हैती में सत्ता पर काबिज़ होने की होड़ में लगे गैंग लीडर

पूर्व विद्रोह गाय फिलिप (बाएं), गैंग लीडर जिमी शेरिज़ियर और जॉन्सन एंद्रे

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    • Author, वेनेसा बुशश्लुएटर
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़ ऑनलाइन लैटिन अमेरिका एंड कैरिबियन एडिटर

एक पूर्व पुलिस अधिकारी, जो ऑटोमैटिक राइफल के साथ प्रेस कांफ्रेंस करना पसंद करते है. वहीं, एक नौजवान अपराधी को रैप वीडियो में एक्टिंग करने का शौक़ है. जबकि उनका असली धंधा हथियारों और ड्रग्स की तस्करी करना है.

ये महज़ वो दो अपराधी गैंग लीडर हैं, जिनको हैती की राजधानी पोर्ट ओ प्रिंस में जुर्म की वारदातों में अचानक आई बढ़ोतरी के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है.

हैती में अपराधों की इस क़दर बाढ़ आ गई है कि इसकी वजह से प्रधानमंत्री एरियल हेनरी को इस्तीफ़ा तक देना पड़ गया.

इसमें अगर हम एक पुराने विद्रोही को भी जोड़ दें, जो हाल ही में अमरीका की एक जेल से बाहर आए हैं, तो ये बड़ा विस्फोटक कॉकटेल बन जाता है. अमरीकी क़ैद से रिहा हुए बाग़ी नेता का इरादा हैती का राष्ट्रपति बनने का है.

हैती इस वक़्त सियासी तौर पर अधर में लटका हुआ है. वहां एक अंतरिम सरकार बनने का इंतज़ार किया जा रहा है.

आइए उन लोगों पर एक नज़र डालते हैं, जिनके बीच हैती की सत्ता में आने के लिए होड़ लगी है.

जिमी ‘बारबीक्यू’ शॉलजे

शॉलजे

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47 बरस के जिमी एक पूर्व पुलिस अधिकारी थे. वैसे तो उन्हें हैती का सबसे ताक़तवर गैंग लीडर नहीं कहा जा सकता, लेकिन हाल के दिनों में हैती की सियासी उठा-पटक के बीच वो सबसे चर्चित चेहरे के तौर पर उभरकर सामने आए हैं.

उन्हें पत्रकारों से गुफ़्तगू करने का शौक़ है. ऐसा करते समय जिमी अक्सर बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकर सामने आते हैं, जो अब उनकी पहचान बन चुकी है. हैती में वो 'बारबीक्यू' के नाम से मशहूर हैं. वो उन गिरोहों की अगुवाई करते हैं, जिन्हें हैती में जी9 के नाम से जाना जाता है.

जिमी, पूर्व प्रधानमंत्री एरियल हेनरी के सबसे मुखर विरोधियों में से एक रहे हैं. जिमी तभी से एरियल हेनरी का इस्तीफ़ा मांगते रहे थे, जब एरियल ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी.

जिमी ख़ुद को एक ऐसे शख़्स के तौर पर पेश करना पसंद करते हैं, जो आम लोगों की लड़ाई लड़ने वाले, और सत्ताधारी तबक़े के विरोधी हैं.

लेकिन, ख़ुद जिमी पर 2018 के नरसंहार की अगुवाई करने का इल्ज़ाम लगता रहा है. उस घटना में सैकड़ों लोगों को मार डाला गया था. यही नहीं, 2021 में वरेऊ के ईंधन टर्मिनल की नाकेबंदी के पीछे भी उनका ही हाथ था.

खाने और पानी की आपूर्ति करने वालों पर जी9 के हमलों की वजह से हैती में ज़रूरी सामानों की भयंकर क़िल्लत होती रही है. इसका सबसे ज़्यादा खामियाज़ा मुल्क के ग़रीबों को भुगतना पड़ा है. नाकेबंदी की वजह से जब हैती में ईंधन की कमी हो गई थी, तो इसकी वजह से अस्पतालों के लिए अपने जेनरेटर चलाना और गंभीर रूप से बीमार मरीज़ों को सेवाएं देना मुश्किल हो गया था.

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पत्रकार, लेखक और यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लिस्बन में रिसर्चर माइकल डीबर्ट हैती से जुड़े मामलों के जानकार हैं. वो कहते हैं कि जिमी बारबीक्यू अक्सर देश में अधिक न्यायोचित और समानता भरी व्यवस्था की अस्पष्ट-सी मांग उठाते रहे हैं. लेकिन, इस पूरे हालात की विडम्बना ये है कि राजधानी पोर्ट ओ प्रिंस और आसपास के इलाक़ों में सक्रिय हथियारबंद गिरोह लोगों को जीते-जी नरक भुगतने को मजबूर कर रहे हैं.

जिमी का दावा है कि उन्होंने आपस में ख़ूनी जंग लड़ने के लिए बदनाम पोर्ट ओ प्रिंस में काम करने वाले आपराधिक गिरोहों को एक गठबंधन के तौर पर एकजुट किया है, जिसका नाम 'नामविव अनसान्म' (साथ जियो) है.

इस दावे की तस्दीक़ कर पाना मुश्किल है. लेकिन, अब तक किसी भी विरोधी गैंग के नेता ने इस दावे को ग़लत नहीं बताया है.

माइकल डीबर्ट कहते हैं कि हैती में आपराधिक गिरोहों का ऐसा कोई भी गठबंधन बहुत ज़्यादा दिनों तक चलने वाला नहीं है. वो कहते हैं कि, "ये गिरोह हर वक़्त एकदूसरे के ख़िलाफ़ निर्मम जंग लड़ते रहे हैं."

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माइकल डीबर्ट को लगता है कि इस वक़्त जिमी को आपराधिक गिरोहों को एकजुट होने की एक वजह मिल गई है. उनके मुताबिक़, "वो एकजुट होकर सत्ता के पूरे ढांचे को तबाह कर रहे हैं. ये बात मेरी समझ से परे है कि आख़िर इससे वो क्या मक़सद हासिल करना चाहते हैं."

लोगों में सिहरन पैदा करते हुए बारबीक्यू ने पिछले हफ़्ते धमकी दी थी कि "अगर एरियल हेनरी सत्ता में लौटते हैं तो देश में गृह युद्ध छिड़ जाएगा."

एरियल हेनरी के अपने पद से इस्तीफ़ा देने की ख़बर के बाद से जिमी बारबीक्यू का कोई नया बयान सामने नहीं आया है. वहीं, एरियल हेनरी ने कहा है कि जैसे ही देश में अंतरिम परिषद का गठन हो जाएगा, वो प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़ देंगे.

बारबीक्यू की पुरानी चेतावनियों के पैमाने पर देखें, तो हैती के भविष्य का फ़ैसला वहां के नागरिकों पर छोड़ दिया जाना चाहिए और इसमें कोई बाहरी दख़लंदाज़ी नहीं होनी चाहिए. मगर, हैती में स्वतंत्र चुनाव कराने के लिए जिस बहुराष्ट्रीय सेना की तैनाती की योजना बनी है, वो शायद बारबीक्यू के गले न उतरे.

ग्लोबल इनिशिएटिव अगेंस्ट ट्रांसनेशनल ऑर्गेनाइज़्ड क्राइम (जीआई-टीओसी) में बतौर विशेषज्ञ काम कर रहे रोमां ले कोर कहते हैं कि बारबीक्यू को अपनी ताक़त राजधानी पर नियंत्रण रखने से हासिल होती है, वहां के ईंधन के भंडारों और बंदरगाहों पर उन्हीं का क़ब्ज़ा है.

रोमां ले कोर कहते हैं, "अगर देश के अहम ठिकानों पर दोबारा क़ब्ज़े के लिए अंतरराष्ट्रीय पुलिसबलों को तैनात किया जाता है, तो बारबीक्यू का अपना दबदबा कम हो जाएगा."

माइकल डीबर्ट और रोमां ले कोर, दोनों ही लगभग चेतावनी देते हुए बताते हैं कि हैती के आपराधिक नेताओं में अकेले बारबीक्यू ही सबसे ताक़तवर नहीं हैं. वो उन तमाम गैंग लीडरों में से एक हैं, जिन तक मीडिया की पहुंच है.

माइकल डीबर्ट इशारा करते हैं कि, "हैती में ऐसी बहुत-सी ताक़तवर शख़्सियतें हैं, जो पत्रकारों को इंटरव्यू नहीं देते हैं."

गैंग लीडर जॉनसन आंद्रे उर्फ़ इज़ो

जॉनसन आंद्रे उर्फ़ इज़ो

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26 बरस के जॉनसन आंद्रे उर्फ़ इज़ो हैती में काम करने वाले एक और गैंग लीडर हैं. इज़ो के बारे में कहा जाता है कि वो बारबीक्यू से भी ज़्यादा ताक़त रखते हैं.

रोमां ले कोर बताते हैं कि इज़ो और बारबीक्यू के बीच सबसे बड़ा अंतर ये है कि इज़ो गैंग के बीच से ही उभरे हैं और इन दिनों वो विलाज डे डाय-5 सेगोन गैंग की अगुवाई करते हैं. दोनों ही अपराधी नेता चर्चा में रहना पसंद करते हैं.

लेकिन, इज़ो इसके लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने को तरज़ीह देते हैं. वो मीडिया को इंटरव्यू देकर अपने सियासी विचार सामने रखने की बजाय, म्यूज़िक वीडियो पोस्ट करके शोहरत हासिल करना पसंद करते हैं.

नौजवान गैंग लीडर इज़ो, रैप गीतों के अपने कई वीडियो जारी कर चुके हैं. यू-ट्यूब पर एक लाख फॉलोवर्स हासिल करने पर यू-ट्यूब की तरफ़ से उन्हें इनाम भी दिया गया था.

लेकिन, इज़ो एक बेरहम अपराधी भी हैं. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ इज़ो का गिरोह बलात्कार, अपहरण, ड्रग्स और हथियारों की तस्करी जैसे अपराधों में शामिल है. वो हैती के लोगों को मानवीय सहायता पहुंचाने में भी बाधाएं खड़ी करते रहते हैं.

सालों तक हैती के आपराधिक गिरोहों पर अध्ययन करते रहे रोमां ले कोर कहते हैं कि इज़ो बाक़ी के अपराधी नेताओं से इस मामले में अलग हैं कि वो पोर्ट ओ प्रिंस की खाड़ी तक आने वाले समुद्री रास्तों पर नियंत्रण रखते हैं.

इसकी वजह से इज़ो का गैंग, दूसरे गिरोहों के हैती की ज़मीन पर क़ब्ज़ा रखने को धता बताकर बाहर से बड़ी तेज़ी से हैती तक हथियार पहुंचा पाता है.

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़, इज़ो ने ड्रग्स की तस्करी से ख़ूब पैसे कमाए हैं. कहा जाता है कि उनकी ड्रग्स की कुछ खेपें तो सीधे दक्षिणी अमरीका से विलाज डे डाय के उन इलाक़ों तक पहुंच जाती हैं, जिन पर इज़ो के गिरोह का नियंत्रण है.

ग्लोबल इनिशिएटिव अगेंस्ट ट्रांसनेशनल ऑर्गेनाइज़्ड क्राइम

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इमेज कैप्शन, बीते दिनों रिलीज़ हुई ग्लोबल इनिशिएटिव अगेंस्ट ट्रांसनेशनल ऑर्गेनाइज़्ड क्राइम की रिपोर्ट

हैती में आपराधिक गिरोहों की सक्रियता को लेकर ग्लोबल इनिशिएटिव अगेंस्ट ट्रांसनेशनल ऑर्गेनाइज़्ड क्राइम (जीआई- टीओसी) ने अपनी रिपोर्ट में ये समझाने की कोशिश की है कि इज़ो ने किस तरह राजधानी के बाहर अपना दबदबा बढ़ाया है.

जब इज़ो के गिरोह ने राजधानी पोर्ट ओ प्रिंस से क़रीब 35 किलोमीटर उत्तर में स्थित मिरेबलाय को अपनी गिरफ़्त में लेने की कोशिश की थी, तब इससे वहां क़ाबिज़ गैंग के साथ ख़ूनी मुठभेड़ छिड़ गई थी. इसमें इज़ो के सेगॉन गैंग के पांच लोग और विरोधी गिरोह के 30 लोग मारे गए थे. रिपोर्ट के मुताबिक़, दो गिरोहों के बीच लड़ाई से जो हिंसा भड़की थी, उसकी वजह से मिरेबलाय से लगभग 800 परिवारों को अपना घर-बार छोड़कर भागना पड़ा था.

रोमां ले कोर कहते हैं कि इज़ो के नेटवर्क को तोड़ पाना बहुत मुश्किल है क्योंकि इसका दायरा काफी बड़ा है और फैला हुआ है. कहा जाता है कि इस पर इज़ो का शिकंजा इस क़दर है कि वो अपने दुश्मनों को भी हथियार बेचने से नहीं हिचकते हैं.

पूर्व बाग़ी गाय फिलिप

गाय फिलिप

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गाय फिलिप एक और पूर्व पुलिस अधिकारी हैं, जो विद्रोही हो गए हैं. 56 साल के फिलिप ने 2004 में तत्कालीन राष्ट्रपति बरट्रैंड एरिस्टाइड के ख़िलाफ़ तख़्तापलट की अगुवाई में मदद की थी.

2016 में वो हैती में सीनेट का चुनाव लड़े और जीते थे. पर, सीनेटर की शपथ दिलाए जाने के कुछ दिन पहले ही उन्हें ड्रग तस्करी के आरोप में गिरफ़्तार करके अमरीका के हवाले कर दिया गया था. अगर वो सीनेटर की शपथ ले लेते, तो उनके ऊपर ये क़ानूनी कार्रवाई नहीं हो सकती थी.

गाय फिलिप ने माना था कि पुलिस अधिकारी रहते हुए उन्होंने अमरीका जाने वाली ड्रग्स की खेप की सुरक्षा करने के बदले में रिश्वत ली थी.

अमरीका में अपनी सज़ा पूरी करने के बाद पिछले साल नवंबर में गाय फिलिप को दोबारा हैती भेज दिया गया था. माइकल डीबर्ट कहते हैं कि "ऐसा करके देश के बीतर पहले से ही जल रही आग में और पेट्रोल डाल दिया गया."

हैती आने के बाद फिलिप ने सोशल मीडिया पर वीडियो मैसेज पोस्ट करने में ज़रा भी देर नहीं की. अपने बयानों में उन्होंने प्रधानमंत्री एरियल हेनरी के ख़िलाफ़ बग़ावत करने की अपील की. वो खुलकर कह चुके हैं कि वो अगले राष्ट्रपति बनना चाहते हैं.

जब उनसे पूछा गया कि क्या राष्ट्रपति भवन पहुंचने की राह में उनकी जेल की सज़ा आड़े आएगी, तो उन्होंने जवाब में कहा, "दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला भी जेल में रहे थे. वेनेज़ुएला के ह्यूगो शावेज़ भी जेल में रहे. ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुई इनासियो लूला डा सिल्वा भी क़ैद रहे थे. और अगर मेरी जनता मुझ पर भरोसा करती है तो मैं उनका नेता बनूंगा. ये मेरी जनता का फ़ैसला है, किसी और का नहीं."

माइकल डीबर्ट कहते हैं कि हैती में आपराधिक गिरोहों की हिंसा की वजह से पैदा हुई अराजकता के बीच, राष्ट्रपति बनने की महत्वाकांक्षा जताने वाले गाय फिलिप इकलौते नेता नहीं हैं.

वो कहते हैं कि, "ऐसा लगता है कि उनका गिरोह शायद ये भूल गया है कि असल में हैती की जनता की अपनी मुश्किलें हैं. यहां का मानवीय संकट सारी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ़ खींच रहा है. इस संकट की वजह से हैती की एक करोड़ दस लाख की आबादी में से, लगभग पचास लाख लोग भीषण भुखमरी का सामना कर रहे हैं."

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