सूडान संघर्ष: आख़िर लोग धड़ल्ले से एके-47 राइफ़ल क्यों ख़रीद रहे हैं

सूडान संघर्ष

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    • Author, ज़ैनब मोहम्मद सालेह
    • पदनाम, खार्तूम से बीबीसी के लिए

सूडान की राजधानी खार्तूम के ब्लैक मार्केट में दुनिया की सबसे चर्चित असॉल्ट राइफल एके-47 के दाम पिछले कुछ महीनों में पचास फीसद तक कम हो गए हैं. अब इसकी कीमत सिर्फ़ 68 हज़ार रुपये रह गयी है.

हथियारों की ख़रीद-फरोख़्त में लगे एक शख़्स के मुताबिक़, इसकी वजह ब्लैक मार्केट में रूसी राइफल क्लाश्निकोव (एके-47) का बहुतायत से उपलब्ध होना है.

सूडान में इस साल अप्रैल में गृह युद्ध शुरू हुआ था जिसके बाद से इन रूसी राइफलों की संख्या में तेज़ बढ़ोतरी हुई है.

सूडानी राजधानी खार्तूम समेत देश के दूसरे बड़े शहरों जैसे बहरी और ओमडुरमैन की सड़कों पर रोज़ाना के स्तर पर संघर्ष जारी है.

नाम न बताने की शर्त पर एक आर्म्स डीलर ने बताया है कि उसे हथियार मुहैया कराने वाले कुछ लोग सेना के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं. वहीं, ज़्यादातर आपूर्तिदाता आरएसएफ़ से जुड़े हैं.

गृह युद्ध शुरू होने के तीन महीने बाद जुलाई में हुई बहरी शहर में हुए संघर्ष, जिसे कुछ लोग बहरी की जंग कहते हैं, की वजह से मांग ने आपूर्ति को पीछे छोड़ दिया.

इस संघर्ष के बाद बहरी शहर की सड़कों पर सैनिकों की लाशें बिखरी हुई हैं. इस जंग में सूडानी सेना को भारी नुकसान झेलना पड़ा है और अर्धसैनिक बलों ने बहरी शहर के ज़्यादातर हिस्से के साथ-साथ खार्तूम और ओमडुरमैन पर भी नियंत्रण बनाया हुआ है.

इस आर्म्स डीलर ने बताया, "कई सैनिक पकड़े गए हैं और कई मारे गए है इसलिए हमारे सप्‍लायर के पास बहुत सारे हथियार हैं."

इसका मतलब ये है कि उन्हें अब लीबिया से सहारा रेगिस्तान के ज़रिए तस्करी करके मंगाई जाने वाली 'द क्लाश' पर निर्भर नहीं रहना होगा. ये डीलर इस क्षेत्र को ओपन आर्म्स मार्केट की संज्ञा देते हैं.

यह इस बात का संकेत है कि 2011 में लंबे समय तक शासन करने वाले शासक मुअम्मर गद्दाफ़ी के तख़्तापलट और हत्या के बाद से उत्तरी अफ़्रीकी देशों में किस हद तक अराजकता और अस्थिरता बढ़ गई है.

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नागरिक ख़रीद रहे हैं हथियार

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अतीत में तस्करी के हथियार मुख्य रूप से सूडान या चाड जैसे पड़ोसी देशों में लंबे समय से चल रहे संघर्षों में शामिल विद्रोहियों और मिलिशिया के सदस्यों को बेचे जाते थे.

लेकिन अब लड़ाके खार्तूम के युद्ध क्षेत्रों से मारे गए या पकड़े गए दुश्मनों के हथियार उठाते हैं और उन्हें बिचौलियों के माध्यम से डीलरों को बेचते हैं जिन्हें बदले में राजधानी के कुछ निवासियों के रूप में खरीदारों का एक नया समूह मिल गया है. ये लोग जंग, अराजकता के बारे में चिंतित हैं और अलग-अलग तरह के ख़तरे उनके दरवाज़े पर दस्तक दे रहे हैं.

डीलरों से बातचीत के बाद खार्तूम के लोग ऑर्डर देने के लिए उन्हें फ़ोन करते हैं. डीलर उनके घरों में एके-47 राइफ़ल पहुंचाते हैं और उन्हें एक ऐसे हथियार के इस्तेमाल का तरीका बताते हैं जिस हथियार की उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी.

इसके बाद गोला बारूद की बिक्री अलग से ओमडुरमैन के मुख्य बाज़ार में होती है.

छह बच्चों के 55 वर्षीय पिता ने कहा कि उन्होंने बढ़ते अपराध और खार्तूम में संभावित हमलों से बचने के लिए एके-47 राइफल खरीदी है.

उन्होंने कहा, ''वे किसी भी कारण से आप पर हमला कर सकते हैं. यह एक जातीय युद्ध में बदल सकता है. आप कभी नहीं जानते. यही हमारा सबसे बड़ा डर है.''

वीडियो कैप्शन, सूडान में बलात्कार और यौन हिंसा बने हथियार

हथियार महंगे क्यों हुए?

अप्रैल में सेना प्रमुख जनरल अब्देल फतह अल-बुरहान और आरएसएफ़ कमांडर मोहम्मद हमदान दगालो यानी हेमेदती के बीच मतभेद के बाद सूडान गृह युद्ध की चपेट में आ गया था.

दोनों ने अक्टूबर 2021 में तख़्तापलट किया लेकिन फिर एक सत्ता संघर्ष में शामिल हो गए. इस बीच उनके लोगों ने एक युद्ध में एक-दूसरे के ख़िलाफ़ हथियार उठा लिए, जिसके ख़त्म होने के आसार नज़र नहीं आ रहे हैं.

हथियार विक्रेता ने कहा कि एके-47 राइफ़लों से कहीं अधिक मांग पिस्तौल की है जिन्हें इस्तेमाल करना और ले जाना आसान है.

स्थानीय निवासी हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं क्योंकि पुलिस बल, जेल प्रशासन और न्यायपालिका समेत सरकार के पतन के कारण अपराध नियंत्रण से बाहर हो गया है.

जंग की शुरुआत में खार्तूम की सबसे बड़ी जेल में बड़े पैमाने पर भगदड़ मची और अपराधी अब सड़कों पर हैं.

अपराध भी बढ़ गया है क्योंकि एक तरफ़ संघर्ष के कारण कई व्यवसाय बंद हो गए हैं जिसका बेरोज़गारी पर गहरा प्रभाव पड़ा है. और दूसरी तरफ़ बुनियादी खाद्य पदार्थों की कमी के कारण जीवनयापन का ख़र्च बढ़ गया है.

लोग आर्थिक रूप से संघर्ष कर रहे हैं लेकिन बड़ी संख्या में हथियार ख़रीद रहे हैं क्योंकि सुरक्षा सबसे अहम है. ख़ासकर जब घरों को लूटा जा रहा है और महिलाओं के साथ बलात्कार किया जा रहा हो.

डीलर ने कहा कि उसने पिस्तौल की कीमत एक लाख दस हज़ार रुपए से चार गुना घटाकर लगभग 27 हज़ार रुपये कर दी है.

डीलर ने बताया, "जो चीज़ पिस्तौल को महंगी बनाती थी, वह लाइसेंस था. अब आपको इसे लेने की ज़रूरत नहीं है. आप बस इसे खरीदें और इसका इस्तेमाल करें."

उसने यह भी बताया कि उसने अच्छा लाभ कमाया क्योंकि बिक्री पहले से कहीं अधिक थी.

एके-47 राइफल के मालिक हथियार घर पर रखते हैं जबकि पिस्तौल-मालिक जब बाहर जाते हैं तो इसे अपने साथ ले जाते हैं.

अपराधियों द्वारा उत्पन्न ख़तरे को एक 24 वर्षीय व्यक्ति की दुर्दशा से बताया जा सकता है, जिनकी कुछ साल पहले ही शादी हुई थी और एक साल का बच्चा है.

जैसे ही वह ओमडुरमैन के एक बाज़ार में गए, उनका सामना एक गिरोह से हुआ जिसने उनसे नकदी लूट ली और उसकी रीढ़ में गोली मार दी.

शहर में एकमात्र अस्पताल में उचित इलाज नहीं मिला तो उन्हें लगभग 200 कि.मी. दूर एक अस्पताल में ख़तरनाक सड़क यात्रा के ज़रिए ले जाया गया.

गोली तो निकाल दी गई लेकिन गोलीबारी ने उन्हें असहाय बना दिया.

ये एक जंग की दर्दनाक याद है जिसने लाखों लोगों की ज़िंदगी बर्बाद कर दी.

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