उत्तर प्रदेश: कथित तौर पर सैनेटरी पैड मांगने पर छात्रा को क्लासरूम से निकाला, क्या है पूरा मामला

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- Author, कीर्ति रावत
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
उत्तर प्रदेश के बरेली में 11वीं की एक छात्रा ने आरोप लगाया कि स्कूल में, टीचर से सैनेटरी पैड मांगने पर उन्हें एक घंटे तक क्लासरूम के बाहर खड़ा कर दिया गया.
घटना 24 जनवरी की है. जब यह घटना हुई तब छात्रा परीक्षा दे रही थी. घटना के बाद छात्रा के पिता ने इसकी शिकायत स्कूल प्रशासन और ज़िला प्रशासन से की.
शिकायत सार्वजनिक होने के बाद स्कूल प्रशासन सवालों के घेरे में है और आलोचनाओं का सामना कर रहा है. बीबीसी ने स्कूल प्रशासन से मामले पर बातचीत की. स्कूल ने इस बात से इनकार किया है कि सैनेटरी पैड मांगने के कारण ऐसी कोई घटना हुई है. हालांकि ज़िला प्रशासन ने बच्ची के पिता की ओर से शिकायत मिलने की पुष्टि की है और कहा है कि मामले की जांच जारी है.

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छात्रा के पिता ने क्या कहा?
25 जनवरी को छात्रा के पिता ने ज़िला विद्यालय निरीक्षक और ज़िला अधिकारी को इस मामले में संज्ञान लेने के लिए शिकायत पत्र लिखा.
शिकायत पत्र के मुताबिक, "मेरी बेटी 24 जनवरी को परीक्षा देने के लिए स्कूल गई थी. इस दौरान उन्हें पीरियड्स शुरू हो गए थे. जिसके बाद मेरी बेटी ने स्कूल की प्रधानाचार्या से सैनेटरी पैड मांगा. फिर प्रधानाचार्या ने बेटी को क्लासरूम के बाहर खड़े रहने को कहा और अंदर आने से मना कर दिया."
घटना के बारे में ज़्यादा जानकारी के लिए बीबीसी ने छात्रा के पिता से फ़ोन पर बातचीत की है.
उन्होंने कहा, "मेरी बेटी जब घर आई, तब मैं ऑफिस में था. मेरी पत्नी ने फोन करके मुझे इस घटना के बारे में बताया. उसने बताया कि बेटी के कपड़े खराब हो गए हैं और प्रिंसिपल ने सैनेटरी पैड देने से मना कर दिया. फिर मैंने प्रिंसिपल से फोन पर बात की."
"मैंने उनसे पूछा कि क्या स्कूल में पैड देने की सुविधा नहीं है. इस पर उन्होंने कहा कि उन्हें घटना की कोई जानकारी नहीं है वह अपने स्टाफ़ से बात करके बताएंगी."
पिता बताते हैं, "जिस हालत में मेरी बेटी घर आई थी, उसे देखकर कोई भी माता-पिता परेशान हो जाएंगे. महिला होने के नाते टीचरों को सोचना चाहिए कि परीक्षा देते समय ऐसी दिक्कत आ गई तो उस समय उन्हें सैनेटरी पैड देना चाहिए था. प्रिंसिपल मैम से मेरी बात-चीत हुई थी. उन्होंने कहा कि उसको (बेटी) अपना इंतज़ाम करना चाहिए था. जब उस स्कूल में इसकी सुविधा है तो क्यों नहीं दिया गया?"
छात्रा के पिता ने बताया कि उन्हें स्कूल की प्रधानाचार्या और जांच अधिकारियों ने बेटी के स्कूल में बुलाया है.
घटना के बारे में छात्रा ने क्या बताया ?
छात्रा ने बताया कि उस दिन उसका ड्राइंग का पेपर था और पेपर शुरू होने के 15 मिनट बाद उसके पीरियड्स शुरू हो गए थे.
बीबीसी से बातचीत में वो कहती हैं, "पीरियड्स होने पर मैंने क्लास में मौजूद मैम से बात की. उन्होंने मुझसे प्रिंसिपल मैम से बात करने के लिए कहा. मैं परीक्षा को बीच में छोड़कर प्रिंसिपल मैम के पास गई. वह फोन पर बात कर रही थीं तो मैंने सोचा कि मैं पहले परीक्षा दे देती हूं. परीक्षा के ख़त्म होने तक मेरे कपड़ों पर दाग लग चुका था. फिर मेरे दोस्तों ने कहा कि वो सैनेटरी पैड लेकर आएंगे. उसके बाद मेरे दोस्त वाइस प्रिंसिपल मैम के पास गई, उन्होंने भी क्लास टीचर से बात करने के लिए भेज दिया."
छात्रा का दावा है कि उन्हें सैनेटरी पैड नहीं दिया गया और घर जाने के लिए बोला गया.
छात्रा ने बताया "जब मेरी दोस्तों ने वाइस प्रिंसिपल मैम से कहा कि आज क्लास टीचर मैम नहीं आई हैं. तो इसके बाद वाइस प्रिंसिपल ने उन्हें बोला कि अब छुट्टी हो गई है घर चले जाओ. कपड़े खराब हो गए हैं तो घर जाकर बदल लेना."
छात्रा ने आगे बताया, "मेरे कपड़े बहुत ज्यादा ख़राब थे. मैं जाने की स्थिति में नहीं थी. उसके बाद मेरे दोस्त अंग्रेजी की टीचर के पास गए. उन्होंने भी प्रिंसिपल मैम के पास जाने के लिए कहा. सारी टीचर से बात करने के बाद हम लोग प्रिंसिपल मैम के ऑफ़िस गए. प्रिंसिपल मैम फोन पर बात कर रही थींं. उन्होंने हमसे दो मिनट इंतजार करने को कहा. मैंने प्रिंसिपल मैम के ऑफिस के बाहर 15 मिनट तक इंतजार किया."
छात्रा का कहना है कि तय समय से ज़्यादा इंतज़ार करने के बावजूद प्रिंसिपल मैम ने उन्हें डांट दिया.
छात्रा ने बताया, "15 मिनट के इंतज़ार के बाद मेरी दोस्त ने तेज आवाज़ में प्रिंसिपल मैम से कहा, 'मैम आप एक पैड नहीं दे सकती हो.' इसके बाद प्रिंसिपल मैम ने डांट कर बोला कि जाओ यहां से, इन लोगों को यहां से भगाओ. छुट्टी होने वाली है. घर जाओ."
छात्रा के आरोपों से स्कूल प्रशासन का इनकार

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बीबीसी ने पूरे मामले पर स्कूल की प्रधानाचार्या का पक्ष जानना चाहा.
उन्होंने इस बात से इनकार किया है कि छात्रा उनके पास सैनेटरी पैड मांगने आई थी.
उन्होंने कहा, "मेरे पास वह छात्रा नहीं आई थी सिर्फ टीचर आई थीं. मैं फ़ोन पर बात कर रही थी इसलिए मैंने टीचर को रुकने के लिए बोला. फिर टीचर ने बाद में बताया कि वह (छात्रा) घर चली गई है."
वो कहती हैं, "इस मामले में जांच चल रही है. ज़िला विद्यालय निरीक्षक के निर्देशों के मुताबिक़, आज दो जांच अधिकारी स्कूल में आए थे. स्कूल में सैनेटरी पैड की मशीन है और हम ख़ुद छात्राओं को सैनेटरी पैड उपलब्ध भी करवाते हैं."
अजीत कुमार बरेली के ज़िला विद्यालय निरीक्षक हैं. उन्होंने छात्रा के पिता की तरफ़ से शिकायत पत्र मिलने की पुष्टि की है.
बीबीसी ने घटना को लेकर अजीत कुमार से भी बातचीत की है.
बीबीसी से बातचीत में अजीत कुमार कहते हैं, "25 जनवरी को शिकायत पत्र मिलने के बाद 27 जनवरी को हमने स्कूल का दौरा किया था. हमने प्रधानाचार्या समेत सभी टीचरों से इस मामले पर बात की. उस दिन छुट्टी होने के कारण मेरी मुलाकात छात्रा से नहीं हो पाई थी."
"25 जनवरी को हमने दो महिला अधिकारियों की एक जांच कमेटी बनाई. "
ज़िला विद्यालय निरीक्षक अजीत कुमार का कहना है कि वह स्कूलों के साथ मिलकर पीरियड्स पर जागरुकता अभियान चलाने की योजना पर काम कर रहे हैं.
बरेली से आशीष आनंद की अतिरिक्त रिपोर्टिंग के साथ
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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