सोनम वांगचुक को लेकर लोग पूछ रहे हैं- किस अपराध में दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोका

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पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सोमवार की रात दिल्ली से पहले सिंघु बॉर्डर पर रोके जाने की ख़बर है.
समाचार एजेंसी एएनआई ने दिल्ली पुलिस के हवाले से बताया कि सोनम वांगचुक और उनके साथ आए कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ने सिंघु बॉर्डर से हिरासत में लिया है.
वहीं समाचार एजेंसी पीटीआई ने भी दिल्ली पुलिस के सूत्रों से बात करते हुए वांगचुक को हिरासत में लिए जाने की पुष्टि की है.
हालांकि वांगचुक को हिरासत में लिए जाने को लेकर दिल्ली पुलिस ने अभी तक कोई भी आधिकारिक बयान नहीं दिया है.
वांगचुक लद्दाख को पूर्ण राज्य और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर दिल्ली के लिए पदयात्रा कर रहे हैं. लेह से एक सितंबर को शुरू हुई ये यात्रा क़रीब एक हज़ार किलोमीटर लंबी है.
तय कार्यक्रम के अनुसार, उन्हें दो अक्टूबर यानी गांधी जयंती के दिन बापू की समाधि पहुँचना है.
सोमवार की रात ख़ुद सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हिरासत में लिए जाने की बात कही.
उन्होंने खुद की एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, “दिल्ली बॉर्डर पर 150 पदयात्रियों के साथ मुझे हिरासत में लिया जा रहा है. इसके लिए 100 पुलिस वाले हैं. कुछ का कहना है कि ये 1000 हैं.”
उन्होंने बताया, ''उनके साथ पदयात्रियों में 80 साल से ज़्यादा उम्र के बुज़ुर्ग भी हैं. इसमें महिलाएं भी शामिल हैं. इसके साथ कुछ दर्जन सेना से रिटायर्ड लोग भी हैं.''
वांगचुक ने लिखा, “आगे क्या होगा, कुछ पता नहीं है. हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में बापू की समाधि तक सबसे शांतिपूर्ण मार्च पर थे.”

दिल्ली पुलिस ने 6 दिन के लिए भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 को भी लागू कर दिया है.
पुलिस के मुताबिक नई दिल्ली, सेंट्रल दिल्ली, नॉर्थ दिल्ली के अलावा दिल्ली के सभी बॉर्डर्स पर ये धारा लागू की गई है और पाँच अक्टूबर तक इन जगहों पर धरना प्रदर्शन पर पाबंदी रहेगी.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक वांगचुक और उनके साथ आए कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने के बाद दिल्ली पुलिस उन्हें नरेला इंडस्ट्रियल एरिया के पुलिस स्टेशन में लाई है.
वांगचुक से मिलने जाएंगी दिल्ली की सीएम

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दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी का कहना है कि आज यानी मंगलवार दोपहर एक बजे वह सोनम वांगचुक से मिलने बवाना जाएंगी.
आतिशी ने एक्स पर लिखा है, “सोनम वांगचुक और हमारे 150 लद्दाखी भाई-बहन शांतिपूर्ण तरीक़े से दिल्ली आ रहे थे. उनको पुलिस ने रोक लिया है. कल रात से बवाना थाने में क़ैद हैं.”
उन्होंने लिखा, “क्या लद्दाख के लिए लोकतांत्रिक अधिकार मांगना ग़लत है? क्या दो अक्टूबर को सत्याग्रहियों का गांधी समाधि जाना ग़लत है? सोनम वांगचुक जी को रोकना तानाशाही है.”
आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री सौरभ भारद्वाज ने लिखा कि सोनम वांगचुक के साथ जो बर्ताव किया जा रहा है, वह ठीक नहीं है क्योंकि उन्हें लोग देवता की तरह मानते हैं और उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज और देश के लिए समर्पित कर दिया है.
उन्होंने लिखा कि 80 साल का एक बुज़ुर्ग अपने लद्दाख के लिए कुछ मांगने के लिए देश की राजधानी में आ रहा है और महात्मा गांधी की समाधि पर जाना चाहता है और ऐसे में केंद्र सरकार ने दिल्ली में कर्फ्यू लगा दिया है.
दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आप नेता मनीष सिसोदिया ने भी नाराजगी जाहिर की है.
समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा, “सोनम वांगचुक जैसे देशभक्त लोग, देश के मुद्दों को उठाने वाले लोग, देश की जनता की पीड़ा को उठाने वाले लोग अगर चंद लोगों के साथ एक पदयात्रा करते हुए लद्दाख से आपके यहां पर आए हैं, तो आप उन लोगों के साथ आतंकवादियों की तरह सलूक कर रहे हो कि आतंकवादी घुस जाएंगे.”
उन्होंने लिखा, “अगर आपमें हिम्मत है तो गैंगस्टर्स को रोको. दिल्ली पुलिस की जिस शक्ति का इस्तेमाल, जिस इंटेलिजेंस का इस्तेमाल मोदी जी, अमित शाह जी और दूसरे लोग सोनम वांगचुक को रोकने के लिए कर रहे हैं, वही इस्तेमाल गैंगस्टर को रोकने के लिए किया गया होता तो दिल्ली गैंगस्टर्स की राजधानी नहीं बनती."
कांग्रेस हमलावर

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोनम वांगचुक को बापू की समाधि आने से रोकने पर सवाल उठाए हैं.
उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “पर्यावरण और संवैधानिक अधिकारों के लिए शांतिपूर्वक मार्च कर रहे सोनम वांगचुक और सैकड़ों लद्दाख के लोगों की हिरासत अस्वीकार्य है. लद्दाख के भविष्य के लिए आवाज़ उठाने वाले बुजुर्ग नागरिकों को दिल्ली की सीमा पर हिरासत में क्यों लिया जा रहा है?”
राहुल गांधी ने लिखा, “मोदी जी, किसानों की तरह ये ‘चक्रव्यूह’ और आपका अहंकार भी टूटेगा. आपको लद्दाख की आवाज़ सुननी ही पड़ेगी.”
कांग्रेस पार्टी के महासचिव और वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने लिखा, “गांधी जयंती से एक दिन पहले भारत सरकार एक बार फिर उनके आदर्शों की हत्या करने के लिए तैयार है.”
उन्होंने लिखा, “सोनम वांगचुक जी की गिरफ्तारी से पता चलता है कि सरकार अपने अधिकारों के लिए बोलने वाले किसी भी व्यक्ति से डरती है. लद्दाख को ख़ामोश कर दिया गया है. उसके लोकतांत्रिक अधिकार छीन लिए गए हैं. वह बड़े कॉरपोरेट्स को सौंपे जाने की कगार पर है.”
ऐसी ही बात कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी लिखी है. उनका कहना है, “दिल्ली किसी की बपौती है क्या? ना किसान आ सकते हैं, ना लद्दाखी, ना युवा. जनता को भला कौन रोक सकता है? यह बात एक कायर तानाशाह को समझ नहीं आ रही, लानत है.”
पत्रकारों ने जताई नाराज़गी

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न्यूज वेबसाइट द वायर के फाउंडिंग एडिटर सिद्धार्थ वरदराजन ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि जब वांगचुक को सत्याग्रहियों के साथ दिल्ली में आने की इजाजत नहीं दी जाती, तो ये साफ़ हो जाता है कि भारत में अब लोकतंत्र मौजूद नहीं है और मोदी सरकार शांतिपूर्ण विरोध को एक ख़तरा मानती है.
पर्यावरण पत्रकार हृदेश जोशी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “अब जब सोनम वांगचुक का संघर्ष दिल्ली पहुंच चुका है, तो हम जैसे लोगों को भी कुछ कहने का हक होना चाहिए, जो हालात इस दहलीज पर पहुँचने के दशकों पहले से याद दिलाते रहे कि देश का हर भूभाग एक सा नहीं है. कुछ बहुत संवेदनशील बायोस्फीयर हैं, जिनका विशेष ख्याल रखा जाना जरूरी है.
वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने लिखा, “सोनम वांगचुक की पदयात्रा को रोकने का प्रयास निंदनीय है. लद्दाख से उनके साथ आए लोगों का स्वागत होना चाहिए. मसला पर्यावरण मंत्री का है और फैसला पुलिस मंत्री ले रहे हैं. 120 लोगों को किस क़ानून के आधार पर रोका गया?”
अखिलेश यादव ने क्या कहा

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि जो लोग शांति से डरते हैं वो लोग अंदर से डरे हुए होते हैं.
उन्होंने लिखा, “भाजपा सरकार पर्यावरण रक्षक और लद्दाख हितैषी सोनम वांगचुक जी की शांतिपूर्ण दिल्ली यात्रा को बाधित करके कुछ भी हासिल नहीं कर सकती. केंद्र अगर सरहद की आवाज नहीं सुनेगा तो उसकी राजनीतिक श्रवणहीनता कहलाएगी.”
राकेश टिकैत ने लिखा, “लद्दाख से दिल्ली तक पैदल मार्च कर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने आ रहे सोनम वांगचुक व अन्य लोगों को दिल्ली पुलिस ने डिेटन कर लिया है. यह सब गैरकानूनी और असंवैधानिक है. हम आजाद देश के लोग हैं और हमें अपनी बात रखने का अधिकार है. हम सभी लोग उनके साथ हैं.”
कौन हैं सोनम वांगचुक

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बॉलीवुड फिल्म ‘थ्री इडियट’ के बाद सोनम वांगचुक चर्चा में आए थे. कहा जाता है कि यह फ़िल्म उनके जीवन से प्रेरित थी.
एनआईटी श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले वांगचुक पिछले 30 सालों से शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में काम कर रहे हैं.
वे स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख के संस्थापक निदेशक हैं. इसका मक़सद हिमालय क्षेत्र में सरकारी स्कूल प्रणाली में सुधार लाना है.
नोबल प्राइज वेबसाइट के मुताबिक वांगचुक ने लेह के पास एक ऐसे स्कूल बनाया है, यहां सिर्फ़ उन बच्चों को एडमिशन दिया जाता है जो परीक्षा में फेल हो जाते हैं. यहां वांगचुक बच्चों को नई-नई चीज़ें सिखाते हैं.
जलवायु परिवर्तन और तेज़ी से पिघलते ग्लेशियरों के कारण पैदा हुए जल संकट से निपटने के लिए उन्होंने आर्टिफिशियल हिमनद आइस स्तूप का आविष्कार किया है, जो सर्दियों में बर्बाद होने वाले पानी को बड़े-बड़े स्तूपों में जमा देता है.
सोनम वांगचुक ने 1 सितंबर, 2024 को लेह से दिल्ली चलो पदयात्रा शुरू की थी. इस पदयात्रा का मकसद लद्दाख को राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल कराना है.
5 अगस्त 2019 को भारतीय संसद ने संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करते हुए जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष राज्य के दर्जे को समाप्त कर दिया था.
जम्मू-कश्मीर से लद्दाख को अलग करते हुए तब दोनों को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था.
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