पुतिन ने युद्ध ख़त्म करने के लिए रखीं शर्तें, क्या यूक्रेन मानेगा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन से शांति वार्ता शुरू करने के लिए दो शर्तें रखी हैं.

पहली, यूक्रेन को दोनेत्स्क, लुहांस्क, खे़रसोन और ज़ापोरज़िया से अपने सैनिक हटाने होंगे. दूसरी, यूक्रेन नेटो में शामिल नहीं होगा.

यूक्रेन से संभावित युद्धविराम के लिए पुतिन की शर्तें ऐसे वक़्त पर सामने आई हैं, जब शनिवार को 90 मुल्कों के प्रतिनिधि स्विट्ज़रलैंड में मुलाक़ात करने वाले हैं.

इस सम्मेलन में यूक्रेन के लिए शांति की राह पर चर्चा होनी है.

इसमें रूस को आमंत्रित नहीं किया गया है. हालांकि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की इसमें शिरकत करने वाले हैं.

रूसी विदेश मंत्रालय के नेताओं के साथ बैठक में पुतिन ने कहा, ''यूक्रेन जैसे ही दोनेत्स्क, लुहांस्क, खे़रसोन और ज़ापोरज़िया से अपने सैनिक हटाने और नेटो में न शामिल होने का एलान करेगा वैसे ही रूसी सेना वहां से पीछे हटना शुरू कर देगी.''

पुतिन ने इस बात पर जोर दिया कि इन इलाकों से यूक्रेन को अपनी फौजें पूरी तरह हटानी होगी. हालांकि ये भी सच है कि रूसी सेना का यहां कब्जा आंशिक ही है.

इसके साथ पुतिन ने ये कहा है कि यूक्रेन को नेटो में शामिल होने का प्लान छोड़ना होगा. उसे फिर से निष्पक्ष, गुट निरपेक्ष और परमाणु मुक्त स्थिति हासिल करनी होगी.

यूक्रेन को रूसी बोलने वालों के अधिकार सुरक्षित करने होंगे. नाज़ीकरण छोड़ना और सैन्यीकरण से पीछे हटना होगा.

उन्होंने कहा कि यूक्रेन को अपनी सीमाओं (जमीन ) से जुड़ी नई वास्तविकताओं को स्वीकार करना होगा.

पुतिन ने इन शर्तों का ज़िक्र करते हुए कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के शांतिपूर्ण हल के समझौते को अंतरराष्ट्रीय संधियों में दर्ज करना होगा. साथ ही रूस पर लगे सभी प्रतिबंध भी हटाने होंगे.

रूसी राष्ट्रपति ने वादा किया कि वो यूक्रेनी सेना को सुरक्षित वापसी का रास्ता देंगे.

पुतिन की शर्तें कितनी भरोसेमंद?

पुतिन ने युद्ध ख़त्म करने की शर्तें यूक्रेन की ओर से आयोजित होने वाले शांति सम्मेलन से एक दिन पहले रखी हैं.

शनिवार को ये शांति सम्मेलन स्विट्जरलैंड के बर्जनस्टॉक में होगा. स्विट्जरलैंड की सरकार ने कहा है कि शांति सम्मेलन में 92 देशों और आठ संगठनों के 100 प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे.

हालांकि रूस के प्रतिनिधियों को नहीं बुलाया गया है. चीन, ब्राजील और सऊदी अरब के प्रतिनिधियों ने सम्मेलन में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है.

सम्मेलन में दो दिनों तक बातचीत होगी. उम्मीद है कि इसके अंत में एक बयान जारी किया जाएगा, जो यूक्रेनी शांति फॉर्मूले के तीन बिंदुओं से जुड़ा होगा.

ये तीन मुद्दे खाद्य सुरक्षा, परमाणु विकिरण और सुरक्षा के साथ ही मानवीय मुद्दों से जुड़े होंगे. इसमें यूक्रेनी बच्चों समेत सभी यूक्रेनी कैदियों और पकड़े गए यूक्रेनी लोगों की रिहाई शामिल है.

सम्मेलन में लिए गए फैसलों को मध्यस्थों के जरिये रूस को बताया जाएगा. सम्मेलन की योजना के मुताबिक ये मध्यस्थ फिर रूस और यूक्रेन के बीच मध्यस्थता कराएंगे. पहले भी इस तरह की बातचीत में समझौते हो चुके हैं.

जैसे यूक्रेन से अनाज के निर्यात को मंजूरी देने के लिए 'ग्रेन कॉरिडोर' बनाया गया था.

हालांकि अभी ये पक्का नहीं है कि युद्ध रोकने को लेकर दिए गए गए पुतिन के बयान से शांति सम्मेलन के एजेंडे में कोई बदलाव होगा या नहीं.

ज़ेंलेस्की ने पुतिन की पेशकश पर क्या कहा

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने पुतिन के युद्धविराम के प्रस्ताव को अल्टीमेटम करार दिया है, जिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता.

जेलेंस्की ने कहा कि जहां तक वो समझते हैं कि पुतिन सैन्य हमला नहीं रोकेंगे भले ही युद्धविराम से जुड़ी उनकी शर्तें हम मान क्यों न लें.

उन्होंने कहा कि पुतिन के ये संदेश उसी तरह के हैं जैसे हिटलर दिया करते थे. इस बात को सौ साल भी नहीं हुए हैं.

जेलेंस्की ने कहा, ''हिटलर कहा करते थे मुझे चेकोस्लोवाकिया का एक हिस्सा दे दो और मैं युद्ध ख़त्म कर दूंगा. ये पूरी तरह एक झूठ था. इसके बाद हिटलर ने पौलेंड का एक हिस्सा मांगा था. लेकिन इसके बाद भी पूरे यूरोप पर हिटलर ने अपना कब्जा बनाए रखा था."

यूक्रेन और नेटो देशों का रुख

सच तो ये है कि इससे पहले भी पुतिन ऐसे बयान देते रहे हैं.

पुतिन के हालिया बयान में कुछ भी नया नहीं है. यूक्रेनी विदेश मंत्रालय के बयान में भी यही कहा गया है.

साथ ही उन्हें पुतिन के इस एलान के समय पर भी गौर किया है.

मंत्रालय के मुताबिक़, ''स्विट्जरलैंड में शांति शिखर सम्मेलन की पूर्व संध्या पर इस तरह के संकेत देने के पीछे पुतिन का एक ही लक्ष्य है- दुनिया भर के नेताओं और देशों को इस शिखर सम्मेलन में भाग लेने से रोकना. सच तो ये है कि पुतिन के बयान शिखर सम्मेलन से ठीक एक दिन पहले सामने आए, जो यह दिखाता है कि रूस वास्तविक शांति से डरता है.''

यूक्रेन के राष्ट्रपति के कार्यालय के प्रमुख सलाहकार, मिखाइल पोदोल्योक ने रूसी राष्ट्रपति द्वारा रखी गई शर्तों को ''हमलावरों का एक मानक सेट" कहा, जिसका कंटेंट "अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए बेहद आक्रामक है. ये हालातों की वास्तविकता का आकलन करने में रूसी नेतृत्व की अक्षमता को दिखाता है.''

यूक्रेन के पश्चिमी सहयोगियों ने पुतिन के प्रस्ताव की आलोचना की है.

नेटो के सेक्रेटरी जनरल जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने कहा कि यूक्रेन को यूक्रेनी जमीन से सेना वापस बुलाने की नहीं बल्कि रूस को यूक्रेनी जमीन से सेना वापस लेने की जरूरत है.

उन्होंने पुतिन की मांगों को 'शांति प्रस्ताव' की जगह 'अधिक आक्रामकता और अधिक कब्जे' वाला प्रस्ताव करार दिया.

उन्होंने कहा, "ये बताता है कि रूस का लक्ष्य यूक्रेन को नियंत्रित करना है. इस युद्ध की शुरुआत से ही रूस का ये लक्ष्य रहा है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन है. यही वजह है कि नेटो में शामिल देश यूक्रेन का समर्थन करना जारी रखना चाहते हैं.''

अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने शुक्रवार को कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस स्थिति में नहीं हैं कि वो ये कहें कि यूक्रेन युद्ध समाप्त करें.

ब्रसेल्स में नेटो के मुख्यालय में ऑस्टिन ने कहा, ''पुतिन इस स्थिति में नहीं हैं कि वो यूक्रेन को ये बताएं कि उसे शांति हासिल करने के लिए क्या करना चाहिए.''

उन्होंने कहा कि पुतिन अगर चाहते हैं तो वो आज ही युद्ध खत्म कर सकते हैं.

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