नीतीश कुमार का वायरल वीडियो और उनकी सेहत पर मेडिकल बुलेटिन जारी करने की मांग

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- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पटना से
शुक्रवार सुबह जब बिहार विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्षी दलों ने सदन चलने नहीं दिया. विपक्ष के विधायक लगातार नारे लगा रहे थे, " राष्ट्र गान का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान."
दरअसल 20 मार्च की शाम को पटना के पाटलिपुत्र स्टेडियम में आयोजित सेपक टाकरा वर्ल्ड कप 2025 का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कुछ ऐसा किया, जिससे सब हैरानी में पड़ गए.
इस कार्यक्रम में राष्ट्र गान के दौरान नीतीश कुमार अपने बगल में खड़े प्रधान सचिव दीपक कुमार से बात करने की कोशिश कर रहे थे और मंच के नीचे खड़े पत्रकारों की तरफ़ हाथ जोड़ कर अभिवादन करने लगे.
इस बीच प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सीधे खड़े होने का इशारा करते रहे थे. इसी कार्यक्रम में नीतीश कुमार ने सेपक टाकरा खेल का प्रतीक चिह्न ले जाकर एक टीवी चैनल के पत्रकार को दे दिया.

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नीतीश कुमार के 'अटपटे' व्यवहार पर सवाल

फिर राष्ट्रगान के दौरान नीतीश कुमार के इशारे करते हुए वीडियो वायरल हुए जिसके बाद से बिहार की राजनीति नीतीश कुमार की सेहत के इर्द-गिर्द गरमाई हुई है.
74 साल के नीतीश कुमार के पूरे राजनीतिक करियर की पहचान, उनका सार्वजनिक व्यवहार रहा है.
उनकी अच्छी हिन्दी, विषय पर पकड़ और एक नेता के तौर पर सौम्य-शालीन व्यवहार उन्हें बिहार के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में एक अच्छी छवि वाला नेता बनाता है.

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उन्हें 'सुशासन बाबू' के नाम से भी जाना जाता रहा है.
लेकिन बीते दो सालों में कई ऐसे मौक़े आए, जब लगा कि नीतीश कुमार का व्यवहार बदला है. इसके आधार पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर लगातार टिप्पणी करते रहे हैं.
ये दोनों नेता दोहराते रहे हैं, "नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री पद पर बने रहने योग्य नहीं रह गए."
पहले उन वाकयों की चर्चा कर लेते हैं, जब नीतीश कुमार का व्यवहार लोगों को अटपटा लगा.
कब-कब दिखा बदला व्यवहार

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07 नवंबर 2023: ये पहला मौक़ा था, जब नीतीश कुमार का व्यवहार राष्ट्रीय ख़बर बना. उन्होंने विधानसभा और परिषद में यौनिकता से जुड़ा विवादित बयान दिया.
09 नवंबर 2023: विधानसभा में नीतीश कुमार अचानक पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी पर भड़क गए और कहा उनकी (नीतीश) मूर्खता से जीतन राम मांझी मुख्यमंत्री बने थे.
22 दिसंबर 2023: डेयरी एंड कैटल एक्सपो के दौरान मंच पर मौजूद महिला एंकर के कंधे पर नीतीश कुमार ने हाथ रखकर कहा, आपका भी अभिनंदन.
01 मई 2024: चुनावी रैली के दौरान उन्होंने नारा लगाया, अबकी बार, 4000 पार. ये ग़लती उन्होंने अलग-अलग मौक़ों पर कई बार दोहराई.
19 जून 2024: नालंदा में आयोजित एक कार्यक्रम में मौजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाथ अपने हाथ में लेकर टटोलने लगे.
15 अक्तूबर 2024: गांधी मैदान में आयोजित रावण वध समारोह में रावण पर चलाने के लिए दिए गए तीर धनुष को फेंक दिया.
29 नवंबर 2024: विधानसभा में मंत्री अशोक चौधरी बोल रहे थे, तभी उनके पास बैठे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उनके ब्रेसलेट से खेलने लगे.
18 जनवरी 2025: प्रगति यात्रा के दौरान कहा कि 2005 से पहले महिलाएँ कुछ पहनती थी क्या? पूरी प्रगति यात्रा के दौरान जीविका दीदियों पर उनकी टिप्पणी सुर्ख़ियाँ बनती रहीं.
30 जनवरी 2025: महात्मा गांधी की स्मृति में मौन रखने के बाद अचानक ताली बजाने लगे.
08 मार्च 2025: होली मिलन समारोह में बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद के पैर छूने लगे. इससे पहले भी वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई नेताओं और अधिकारियों के पैर छूने की कोशिश करते नज़र आए हैं.
अभी चल रहे बजट सत्र के दौरान भी नीतीश कुमार, नेता प्रतिपक्ष को कई बार इशारे करने, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के साथ बार-बार उलझने को लेकर भी चर्चा में हैं.
निशांत को मुख्यमंत्री बना दें नीतीश: राबड़ी देवी

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20 मार्च की शाम जो हुआ उसके बाद नीतीश कुमार पर विपक्ष हमलावर है.
पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने विधान परिषद के बाहर पत्रकारों से बातचीत में कहा, "अगर दिमाग़ी (मानसिक संतुलन) संतुलन ठीक नहीं है इस्तीफ़ा देकर अपने बेटे को मुख्यमंत्री बनाएं या किसी और को मुख्यमंत्री बना दें."
वहीं नेता प्रतिपक्ष और बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने कहा, "मुख्यमंत्री की हम व्यक्तिगत रूप से इज़्ज़त करते हैं, लेकिन राष्ट्रगान के मुद्दे पर चुप नहीं रह सकते. भारत के इतिहास में ये पहली घटना है, सीएम वाकई अचेत अवस्था में आ गए हैं, उन्हें माफ़ी मांगनी चाहिए."
एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख़्तरुल ईमान ने नीतीश कुमार का मेडिकल बुलिटेन जारी करने की मांग की है.
उन्होंने कहा, "ये पहला मौक़ा नहीं है. उनका ऐसा व्यवहार बार-बार देखने को मिल रहा है. हमें उनसे सहानुभूति है लेकिन राज्य हित में मेडिकल रिपोर्ट जारी होनी चाहिए,"
हालाँकि जेडीयू और बीजेपी नीतीश कुमार के बचाव में उतर आए हैं.
मंत्री अशोक चौधरी ने इसे छोटी-मोटी बात करार देते हुए कहा, "नीतीश से बड़ा कोई राष्ट्र भक्त नहीं हो सकता."
जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार ने तेजस्वी पर हमलावर होते हुए कहा, "नीतीश कुमार किसी सज़ायाफ्ता के नहीं बल्कि स्वतंत्रता सेनानी के बेटे हैं. राष्ट्र गान का सम्मान उनसे ज़्यादा कौन कर सकता है?"
मेडिकल बुलेटिन जारी करने की मांग

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बीजेपी नेता प्रेम कुमार ने कहा, "विपक्ष बेवजह झूठे मुद्दों को तूल दे रहा है. नीतीश कुमार जी स्वस्थ हैं और उन्हें किसी मेडिकल बुलिटेन की ज़रूरत नहीं है."
लेकिन हाल के कुछ महीनों में नीतीश कुमार को जेडीयू और बीजेपी नेता बहुत 'गार्डेड' रखते हैं. उनके साथ ज़्यादातर समय जेडीयू नेता विजय कुमार चौधरी दिखते हैं.
प्रगति यात्रा के दौरान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी उनके साथ कई मौक़ों पर दिखे. नीतीश कुमार जैसे ही बोलना शुरू करते, सम्राट चौधरी कहते, "चलिए ना सर, हो गया."
मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल से जुड़े और टिस के पूर्व प्राध्यापक रहे पुष्पेंद्र कहते हैं, "हम लोग जब नौकरी के लिए जाते हैं, पीएचडी आदि के लिए अप्लाई करते हैं तो हमें अपनी मेंटल फ़िटनेस का सर्टिफिकेट देना होता है. यहाँ एक मुख्यमंत्री हैं, जो एक स्टेट चला रहे हैं, उनकी मेडिकल फिटनेस शक के दायरे में है. हर बिहारी को अपने मुख्यमंत्री की मानसिक दशा के बारे में जानने का अधिकार है. इस पर मेडिकल बुलिटेन जारी होना चाहिए."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















