न्यूज़ एंकरों के बहिष्कार से ‘इंडिया’ गठबंधन को क्या हासिल होगा?

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    • Author, चंदन कुमार जजवाड़े
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

भारत में प्रमुख विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ ने तय किया है कि उनके नेता कुछ न्यूज़ एंकरों के शो में भाग नहीं लेंगे.

‘इंडिया’ की तरफ़ से अलग-अलग न्यूज़ चैलनों के ऐसे 14 एंकरों की सूची भी जारी की गई है, जिनके बहिष्कार का फ़ैसला लिया गया है.

गठबंधन की तरफ से कहा गया है कि ‘नफ़रत भरे’ न्यूज़ डिबेट चलाने वाले ऐसे टीवी एंकरों के बहिष्कार का फ़ैसला किया गया है.

भारत में यह ऐसा पहला बड़ा मौक़ा है जिसमें किसी राजनीतिक दल या गठबंधन ने सामूहिक तौर पर इस तरह का फ़ैसला लिया हो.

वहीं, सत्ताधारी दल बीजेपी ने इसे 'आपातकाल की मानसिकता' बताया है.

विपक्ष के इस फ़ैसले पर कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा का कहना है, “हर शाम पांच बजे कुछ न्यूज़ चैनलों पर नफ़रत का बाज़ार सज जाता है. पिछले नौ साल से यही चल रहा है. अलग-अलग पार्टियों के कुछ प्रवक्ता इन बाज़ारों में जाते हैं. कुछ एक्सपर्ट जाते हैं, कुछ विश्लेषक जाते हैं. लेकिन सच यह है कि हम सब वहां उस नफ़रत के बाज़ार में ग्राहक के तौर पर जाते हैं.”

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भारत में न्यूज़ चैनल पर होने वाले टिबेट को लेकर कई बार विवाद हुए हैं.

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गठबंधन की ओर से जिन एंकरों के प्रोग्राम में अपने नेताओं को नहीं भेजने का फ़ैसला किया गया है; वो हैं- अदिति त्यागी, अमन चोपड़ा, अमीश देवगन, आनंद नरसिम्हन, अर्णब गोस्वामी, अशोक श्रीवास्तव, चित्रा त्रिपाठी, गौरव सावंत, नाविका कुमार, प्राची पाराशर, रुबिका लियाकत, शिव अरूर, सुधीर चौधरी और सुशांत सिन्हा.

एंकरों पर आरोप

पवन खेड़ा का कहना है कि नफ़रत भरा नैरेटिव समाज को कमज़ोर कर रहा है.

लेकिन विपक्ष के इस फ़ैसले के बाद कई पत्रकारों, जिनमें ख़ासतौर पर टीवी चैनलों से जुड़े पत्रकार हैं और केंद्र में सत्ता पर बैठी बीजेपी की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया आई है.

'इंडिया' गठबंधन के इस फ़ैसले पर बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा है, ''न्यूज़ एंकरों की इस तरह लिस्ट जारी करना नाज़ियों के काम करने का तरीक़ा है, जिसमें यह तय किया जाता है कि किसको निशाना बनाना है. अब भी इन पार्टियों के अंदर इमरजेंसी के वक़्त की मानसिकता बनी हुई है.''

न्यूज़ चैनल आजतक, इंडिया टुडे और जीएनटी के न्यूज़ डायरेक्टर सुप्रिय प्रसाद ने एक्स (पहले ट्विटर) पर इस फ़ैसले का विरोध करते हुए लिखा है, "मैं इस निरंकुश क़दम की कड़ी निंदा करता हूं. इस एकतरफ़ा क़दम को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए.’’

एबीपी नेटवर्क के सीईओ और एनबीडीए के अध्यक्ष अविनाश पांडे ने इस फ़ैसले पर कहा, ''यह फ़ैसला मीडिया का गला घोंटने जैसा है. जो गठबंधन लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात करता है वो इसे ख़त्म करता दिख रहा है. लेकिन हम अपने हर शो में सभी को बुलाएंगे.’’

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वहीं एनडीटीवी के एंकर रहे रवीश कुमार ने भी एक्स (ट्विटर) पर इस फ़ैसले पर लिखा है, ''सात साल बहिष्कार झेला है. सात घंटे भी नहीं हुए. ऐसा लग रहा है कल प्रधानमंत्री पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ही देंगे. प्रेस की आज़ादी की रक्षा के लिए...”

रवीश कुमार लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि एनडीटीवी में उनके शो का बीजेपी ने बहिष्कार कर रखा था और बीजेपी का कोई भी नेता उनके शो में शामिल नहीं होता था.

विपक्ष का फ़ायदा?

अगर कोई एंकर नफ़रत फ़ैलाने वाली बात करता है या उसका रवैया पक्षपाती है, जैसा कि ‘इंडिया’ का आरोप है, तो उनके शो में विपक्ष के नेताओं के शामिल न होने से क्या हासिल होगा? ऐसी स्थिति में एंकर के सामने दूसरे पक्ष से कोई मौजूद नहीं होगा, तो क्या इससे विपक्ष का नुक़सान नहीं होगा?

इस सवाल पर वरिष्ठ पत्रकार एनके सिंह कहते हैं, “एंकर के बहिष्कार से चैनलों की विश्वसनीयता पर एक तरह का हमला किया गया है. कहा गया है कि तुम पक्षपाती हो और जो कुछ नौ साल से हो रहा था लोग देख रहे हैं.”

भारत में टीवी चैनलों के डिबेट शो पर सुप्रीम कोर्ट भी टिप्पणी कर चुका है.

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एनके सिंह के मुताबिक़, 'किसी भी लोकतंत्र में चार चीज़ें प्रमुख होती हैं, बहुमत का शासन, अल्पसंख्यकों को मान्यता, संवैधानिक सरकार और संवाद के माध्यम से शासन. न्यूज़ चैनल की भूमिका चर्चा से शासन में है. यह कोई साइकिल का ठेका नहीं है कि किसी को पांच साल के लिए दे दिया गया कि जो चाहे करो.'

वरिष्ठ पत्रकार और टीवी टुडे नेटवर्क के पूर्व न्यूज़ डायरेक्टर क़मर वहीद नक़वी कहते हैं कि 'एंकर का बहिष्कार करना विरोध जताने का एक तरीका है. वो बताना चाहते हैं कि आप जो कर रहे हो, सही नहीं कर रहे हो.'

नक़वी कहते हैं, “बहुत से एंकर किसी एक निश्चित पूर्वाग्रह को लेकर चल रहे हैं और डिबेट कर रहे हैं. वो उसमें एक पक्ष की खाल उधेड़ रहे हैं और दूसरे पक्ष के साथ खड़े हैं या उन्हें कुछ नहीं बोल रहे हैं. एंकर का काम डिबेट को संचालित करना होता है, किसी पक्ष की तरफ जाना नहीं होता है.”

सोशल मीडिया से मिली हिम्मत?

क़मर वहीद नक़वी का कहना है कि 'विपक्ष के नेताओं ने चैनलों को नहीं, एंकरों को छोड़ा है. दूसरी बात यह है कि आज सोशल मीडिया का ज़माना है और सबको इसने एक प्रभावी विकल्प दिया है. एंकर का बहिष्कार कर मुख्यधारा की मीडिया को आईना दिखाया गया है. अब मुख्यधारा की मीडिया का मनमानापन उस स्तर पर नहीं रह गया है, जो पहले था.'

सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की ताक़त और असर का अंदाज़ा इस बात से भी लगता है कि देश के कई इलाक़ों में स्थानीय यू-ट्यूब चैनल से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर कई मशहूर पत्रकार यू-ट्यूब चैनल पर न्यूज़ शो और डिबेट करते हैं.

अब लोग फ़ेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम के माध्यम से भी ख़बरों से जुड़े रहते हैं.

एनके सिंह कहते हैं कि अब लोग टीवी चैनल से शिफ़्ट कर रहे हैं, सोशल मीडिया को देख रहे हैं.

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी अपनी 'भारत जोड़ो' यात्रा के दौरान यू-ट्यूबर्स को काफ़ी अहमियत दी थी. इसके अलावा भारत में केंद्र में सत्ता पर बैठी बीजेपी भी इस तरह के प्लेटफ़ार्म को लेकर गंभीर दिखती है.

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह कहते हैं कि अगर ये एंकर एकपक्षीय ख़बर दिखाएंगे तो ऐसी ख़बरें कौन देखेगा? ये एंकर इंडिया गठबंधन के दलों का इस्तेमाल एक पंचिंग बैग के तौर पर कर रहे थे, अब उन्हें पंचिंग बैग नहीं मिलेगा.

संजय सिंह आरोप लगाते हैं, “मेरा अपना मानना है कि आतंकवादी हाथ में हथियार लेकर हिंसा और नफ़रत फैलाता है. ये एंकर शाम पांच बजे से रात ग्यारह बजे तक बौद्धिक आतंकवादी का रोल प्ले कर रहे थे. ये कोर्ट, पैंट, टाई पहनकर नफ़रत फ़ैला रहे थे. इन पर रोक लगाने का फ़ैसला पहले होना चाहिए था.”

वहीं कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक ने रहीम के दोहे का इस्तेमाल करते हुए एंकरों के बहिष्कार के विपक्ष के फ़ैसले पर टिप्पणी की है.

रागिनी नायक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा है, “खीरा सिर ते काटिए, मलियत नोन लगाय. रहिमन करुए मुखन कौ, चहियत यही सजाय.”

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सोशल मीडिया ख़बरों को जानने का बड़ा माध्यम बनता जा रहा है.

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भारत में कई बार टीवी डिबेट के दौरान दो पक्षों के बीच हाथापाई तक की नौबत देखी गई है. इसके अलावा भाषा के स्तर पर भी टीवी डिबेट को लेकर कई बार सवाल उठते हैं.

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने भारत में टीवी चैनलों की बहस की सामग्री पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की थी और केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार मूकदर्शक बन कर ये सब देख रही है और इस मामले को बहुत छोटा आंक रही है.

अब विपक्ष के आरोपों के घेरे में आने के बाद उन एंकरों के शो में कोई बदलाव होता है या नहीं, यह देखना भी दिलचस्प होगा.

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