है कि चीन इसके लिए तैयार नहीं है. इससे पहले अमेरिका के साथ हुए ट्रेड वॉर से चीन ने कई सबक सीखे हैं.

इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि चीनी कंपनियाँ जैसे ख्वावे ने दूसरे क्षेत्रों में विस्तार करते हुए अमेरिकी बाज़ार और तकनीक पर अपनी निर्भरता को कम करने के रास्ते तलाशना शुरू कर दिया है.

चीन भी अमेरिका के ख़िलाफ़ कड़ा रूख़ अपनाने से नहीं चूकता है. इसका उदाहरण तब देखने को मिला, जब हाल ही में चीन ने दुर्लभ धातुओं (जिनका इस्तेमाल बैटरीज़ और कैटालेटिक कन्वर्टर बनाने में होता है) के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया.

ये भी सच है कि चीन 2017 की तुलना में अब ट्रेड वॉर से निपटने के लिए बेहतर स्थिति में है.

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2. ग्लोबल टेक्नोलॉजी वॉर

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इमेज कैप्शन, चीन की कोशिश तकनीक के क्षेत्र में मौजूदगी को और मज़बूत करने की है.

इसमें कोई शक नहीं है कि चीन और अमेरिका बीच टैरिफ़ सबसे ज़्यादा ध्यान खींचने वाला मुद्दा होगा.

मगर अगला टकराव चीन के तकनीकी विकास पर हो सकता है. क्योंकि यह क्षेत्र अमेरिका के व्यापारिक प्रभुत्व के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है.

चीन के लिए टेक्नोलॉजी एक अहम फ़ैक्टर बनती जा रही है क्योंकि चीन की कोशिश इस क्षेत्र में निर्यात बढ़ाकर नौकरियाँ पैदा करना चाहता है.

उधर अमेरिका की प्राथमिकता इस सेक्टर में चीन पर निर्भरता कम करना है. अमेरिका ने सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी तक चीन की पहुंच को प्रतिबंधित करने की कोशिश करके इस बात के संकेत दिए हैं. यह टकराव का एक नया मोर्चा है.

चीन के टेक्नोलॉजी क्षेत्र को लेकर योजनाओं को 'बीजिंग इफ़ेक्ट' कहा गया है. इसके तहत चीन की कोशिश डिजिटल इन्फ़्रास्ट्रक्चर के मानक तय करने की है.

यह बिल्कुल वैसा है, जैसे यूरोपियन यूनियन ने जीडीपीआर यानी जनरल डाटा प्रोटेक्शन रेग्यूलेशन के ज़रिए डाटा मैनेजमेंट और प्रायवेसी के लिए किया है.

इस तरह का कदम चीन को टेक्नोलॉजी वर्ल्ड में रणनीतिक नेतृत्व दे सकता है.

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3. यूरोपियन यूनियन टैरिफ़

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इमेज कैप्शन, चीन और यूरोपीय यूनियन के साथ भी व्यापारिक टकराव की स्थिति बनी हुई है.

चीन का यूरोप के साथ भी व्यापारिक टकराव पेचीदा है. दोनों एक-दूसरे के ख़िलाफ़ टैरिफ़ लगा चुके हैं. मिसाल की तौर पर चीन ने फ़्रेंच ब्रैंडी पर आयात शुल्क लगाया. इसके जवाब में यूरोपियन यूनियन ने चीनी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था.

अब चीन की पहुँच उस तकनीक तक हो गई है जिसपर पश्चिमी देशों का कंट्रोल था.

हाल ही में एशिया में नेटो की भूमिका को बढ़ाने के लिए शुरू हुई चर्चा के बाद यूरोपियन यूनियन के साथ ट्रेड वॉर चीन के लिए एक सिरदर्द बन सकता है.

मगर, ट्रंप का यूरोपियन यूनियन के प्रति स्थापित रूप से विरोधी रवैया चीन के हित में काम कर सकता है.

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4. रूस के साथ गठबंधन

शी जिनपिंग के साथ व्लादिमीर पुतिन

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इमेज कैप्शन, चीन और रूस के गठबंधन ने पिछले कुछ समय में सभी का ध्यान खींचा है.

पहली नज़र में, रूस अब चीन के लिए महत्वपूर्ण बन चुका है. इसकी वजह वहां का बाज़ार और प्राकृतिक संसाधन है. जबकि चीन भी रूस के लिए आर्थिक सहयोग देने के हिसाब से महत्वपूर्ण बन गया है.

हालांकि, यह समर्थन चीन के यूरोपीय देशों के साथ संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है. कुछ देश मानते हैं कि यूक्रेन के ख़िलाफ़ युद्ध में चीन ही रूस का सहायक है.

इसी तरह, यूक्रेन पर रूस का आक्रमण और दोनों देशों के बीच जारी युद्ध, अमेरिका का ध्यान चीन से हटाने में मददगार साबित हो सकता है.

ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध के लिए शांति योजना का प्रस्ताव दिया है. अगर यह सफल रहा, तो अमेरिका को एक बार फिर चीन पर ध्यान केंद्रित करने का मौका मिलेगा.

और अगर यूक्रेन का मसला सुलझ जाता है तो अमेरिका और रूस के रिश्ते भी बेहतर हो सकते हैं. ये चीन के लिए अच्छी ख़बर नहीं होगी.

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5. मध्य पूर्व में संघर्ष

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इमेज कैप्शन, मध्य पूर्व में अस्थिरता का माहौल है. यह चीन के लिए चिंता की बात हो सकती है.
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चीन के लिए एक चिंता मध्य पूर्व में बढ़ती अस्थिरता भी है.

रूस की तरह, यह क्षेत्र भी चीन के लिए संसाधनों और बाज़ार के लिहाज से अहम है.

हाल ही में झुहाई एयर शो के दौरान मध्य-पूर्व के प्रमुख देश चीनी हथियारों के बड़े उपभोक्ता के तौर पर दिखे.

चीन के लिए ईरान और इसराइल के बीच क्षेत्रीय संघर्ष की संभावना भी चिंता की बात होगी. ईरान चीन के लिए तेल का प्रमुख स्रोत रहा है.

अगर दोनों देशों के बीच सशस्त्र संघर्ष शुरू होता है, तो चीन के लिए तेल की आपूर्ति थम सकती है. यह चीन के लिए आर्थिक समस्याएं खड़ी करेगा.

सीरिया में गृहयुद्ध का शुरू होना भी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए चिंता की बात है.

चीनी वीगर मुसलमान उन लड़ाकों में शामिल रहे हैं, जिन्होंने राष्ट्रपति बशर अल-असद को सत्ता से बाहर किया है. यह लोग टीआईपी यानी तुर्किस्तान इस्लामिक पार्टी का हिस्सा हैं.

चीन के शिनजियांग प्रांत में एक स्वतंत्र देश के लिए लंबे समय से संघर्ष चल रहा है. इस इलाक़े में वीगर मुसलमान रहते हैं. कुछ टीआईपी सदस्यों ने यह धमकी दी है कि वो सीरिया में कब्ज़े में लिए गए हथियारों का इस्तेमाल चीन में कर सकते हैं.

हाल ही के वर्षों में, शी जिनपिंग की सेना ने लाखों वीगरों को हिरासत में रखा है. वीगरों के प्रति चीन की इस रणनीति की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना होती रही है.

ये सारी बातें दिखाती हैं कि चीन को साल 2025 में दिक्कतें आ सकती हैं.

ऐसे भी संकेत हैं कि चीन इनसे निपटने की तैयारी भी कर रहा है. साथ ही चीन इस बात पर भी नज़र रख रहा है कि पश्चिम की ओर से रूस पर क्या प्रतिबंध लगाए गए हैं.

इसके पीछे चीन की सोच यह है कि अगर ताइवान के साथ चीन का संघर्ष बढ़ता है, तो चीन के ख़िलाफ़ भी ऐसे ही प्रतिबंधों का इस्तेमाल किया जा सकता है.

आख़िरकार, साल 2025 में जो कुछ भी होगा, वो चीन के लिए महत्वपूर्ण होगा. इसी से तय होगा कि चीन को नए सहयोगियों या नया बाज़ार बनाने की ज़रूरत होगी या नहीं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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