भारतीय मीडिया लोकतंत्र को बर्बाद कर रहा है: रवीश कुमार #BeyondFakeNews

रवीश कुमार

बीबीसी के लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम #BeyondFakeNews में वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने कहा है कि आजकल मीडिया ने ही बहुत सी ख़बरें ग़ायब कर दीं हैं.

उन्होंने कहा कि अब तो 'नो न्यूज़ भी फ़ेक न्यूज़ है.'

एक पैनल में चर्चा के दौरान रवीश कुमार ने कहा, "असली ख़बरों के बजाए आप कुछ और पढ़ रहे हैं. क़ाबिल पत्रकारों के हाथ बांध दिए गए हैं. अगर क़ाबिल पत्रकारों का साथ दिया गया तो वो ही इस लोकतंत्र को बदल देंगे. लेकिन भारत का मीडिया, बहुत होश-हवास में, सोच समझकर भारत के लोकतंत्र को बर्बाद कर रहा है. अख़बारों के संपादक, मालिक इस लोकतंत्र को बर्बाद करने में लगे हुए हैं. समझिए किस तरह से हिंदू-मुस्लिम नफ़रत की बातें हो रही हैं."

इसी चर्चा में हिस्सा ले रहे थे पूर्व आईएएस अधिकारी तनवीर जफ़र अली.

उन्होंने कहा, "फ़ेक न्यूज़ से हिंसा हो रही है. ये स्टेट के ख़िलाफ़ अपराध है. इसे रोकने के लिए सख़्त क़ानून बनाए जाने की ज़रूरत है."

एक अन्य सत्र में फ़ेसबुक से जुड़े मनीष खंडूरी जब ये पूछा गया कि चुनावों में फ़ेक न्यूज़ को रोकने के लिए आप क्या कर रहे हैं? तो उन्होंने कहा, "हम तथ्य को जांचने के लिए और अधिक बाहरी लोगों को रख रहे हैं. फ़ेसबुक पर मौजूद सामग्री की स्वच्छता को बरक़रार रखने के लिए हम कई प्रयास कर रहे हैं और इन पर काफ़ी पैसा ख़र्च कर रहे हैं. हम नीति निर्माताओं से बात भी कर रहे हैं. हम ट्रेनिंग भी करवा रहे हैं."

'फ़ेक न्यूज़ वाले देशद्रोही'

अखिलेश यादव

इससे पहले कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि जो लोग फ़ेक न्यूज़ को बढ़ावा दे रहे हैं, वो देशद्रोही हैं.

उन्होंने कहा कि ये प्रोपेगैंडा है और कुछ लोग इसे बड़े पैमाने पर कर रहे हैं.

अखिलेश ने कहा, "फ़ेक न्यूज़ एक वायरस की तरह है जिससे पूरा का पूरा देश कभी कभी पीड़ित हो जाता है. इससे लोगों की जान भी चली जाती है, ये कहना भी ग़लत नहीं होगा."

यादव ने कहा, "इस तरह के प्रचार पहले भी होते रहे हैं, हिटलर और मुसोलिनी के ज़माने भी झूठा प्रचार हो रहा था. आज हर व्यक्ति ब्रॉडकास्टर हो सकता है, कहीं से भी ख़बर को कहीं तक भी पहुंचा सकता है. ग़लत सूचना देना या हेरफेर करके सूचना देना भी फ़ेक न्यूज़ ही है."

उन्होंने कहा, "मैं अपने अनुभव से कह सकता हूं कि जिस समय समाजवादी सरकार थी उस समय एक तस्वीर वायरल की जाती थी- ट्रक से एक पुलिसकर्मी की जान जाने की तस्वीर. मैंने गृहसचिव से उस तस्वीर के वायरल होने का सोर्स पता करने के लिए कहा. पता चला गुड़गांव की मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाली एक लड़की उस झूठी ख़बर को फैला रही थी. मुझसे ग़लती हुई कि मैंने उसके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज नहीं कराई क्योंकि इससे उसका परिवार प्रभावित हो सकता था. आज मुझे उस लड़की को सज़ा न दिलवाने का अफ़सोस होता है."

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बहुजन समाज पार्टी से गठबंधन के सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा, "जहां तक दूसरे दल से गठबंधन का सवाल है, बहुत से दल नहीं चाहेंगे कि गठबंधन हो, उनकी कोशिश होगी कि ये दो विचारधाराएं न मिल जाएं. डॉक्टर लोहिया की समाजवादी विचारधारा और डॉक्टर आंबेडकर की विचारधारा एक न हो. लेकिन हमारी कोशिश होगी कि समाज में जिन्हें सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, जो सबसे ज़्यादा दुख में रह रहे हैं, शायद हम उन्हें अपनी विचारधारा से जोड़ पाएं तो हम कामयाब होंगे. समाजवादी लोग विकास करके जनता को जीतना चाहते हैं, बकवास करके नहीं. हमारी विचारधारा के क़रीब जो लोग होंगे उनका सहारा ज़रूर लिया जाएगा."

क्या बोले डिप्टी सीएम

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा के साथ बीबीसी हिंदी के संपादक मुकेश शर्मा
इमेज कैप्शन, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा के साथ बीबीसी हिंदी के संपादक मुकेश शर्मा

उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने कहा कि समाचार पहले ब्रेक करने की प्रतिद्वंद्विता के कारण चैनलों के प्रति विश्वसनीयता का भाव घटा है.

दिनेश शर्मा ने ये भी कहा कि इसका मतलब ये नहीं है कि सभी फ़ेक न्यूज़ फैला रहे हैं.

उन्होंने कहा कि फ़ेक न्यूज़ की चुनौती से निपटने के लिए सरकार के पास क़ानून बनाने का विकल्प है, लेकिन अगर सरकार ऐसा करेगी तो मीडिया की आज़ादी को सीमित करने का सवाल भी उठेगा.

उन्होंने ये भी कहा कि आज के दौर में सोशल मीडिया ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया को पीछे छोड़ दिया है.

बियोंड फ़ेक न्यूज़

दिनेश शर्मा ने माना कि सोशल मीडिया को रेग्युलेट करना आसान नहीं है. उन्होंने कहा कि प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े लोगों को बुलाकर बात की जा सकती है, लेकिन सोशल मीडिया के मामले में अभी ऐसा नहीं है.

शर्मा ने कहा, "आज सुबह उठने से लेकर सोने तक मोबाइल बाबा हमारा पीछा नहीं छोड़ रहा है. इसकी वजह से सूचना प्राप्त करने और साझा करने की दिशा में भी परिवर्तन आया है. इस परिवर्तन की वजह से हमारे पास ये विकल्प नहीं होता कि हम जल्दी से आई सनसनी भरी ख़बर की पुष्टि करें, हम बिना परिणाम की चिंता करे ख़बर को आगे बढ़ाने लगते हैं."

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एक उदाहरण देते हुए दिनेश शर्मा ने कहा, "मेरे पास एक शहर में दंगे की सूचना मोबाइल पर आई. मैंने तुरंत यूपी पुलिस के डीजीपी को फ़ोन किया. डीजीपी ने एसएसपी से जानकारी ली तो पता चला कि दो समुदाय के बच्चों के बीच आपस में किसी बात को लेकर कहासुनी हुई थी."

दिनेश शर्मा ने कहा, "आज के युवा हर चीज़ को सूक्ष्म नज़र से देखते हैं और उसका विश्लेषण भी करते हैं."

मीडिया का कर्तव्य बढ़ गया है. सत्य ख़बरों को रिपोर्ट करके ही समाज को सही दिशा दी जा सकती है. उत्तर प्रदेश में फ़ेक न्यूज़ का कम से कम असर हो इसके लिए सरकार काम करेगी.

बीबीसी के 'बियोंड फ़ेक न्यूज़' प्रोजेक्ट का मक़सद विश्व स्तर पर लोगों में एक अभियान के तहत 'मीडिया की साक्षरता' को बढ़ाना है.

इस अभियान के तहत भारत और कीनिया में पैनल डिबेट्स की सिरीज़ के अलावा 'हैकाथॉन' भी आयोजित किए जा रहे हैं.

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क्या कहती है बीबीसी की रिसर्च

  • बीबीसी ने भारत, कीनिया और नाइजीरिया में व्यापक रिसर्च की
  • ये रिपोर्ट विस्तार से समझाती है कि कैसे इनक्रिप्टड चैट ऐप्स में फ़ेक न्यूज़ फैल रही है.
  • ख़बरों को साझा करने में भावनात्मक पहलू का बड़ा योगदान है.
  • Beyond Fake news ग़लत सूचनाओं के फैलाव के ख़िलाफ़ एक अंतरराष्ट्रीय पहल है. सोमवार को (आज) इसे लॉन्च किया जा रहा है.
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