पीएम मोदी की पुतिन से मुलाक़ात पर बोले ज़ेलेंस्की: सबसे बड़े लोकतंत्र के नेता को पुतिन से गले मिलते देख झटका लगा

    • Author, अभिनव गोयल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूस दौरे पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.

ज़ेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ पीएम मोदी की मुलाकात पर सवाल उठाते हुए इसे 'भारी निराशा' बताया है.

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "इससे बहुत ज़्यादा निराशा हुई. विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेता को एक ऐसे दिन पर मॉस्को में दुनिया के सबसे ख़ूनी अपराधी को गले लगाते देखना शांति प्रयासों के लिए बहुत बड़ा झटका है."

यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब सोमवार को रूसी मिसाइलों के हमले से यूक्रेन में दर्जनों लोग मारे गए हैं.

इतना ही नहीं यह वो समय है जब वॉशिंगटन में नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइज़ेशन यानी नेटो की बैठक हो रही है. ऐसे में पश्चिम के मीडिया और नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे पर सवाल उठा रहे हैं.

अमेरिका ने उठाए सवाल

सोमवार को अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पत्रकारों के सवालों के जवाब में भारत और रूस के संबंध को लेकर अपनी चिंता ज़ताई.

यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से भारत पर दबाव है कि वह रूस से दूरी बनाकर रखे. दूसरी तरफ़ भारत ने इन दबावों के समाने झुकने से इनकार कर दिया है और अपने पुराने साथी के साथ रक्षा और अन्य आर्थिक संबंधों पर कोई रोक नहीं लगाई.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ़रवरी, 2022 में यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद पहली बार मॉस्को पहुँचे हैं.

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मोदी के रूस दौरे से जुड़े सवाल पर कहा, "हम मोदी की टिप्पणी को देखेंगे कि उन्होंने रूस दौरे में क्या बातचीत की है. लेकिन हम इस मामले में स्पष्ट हैं कि भारत और रूस के संबंधों को लेकर हमारी चिंताएं हैं."

उन्होंने कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि भारत या अन्य देश जो रूस के साथ संबंधों को आगे बढ़ा रहे हैं, वे राष्ट्रपति पुतिन के सामने स्पष्ट करें कि यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय एकता को लेकर यूएन चार्टर का सम्मान होना चाहिए."

गले मिलने की चर्चा

पीएम मोदी जब सोमवार को मॉस्को पहुँचे तो राष्ट्रपति पुतिन ने अपने घर पर गर्मजोशी से स्वागत किया. दोनों ने एक-दूसरे को गले भी लगाया.

पीएम मोदी और पुतिन के गले लगने की चर्चा भी हो रही है.

थिंक टैंक रैंड कॉर्पोरेशन में इंडो-पैसिफिक मामलों के विशेषज्ञ डेरेक जे ग्रॉसमैन ने सात जुलाई को पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के गले मिलने की पुरानी तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था, "सोमवार को मोदी शायद ही पुतिन को गले लगाएंगे या चूमेंगे."

लेकिन सोमवार की शाम पुतिन और मोदी के गले लगने की तस्वीर आई और इसे पीएम मोदी के एक्स अकाउंट से शेयर किया गया तो डेरेक ने लिखा, "मेरा अनुमान ग़लत था कि मोदी पुतिन को गले नहीं लगाएंगे. पुतिन एक युद्ध अपराधी हैं. मुझे लग रहा था कि भारत यूक्रेन के मामले में नैतिक रूप से मिसाल कायम करेगा."

"जैसा कि मैं पहले भी कई बार कह चुका हूँ कि भारत केवल अपने हितों में भरोसा करता है."

डेरेक ने पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के गले लगने का वीडियो क्लिप शेयर करते हुए लिखा है, "क्या कहीं यूक्रेन है?"

डेरेक ने लिखा है, "मोदी और पुतिन का गले मिलना उसी तरह से है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने सऊदी अरब में जाकर वहाँ के क्राउन प्रिंस से हाथ मिलाया था. बाइडन और मोदी दोनों अपने-अपने देश को लोकतांत्रिक कहते हैं और उसके मूल्यों की बात करते हैं लेकिन दोनों अपने राष्ट्रीय हितों को सबसे ऊपर रखते हैं."

"यह हैरान करने वाला नहीं है लेकिन हमेशा अच्छे की उम्मीद की जाती है, ख़ासकर लोकतांत्रिक देशों के बीच."

'दरारों को भरने की कोशिश'

भारत-रूस के बीच आख़िरी वार्षिक समिट नई दिल्ली में छह दिसंबर 2021 को हुआ था, तब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन भारत दौरे पर थे.

साल 2020 में कोविड महामारी के कारण यह वार्षिक बैठक नहीं हो पाई थी.

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ इंटरनेशनल रिलेंशस के एसोसिएट प्रोफेसर राजन कुमार कहते हैं कि साल 2000 से चल आ रही यह सालाना बैठक 2021 के बाद नहीं हुई. इस बैठक में एक बार रूस के राष्ट्रपति भारत आते थे और एक बार भारत के प्रधानमंत्री रूस जाते थे.

वे कहते हैं कि बैठक ना होने की स्थिति में ये कयास लगाए गए कि भारत और रूस के संबंधों में खटास आ रही है.

राजन कहते हैं, "पीएम मोदी इस यात्रा में रूस को आश्वस्त करना चाहते हैं कि वे पीछे नहीं हटे हैं और पिछले दो सालों में जो दरारें पड़ी थीं, उन्हें एक तरह से भरने की कोशिश की जा रही है."

एक तीर से दो निशाने

साल 2023 में राष्ट्रपति बनने के बाद शी जिनपिंग ने रूस का दौरा किया था, वहीं जब साल 2024 में पुतिन फिर से राष्ट्रपति बने तो वे भी पहली विदेश यात्रा पर चीन गए थे.

दोनों राष्ट्राध्यक्षों का एक दूसरे के देश पहुंचना दोनों के बीच गहरे संबंधों को दिखाता है. लेकिन इस बार भारत के साथ भी ऐसा ही देखने को मिला है.

तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी, पहली द्विपक्षीय विदेश यात्रा पर रूस पहुंचे हैं. प्रोफेसर राजन कुमार इसे बहुत ही बोल्ड और डिप्लोमैटिक कोशिश की तरह बताते हैं.

वे कहते हैं, "भारत जानता है कि पश्चिमी देश आलोचना करेंगे, लेकिन वे विचलित नहीं है. भारत यह मैसेज देने की कोशिश कर रहा है कि वह पश्चिमी देशों के दबाव में नहीं आना चाहता है. साथ ही यह भी कि वह रूस को लेकर समझौता नहीं करेगा, क्योंकि उसके रूस के साथ पुराने रणनीतिक संबंध हैं."

प्रोफेसर राजन कहते हैं कि भारत रूस की यात्रा के जरिए एक तीर से दो निशाने लगा रहा है.

वे कहते हैं, "भारत इसके जरिए चीन को भी बैलेंस कर रहा है. मान लीजिए कि अगर रूस के साथ भारत के संबंध खराब हो जाते हैं तो रूस पूरी तरह से चीन पर निर्भर हो जाएगा और ऐसी स्थिति में चीन मनमानी करने लगेगा. ये भी संभावना बनती है कि रूस, चीन, पाकिस्तान और ईरान- भारत के विरोध में खड़े जाएंगे."

व्यापार घाटा बना चिंता की वजह

भारत और रूस के बीच सालाना क़रीब 65 बिलियन डॉलर का व्यापार होता है, जिसमें भारत का निर्यात करीब 5 बिलियन डॉलर है. जो बताता है कि दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा कितना बड़ा है. ये भारत के लिए चिंता का विषय है.

प्रोफेसर राजन कुमार कहते हैं कि पीएम मोदी इस यात्रा की मदद से व्यापार घाटे को कम करने पर भी जोर देंगे, क्योंकि भारत अपने विदेशी मुद्रा बैंक को कम नहीं करना चाहता.

वे कहते हैं, "भारत इस बात पर ज़ोर देगा कि रूस हमसे ज्यादा प्रोडक्ट खरीदे और जो पैसा रूस को जा रहा है, उसे वह भारत में निवेश करे."

लेकिन इन सबके बीच भारत के लिए एक मुश्किल रूस से मिलने वाले डिफेंस प्रोडक्ट भी हैं, क्योंकि यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिम के देश उसे सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी नहीं दे रहे हैं. ऐसी स्थिति में रूस चीन पर निर्भर है.

राजन कुमार कहते हैं, "अगर रूस डिफेंस प्रोडक्ट में चीन की चिप का इस्तेमाल करेगा तो क्या वह उन प्रोडक्ट्स को भारत भेज पाएगा? क्या भारत चीन की चिप पर भरोसा कर पाएगा? डिफेंस कमिटमेंट दोनों देशों के बीच एक बड़ा मुद्दा है."

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