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नरेंद्र मोदी का शपथ ग्रहण समारोह आज, विपक्षी नेताओं का इसमें शामिल होने को लेकर क्या है रुख़
बीते मंगलवार को लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे घोषित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं.
राष्ट्रपति भवन की विज्ञप्ति के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 9 जून को शाम 7.15 बजे प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगी.
शुक्रवार को एनडीए की बैठक में संसदीय दल के नेता और लोकसभा में गठबंधन के नेता के रूप में चुने जाने के बाद कार्यवाहक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति से मुलाक़ात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया था.
शपथ ग्रहण समारोह में कई देशों के प्रमुख बुलाए गए हैं.
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जिन पड़ोसी देशों के शासन प्रमुखों को बुलाया गया है. इनमें बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे, भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे, सेशेल्स के उपराष्ट्रपति अहमद अफीफ, नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दाहाल प्रचंड, मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू शामिल हैं.
राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू का नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण में शामिल होना दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने में महत्वपूर्ण हो सकता है. साल 2014 में मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में तत्कालीन मालदीव राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने शिरकत की थी.
नवंबर 2023 में मुइज़्ज़ू के राष्ट्रपति बनने के बाद भारत और मालदीव के रिश्ते में दरार आ गई थी क्योंकि मुइज़्ज़ू ने अपने चुनावी अभियान में 'इंडिया आउट' का नारा दिया था और राष्ट्रपति बनते ही भारत के सैनिकों को देश छोड़कर जाने को कहा था.
केंद्र सरकार की विज्ञप्ति के मुताबिक़ शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करने वाले विदेशी नेताओं को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति भवन में रात्रि भोज देंगी.
विज्ञप्ति में कहा गया है कि पड़ोसी देशों के नेताओं को भारत की ‘नेबरहुड पॉलिसी’ और ‘सागर’ विज़न के तहत बुलाया गया है.
विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने कहा- न्योता नहीं मिला
इस बीच कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा कि विपक्षी नेताओं को सरकार की ओर से शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए न्योता नहीं मिला है.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह के लिए इंडिया गठबंधन के नेताओं को न्योता नहीं मिला है. जब हमारे इंडिया गठबंधन के नेताओं को न्योता मिलेगा, अगर हमारे नेताओं को न्योता मिलेगा तो हम उस पर विचार करेंगे."
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी लीडर ममता बनर्जी ने भी न्योता न मिलने की बात कही.
तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल की बैठक के बाद पत्रकारों से ममता बनर्जी ने कहा कि वो समारोह में शामिल भी नहीं होंगी. उन्होंने कहा, “तृणमूल कांग्रेस का कोई नेता भी इस समारोह में शामिल नहीं होगा.”
ममता बनर्जी ने बीजेपी को निशाने पर लेते हुए कहा, "एक असंवैधानिक और गैरकानूनी पार्टी को सरकार के गठन के लिए शुभकामनाएं नहीं दी जा सकती हैं. इस सरकार का गठन गैरकानूनी और अलोकतांत्रिक तरीके से किया जा रहा है. हम बीजेपी को नहीं तोड़ेंगे. लेकिन वह भीतर से ही टूटेगी. उस पार्टी के लोग खुश नहीं हैं."
ममता ने कहा, "चार सौ पार का नारा देने वाले अपने बूते बहुमत भी हासिल करने में नाकाम रहे हैं. एनडीए ने सरकार बनाने का दावा किया है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आगे कुछ भी नहीं होगा. हम इंतज़ार कर रहे हैं और परिस्थितियों पर नज़र रख रहे हैं. चीज़ें बदलती हैं."
उन्होंने आगे राजनीतिक परिदृश्य में बड़े बदलाव का संकेत देते हुए कहा कि "कई बार सरकारें एक दिन ही टिक पाती हैं. कुछ भी हो सकता है. कौन जाने कि यह सरकार 15 दिन भी चल पाएगी या नहीं?"
ममता बनर्जी की पार्टी पश्चिम बंगाल की 42 में से 29 सीटों पर जीत दर्ज करने में कामयाब रही है. ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस इंडिया गठबंधन का हिस्सा है.
10 साल बाद कांग्रेस को मिलेगा लोकसभा में नेता विपक्ष का पद
इस बीच शनिवार को कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में सोनिया गांधी को संसदीय दल का नेता चुना गया है.
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "सभी नए सांसदों को बधाई दी गई. संसदीय दल के नेता के तौर पर सोनिया गांधी के नाम का प्रस्ताव रखा गया और उन्हें चुना गया."
इससे पहले कांग्रेस की वर्किंग कमेटी की बैठक भी हुई.
तिवारी ने कहा, "लोकसभा में नेता विपक्ष के पद के लिए सभी ने एकमत से राहुल गांधी के नाम का प्रस्ताव रखा है. राहुल गांधी से कहा गया है कि वो इस प्रस्ताव को स्वीकार करें."
लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाले एनडीए गठबंधन को 293 सीटें और विपक्षी इंडिया गठबंधन को 234 सीटें मिली हैं.
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी 99 सीटें जीतने में कामयाब रही है. 10 साल बाद कांग्रेस को लोकसभा में नेता विपक्ष का पद मिलेगा.
वहीं सोनिया गांधी इस साल की शुरुआत में राजस्थान से राज्यसभा सांसद चुनी गई थीं.
कई केंद्रीय मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा
बीजेपी को इन चुनावों में तगड़ा झटका लगा है. मोदी मंत्रिमंडल के 19 मंत्री चुनाव नहीं जीत सके.
इसमें सबसे अधिक चर्चा उत्तर प्रेदश की प्रतिष्ठित सीट अमेठी से केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति इरानी के हारने की भी है. वो कांग्रेस के पुराने कार्यकर्ता केएल शर्मा के हाथों 1.67 लाख वोटों से हार गईं.
इस लिस्ट में अर्जुन मुंडा, एमएसएमई राज्य मंत्री भानु प्रताप सिंह वर्मा, आरके सिंह, अजय मिश्रा टेनी, साध्वी निरंजन, संजीव बालियान, महेंद्र पांडे, राजीव चंद्रशेखर शामिल हैं.
इसके अलावा योगी मंत्रिमंडल के दो मंत्रियों को भी हार का सामना करना पड़ा. इनमें दिनेश प्रताप सिंह और जयवीर सिंह शामिल हैं.
2019 में बीजेपी और सहयोगी दलों ने 64 सीटें जीती थीं लेकिन इस बार यह आंकड़ा 36 पर अटक गया. 33 बीजेपी, दो आरएलडी के और एक अपना दल के खाते में आई.
इसलिए संभावना है कि यूपी के कोटे से केंद्रीय मंत्रियों की संख्या कम होगी.
सहयोगी दलों से तालमेल
लोकसभा चुनाव में बीजेपी के अगुवाई वाले गठबंधन एनडीए को 293 सीटों पर जीत मिली लेकिन बीजेपी को अकेले दम पर 240 सीटें ही हासिल हो पाईं.
अब एनडीए में तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के मुखिया चंद्रबाबू नायडू और जेडीयू के मुखिया नतीश कुमार अहम साझीदार हैं और कहा जा रहा है कि दोनों की अहम भूमिका होने वाली है.
2019 से पहले चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर एनडीए सरकार से अलग हो गए थे.
बिहार के मुख्यमंत्री नतीश कुमार लंबे समय से विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं. जेडीयू जाति जनगणना को राष्ट्रव्यापी स्तर पर कराए जाने की भी मांग रख सकता है.
दोनों ही दल इस सरकार में अपनी मांगों पर ज़ोर दे सकते हैं हालांकि दोनों का ही कहना है कि वो बना शर्त मोदी 3.0 सरकार को समर्थन दे रहे हैं.
लेकिन जेडीयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने अग्निवीर योजना पर पुनर्विचार करने की मांग की है. जिसका समर्थन चिराग पासवान ने भी किया है.
मंत्रिमंडल में जगह पाने को लेकर भी रस्साकशी होने की पूरी संभावना है.
हालांकि सात सीटों वाली शिव सेना एकनाथ शिंदे गुट, पांच सीटों के साथ लोक जनशक्ति रामविलास पासवान गुट (लोजपा) और उत्तर प्रदेश की दो सीटें जीतकर संसद में आया राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) भी बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण है.
नवभारत टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि मुख्यमंत्री शिंदे ने केंद्र में 1 कैबिनेट और 2 राज्य मंत्री पद मांगे हैं.
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