शेख़ हसीना के बांग्लादेश छोड़ने के बाद भारत के भारी-भरकम निवेश का क्या होगा?

ढाका में एक प्रोजेक्ट पर काम करती हुईं बांग्लादेशी महिलाएं

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    • Author, कीर्ति दुबे
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पाँच अगस्त को जब शेख़ हसीना बांग्लादेश से दिल्ली पहुंचीं, तो यह समझना मुश्किल नहीं था कि उन्होंने भारत को क्यों चुना.

15 सालों से बांग्लादेश की सत्ता में रहते हुए शेख़ हसीना ने भारत के साथ अपने रिश्तों को काफ़ी मज़बूत बनाया था.

या यूं कहें कि बांग्लादेश की कई क्षेत्रों में भारत पर निर्भरता बढ़ती गई है.

खाद्य सामग्री से लेकर बिजली तक बांग्लादेश भारत से लेता है.

भारत ने इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यापार के क्षेत्र में बांग्लादेश में बड़ा निवेश किया है.

दोनों देशों के बीच ट्रेन लाइन हैं और लोग सीमा पार करके बड़ी आसानी से एक से दूसरे देश आते-जाते हैं.

इस साल शेख़ हसीना भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल की पहली विदेशी मेहमान थीं.

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बीते एक साल में दोनों नेताओं के बीच 10 बार मुलाक़ात हुई है.

साल 2009 से जब से शेख़ हसीना बांग्लादेश की सत्ता में आईं, तब से ही भारत ने वहाँ बड़े प्रोजेक्ट में निवेश किए हैं.

ऐसे में इस तरह से शेख़ हसीना का देश की सत्ता से बाहर होना, लोगों का उनके प्रति ग़ुस्सा और जिस तरह से देश की सत्ता में परिवर्तन हो रहा है, उससे भारत की कई सारी चीज़ें दांव पर लगी हैं.

ख़ासकर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय समझौते, जिनमें भविष्य में होने वाला मुक्त व्यापार समझौता भी शामिल है.

बांग्लादेश

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बांग्लादेश में भारत का निवेश

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बांग्लादेश भारत का व्यापार के लिहाज से इस उपमहाद्वीप में सबसे बड़ा साझेदार है और भारत भी बांग्लादेश के लिए चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है.

भारत सरकार का डेटा बताता है कि साल 2023-24 में दोनों देशों के बीच 13 अरब डॉलर का व्यापार हुआ.

बीते साल नवंबर महीने में दोनों देशों के प्रधानमंत्री ने भारत समर्थित तीन विकास परियोजनाओं का उद्धाटन किया था. अखौरा-अगरतला रेल लिंक, खुलना-मोंगला पोर्ट रेल लाइन और मैत्री थर्मल प्लांट.

अखौरा-अगरतला पहली ट्रेन सेवा है, जो पूर्वोत्तर भारत को बांग्लादेश से जोड़ती है.

भारतीय रेल ने लाइन ऑफ़ क्रेडिट प्रोग्राम के तहत बांग्लादेश के रेल इंफ्रास्ट्रक्चर में लगभग एक हज़ार करोड़ का निवेश किया है.

बांग्लादेश में अडानी समूह का भी बड़ा निवेश है. अडानी पावर ने साल 2017 में बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट के साथ 25 साल का समझौता किया था.

जिसमें अडानी पावर की ओर से अपने झारखंड स्थित गोड्डा प्लांट से 1496 मेगावाट बिजली देने का वादा है.

गोड्डा पावर प्रोजेक्ट देश का पहला ट्रांजेक्शनल पावर प्लांट है. इसकी 100 फ़ीसदी एनर्जी बांग्लादेश भेजी जाती है. साल 2023 से ये प्लांट बांग्लादेश में बिजली भेज रहा है.

अडानी के साथ-साथ बांग्लादेश में डाबर, मारिको, हीरो मोटोकॉर्प, टीवीएस मोटर का भी निवेश है.

बांग्लादेश में 2007-2010 तक भारत के उच्चायुक्त रहे पिनाक चक्रवर्ती कहते हैं, “मैंने बांग्लादेश का 2007 का एक बेहद मुश्किल दौर में देखा है, ये भी ऐसा दौर है जहां प्रशासन व्यवस्था ख़त्म हो गई है. लेकिन बांग्लादेश में सरकार किसी की भी बने वो देश की अर्थवयवस्था को अनदेखा तो नहीं कर सकती.''

वो कहते हैं, ''भारत पर बांग्लादेश की निर्भरता इतनी ज़्यादा है कि वो भारत को नहीं छोड़ सकता तो ऐसे में कुछ वक़्त के लिए जो प्रोजेक्ट हैं वो रुकेंगे लेकिन भारत का निवेश दांव पर लगा है ये कहना या समझना ठीक नहीं है.”

शेख़ हसीना

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इमेज कैप्शन, भारत बांग्लादेश के लिए चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है.

भारत पर बांग्लादेश की निर्भरता

भारत और बांग्लादेश के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अक्तूबर 2023 में शुरू हुई ताकि दोने देशों से आयात-निर्यात होने वाली चीज़ों पर कस्टम ड्यूटी हटा दी जाए.

विश्व बैंक के एक अनुमान के अनुसार, इससे भारत को बांग्लादेश के निर्यात में 297 फ़ीसदी तक और भारत के निर्यात में 172 फ़ीसदी तक की वृद्धि होने की संभावना है.

हालाँकि बांग्लादेश के मौजूदा राजनीतिक दृश्य को देखते हुए इसके भविष्य पर अनिश्चितता बनी हुई है.

हीरो मोटोकॉर्प और टीवीएस के बांग्लादेश में एसेंबल करने वाले प्लांट हैं.

भारत की महत्वपूर्ण टेलीकॉम कंपनी एयरटेल का बांग्लादेश की टेलीकॉम कंपनी रॉबी एक्सीआटा में 28 फ़ीसदी का निवेश है.

दिल्ली स्थित अर्थशास्त्री प्रबीर डे कहते हैं, “इस समय हर देश को इंडस्ट्री चाहिए और इससे निवेश करने वाले और उस देश दोनों को फायदा होता है, भारत के साथ-साथ चीन का भी बांग्लादेश में निवेश है. लेकिन भारत पर बांग्लादेश की निर्भरता काफ़ी ज़्यादा है. रोज़मर्रा की ज़रूरतों का सामान भी वहां भारत से जा रहा है. ऐसे में भारत से व्यापार और निवेश हालात के पटरी पर लौटने से ठीक हो जाएंगे.''

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प्रवासियों के बढ़ने का ख़तरा

बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता के बीच सबसे बड़ा संकट वहां रहने वाले अल्पसंख्यकों पर मंडरा रहा है. देश की 90 फ़ीसदी आबादी मुसलमान है.

जब से शेख़ हसीना ने देश छोड़ा है तब से ही सोशल मीडिया पर कई रिपोर्ट्स सामने आई हैं कि अल्पसंख्यक हिंदुओं की संपत्ति और मंदिरों पर हमले हो रहे हैं.

वहां के हालात पर भारत विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बयान जारी किया और कहा कि सबसे ज़्यादा चिंता की बात यह है कि अल्पसंख्यकों, उनके व्यवसायों और मंदिरों पर भी कई जगहों पर हमले हुए हैं. ये हमले किस स्तर पर हो रहे हैं और इनका पूरा दायरा अभी भी स्पष्ट नहीं है.

भारत बांग्लादेश के साथ 4 हज़ार किलोमीटर से ज़्यादा की सीमा शेयर करता है.

प्रबीर डे कहते हैं कि एक बड़ी चुनौती भारत के सामने ये है कि बांग्लादेश से आने वाले शरणार्थियों की संख्या बढ़ सकती है.

वे कहते हैं कि बांग्लादेश के साथ व्यापार को लेकर भारत को ख़तरा नहीं है क्योंकि वो हालात बदलते ही बदल जाएगा लेकिन शरणार्थियों का दबाव भारत के लिए चिंता का विषय होगा.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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