विपक्षी गठबंधन का नाम 'इंडिया' देने के पीछे की रणनीति जानिए- प्रेस रिव्यू

मल्लिकार्जुन खड़गे

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इमेज कैप्शन, बैंगलुरू में विपक्ष की बैठक में शामिल राहुल गांधी, सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और ममता बनर्जी

द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ बेंगलुरु में हुई विपक्षी दलों की बैठक के दौरान सीटों के बँटवारे को लेकर चर्चा नहीं हुई है.

17-18 जुलाई को बेंगलुरु में दो दिवसीय बैठक के दौरान 26 विपक्षी दलों ने अपने गठबंधन को नया नाम दिया. पार्टियां बीजेपी का मुक़ाबला करने के लिए ‘वैकल्पिक राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक एजेंडा’ देने पर भी सहमत हुई हैं.

अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़ इस दौरान सीटों के बँटवारे पर चर्चा नहीं हुई.

गठबंधन में शामिल राजनीतिक दल एक समय में एक ही काम करने की रणनीति पर चल रहे हैं. इस बार बैठक में राज्य के स्तर पर सीटों के बँटवारे की प्रक्रिया को लेकर चर्चा नहीं हुई.

गठबंधन का समन्वयक नियुक्त करने के फ़ैसले को भी अगली बैठक के लिए टाल दिया गया है. ये बैठक अगले महीने मुंबई में होगी.

बैठक में गठबंधन का नाम इंडिया यानी इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इनक्लूसिव अलायंस रखा गया है.

टेलीग्राफ़ ने अपने एक लेख में कहा है कि गठबंधन का नाम इंडिया रखना राष्ट्रवाद के मैदान-ए-जंग में विपक्ष का अंतिम क़दम है.

अख़बार लिखता है कि मौजूदा राजनीतिक युद्ध में राष्ट्रवाद से बीजेपी को स्पष्ट बढ़त मिलती दिखती है.

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लेख में कहा गया है, “इंडिया नाम को पसंद करना राष्ट्रवाद पर बीजेपी के एकाधिकार को चुनौती देने का सोचा-समझा फ़ैसला लगता है. इसमें भारत जोड़ों यात्रा का मूल संदेश भी शामिल है जो समुदायं, जातियों और अलग-अलग संस्कृतियों के बीच भाईचारा मज़बूत करके भारत के विचार को बचाने की कोशिशों पर आधारित है.”

अख़बार लिखता है कि ये बिडंबना ही है कि आरएसएस की उपज बीजेपी ने राष्ट्रवाद के मुद्दे को कांग्रेस से छीन लिया, जबकि कांग्रेस भारत की स्वतंत्रता के आंदोलन से पैदा हुई है और आरएसएस की इस आंदोलन में कोई भूमिका नहीं थी.

अख़बार ने लिखा है, बीजेपी अपनी राजनीति पर ‘नेशन फ़र्स्ट’ का तमगा लगाने में कामयाब रही है जबकि उसका ‘हिंदू राष्ट्रवाद’ संवैधानिक सिद्धांतों के नज़दीक नहीं है.

बीजेपी ने अपनी बहुसंख्यकवादी नीतियों से ना सिर्फ़ बड़ी हिंदू आबादी को अपनी तरफ़ खींचा बल्कि धर्मनिरपेक्ष दलों को राष्ट्रवाद के फ्रेमवर्क से ही बाहर कर दिया.

लेख में अखबार ने लिखा है कि राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के ज़रिये इसी भेदभावपूर्ण बहुसंख्यकवाद और हिंसक राष्ट्रवाद को जवाब देने की कोशिश की थी और अभी इसी भाव के साथ मोदी विरोधी गठबंधन का नाम इंडिया रखा गया है.

हालांकि इस नाम को क़ानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि बीजेपी विपक्षी गठबंधन के इस सांकेतिक महत्व वाले नाम से बहुत सहज नहीं होगी.

हालांकि ये तो साफ़ ही है कि विपक्षी दल ये संदेश देने में तो कामयाब ही हुए हैं कि ये लड़ाई सत्ता को हथियाने की नहीं हैं बल्कि इंडिया को बचाने की है.

एनसीबी ने सुप्रीम कोर्ट में रिया चक्रवर्ती की ज़मानत को चुनौती नहीं दी

रिया चक्रवर्ती

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द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ नॉर्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने सुप्रीम कोर्ट में ड्रग्स मामले में अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती की ज़मानत को चुनौती नहीं दी है. सुप्रीम कोर्ट ने एनसीबी की रिया की ज़मानत को चुनौती ना देने की दलील को स्वीकार कर लिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ये भी कहा है कि रिया चक्रवर्ती के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट की टिप्पणी- कि किसी व्यक्ति को ड्रग्स ख़रीदने के लिए पैसा देना अवैध तस्करी को बढ़ावा देना नहीं है- को मिसाल नहीं माना जाएगा.

एनसीबी ने अदालत से कहा है कि सरकार रिया चक्रवर्ती की ज़मानत को चुनौती नहीं दे रही है और एनडीपीएस (नार्कोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटांस) एक्ट की धारा 27ए की व्याख्या पर आगे बहस हो सकती है.

केंद्रीय एजेंसी एनसीबी हाई कोर्ट की धारा 27ए की व्याख्या से सहमत नहीं है. इस धारा के तहत किसी व्यक्ति को अवैध ड्रग तस्करी पर ख़र्च करने और क़ानून का उल्लंघन करने वालों की मदद करने के लिए बीस साल तक की सज़ा हो सकती है.

एनसीबी ने अदालत से अपील की है कि बांबे हाई कोर्ट के फ़ैसले को आगे के लिए मिसाल की तरह इस्तेमाल ना किया जाए.

मणिपुर में नागा महिला की हत्या के बाद और बढ़ा तनाव

मणिपुर में पुलिस

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इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक मणिपुर में एक 57 वर्षीय महिला की हत्या से पहले से ही हिंसा में घिरे इस राज्य में तनाव और बढ़ गया है.

मैतेई समूहों ने इस महिला की हत्या के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनका इससे कोई लेनादेना नहीं है.

57 वर्षीय लूसी मारेम को पूर्वी इंफाल ज़िले में कीबी हेकाक मपाल गांव के पास गोली मार दी गई थी. मारिंग नागा समुदाय की इस महिला की हत्या शनिवार को हुई थी.

इस हत्या के अगले दिन पांच महिलाओं समेत मैतेई समुदाय के नौ लोगों को हिरासत में लिया गया था.

रविवार को पूर्वी इंफाल ज़िले की पुलिस ने प्रैस वार्ता करके घटना के बारे में जानकारी भी दी.

रिपोर्टों के मुताबिक़ मणिपुर में 3 मई को शुरू हुई हिंसा में अब तक 140 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. लूसी मारेम पहली नागा व्यक्ति हैं जिसकी इस हिंसा में मौत हुई है.

लूसी मारेम के परिवार के मुताबिक़ वो मानसिक रूप से अस्थिर थीं और अपने घर से भटककर बीस किलोमीटर दूर पहुंच गईं थीं.

उनके परिजनों का कहना है कि लूसी ने अपने आप को मारंग नागा समुदाय से बताया था, इसके बावजूद उनकी हत्या कर दी गई.

इस घटना के विरोध में यूनाइटेड नगा काउंसिल ने सोमवार को बंद का आह्वान किया था और राज्य में नागा आबादी वाले पांच ज़िलों में जनजीवन प्रभावित रहा.

जम्मूः रोहिंग्या क़ैदियों और पुलिस के बीच झड़प की रिपोर्ट

रोहिंग्या शरणार्थी की फ़ाइल तस्वीर

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मंगलवार को जम्मू के एक होल्डिंग सेंटर (अस्थायी जेल) में बंद रोहिंग्या शरणार्थियों और पुलिस के बीच झड़प हुई है.

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक़ रोहिंग्या शरणार्थी अपनी रिहायी या वापस म्यांमार भेज दिए जाने की मांग कर रहे थे.

एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक़ इस झड़प में कई पुलिसकर्मी और शरणार्थी घायल हुए हैं और शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिए सीआरपीएफ़ को बुलाया गया है.

पुलिस के मुताबिक हिरासत में बंद लोगों ने मंगलवार सुबह हीरा नगर सब जेल का गेट तोड़ने की कोशिश की जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की. ये जेल जम्मू और कश्मीर में शरणार्थियों को रखने का एकमात्र होल्डिंग सेंटर है.

पुलिस के मुताबिक इस संबंध में एफ़आईआर दर्ज कर ली गई है और जांच की जा रही है.

म्यांमार से भागकर आये हज़ारों रोहिंग्या शरणार्थी जम्मू में रह रहे हैं. जम्मू में इन लोगों को बाहर निकालने की मांग भी उठ रही है.

रोहिंग्या लोगों के मानवाधिकर समूह का दावा है कि पुलिस ने भूख हड़ताल कर रहे क़ैदियों पर आंसू गैस का इस्तेमाल किया है और किसी तरह की झड़प नहीं हुई है.

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