सऊदी अरब के इस्लामिक नेता ने अजित डोभाल के सामने भारत के मुसलमानों पर क्या कहा?

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कुछ वक़्त पहले जब पीएम नरेंद्र मोदी अमेरिका दौरे पर गए थे, तब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भारत में अल्पसंख्यकों का मुद्दा उठाया था.
ओबामा के बयान के बाद भारत में मुसलमानों की स्थिति पर फिर से चर्चा शुरू हो गई थी.
हाल के दिनों में भारत में समान नागरिक संहिता क़ानून लाए जाने की चर्चा भी तेज़ हुई है. इस क़ानून पर मुस्लिम समाज भी अपनी चिंताएं ज़ाहिर कर रहा है.
ऐसे वक़्त में मुस्लिम वर्ल्ड लीग के प्रमुख और सऊदी अरब के पूर्व क़ानून मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलकरीम अल-ईसा भारत के छह दिन के दौरे पर हैं.
अल-ईसा मुस्लिम वर्ल्ड लीग के महासचिव हैं. सऊदी अरब के दबदबे वाला ये प्रभावशाली संगठन दुनिया के भर के मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व करता है.
अल-ईसा ने सऊदी अरब में अपने नेतृत्व में कई सुधारों को लागू करवाया था. इनमें पारिवारिक मामले, मानवीय मामलों और महिलाओं के अधिकार से जुड़े क़ानून शामिल हैं.
उन्होंने दुनिया भर में अलग-अलग समुदायों, संप्रदायों और देशों के बीच संबंधों को मज़बूत करने वाले कई अभियानों का भी नेतृत्व किया है.
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अल-ईसा ने मंगलवार को पीएम मोदी से भी मुलाक़ात की. प्रधानमंत्री मोदी के अलावा अल-ईसा ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर से भी मुलाक़ात की.
मंगलवार को अल-ईसा दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में अजित डोभाल के साथ एक कार्यक्रम में शरीक हुए.

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'आतंकवाद का किसी धर्म से नाता नहीं है'
इस कार्यक्रम में अजित डोभाल और मोहम्मद बिन अब्दुलकरीम अल-ईसा दोनों ने ही भारत समेत पूरी दुनिया के मुसलमानों पर बात की.
अजित डोभाल ने कहा, ''आतंकवाद का किसी धर्म से नाता नहीं है और ये धार्मिक गुरुओं की ज़िम्मेदारी है कि हिंसा के रास्ते पर चलने वाले लोगों का विरोध करें.''

डोभाल बोले, ''आतंकवाद किसी धर्म से जुड़ा नहीं है, ये तो कुछ लोग होते हैं जो भटक जाते हैं. किसी भी धर्म, विश्वास या राजनीतिक विचारधारा के धार्मिक और आध्यात्मिक गुरुओं का ये फ़र्ज़ है कि वो हिंसा के रास्ते पर चलने वाले लोगों का प्रभावी ढंग से विरोध करें.''
डोभाल जिस कार्यक्रम में बोल रहे थे, वहां कई धार्मिक गुरु, स्कॉलर, डिप्लोमैट भी मौजूद थे.
इस दौरान मोहम्मद बिन अब्दुलकरीम अल-ईसा ने भी भारतीय एकता और देश के मुस्लिम समुदाय की तारीफ़ की.
अल-ईसा ने कहा, ''भारतीय मुसलमान फ़ख़्र महसूस करते हैं कि वो भारत के नागरिक हैं और वो संविधान पर फ़ख़्र महसूस करते हैं.''

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अल-ईसा की तारीफ़ पर अजित डोभाल क्या बोले?
मुस्लिम वर्ल्ड लीग के महासचिव ने कहा, ''हमने भारतीय संस्कृति के बारे में काफ़ी कुछ सुना है. हम जानते हैं कि हमारा साझा लक्ष्य है कि शांतिपूर्ण ढंग से सह-अस्तित्व बना रहे. हम जानते हैं कि विविधिता के साथ रहने के मामले में भारत एक शानदार उदाहरण है. ये एकता सिर्फ़ शब्दों में ही नहीं, ज़मीन पर भी दिखती है. हम इस दिशा में उठाए सभी क़दमों की प्रशंसा करते हैं.''
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अल-ईसा की तारीफ़ पर जवाब देते हुए अजित डोभाल ने कहा, ''इस्लाम को लेकर आपकी गहरी समझ, दुनिया के दूसरे धर्मों, अंतरधार्मिक सद्भाव के लिए की जा रही कोशिशें और सुधारों के रास्ते पर लगातार चलने का साहस, ये ऐसी चीज़ें हैं जो न सिर्फ़ मानवता में योगदान देती हैं बल्कि इस्लाम को बेहतर ढंग से समझाती भी हैं. इन क़दमों ने चरमपंथ और कट्टर विचारधाराओं को युवाओं के बीच फैलने से रोका है.''
अजित डोभाल ने कहा, ''भारत में कोई धर्म ख़तरे में नहीं है. एक समावेशी लोकतंत्र होने के नाते भारत में सभी धर्मों, समुदायों और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के लोगों के लिए जगह है. सहिष्णुता को बढ़ावा देने, संवाद और सहयोग में भारत यक़ीन करता है ताकि आज के वक़्त की चुनौतियों से निपटा जा सके. ये महज़ इत्तेफ़ाक नहीं है कि 20 करोड़ मुसलमान होने के बावजूद वैश्विक आतंकवाद में भारतीय नागरिक बेहद कम हैं.''
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा, ''भारत में कई धर्मों के बीच इस्लाम एक अद्वितीय और महत्वपूर्ण स्थान रखता है. दुनिया में मुसलमानों की दूसरी सबसे ज़्यादा आबादी भारत में है. ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कॉर्पोरेशन के 33 सदस्य देशों की आबादी को जोड़ लिया जाए तो ये भारतीय मुसलमानों के बराबर होगी.''
ये कार्यक्रम ख़ुसरो फाउंडेशन की ओर से आयोजित किया गया था.
कार्यक्रम में मलेशिया, ईरान, ओमान, जॉर्डन और मिस्र के डिप्लोमैट्स शामिल हुए थे. साथ ही कार्यक्रम में कई समुदायों के धार्मिक गुरु भी मौजूद थे.

अजित डोभाल ने और क्या कहा?
अजित डोभाल ने कहा, ''भारत एक ऐसा देश है, जहां संस्कृतियों, धर्मों और भाषाओं का मिलन होता है और ये चीज़ें सौहार्द के साथ रहती हैं. भारत ने सफलतापूर्वक सभी नागरिकों को बिना किसी धार्मिक, सांस्कृतिक भेदभाव के बगैर मौक़े मुहैया करवाए हैं. आधुनिक भारत की इमारत समान अधिकारों, समान अवसरों और समान ज़िम्मेदारियों पर बनी है. संविधान और क़ानून से समानता की गारंटी है.''
अजित डोभाल बोले, ''असहमति का मतलब ठेस पहुंचाना नहीं है और न ही इसका मतलब विरोध में खड़े होना है. भारत में सोच, विचारधारा के कारण किसी पर कोई ख़तरा नहीं होता.''
पड़ोसी देशों का ज़िक्र करते हुए डोभाल ने कहा, ''भारत की सरहदों और उससे बाहर स्थायित्व और सुरक्षा के लिए चुनौतियों के ख़िलाफ़ भारत डटकर खड़ा है. कट्टरपंथ, आतंकवाद और नार्कोटिक्स को बढ़ावा देने वालों के ख़िलाफ़ जंग में भारत सबसे आगे रहा है.''
डोभाल ने साल 1979 में मक्का की मस्जिद पर हुए चरमपंथी हमले का भी ज़िक्र किया.
डोभाल ने कहा कि मस्जिद पर हुए हमले के बाद सऊदी अरब को सुरक्षा की ख़ातिर अपनी विदेश नीति और आतंकवाद से निपटने के मोर्चे पर आगे आना पड़ा था.
इस संबोधन में डोभाल ने सऊदी अरब और भारत के रिश्तों पर भी बात की.
डोभाल ने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों की जड़ में साझी सांस्कृतिक विरासत, साझा मूल्यों और आर्थिक समझौते हैं.

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हिंदू नेताओं पर अल-ईसा ने कही ये बात
इस कार्यक्रम में मोहम्मद बिन अब्दुलकरीम अल-ईसा ने हिंदू संगठनों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी.
अल-ईसा ने कहा, ''मुस्लिम वर्ल्ड लीग ने भारत में कई हिंदू संगठनों के साथ काम किया है. हिंदू नेताओं के साथ हमारे कई साझा मूल्य हैं और हम मतभेदों का सम्मान करते हैं. सहिष्णुता और सह-अस्तित्व ऐसी चीज़ें नहीं हैं जिनके बारे में सिर्फ़ कॉन्फ्रेंस में बात की जाए बल्कि इनका ज़मीन पर पालन भी होना चाहिए. मुसलमानों से न सिर्फ़ सह-अस्तित्व की सराहना की उम्मीद करनी चाहिए बल्कि ये उनका धार्मिक दायित्व भी है.''
अल-ईसा बोले, ''भारत दुनिया के दूसरे देशों के लिए प्रेरणा है. भारत के साथ हमारी साझेदारी पूरी दुनिया के लिए संदेश है.''
अल- ईसा ने पीएम मोदी से भी मुलाकात की और इस मुलाकात को अंतरधार्मिक सौहार्द के लिए महत्वपूर्ण बताया.
जनवरी 2020 में अल-ईसा नाजियों के यातना कैंपों की मुक्ति के 75 साल पूरा होने पर एक शिष्टमंडल का नेतृत्व करते हुए पोलैंड गए थे.
मार्च में मुस्लिम वर्ल्ड लीग के लंदन में आयोजित पहले यूरोपियन कॉन्फ्रेंस में यहूदी समुदायों को भी बुलाया गया था. उस समय उन्होंने ‘इस्लाम को एक ऐसा धर्म बताया था, जो हर किसी से प्रेम करता है चाहे वो मुस्लिम हो या ग़ैर मुस्लिम.’’
मुस्लिम वर्ल्ड लीग का कहना है कि वह सच्चे इस्लाम और इसके सहिष्णु सिद्धांतों को प्रतिनिधित्व करता है. पिछले साल जब मशहूर लेखक सलमान रुश्दी पर हमला किया गया था तो उन्होंने कहा था कि ये एक ऐसा अपराध है, जिसे इस्लाम मंज़ूर नहीं कर सकता.
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