'इंडिया' गठबंधन किन एंकरों का करेगा बहिष्कार?- प्रेस रिव्यू

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विपक्षी दलों के गठबंधन 'इंडिया' की मुंबई बैठक में बनी समन्वय समिति के सदस्यों की पहली मुलाक़ात बुधवार को दिल्ली में हुई.
इस मुलाक़ात में इंडिया गठबंधन की आगे की रणनीति पर चर्चा की गई है.
इसी बैठक से जुड़ी ख़बरों को प्रमुख अख़बारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. द टेलीग्राफ की रिपोर्ट में इस बैठक से जुड़ी जानकारियां बताई गई हैं.
टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक़, इंडिया गठबंधन के नेताओं ने तय किया है कि वो अपने नेताओं और प्रवक्ताओं को कुछ टीवी एंकर्स के शो में भेजना बंद करेंगे.
विपक्षी दलों के नेता अक्सर कुछ टीवी एंकर्स पर बीजेपी और आरएसएस का समर्थन करने का आरोप लगाते रहे हैं. राहुल गांधी भी कई बार मीडिया पर तंज़ कसते हुए दिखे थे.
दिल्ली में शरद पवार के घर पर हुई बैठक के बाद साझा बयान जारी कर कहा गया, ''समन्वय समिति ने ऐसे टीवी एंकर्स के नामों की लिस्ट तैयार करने के लिए कहा है, जिनके शो में इंडिया गठबंधन के नेता नहीं जाएंगे.''
टेलीग्राफ लिखता है कि ये संभवत: पहली बार है, जब विपक्षी दलों ने सत्ता की तरफ़दारी करने वाले पत्रकारों को निशाना बनाने का फ़ैसला किया है.
गुरुवार को इंडिया गठबंधन की ओर से उन 14 एंकरों की सूची जारी कर दी गई है, जिनके प्रोग्राम इसके नेताओं ने नहीं जाने का फ़ैसला किया है.
ये एंकर हैं- अदिति त्यागी, अमन चोपड़ा, अमीश देवगन, आनंद नरसिम्हन, अर्णब गोस्वामी, अशोक श्रीवास्तव, चित्रा त्रिपाठी, गौरव सावंत, नाविका कुमार, प्राची पाराशर, रुबिका लियाकत, शिव अरूर, सुधीर चौधरी,और सुशांत सिन्हा.

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तीन मीडिया घरानों का पूरी तरह बहिष्कार
अख़बार लिखता है कि विपक्षी दलों के बीच इस बात को लेकर सहमति है कि कम से कम तीन मीडिया घरानों से किसी तरह का कोई नाता नहीं रहेगा.
विपक्षी दलों का आरोप है कि ये न्यूज़ चैनल बीजेपी और आरएसएस के लिए काम करते हैं.
हालांकि अभी इंडिया गठबंधन की ओर से टीवी चैनलों और एंकर्स के नामों का एलान नहीं हुआ है.
समन्वय समिति की सदस्य और जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने 'गोदी मीडिया' शब्द का इस्तेमाल करके संकेत देने की कोशिश की.
वहीं सपा नेता जावेद अली ख़ान ने कहा कि ऐसे एंकर जो समाज में नफ़रत फैलाते हैं.
एक वरिष्ठ नेता ने टेलीग्राफ से कहा, ''पिछले कुछ हफ़्तों में हमने इस पर विस्तार से चर्चा की है. कुछ लोगों के नामों पर बात हुई है. बात सिर्फ़ ये नहीं है कि ये लोग आरएसएस और बीजेपी का समर्थन करते हैं बल्कि ये लोग समाज में ज़हर घोलते हैं. ये लोग ऐसे मुद्दे चुनते हैं, जिससे सांप्रदायिक तनाव फैलता है. ये रोज़ प्रोपैगेंडा के तहत काम करते हैं. ये सिर्फ़ राजनीतिक पक्षपात की बात नहीं है, ये पत्रकारिता के मूल्यों के उल्लंघन की भी बात है.''

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जब मीडिया कवरेज को लेकर विपक्ष ने की थी प्रेस कॉन्फ्रेंस
टेलीग्राफ अख़बार लिखता है कि साल 2004 में कांग्रेस इस बात से चिंतित थी कि मीडिया उसे पर्याप्त स्पेस नहीं दे रही है.
तब मनमोहन सिंह, प्रणब मुखर्जी, नटवर सिंह, ग़ुलाम नबी आज़ाद और अर्जुन सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और संपादकों से अपील की थी कि निष्पक्ष होकर लोकतांत्रिक सिद्धांतों का पालन करें.
तब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी और विपक्षी दलों के नेताओं के ख़िलाफ़ झूठा अभियान चलाने जैसी कोई शिकायत नहीं थी.
टेलीग्राफ लिखता है कि अब सरकार का समर्थन और विपक्ष पर हमला ज़्यादा दिखता है.
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अख़बार लिखता है कि विपक्ष अब मीडिया चैनलों की कवरेज चाहने की बजाय उस पर आक्रामक होने की तैयारी कर रहा है.
कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत से मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूछा गया था, ''आप चरणचुंबक मीडिया किसे कहती हैं और आप पत्रकारों का अपमान कैसे कर सकती हैं?''
इस पर सुप्रिया श्रीनेत ने जवाब दिया था, ''पत्रकार जिस दिन पत्रकारिता करना शुरू कर देंगे और आंख में आंख डालकर सत्ता से महंगाई, बेरोज़गारी, मणिपुर और अदानी के मुद्दे पर सवाल पूछेंगे, उस दिन मैं पत्रकारों की इज्जत करूंगी. कुछ की मैं करती हूं. अन्यथा सरकार के इशारों पर चलने वाले न्यूज़रूम जो पीएमओ के चपरासी के वॉट्सऐप पर चलते हैं, उनके लिए मेरे मन में कोई सम्मान नहीं. वो चरण चुंबन का काम करते हैं तो चरण चुंबक कहलाएंगे.''

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समन्वय समिति की बैठक में और क्या हुआ
पटना, बेंगलुरु, मुंबई बैठक के बाद दिल्ली में इंडिया के नेताओं की मुलाक़ात हुई तो इसमें सीटों के बँटवारे पर भी चर्चा हुई.
विपक्ष ने बताया है कि पार्टी के सदस्य इस बारे में बैठक करेंगे और जल्दी ही बताएंगे.
कमिटी ने फ़ैसला किया है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में जनसभाएं की जाएंगी.
इसी के तहत पहली जनसभा भोपाल में की जानी है. ये जनसभा अक्टूबर में की जाएगी. जनसभा में महंगाई, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को उठाया जाएगा.
बैठक में जातीय जनगणना के मुद्दे को भी आगे ले जाने पर सहमति बनी है.

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मीडिया ट्रायल पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से क्या कहा
हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक़, सुप्रीम कोर्ट ने गृह मंत्रालय से पुलिस के मीडिया ब्रीफिंग को लेकर गाइडलाइंस बनाने के लिए कहा है.
कोर्ट ने कहा है कि तीन महीने के अंदर सरकार इस बारे में गाइडलाइंस बनाए कि किसी जांच के दौरान पुलिस कैसे मीडिया की ब्रीफिंग करे.
कोर्ट ने कहा कि ऐसा करके मीडिया ट्रायल, पक्षपाती रिपोर्टिंग को रोका जाए. साथ ही इसका भी ख़्याल रखा जाए कि पारदर्शिता बनी रहे.
इस मामले में अगली सुनवाई जनवरी में होनी है.
कोर्ट ने सरकार से राज्यों के डीजीपी, एनएचआरसी से भी सुझाव लेने के लिए कहा है.
पहले भी कई बार कुछ मामलों में जैसा मीडिया कवरेज हुआ, उस पर अदालत की टिप्पणी आती रही हैं.

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आरबीआई ने बैंकों से कहा- 30 दिन में लौटाएं प्रॉपर्टी पेपर
द इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़, रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैकों और कर्ज देने वाली नॉन बैंकिंग कंपनियों से कहा है कि लोन चुकाने के 30 दिनों के भीतर प्रॉपर्टी के दस्तावेज़ मालिकों को लौटाए जाएं.
अखबार ने इसे पहले पन्ने पर जगह दी है.
आरबीआई ने कहा है कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो प्रति दिन के हिसाब से पांच हज़ार रुपये चुकाने होंगे.
साथ ही कर्ज लेने वाले शख़्स को देरी की वजह भी बताना ज़रूरी होगा.
ये आदेश 1 दिसंबर से लागू होगा.
आरबीआई ने कहा कि अगर क़र्ज़ देने वाले बैंक या कंपनी से प्रॉपर्टी के कागज खो जाते हैं तो नए दस्तावेज़ों को निकलवाने और इसका खर्च उठाने की ज़िम्मेदारी भी बैंक या कंपनी की ही होगी.

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केरल में तेज़ी से बढ़ता निपाह वायरस
केरल में निपाह वायरस के तेज़ी से बढ़ने की ख़बर को द टाइम्स ऑफ इंडिया ने पहले पन्ने पर जगह दी है.
ख़बर के मुताबिक़, केरल में निपाह वायरस का पांचवां मामला सामने आया है.
केरल में इस वायरस के कारण अब तक दो लोगों की मौत हो गई है.
ताज़ा मामला कोझिकोड के निजी अस्पताल में काम करने वाले 24 साल के हेल्थवर्कर से जुड़ा है.
बुधवार तक कोझीकोड में 58 कंटेनमेंट ज़ोन बनाए गए हैं और प्रशासन हाई अलर्ट पर है.
साल 2018 में भी केरल में तेज़ी से निपाह वायरस के मामले सामने आए थे.


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