खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह चुनाव तो जीत गए लेकिन जेल में रहकर शपथ कैसे लेंगे?

जेल में बंद खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह ने पंजाब के खडूर साहिब लोकसभा सीट से आज़ाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीता है.

अमृतपाल सिंह फिलहाल राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं.

अमृतपाल सिंह जेल से चुनाव तो जीत गए, लेकिन अब सवाल ये है कि आगे क्या होगा, वो सांसद पद की शपथ कैसे लेंगे?

अमृतपाल सिंह मार्च, 2023 से राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत असम के डिब्रूगढ़ की जेल में बंद हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 में अस्तित्व में आया था.

यह केंद्र और राज्य सरकारों को बिना पूर्व सूचना के किसी को भी हिरासत में लेने का अधिकार देता है. ये कानून किसी भी व्यक्ति को 12 महीने तक हिरासत में रखने की अनुमति देता है.

अमृतपाल सिंह पर लगे गंभीर आरोप

अब लोकसभा सदस्य के रूप में अमृतपाल का क्या होगा?

इतना तो स्पष्ट है कि खडूर साहिब से लोकसभा चुनाव जीतने का मतलब यह नहीं है कि अब अमृतपाल सिंह जेल से बाहर आएंगे और सांसद के रूप में काम करना शुरू कर देंगे.

भारतीय संविधान के जानकारों का मानना ​​है कि शपथ लेने के लिए संसद में आना पड़ता है और यह उनका कानूनी अधिकार भी है. शपथ लेना सांसद के रूप में किसी भी चुने हुए व्यक्ति की भूमिका को पूरा करने की दिशा में पहला कदम है.

भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सतपाल जैन का कहना है कि जेल में रहते हुए लोकसभा चुनाव जीतने वाला व्यक्ति जिला अधिकारी की अनुमति के बाद स्पीकर द्वारा निर्धारित समय के अनुसार लोकसभा सदस्य के रूप में शपथ ले सकता है.

उनके मुताबिक,स्पीकर तय करेंगे कि शपथ सदन में ली जाए या स्पीकर के चैंबर में.

उन्होंने कहा कि जेल में बंद किसी व्यक्ति के संसद सदस्य चुने जाने का यह पहला मामला नहीं है.

इसी वर्ष मार्च में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में दिल्ली की तिहाड़ जेल में कैद में होने के बावजूद आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह को अदालत ने दूसरी बार राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने की अनुमति दी थी.

ट्रायल कोर्ट ने जेल अधीक्षक से यह सुनिश्चित करने को कहा था कि संजय सिंह को पर्याप्त सुरक्षा के साथ संसद में जाने की अनुमति दी जाए और शपथ लेने के बाद उन्हें वापस जेल में लाया जाए.

1977 में आपातकाल के दौरान जेल में रहते हुए जॉर्ज फर्नांडीस बिहार के मुजफ्फरपुर से सांसद चुने गए थे. लेकिन शपथ ग्रहण समारोह से पहले ही उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया.

एक संसद सदस्य के क्या कर्तव्य होते हैं?

संसदीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना ​​है कि शपथ लेने की अनुमति देना, ज़मानत पर रिहा होने के बराबर नहीं है. इसे एक दिन के विशेष पैरोल की तरह देखा जाना चाहिए.

भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सतपाल जैन का कहना है कि लोकसभा के क़ानून के मुताबिक़, जेल में बंद किसी सांसद को स्पीकर को लिखित रूप में बताना होता है कि वो संसद का कार्यवाही में क्यों शामिल होने में असमर्थ हैं.

यह महत्वपूर्ण है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 101 (4) में प्रावधान है कि अगर कोई संसद सदस्य बिना अनुमति के 60 दिनों से अधिक समय तक सभी बैठकों से अनुपस्थित रहता है, तो उसकी सीट रिक्त घोषित कर दी जाएगी.

इसके अलावा अगर किसी सांसद को आरोप के तहत दो साल की सज़ा होती है तो उसकी संसद सदस्यता भी खत्म हो जाएगी.

अमृतपाल सिंह के वकील ने क्या कहा

बीबीसी से बात करते हुए अमृतपाल सिंह के वकील ईमान सिंह खैरा ने कहा कि क़ानून के मुताबिक़, एक सांसद को जो भी अधिकार हैं, वह उनके मुव्वकिल को भी मिलेंगे.

उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों के आधार पर वह शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी करेंगे.

वकील ने कहा कि फिलहाल वे संसद सत्र के शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं और उसके बाद ही अगली रणनीति बनाएंगे.

अमृतपाल बड़े अंतर से जीते

अमृतपाल सिंह ने खडूर साहिब सीट पर एक लाख 97 हजार 120 वोटों से जीत हासिल की है. ये इन लोकसभा चुनावों में पंजाब के किसी भी हलके से दर्ज की गई जीत का सबसे बड़ा अंतर है.

हरपाल सिंह खारा पेशे से वकील हैं और वह राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ भी हैं.

वह कहते हैं, "खडूर साहिब लोकसभा क्षेत्र पंजाब के माझा इलाके का अहम हिस्सा है. यहाँ भारी संख्या में सिख रहते हैं. इस सीट के मतदाताओं ने पंथ के नाम पर अमृतपाल सिंह को वोट देकर उन्हें जीत दिलाई है."

कुछ जानकार ये भी कह रहे हैं कि इस जीत के बाद पंजाब के सियासत के पंथिक धड़े की अगुवाई का रास्ता भी साफ कर दिया है.

खारा कहते हैं, "अमृतपाल सिंह की जेल से रिहाई के बाद पंजाब में राजनीतिक रूप से कुलीन पंथक हलकों के बीच एक नई तरह की राजनीति उभरेगी. ये नया पंथिक धड़ा 2027 के विधानसभा चुनावों में अपनी उपस्थिति महसूस करा सकता है."

अमृतपाल सिंह कौन हैं और उनका बैकग्राउंड क्या है

अमृतपाल सिंह 'वारिस पंजाब दे' संगठन के प्रमुख हैं. वह सिखों के लिए खालिस्तान नाम के एक एक अलग देश को अपना लक्ष्य बताते हैं.

'वारिस पंजाब दे' संगठन का गठन दिवंगत संदीप सिंह उर्फ ​​दीप सिद्धू ने किया था.

29 सितंबर, 2022 को रोडे गांव में दमदमी टकसाल के पूर्व प्रमुख जरनैल सिंह भिंडरावाले के जन्मदिन पर एक भव्य समारोह के दौरान अमृतपाल सिंह को 'वारिस पंजाब दे' प्रमुख के रूप में पेश किया गया था.

गौरतलब है कि भिंडरावाले भी इसी रोडे गांव में पैदा हुए थे. और इसी गांव के एक गुरुद्वारे से पिछले साल अमृतपाल सिंह को गिरफ़्तार किया गया था.

अमृतसर के जल्लूखेड़ा गांव के रहने वाले अमृतपाल सिंह ने काफी समय तक दुबई में बिताया है. दुबई में रहने के बाद अमृतपाल सिंह पंजाब आ गए और एक धार्मिक उपदेशक के रूप में सक्रिय हो गए.

उन्होंने अमृत संचार और नशा मुक्ति आंदोलन के नाम पर युवाओं को अपने साथ जोड़ना शुरू किया. इसका उन्हें काफी अच्छा रिस्पॉन्स भी मिला.

अमृतपाल सिंह अपने उग्र भाषणों और गुरुद्वारों में बेंचों को जलाने और अजनाला पुलिस स्टेशन की घेराबंदी और वहां हुई हिंसा के कारण भी विवादों में रहे थे.

अमृतपाल सिंह और उनके कई साथी फिलहाल राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं.

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