बांग्लादेश: तस्वीरों में देखिए छात्रों का उग्र प्रदर्शन, देशभर में व्यापक असंतोष

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बांग्लादेश में राजनीतिक उथल पुथल के बीच सोमवार को एक नाटकीय घटनाक्रम में शेख़ हसीना ने इस्तीफ़ा देकर देश छोड़ दिया.
सोमवार, पांच अगस्त को जब ये ख़बर आई तो प्रदर्शनकारी सड़कों पर जश्न मनाने लगे. कुछ प्रदर्शनकारी सैनिकों से हाथ मिलाते हुए.


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यह ढाका में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री का आवास है, जहां हज़ारों प्रदर्शनकारी मौजूद हैं. सैकड़ों प्रदर्शनकारी आवास के ऊपर चढ़ गए, जबकि आवास में लूटपाट भी हुई है.

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सोमवार की शाम को ढाका में शेख़ मुजीब की याद में बनाए गए म्यूजियम में प्रदर्शकारियों ने आग लगा दी.

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म्यूजियम से कुछ प्रदर्शनकारी सामान ले जाते हुए भी दिख रहे हैं. ढाका में बीबीसी बांग्ला संवाददाता के मुताबिक़, प्रदर्शनकारियों ने गृह मंत्री के आवास में भो तोड़ फोड़ की है.

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प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री के सरकारी आवास गण भवन में घुस गए. वीडियो फ़ुटेज में दिख रहा है कि सोमवार की शाम तीन बजे के आस पास लोग बैरिकेड और सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए परिसर में घुस गए और सोफ़ा और कुर्सी और अन्य सामान उठा कर ले जा रहे हैं.

गण भवन के अंदर घुसे कई प्रदर्शनकारियों को तोड़ फोड़ करते हुए देखा गया. कई लोगों ने गण भवन के तालाब से मछली ले जाते दिखे.
इस बीच चीफ़ आर्मी स्टाफ़ जनरल वक़ार उज़- ज़मान विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बैठक कर रहे थे और उसके कुछ देर बाद ही उन्होंने देश में अंतरिम सरकार के गठन का एलान किया.

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सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने शेख़ मुजीबुर्रहमान की मूर्ति को भी नुक़सान पहुँचाया है. ढाका के गणभवन में कुछ प्रदर्शकारी शेख़ मुजीबुर्रहमान की मूर्ति पर भी चढ़ गए और मूर्ति को तोड़ने की कोशिश की. मुजीब रहमान, शेख़ हसीना के पिता थे. उन्हें बांग्लादेश की आज़ादी का जनक माना जाता है.

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सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने ढाका में अवामी लीग के ऑफ़िस को भी आग के हवाले कर दिया.

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ढाका के धानमंडी के इलाक़े में बड़े पैमाने पर आगजनी हुई है. यही पर बंगबंधु मेमोरियल म्यूजियम स्थित है. तस्वीर में कई जगहों पर आगजनी और धुआं उठते देखा जा सकता है.

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इससे पहले, बीते शनिवार यानी तीन अगस्त को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में सेंट्रल शहीद मीनार पर आयोजित प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए प्रदर्शनकारी इकट्ठा हुए थे. भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन के आयोजनकर्ता मौजूदा सरकार के इस्तीफ़े की मांग पर अड़े हुए थे. उन्होंने चार अगस्त 2024 से असहयोग आंदोलन शुरू करने की घोषणा की थी. पिछले महीने शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के हिंसक होने के बाद 20 जुलाई को बांग्लादेश सरकार ने देशव्यापी कर्फ़्यू लगा दिया था.

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तीन अगस्त को ढाका में सेंट्रल शहीद मीनार इलाक़े में इकट्ठा हुए लोगों के हाथों में तख़्तियां थीं, जिनमें हसीना से इस्तीफ़ा दिए जाने की मांग वाले नारे लिखे हुए थे. पिछले महीने शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन काफ़ी उग्र होने की वजह से 300 लोगों की मौत हो गई थी.

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चार अगस्त, रविवार को ढाका में प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी एक पुलिस बॉक्स में तोड़ फोड़ करता हुआ. रविवार को हुई हिंसा में कम से 90 लोग मारे गए थे. इनमें एक इलाक़े में ही मारे गए 13 पुलसकर्मी भी शामिल हैं. पिछले शनिवार से ही कर्फ़्यू और इंटरनेट पाबंदियों में ढील देने की शुरुआत की जा रही थी, लेकिन पहले छह अगस्त और फिर बाद में पांच अगस्त

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चार अगस्त को बोकुरा में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागे.

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प्रदर्शन के दौरान मारे गए लोगों के लिए इंसाफ़ की मांग करते हुए, शुक्रवार यानी दो अगस्त को छात्र कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया. पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर, जुमे की नमाज़ के बाद ही पूरे देश में प्रदर्शन शुरू हो गए थे.

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तीन अगस्त को ढाका में सेंट्रल शहीद मीनार में इकट्ठा हुए प्रदर्शनकारी गिरफ़्तार नेताओं की रिहाई की मांग कर रहे थे.
1971 में बांग्लादेश की आज़ादी के लिए लड़ने वालों स्वतंत्रता सेनानियों के रिश्तेदारों के लिए कई सिविल सेवा नौकरियों में दिए गए आरक्षण को लेकर पिछले महीने छात्र सड़कों पर उतर आए थे.
अब एक फैसले के बाद सरकार ने अधिकांश कोटा वापस ले लिया है, लेकिन छात्रों ने अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा.
छात्र प्रदर्शन के दौरान मारे गए लोगों और घायलों के लिए इंसाफ़ की मांग कर रहे थे और चाहते थे कि पीएम हसीना अपने पद से इस्तीफ़ा दे दें.
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