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लोकसभा चुनाव 2024: अलग-अलग जाति और वर्ग के लोगों ने किसे दिया वोट?
- Author, संजय कुमार
- पदनाम, सीएसडीएस
लोकसभा चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए गठबंधन की सरकार बनने जा रही है.
बीजेपी का प्रदर्शन पिछले लोकसभा चुनावों के मुक़ाबले ख़राब रहा है.
लोकनीति-सीएसडीएस के चुनाव बाद किए गए सर्वेक्षण के आंकड़ों से पता चलता है कि भले ही 2024 के इन नतीजों में बीजेपी का प्रदर्शन ख़राब रहा हो लेकिन विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच बीजेपी का वोटर बेस लगभग नहीं बदला है.
बीजेपी ने इस लोकसभा चुनाव में 240 सीट हासिल किए हैं.
वहीं, 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 303 सीट हासिल किए थे. इसके बावजूद 2019 और 2024 के बीच बीजेपी के समर्थन आधार में या तो इजाफ़ा हुआ है या इस आंकड़े में कोई बदलाव नहीं हुआ.
किस जाति समुदाय ने किसे दिया वोट?
अगड़ी कही जाने वाली जातियों में बीजेपी का समर्थन तक़रीबन बरकरार रहा है. साल 2019 के चुनाव में इस तबके 53 फ़ीसदी मतदाताओं ने बीजेपी को वोट दिया था. 2024 में भी यही आंकड़ा है.
हिंदुओं में अगड़ी कही जाने वाली जातियों के मामले में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को मामूली फ़ायदा हुआ है.
हिंदू अपर ओबीसी जातियों (अन्य पिछड़ा वर्ग की जातियों में दबदबा रखने वाला तबका) में कांग्रेस (20%) को 5% और उसके सहयोगियों (15%) को 6% का लाभ हुआ है. बीजेपी और उसके सहयोगी पार्टियों को इस वर्ग में 2% का झटका लगा है.
हिंदू लोअर ओबीसी जातियों के मामले में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के वोट प्रतिशत में मामूली बदलाव है. वहीं कांग्रेस को इस समुदाय में 3% का और उसके सहयोगियों को 2019 के लोकसभा चुनाव के मुक़ाबले 4% का फ़ायदा हुआ है.
राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी ने 2019 के लोकसभा चुनाव के मुक़ाबले 3% फ़ीसदी दलित वोट गंवाए हैं. बीजेपी की सहयोगी पार्टियों ने 2% समर्थन गंवाया है. वहीं कांग्रेस ने पिछले पांच सालों में 1% दलित समर्थन खोया है. कांग्रेस के सहयोगी दलों को दलित वोटरों का फ़ायदा मिला है, ख़ासकर समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में दलित वोट जुटाए हैं. राज्य स्तर के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि यूपी में दलितों के बीच भाजपा के समर्थन आधार में भारी कमी आई है और कुछ अन्य राज्यों में मामूली नुकसान हुआ है.
ऐसा लग रहा है कि आदिवासियों के बीच कांग्रेस के जनाधार में जो कमी आई है उसकी भरपाई कांग्रेस के सहयोगी दलों से हो गई है. कांग्रेस के सहयोगी दलों ने पिछले लोकसभा चुनाव के मुक़ाबले इस चुनाव में 2% की बढ़त हासिल की है. आदिवासी समुदाय से बीजेपी के लिए अच्छी ख़बर आई है, बीजेपी का समर्थन पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में 5% बढ़ गया है.
मुस्लिम वोटरों के बीच बीजेपी के समर्थन में 1% की मामूली गिरावट देखी गई है, जिसकी भरपाई बीजेपी के सहयोगी दल कर रहे हैं. ऐसा लगता है कि कांग्रेस का आधार मुसलमानों के बीच काफ़ी बढ़ा है, यहां बढ़त 5% की है लेकिन मुस्लिम मतदाताओं के बीच असली फ़ायदा कांग्रेस के सहयोगी दलों (15%) को हुआ है. जो ख़ास तौर पर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बिहार में राष्ट्रीय जनता दल के लिए देखा गया.
दिल्ली में भी आप-कांग्रेस गठबंधन के पीछे मुस्लिम वोट एकजुट हुआ. ऐसा लगता है कि इंडिया गठबंधन के लिए मुस्लिम समर्थन मज़बूती से मिलने की वजह से गठबंधन को काफ़ी फायदा हुआ है.
ये जानकर हैरानी हो सकती है कि बीजेपी को हुए भारी नुकसान के बावजूद उसके समर्थन आधार में कोई ख़ास बदलाव नहीं हुआ है. कारण साफ है, राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी के वोट शेयर में शायद ही कोई बदलाव हुआ है. 2024 में उसे 36.6% वोट मिले हैं, जो 2019 में 37.6% था. सीटें जीतना अहम है, क्योंकि सरकार सीटों के आधार पर ही बनती है लेकिन सीटों की संख्या से परे भी एक कहानी है.
किस वर्ग ने किसको दिया वोट
2024 के लोकसभा चुनाव में जो दिलचस्प पैटर्न देखा जा सकता है वो है ग़रीबों और निम्न आय वर्ग के मतदाताओं के बीच अहम बदलाव.
पिछले चुनावों (2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों) में बीजेपी के समर्थन में जो ग़रीब और अमीर लोग थे, उनके बीच का अंतर बहुत बड़ा हुआ करता था. यानी गरीबों और निम्न वर्ग की तुलना में अमीर और मध्यम वर्ग के मतदाताओं ने बीजेपी को अधिक वोट दिया लेकिन 2024 में बीजेपी के लिए जिन लोगों ने वोट दिया, उसमें अमीर और ग़रीब के बीच का अंतर काफी कम हो गया है.
लोकनीति-सीएसडीएस के चुनाव बाद सर्वेक्षण के निष्कर्षों से साफ़ संकेत मिलता है कि भले ही 2024 के आम चुनावों में बीजेपी अपने दम पर बहुमत से पीछे रह गई, लेकिन आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के एक महत्वपूर्ण हिस्से ने बीजेपी के लिए मतदान किया.
ग़रीबों में 37 फ़ीसदी ने बीजेपी को वोट दिया जबकि 21 फ़ीसदी ने कांग्रेस को चुना. हालांकि, बीजेपी के सहयोगी दलों को इस समूह से बहुत कम समर्थन (6%) मिला. इसकी तुलना में कांग्रेस के सहयोगी दलों ने गरीब वर्ग के 14% वोट हासिल किए. इसी तरह बीजेपी को निम्न वर्ग का 35% वोट मिला जो कि कांग्रेस को मिले वोट से 13 पर्सेंटेज़ प्वाइंंट ज़्यादा है.
मध्यम वर्ग से मिले समर्थन के मामले में भी बीजेपी ने कांग्रेस पर लगभग समान बढ़त बनाए रखी है. हालांकि, बीजेपी ने सबसे ज़्यादा वोट (41%) अपर उच्च वर्ग से हासिल किए हैं.
हालांकि, दिलचस्प बात ये है कि 2019 के लोकसभा चुनाव की तुलना में बीजेपी को वोट देने वाले उच्च वर्ग के अनुपात में गिरावट आई है. इस चुनाव में बीजेपी को मध्यम वर्ग से जो समर्थन मिला है उसमें भी 3 परसेंटेज प्वाइंट्स की छोटी गिरावट दिखाई दे रही है.
निम्न वर्ग में इस बार 35% वोटिंग बीजेपी के लिए हुई. ये आंकड़ा 2019 लोकसभा चुनाव में 36% का था.
2014 के बाद से बीजेपी को ग़रीब वोटरों से मिलने वाले वोटों में लगातार वृद्धि हुई है और इस चुनाव में भी ये अनुपात बढ़कर 37% हो गया है.
ऐसा लगता है कि सत्ताधारी बीजेपी की कई कल्याणकारी योजनाओं, ख़ासकर ग़रीब लोगों की बड़ी आबादी को मिलने वाली मुफ़्त राशन योजना ने बीजेपी के पक्ष में काम किया है.
(लोकनीति-सीएसडीएस ने 191 संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में फैले 776 स्थानों पर पोस्ट पोल सर्वेक्षण आयोजित किया था. सर्वेक्षण का नमूना राष्ट्रीय स्तर पर भारत के मतदाताओं की सोशल प्रोफ़ाइल का प्रतिनिधित्व करता है. सभी साक्षात्कार ज़्यादातर मतदाताओं के घर आमने-सामने बैठकर आयोजित किए गए थे.)