आरजी कर रेप-मर्डर मामले में संदीप घोष की गिरफ़्तारी, उधर ममता बनर्जी और डॉक्टरों के बीच नहीं बनी बात

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कोलकाता के सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक डॉक्टर के साथ रेप के बाद उसकी हत्या के मामले में सीबीआई ने पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष और टाला थाने के ऑफिसर इंचार्ज अभिजीत मंडल को गिरफ़्तार कर लिया है.
हालांकि, संदीप घोष पहले से ही मेडिकल कॉलेज में वित्तीय अनियमितताओं के मामले में जेल में हैं.
बीबीसी के सहयोगी पत्रकार प्रभाकर मणि तिवारी ने बताया है कि सीबीआई ने उन्हें सुबूतों के साथ छेड़छाड़, उनको ग़ायब करने और देरी से एफ़आईआर दर्ज करने के आरोप में शनिवार देर रात गिरफ़्तार किया है.
टाला पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में ही आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल आता है.
अब इन दोनों ही अभियुक्तों को रविवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा. सीबीआई के एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी है.

आर्थिक घोटाले के एक मामले में संदीप घोष पहले से ही सीबीआई की हिरासत में हैं. फ़िलहाल उनको 23 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में प्रेसीडेंसी जेल में रखा गया है. अब सीबीआई नए मामले में उनको रिमांड पर लेने की कोशिश कर सकती है.
इस कार्रवाई के बाद पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने अपने एक एक्स पोस्ट में कोलकाता पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का इस्तीफ़ा मांगा है.
उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा है, ''अभिजीत मंडल जो टाला पुलिस स्टेशन के प्रभारी हैं, उनकी गिरफ़्तारी ने ये साबित कर दिया है कि पुलिस सबूतों से छेड़छाड़ के मामले में सीधे तौर पर शामिल थी.''
उन्होंने आगे लिखा है, ''प्रक्रिया में इस तरह की चूक पूरी तरह से सोच समझकर की गई थी और ये सब कोलकाता पुलिस के टॉप ऑफिशियल की निगरानी में किया गया है.''

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बातचीत बेनतीजा रही
वहीं आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में ट्रेनी डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या के मामले में एक महीने से ज़्यादा समय से डॉक्टरों का प्रदर्शन जारी है.
शनिवार को ममता बनर्जी ने कोलकाता में विरोध प्रदर्शन कर रहे जूनियर डॉक्टरों से प्रदर्शनस्थल पर जाकर मुलाक़ात की थी, जिसके बाद डॉक्टर उनके साथ बातचीत के लिए राज़ी हो गए थे.
इसके लिए शाम के वक़्त डॉक्टर मुख्यमंत्री आवास पर भी पहुंचे लेकिन ये कोशिश बेनतीजा रही.
डॉक्टरों की मांग है कि बातचीत की लाइव स्ट्रीमिंग की जाए. हालांकि, राज्य सरकार का कहना है कि चूंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में है, इसलिए इसकी इजाज़त नहीं दी जा सकती है.
इससे पहले शनिवार शाम को डॉक्टरों ने ईमेल के ज़रिए मुख्यमंत्री से कहा है कि वो उनकी मौजूदगी में पूरी पारदर्शिता के बीच सभी मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार हैं.
लेकिन सहमति नहीं बनने पर बातचीत के लिए ममता बनर्जी के घर पर पहुंचे राज्य के शीर्ष अधिकारी और हड़ताली जूनियर डॉक्टरों का प्रतिनिधिमंडल लौट गया.
क्या है डॉक्टरों की पांच मांगें?
- आंदोलनकारी डॉक्टरों का कहना है कि घटना के दोषियों की शिनाख्त कर उनको कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाए.
- सुबूत मिटाने की कोशिश करने वालों की पहचान कर उनको सज़ा दी जाए.
- कोलकाता के पुलिस आयुक्त विनीत गोयल इस्तीफ़ा दें. इसके साथ ही स्वास्थ्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा निदेशक और स्वास्थ्य निदेशक के इस्तीफे की भी मांग की गई है.
- राज्य के तमाम मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
- सभी मेडिकल कॉलेजों में भयमुक्त लोकतांत्रिक माहौल तैयार किया जाए.
दिनभर क्या-क्या हुआ?

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शनिवार दोपहर को सीएम ममता बनर्जी ने सॉल्ट लेक में विरोध प्रदर्शन पर बैठे डॉक्टरों से जल्द काम पर लौटने की अपील की. साथ ही उन्होंने ये भी आश्वासन दिया कि प्रदेश सरकार बीते दिनों प्रदर्शनों में शामिल डॉक्टरों पर कोई कार्रवाई नहीं करेगी.
मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनकारी डॉक्टरों से वक्त मांगा और कहा कि वो उनकी सभी मांगों पर विचार करेंगी और इस मुश्किल का समाधान ज़रूर निकालेंगी. वहीं, जूनियर डॉक्टरों ने ममता बनर्जी के साथ हुई बातचीत के बाद कहा है कि जब तक चर्चा नहीं होती, वो अपनी मांगों से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं.
इसके बाद डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री को ईमेल लिखकर बातचीत के लिए अपने प्रतिनिधियों को भेजने को लेकर सहमति दी.
बातचीत के लिए शाम के छह बजे का वक्त और कालीघाट में मुख्यमंत्री का आवास तय किया गया.
लगातार हो रही बारिश के बीच डॉक्टरों के प्रतिनिधि तय समय पर कालीघाट पहुंचे लेकिन शाम के साढ़े आठ बजे तक बातचीत शुरू नहीं हो सकी.

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डॉक्टरों की मांग थी कि बातचीत की लाइव स्ट्रीमिंग की जाए. लेकिन मुख्यमंत्री का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट में मामला होने के कारण इसकी लाइव स्ट्रीमिंग नहीं की जा सकती.
देर शाम ममता बनर्जी ने कहा, "आप लोग बारिश में मत भीगिए, आराम से बैठकर बात करिए. चीफ़ सेक्रेटरी, डीजी पुलिस और मैं, हम सभी आप लोगों का इंतज़ार कर रहे थे."
"हम बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए तैयार हैं लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट में है. हम इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग करेंगे लेकिन सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद रिकॉर्डिंग आपको देंगे."
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पोस्ट X समाप्त
शुक्रवार को ममता बनर्जी ने दावा किया था कि जूनियर डॉक्टरों की कामबंदी के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है और इस कारण 29 क़ीमती जानें चली गई हैं.
गुरुवार को जूनियर डॉक्टरों के साथ बातचीत की कोशिश नाकामयाब होने के बाद शनिवार दोपहर सीएम ममता बनर्जी ने जूनियर डॉक्टरों से प्रदर्शनस्थल पर जाकर मुलाक़ात की थी.
ये डॉक्टर सॉल्ट लेक में मौजूद स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. सीएम ने डॉक्टरों से वादा किया कि दोषियों को बख़्शा नहीं जाएगा.
बीबीसी के सहयोगी पत्रकार प्रभाकर मणि तिवारी ने जानकारी दी है कि ममता बनर्जी के जाने के बाद डॉक्टरों ने आपस में चर्चा की जिसके बाद वेस्ट बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ईमेल लिखा.
डॉक्टरों ने लिखा, "हमें खुशी है कि ख़राब मौसम के बीच सीएम खुद चलकर हमारे पास बात करने के लिए आईं और अपने विचार हमारे साथ साझा किए. हम इसे बातचीत की दिशा में सकारात्मक कदम के तौर पर देखते हैं."
"हम सीएम की मौजूदगी में बातचीत के लिए उचित संख्या में अपने प्रतिनिधियों को भेजने के लिए तैयार हैं और चाहते हैं कि पूरी पारदर्शिता में दोनों पक्षों के बीच चर्चा हो.
इस ईमेल के जवाब में मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा है कि डॉक्टरों के 15 प्रतिनिधि कालीघाट स्थित मुख्यमंत्री के निवास पर उनके साथ बातचीत करने के लिए आ सकते हैं.
बातचीत के लिए शनिवार शाम के छह बजे का वक्त तय किया गया.

ममता बनर्जी ने क्या कहा?
शनिवार दोपहर प्रदर्शनकारी डॉक्टरों से मुलाक़ात करने आई ममता बनर्जी ने डाक्टरों से कहा कि वो मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि उनकी दीदी के तौर पर उनसे मिलने आई हैं.
उन्होंने कहा, "मैं आपके आंदोलन को समझती हूं. मैं खुद छात्र आंदोलन से आने वालों में से हूं. मैंने भी अपनी ज़िंदगी में काफी मुश्किलें झेली हैं और मैं आपकी मुश्किलें समझती हूं. मेरा ओहदा कोई बड़ी बात नहीं है, इंसान का ओहदा बड़ी बात है."
इस दौरान आला पुलिस अधिकारी और सरकारी अधिकारी भी ममता बनर्जी के साथ मंच पर मौजूद रहे.
ममता बनर्जी ने कहा, "कल पूरी रात बारिश हो रही थी. आप यहां बैठे विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और मुश्किल में थे, मुझे भी पूरी रात नींद नहीं आई, मुझे आपकी चिंता सताती रही. आज 33-34 दिन हो चुके हैं. मैं आपसे कहने आई हूं कि आप और मुश्किलें न झेलें. अगर आप काम पर लौटना चाहते हैं तो मैं आपसे वादा करती हूं कि मैं आपकी मांगों को सहानूभुति के साथ स्टडी करूंगी."
"मैं अकेली सरकार नहीं चलाती, लेकिन आपकी मांगें देखने के बाद अधिकारियों और वरिष्ठ डॉक्टरों से चर्चा करने के बाद मैं ज़रूर इसका समाधान निकाल सकूंगी. मुझे थोड़ा वक्त दीजिए. मैं सीबीआई से अनुरोध करूंगी कि वो इस मामले की जल्द से जल्द जांच करें ताकि 3 महीने के भीतर दोषी को फांसी दी जा सके."


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ममता बनर्जी ने कहा, "आपके ख़िलाफ़ (प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के ख़िलाफ़) प्रदेश सरकार कोई कार्रवाई नहीं करेगी. मैं आपसे गुज़ारिश करती हूं कि आप काम पर लौट आएं. अस्पताल की सुरक्षा, उसके ढांचागत विकास के सभी काम पहले ही शुरू हो चुके हैं और ये काम जारी रहेंगे."
उन्होंने कहा कि राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों के साथ-साथ सभी अस्पतालों की रोगी कल्याण समितियों को भंग कर दिया गया है.
उन्होंने कहा, "अब जो नई रोगी कल्याण समिति बनेगी उसमें प्रिंसिपल चेयरमैन रहेंगे, जूनियर और सीनियर डॉक्टर प्रतिनिधि के रूप में रहेंगे, एक नर्स भी इसकी सदस्य होंगी, इसके अलावा एक पुलिस अधिकारी भी सदस्य के तौर पर इसके सदस्य रहेंगे."
"मैं आपसे कह सकती हूं कि दोषियों के प्रति किसी तरह की सहानुभूति नहीं बरती जाएगी. आप आपस में बात करिए और क्या करना है ये तय करिए और मेरी गुज़ारिश है कि काम पर लौटिए."
डॉक्टरों ने क्या दी प्रतिक्रिया?
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार ममता बनर्जी के जूनियर डॉक्टरों से बात करने के बाद जूनियर डॉक्टरों ने कहा है कि जब तक चर्चा नहीं होती वो अपनी मांगों से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं.
ममता के प्रदर्शनस्थल से लौटने के बाद जूनियर डॉक्टरों ने पत्रकारों से कहा कि वो अपनी पांच मांगों पर कहीं भी और कभी भी बातचीत के लिए तैयार हैं.
एक जूनियर डॉक्टर अनिकेत महतो ने बीबीसी के सहयोगी पत्रकार प्रभाकर मणि तिवारी को बताया, "हम बातचीत के लिए तैयार हैं. हमारी पांच मांगों पर ही बातचीत होनी चाहिए. बातचीत के लिए मुख्यमंत्री जहां भी बुलाएंगी, हम वहां जाने के लिए तैयार हैं."
उन्होंने कहा, "हमें आपस में विचार-विमर्श के लिए कुछ समय चाहिए. उसके बाद मुख्यमंत्री जहां बुलाएंगी, हम जाने के लिए तैयार हैं. बातचीत में नाराज़गी या ज़िद का कोई मुद्दा नहीं है."

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इसी सप्ताह गुरुवार, 12 सितंबर को नबान्न हॉल में मुख्यमंत्री के साथ प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टरों की बातचीत होनी थी, लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि मांग रखी कि बैठक का लाइव टेलिकास्ट करना होगा.
इस मुद्दे पर सहमति न बनने के कारण ये बैठक नहीं हो सकी थी. ममता बनर्जी का कहना था, "मामला कोर्ट में है, हम इस तरह मामले से जुड़ी बातें लाइव नहीं कर सकते. लेकिन बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था की गई है."
सीएम ममता बनर्जी दो घंटे तक डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल का इंतज़ार करती रहीं. जिसके बाद ममता बनर्जी ने कहा, "उन्हें चर्चा नहीं चाहिए, उन्हें कुर्सी चाहिए. मुझे मुख्यमंत्री का पद नहीं चाहिए, मुझे चाहिए कि आम आदमी को इलाज मिले."
क्या है पूरा मामला?

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नौ अगस्त को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रही 31 साल की महिला जूनियर डॉक्टर के साथ रेप और मर्डर की वारदात हुई.
परिवार का आरोप है कि इस घटना की एफ़आईआर रजिस्टर करने में देरी हुई. शुरुआत में पुलिस ने इसे केवल हत्या का मामला माना था लेकिन परिजनों के ज़ोर देने पर इसमें बलात्कार की धाराएं भी जोड़ी गईं. पुलिस के मुताबिक़, ये घटना रात तीन से सुबह छह बजे के बीच हुई थी.
इस घटना के बाद ही जूनियर डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ. उनकी मांग थी कि मृत डॉक्टर को न्याय मिले, मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से कराई जाए और अस्पताल को डॉक्टरों के लिए सुरक्षित जगह बनाया जाए.
मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल के आचरण और एफ़आईआर दर्ज करने में देरी को लेकर भी छात्र नाराज़ थे.
पुलिस ने इस घटना की जांच के लिए एक एसआईटी का गठन किया और जांच शुरू होने के छह घंटे के भीतर ही अभियुक्त को गिरफ़्तार कर लिया गया था.
लेकिन अभियुक्त की गिरफ़्तारी के बाद भी डॉक्टरों का ग़ुस्सा थमा नहीं.
प्रदेश में विपक्ष में बैठी बीजेपी, महिला संगठन और अन्य नागरिक संगठन भी विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुए और ये विरोध बढ़ता चला गया. इस मामले ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया था.
सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए इस पर 9 सितंबर 2024 को सुनाई की और सख़्त टिप्पणी की. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार और पुलिस से भी सवाल किए.
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि पीड़िता का नाम, शव को दिखाने वाली तस्वीरें और वीडियो क्लिप पूरे मीडिया में फैल गई हैं. उन्होंने इसे "बेहद चिंताजनक" बताया.
सुप्रीम कोर्ट ने भी जूनियर डॉक्टरों से 10 सितंबर 2024 की शाम के पांच बजे तक काम पर लौटने को कहा था. लेकिन आंदोलनकारी डॉक्टरों ने साफ कर दिया की मांगें पूरी नहीं होने और इस मामले में न्याय नहीं मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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