चिदंबरम क्यों मानते हैं पीएम मोदी के तीसरे कार्यकाल में भी पांच ट्रिलियन इकॉनमी होना मुश्किल - प्रेस रिव्यू

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम ने द इंडियन एक्सप्रेस में एक लेख लिखा है जिसमें उन्होंने कहा है कि बीते दस सालों में एनडीए सरकार का रिकॉर्ड निराशाजनक रहा है.
उन्होंने पीएम मोदी पर तंज़ कसते हुए लिखा है, "पीएम इलिइज़्म नाम की आदत से मजबूर हैं, वो मैं या मेरा कहने से बचते हैं और खुद को थर्ड पर्सन में आगे रखते हैं."
वो लिखते हैं कि "ये एक तरह से साबित हो चुका है कि मोदी ही सरकार हैं और सरकार अच्छा करे या बुरा वो ही ज़िम्मेदार हैं. अमित शाह को छोड़ दें तो उनकी सरकार के अन्य नेता मंत्री यहां तक कि मुख्यमंत्री और सांसद तक का कोई महत्व ही नहीं रह गया है. विडंबना ये है कि वो सब भी इससे ख़ुश दिखते हैं. ऐसे में जवाब की उम्मीद हम पीएम से ही करते हैं."
चिदंबरम ने प्रधानमंत्री के नए स्लोगन 'विकसित भारत' को लेकर भी तंज़ कसा है.
उन्होंने लिखा, "पीएम ने कहा है कि 2047 तक वो भारत को विकसित बनाएंगे. लेकिन 1947 से लेकर 2024 तक भारत का तो विकास ही हुआ है, ठीक उसी तरह अब से लेकर 2047 तक भले ही केंद्र में सरकार किसी की भी हो 2024 की तुलना में 2047 में भारत अधिक विकसित ही होगा. मुद्दा ये है कि विकसित भारत की परिभाषा क्या होगी."
विकास दर

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उन्होंने लिखा कि आगे बढ़ने के लिए हमें अपने गोलपोस्ट तय करने होंगे और हमें उन्हें फिक्स करना होगा, ताकि इन्हें आगे न बढ़ा दिया जाए.
उन्होंने लिखा, "सबसे पहले 2023-24 तक भारत को 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य था. लेकिन इसे एक-एक कदम कर 2027-28 तक आगे बढ़ा दिया गया."
"2023-24 के आख़िर तक भारत की जीडीपी 172 लाख करोड़ रुपये हो जाएगी, करेंसी एक्सचेंज की मौजूदा दर के अनुसार ये 3.57 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर होगी."
चिदंबरम ने लिखा है कि अगर आने वाले वक्त में एक्सचेंज दर में बदलाव नहीं आया तो अलग-अलग विकास दर पर अलग-अलग वक्त में 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचा जा सकता है.
उन्होंने आकलन लगाया कि अगर विकास दर 6 रही तो 6 सालों में (2029-30) तक इस लक्ष्य तक पहुंचा जा सकेगा, वहीं अगर विकास दर 7 रही तो 5 सालों में (2028-29) तक इस लक्ष्य तक पहुंचा जा सकेगा और विकास दर 8 रही तो 4.5 सालों में (सितंबर 2028) इस लक्ष्य तक पहुंचा जा सकेगा.
उन्होंने एनडीए सरकार के कार्यकाल की तुलना यूपीए सरकार के कार्यकाल से की है और लिखा है, "पिछले 10 एनडीए सरकार का रिकॉर्ड निराशाजनक रहा है. दस सालों में वो केवल 5.9 फीसदी की विकास दर हासिल कर सकी है. वहीं नई सिरीज़ में यूपीए का रिकॉर्ड 6.7 फ़ीसदी का रहा है जबकि पुरानी सिरीज़ में ये 7.5 फीसदी था."
उन्होंने बीजेपी से सवाल किया है कि वो अधिक विकास दर तक पहुंचने के लिए क्या करेगी. इसके बाद वो समझाते हैं इस सवाल का जवाब तलाशना मुश्किल है क्योंकि विकास दर घरेलू अर्थव्यवस्था के संचालन के साथ-साथ बाहरी कारकों पर भी निर्भर करती है.
वो लिखते है, "सभी अनिश्चितताओं के बीच अगर मोदी अगला चुनाव जीतकर तीसरी बार सरकार बना लेते हैं और अर्थव्यवस्था की विकास दर हर साल 8 फीसदी तक रहती है, तब भी उनके कार्यकाल के पांचवें साल में भारत की जीडीपी मुश्किल से 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच पाएगी."
क्या हो 'विकसित' की परिभाषा

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चिदंबरम 'विकसित' की परिभाषा पूछते हैं और लिखते हैं कि अगर 2028-29 तक भारत की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई तो क्या भारत को विकसित देश कहा जाएगा?
2028-29 में 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत की आबादी क़रीब 1.5 अरब होगी. उस वक्त प्रति व्यक्ति आय क़रीब 3333 अमेरिकी डॉलर तक होगी. और इस हिसाब से भारत लोअर मिडल इनकम वाले मुल्कों की श्रेणी में आएगा.
चिदंबरम कहते हैं कि प्रति व्यक्ति आय के आधार पर मौजूदा वक्त में दुनिया के और मुल्कों की लिस्ट में भारत 140 रैंक पर है. साल 2028-29 में इसकी रैंकिंग 5 से 10 नंबर तक बढ़ सकती है.
वो लिखते हैं कि उन्होंने ये पूरा हिसाब-किताब इसलिए दिया है ताकि 'सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था' और 'दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था' जैसे जुमलों को नकारा जा सके.
वो पीएम मोदी से कई सवाल करते हैं और लिखते हैं कि अगले लोकसभा चुनावों में बेरोज़गारी, महंगाई जैसे मुद्दों पर चर्चा की जानी चाहिए.
वो लिखते हैं, "मुझे याद नहीं आता कि पीएम मोदी ने इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर कब कुछ कहा था. बीजेपी में उन्हीं का कहा महत्व रखता है ऐसे में उन्हें चुप्पी तोड़नी ही चाहिए."
रूसी सेना में ‘हेल्पर’ के तौर पर गए भारतीय की युद्ध क्षेत्र में मौत का दावा

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अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू एक अन्य भारतीय के अनुसार लिखता है कि मिसाइल दाग़ने की प्रैक्टिस के दौरान मिसाइल से 23 साल के एक भारतीय की मौत हो गई है. ये व्यक्ति गुजरात से थे.
रूस और यूक्रेन की सीमा से सटे दोनेत्स्क इलाक़े में 21 फरवरी को हुए एक हमले में 23 साल के एक भारतीय युवक की मौत हो गई. हमले से बच कर भागे एक अन्य भारतीय नागरिक ने अख़बार द हिंदू को इसकी पुष्टि की है.
उस व्यक्ति ने बताया कि गुजरात के इस युवक को रूसी सेना में बतौर सिक्योरिटी हेल्पर रखा गया था.
अख़बार लिखता है कि मृत युवक की पहचान हेमिल अश्विन भाई मंगूकिया के तौर पर की गई है जो गुजरात के सूरत ज़िले से हैं. हेमिल दिसंबर 2023 में रूस गए थे जहां वो रूसी सेना के लिए काम करने लगे.
बीते दिनों उनके पिता के एजेंट ने उन्हें वापस लाने के लिए भारतीय दूतावास की मदद मांगी थी. रूसी सेना के साथ करार कर चुके कई और भारतीय नागरिकों ने भी हाल के दिनों में भारतीय दूतावास से मदद की गुहार लगाई थी.
अख़बार लिखता है कि भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा है कि अब तक उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं दी गई है.
हेमिल के पिता ने द हिंदू को बताया कि 20 फरवरी को हेमिल से उनकी बात हुई थी, हालांकि उन्होंने इस बारे में और अधिक जानकारी नहीं दी.
हेमिल अश्विन भाई मंगूकिया की मौत कैसे हुई?

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कर्नाटक के कलबुर्गी के 23 साल के समीर अहमद ने द हिंदू को बताया कि हेमिल की मौत एक मिसाइल हमले में हुई.
उन्होंने कहा, "हमने देखा एक ड्रोन हमारे सिर के ऊपर मंडरा रहा था. मैं ट्रेंच बना रहा था और मुझसे क़रीब 150 मीटर दूरी पर हेमिल मिसाइल दाग़ने की प्रैक्टिस कर रहे थे."
"अचानक हमने तेज़ धमाके की आवाज़ सुनी. मैं, मेरे साथ के दो और भारतीय लोग और कुछ रूसी सैनिक ट्रेंच में छिप गए. वहां मिसाइल गिरी थी. ऐसा लगा कि वहां की ज़मीन कांप रही थी. कुछ वक्त बाद जब हम बाहर निकले तो हमने देखा कि हेमिल का मौत हो चुकी है. मैंने ही उनके शव को ट्रक में रखा था."
एक अन्य व्यक्ति ने हेमिल के शव की एक तस्वीर साझा की जिसमें उनके चेहरे और सिर पर चोट के कई निशान दिख रहे थे. तस्वीर में खू़न से लथपथ उनका शव ट्रक में कई और शवों के साथ रखा गया था.
एक अन्य भारतीय नागरिक ने बताया, "हम चार भारतीय उस टुकड़ी का हिस्सा थे जो 21 फरवरी को हमले की ज़द में आई थी. हेमिल रूसी सैन्य कमांडर के काफी क़रीब थे और कमांडर उन पर भरोसा करते थे. उन्होंने हेमिल से कभी छोटा काम नहीं कराया."
"जिस वक्त ट्रेंच बनाने का काम चल रहा था हमला उस वक्त हुआ था. हमारे साथ एक नेपाली नागरिक भी थे जो इस हमले में मारे गए."
रूसी सेना के लिए काम कर रहे कई भारतीय

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इस घटना की पूरी जानकारी अब तक सामने नहीं आई है. हालांकि बीबीसी ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में कहा था कि पूर्वी यूक्रेन में रूस के कब्ज़े वाले इलाक़े में बने एक ट्रेनिंग एरिया में दो मिसाइलों के गिरने से कम से कम 60 रूसी सैनिकों की मौत हुई है.
रूस के टेलिग्राम ऐप पर हो रही चर्चा के अनुसार ट्रेनिंग एरिया में यूक्रेनी मिसाइलें उस वक्त आकर गिरी थीं जब सैनिक इंस्पेक्शन के लिए खुले में कतार बनाए खड़े थे.
द हिंदू की ही एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार बीते एक साल में कम से कम 100 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना के लिए काम पर रखा गया है. इनमें से कम से कम तीन सिक्योरिटी हेल्पर्स को यूक्रेन के ख़िलाफ़ रूसी सेना के साथ मिलकर लड़ने के लिए बाध्य किया गया.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसी सप्ताह शुक्रवार को कहा था कि रूसी सेना की मदद कर रहे भारतीय नागरिकों को जल्द वहां से 'डिस्चार्ज' कराने को लेकर भारत ने रूसी अधिकारियों से बात की है.
दिल्ली दंगों के चार साल, दर्ज किए गए मामलों का क्या हुआ?

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2020 में उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों को अब चार साल हो चुके हैं. इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार इससे जुड़े कुल 695 मामले दर्ज किए गए थे जिनमें से दंगे करने, लूटपाट और आगज़नी करने और ग़ैर क़ानूनी तरीके से इकट्ठा होने से जुड़े 88 मामलों में सज़ा सुनाई गई है.
अख़बार ने इनमें से 85 मामलों में आदेशों को पढ़ा है और पाया है कि 80 फ़ीसदी यानी 68 मामलों में व्यक्ति को बरी किया गया है जबकि 16 फ़ीसदी यानी 20 मामलों में व्यक्ति को सज़ा सुनाई गई है. जिन मामलों में व्यक्ति को बरी किया गया है उनमें दोनों ही समुदाय के लोग शामिल हैं.
पुलिस सूत्रों के हवाले से अख़बार लिखता है कि दिल्ली दंगे को लेकर कुल 695 मामले दर्ज किए गए थे जिनमें से क़रीब आधे यानी 53 फ़ीसदी (367) मामलों में चार्जशीट दायर की गई. इनमें से 14 मामलों में आरोप तय करते वक्त सबूत न होने के कारण व्यक्ति को डिस्चार्ज कर दिया गया, प्राथमिकी कैंसिल करने के कारण चार मामले आगे नहीं बढ़े और पांच मामलों में क्लोज़र रिपोर्ट फाइल की गई.
पुलिस सूत्रों के अनुसार अब तक दर्ज किए गए 695 मामलों में से 47 को सज़ा सुनाई जा चुकी है जबकि 183 को बरी कर दिया गया है. 1,728 लोग ज़मानत पर बाहर हैं, 108 जेल में हैं और 50 को डिस्चार्ज कर दिया गया है.
जिन 68 मामलों में व्यक्ति को बरी किया गया उनमें से 45 मामलों में गवाह अपने बयान से पलट गए थे. तीन मामलों में पुलिस चश्मदीद का पता नहीं लगा पाई. इनमें से अधिकतर मामलों में दंगे करने और ग़ैरक़ानूनी तरीके से इकट्ठा होने के आरोप लगाए गए थे, लेकिन कोर्ट में गवाह आरोपी की पहचान नहीं कर पाया.
अख़बार ने दिल्ली पुलिस की प्रतिक्रिया जानने के लिए उनसे संपर्क करने की कोशिश की है, लेकिन उसे अपने सवालों के जवाब अब तक नहीं मिले हैं.
हल्द्वानी हिंसा मामले में मुख्य अभियुक्त को पुलिस ने किया गिरफ्तार

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उत्तराखंड पुलिस के प्रवक्ता और इंस्पेक्टर जनरल (प्रोविज़निंग एंड मॉर्डनाइज़ेशन) निलेश आनंद भरणे ने अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि हल्द्वानी हिंसा के "मुख्य अभियुक्त अब्दुल मलिक को राजधानी दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है."
इससे पहले डीजीपी अभिनव कुमार ने मलिक को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम को 50 हज़ार रुपये का कैश ईनाम देने की घोषणा की थी.
मलिक के वकील ने शनिवार को हल्द्वानी ज़िला और सेशन अदालत में उनकी अग्रिम ज़मानत के लिए अर्ज़ी डाली थी. उनके वकील ने अब कहा है, "जिस वक्त हमने अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी लगाई थी उस वक्त हमें उनकी गिरफ्तारी की जानकारी नहीं थी. अब ये अर्ज़ी अपने आप ही कैन्सल हो जाएगी."
इससे पहले नैनीताल के एसएसपी प्रह्लाद नारायण मीणा ने कहा था कि "'नज़ुल ज़मीन' पर बने अवैध ढांचे को गिराने को लेकर विवाद हुआ था उसके मालिक अब्दुल मलिक ही हैं. ज़मीन पर अवैध ढांचा उन्होंने ही बनाया था और उसे गिराने के मुद्दे पर हुए विरोध का नेतृत्व वही कर रहे थे."
जल्द आ सकती ही बीजेपी की 150 उम्मीदवारों की सूची

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लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र 29 फ़रवरी को बीजेपी के केंद्रीय चुनाव समिति की होने वाली बैठक के बाद पार्टी जल्द ही अपने पहले 150 उम्मीदवारों की सूची जारी कर सकती है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार पहली लिस्ट में वाराणसी से पीएम मोदी, गांधीनगर से गृह मंत्री अमित शाह, लखनऊ से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नागपुर से परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का नाम हो सकता है.
सूत्रों के हवाले से अख़बार लिखता है कि पश्चिमी दिल्ली से परवेश वर्मा, उत्तर पश्चिम दिल्ली से मनोज तिवारी और दक्षिणी दिल्ली से रमेश बिधुड़ी को भी पहली सूची में जगह दी जा सकती है.
अख़बार लिखता है कि उम्मीद की जा रही है कि पार्टी उन सीटों पर उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर सकती हैं जिन पर उसकी या तो उसकी मज़बूत पकड़ है या फिर जहां वो अपनी स्थिति और बेहतर कर सकती है.
150 उम्मीदवारों के नामों का फ़ैसला करने वाली 29 फ़रवरी की केंद्रीय चुनाव समिति की अहम बैठक से पहले शनिवार को बीजेपी मुख्यालय में इसकी तैयारी को लेकर एक बैठक हुई थी.
इसमें बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई वरिष्ठ नेता, साथ ही उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और केरल से बीजेपी के मुख्य नेता शामिल हुए.
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