अमेरिकी-तुर्की महिला की इसराइली सेना की फ़ायरिंग में मौत, अर्दोआन ने कही ये बात

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- Author, मालू कर्सिनो
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
इसराइल के क़ब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में इसराइली सेना की गोलीबारी में शुक्रवार को 26 साल की एक तुर्की-अमेरिकी महिला की सिर में गोली लगने से मौत हो गई.
दोहरी नागरिकता वाली आयसेनुर एज़गी ईगी, नाबलस के पास बेइटा क़स्बे में नई यहूदी बस्ती बनाने के ख़िलाफ़ प्रदर्शन में हिस्सा ले रही थीं.
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईगी को इसराइली सैनिकों ने गोली मार दी.
इसराइली डिफ़ेंस फ़ोर्सेज़ (आईडीएफ़) ने कहा कि इलाक़े में गोली चलने से एक विदेशी नागरिक की मौत की ख़बरों की पड़ताल की जा रही है.
शुक्रवार को हुए प्रदर्शन में शामिल अन्य लोगों ने बीबीसी को बताया कि इंटरनेशनल सॉलिडेरिटी मूवमेंट के साथ हुए प्रदर्शन में ईगी पहली बार शामिल हुई थीं.
इंटरनेशनल सॉलिडेरिटी मूवमेंट एक फ़लस्तीनी समर्थक ग्रुप है.

अर्दोआन की कड़ी प्रतिक्रिया

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अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने इस घटना को “दुखद” बताया है जबकि तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने इसराइली कार्रवाई को “बर्बर” बताया है.
अर्दोआन ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, “वेस्ट बैंक में कब्ज़े के ख़िलाफ़ नागरिक प्रदर्शन पर इसराइल के बर्बर हमले की मैं निंदा करता हूं. मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि वो हमारे देश की नागरिक आयसेनुर एज़्गी ईगी की आत्मा को शांति प्रदान करे, जिनकी इस हमले में जान चली गई.”
“तुर्की हर मंच से कोशिश करता रहेगा कि इसराइल के कब्ज़े और जनसंहार की नीति ख़त्म हो, जो कि एक साल से जारी है और जिसने 41 हज़ार लोगों की जान ले ली है, जिसमें बच्चे, नौजवान और बुज़ुर्ग शामिल हैं. तुर्की इंसानियत के ख़िलाफ़ अपराधों के लिए इसराइल को उसके गुनाहों की सज़ा दिलाने की कोशिशें जारी रखेगा.”
तुर्की के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि “ईगी को नाबलस शहर में इसराइली क़ब्ज़ाधारी सैनिकों ने मार डाला.”
व्हाइट हाउस ने इस बारे में कोई आरोप नहीं लगाया है लेकिन इसराइल से इस मामले की जांच करने को कहा है.
इससे पहले अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा कि “इस मौत के हालात को लेकर वॉशिंगटन तत्काल रूप से और जानकारियां जुटा रहा है.”
तुर्की की मीडिया में कहा गया है कि ईगी का जन्म एंटाल्या में हुआ था.
गोली लगने के बाद ईगी को तुरंत राफ़िदिया हॉस्पीटल पहुंचाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.
अस्पताल के प्रमुख डॉ. फ़ौद नाफ़ा ने इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिकी नागरिक को “सिर में गोली मारी” गई थी.
इसराइली सेना ने क्या कहा?

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इसराइली सेना ने अपने एक बयान में कहा है, “आज (शुक्रवार) बेइता के पास के इलाक़े में इसराइली सुरक्षा बलों की कार्यवाही के दौरान, सैनिकों ने हिंसा भड़काने वाले मुख्य व्यक्ति की ओर गोली चलाई थी. इस व्यक्ति ने सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंके थे और इससे उनको ख़तरा लगा.”
“आईडीएफ़ इस मामले को देख रहा है कि कैसे एक विदेशी नागरिक की मौत हुई. घटना की विस्तृत जानकारी और किन हालात में मौत हुई इसकी पड़ताल की जा रही है.”
एक इसराइली एक्टिविस्ट जोनाथन पोलाक भी उसी प्रदर्शन में ईगी के साथ मौजूद थे. उन्होंने कहा कि उन्होंने “एक के बाद एक दो बार गोली चलने की आवाज़ सुनी...और इसके बाद एक और गोली की आवाज़ सुनी.”
पोलाक ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा, “मैंने देखा कि वो एक पेड़ के पीछे ज़मीन पर पड़ी हुई हैं. उनके सिर से बहुत सारा खून निकल रहा था. ”
पोलाक ने ईगी के सिर को पकड़ा था तो उनका हाथ भी खून से सन गया था.
अपना हाथ दिखाते हुए उन्होंने बताया, “मैंने नब्ज़ देखी, जो बहुत धीमे चल रही थी. इसके बाद मैंने एंबुलेंस को बुलाया.”
उन्होंने कहा, “वहां से हम उन्हें गांव के मेडिकल सेंटर ले गए, जहां डॉक्टर एंबुलेंस लेकर आए और उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया. वहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे.”
पोलाक का कहना था कि “यह हत्या अब ख़बरों में हैं क्योंकि वो एक अमेरिकी नागरिक हैं.”
चश्मदीद ने क्या बताया?

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बीबीसी न्यूज़ऑवर प्रोग्राम में पोलाक से इसराइली सेना के उस बयान के बारे में पूछा गया था कि ‘सुरक्षा बल हिंसा भड़काने वाले व्यक्ति को जवाब दे रहे थे, जिसने पत्थर फेंके थे और इससे सुरक्षा बलों के लिए ख़तरा पैदा गया था.’
पोलाक ने कहा कि वहां भिड़ंत हो रही थी लेकिन उन्हें लगा था कि “सैनिकों पर कोई ख़तरा नहीं था.”
उन्होंने ये भी कहा कि 'जहां ईगी को गोली मारी गई, वो बिल्कुल अलग जगह थी और ये एक अलग घटना थी.'
उन्होंने कहा कि 'जहां ईगी मौजूद थीं, वहां से पत्थर नहीं फेंके गये थे.'
क़ब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में जेनिन शहर और इसके रेफ़्यूजी कैंप मैं नौ दिनों तक बड़ा सैन्य अभियान चलाने के बाद इसराइली सैनिक शुक्रवार को वापस लौट गए.
फ़लस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इस दौरान 36 फ़लस्तीनियों की मौत हुई जिनमें अकेले जेनिन शहर में 21 मौतें हुईं.
इसराइल का दावा है कि मारे गए अधिकांश लोगों में हथियारंबद ग्रुपों के सदस्य थे, लेकिन मंत्रालय का कहना है कि मरने वालों में बच्चे भी शामिल हैं.
पिछले 50 सालों से इसराइल ने वेस्ट बैंक और पूर्वी यरूशलम में कई नई बस्तियां बसाई हैं, जहां अब सात लाख से अधिक यहूदी रह रहे हैं.
अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के अनुसार, ये बस्तियां ग़ैरक़ानूनी हैं.
हालांकि इसराइल इस दावे को ख़ारिज़ करता आया है लेकिन संयुक्त राष्ट्र और ब्रिटेन सरकार इन बस्तियों को ग़ैरक़ानूनी मानते हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित


















