दिल्ली में दंगा प्रभावित सीटों पर कैसा है चुनावी माहौल, पीड़ितों ने क्या कहा

- Author, अंशुल सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
दिल्ली का मुस्तफ़ाबाद इलाक़ा. यहां एक लंबी और सकरी गली में 25 फ़ुटा बाज़ार है. बाज़ार में चहल-पहल है और लोग ख़रीदारी में जुटे हैं.
पांच साल पहले फ़रवरी, 2020 में इस इलाक़े में सांप्रदायिक दंगे हुए थे. दंगों के बाद यहां जली हुई दुकानें, सड़कों पर ईंटें और पत्थर थे. सब तरफ़ सन्नाटा पसरा था.
अब मुस्तफ़ाबाद की गलियों में माहौल चुनावी है. जगह-जगह पोस्टर लगे हैं और भीड़ के बीच चुनावी उम्मीदवार लोगों से वोट देने की अपील कर रहे हैं.
25 फ़ुटा बाज़ार से क़रीब एक किलोमीटर की दूरी पर भागीरथी विहार में आग़ाज़ हुसैन रहते हैं. दिल्ली दंगों के दौरान आग़ाज़ के बेटे अशफ़ाक़ हुसैन मारे गए थे. अशफ़ाक़ तब सिर्फ़ 22 साल के थे और शादी के दस दिन बाद उन्हें मार दिया गया.
आग़ाज़ हुसैन अशफ़ाक़ की शादी की तस्वीरें दिखाते हुए भावुक हो उठ पड़ते हैं.

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आग़ाज़ हुसैन बताते हैं, "जिस घर में ख़ुशियां मनाईं जा रही हों, वहां अगर ग़म आ जाएं तो आप समझ सकते हैं कि क्या हालात होंगे. यह हादसा सबसे छोटे बेटे के दिमाग़ में घर कर गया. एक बेटा मर गया और अब एक डिप्रेशन में है."
दंगों के दंश झेलने वाले आग़ाज़ हुसैन अकेले नहीं हैं.
दंगों में 53 लोग मारे गए थे. इनमें 40 मुसलमान और 13 हिन्दू थे. इसके अलावा सैकड़ों लोग ज़ख़्मी हुए थे और कई अभियुक्त अब भी जेल में बंद हैं.
दंगों के लगभग पांच साल बाद दिल्ली में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं. चुनावों से पहले बीबीसी ने दंगा प्रभावित सीटों का हाल जाना और इलाक़े के मतदाताओं की राय जानी.
सवाल ये है कि क्या इन सीटों पर दिल्ली दंगा पांच साल बाद भी चुनावी मुद्दा है?
घर छोड़ा और पुलिस सुरक्षा में रहने को 'मजबूर'

अशफ़ाक़ के घर से क़रीब दो किलोमीटर दूर गोकलपुरी में नितिन पासवान का परिवार रहता है. 15 साल के नितिन 26 फ़रवरी 2020 को दिल्ली दंगों में मारे गए थे.
रिक्शा चलाने वाले पिता राम सुगारत पासवान आज भी उस दिन को नहीं भूल पाते जब उनके बेटे ने उनकी गोद में दम तोड़ दिया था.
घटना के असर के बारे में बताते हुए राम सुगारत की आंखों में आंसू आ जाते हैं.
वह कहते हैं, "मेरा लड़का कहता था कि पापा मैं पुलिस वाला बनूंगा. रोज़ सुबह पांच बजे उठकर दौड़ लगाता था. वो कहता था पापा मेरी नौकरी लगने के बाद मैं आपको रिक्शा नहीं चलाने दूंगा. मेरी बीबी तो उस दिन से बीमार रहती है. सब कुछ लुट गया है सर."
दंगों में हिंसक भीड़ ने नितिन और अशफ़ाक़ की जान ले ली लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इन दंगों में मरते-मरते बचे.
24 घंटे पुलिस सुरक्षा में रहने वाले निसार अहमद ऐसे ही लोगों में से एक है. भीड़ ने निसार की पिटाई की और उन्हें अधमरा छोड़ दिया था. घटना का असर यह हुआ कि उन्हें भागीरथी विहार में उन्हें अपना घर बेचना पड़ा और वो मुस्तफ़ाबाद के एक मुस्लिम बहुल मोहल्ले में आकर बस गए.
निसार अहमद मामले को कोर्ट में ले गए और वो दिल्ली दंगों के चश्मदीद गवाह बने.
अपनी हालिया ज़िंदगी के बारे में निसार बताते हैं, "अब मैं अपने आप को एक उलझन में पाता हूं. पुलिस सुरक्षा होने पर भी मैं आज़ाद नहीं हूं और न होने पर डर बना रहता है. आम आदमी की तरह मैं ज़िंदगी नहीं जी पा रहा हूं."
निसार अहमद कहते हैं, "हमारा पुराना मकान मेन रोड पर था. अभी वाला मकान पतली सी गली में है. उसकी तुलना में यह आधी क़ीमत का मकान है. मुझे कभी अंदाज़ा नहीं था कि यहां आकर भी रहना पड़ेगा. अंदर से महसूस होता है कि इस तरह के हालातों ने यहां लाकर खड़ा कर दिया."
क्या दिल्ली के दंगे यहां चुनावी मुद्दा है?
निसार इस सवाल के जवाब में कहते हैं, "जिनकी दुकानें जलीं, जिनके लोग मरे कम से कम उनके लिए तो मुद्दा है."
कपिल मिश्रा और ताहिर हुसैन चुनावी मैदान में

उत्तर-पूर्व दिल्ली लोकसभा में विधानसभा की 10 सीटें आती हैं. इनमें से कम से कम छह सीटें दंगा प्रभावित थीं. ये सीटें हैं- सीलमपुर, घोंडा, बाबरपुर, गोकलपुर (आरक्षित), मुस्तफ़ाबाद और करावल नगर.
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कपिल मिश्रा को करावल नगर से टिकट दिया है. कपिल मिश्रा आम आदमी पार्टी में रहते हुए इस सीट से विधायक (2015-20) रह चुके हैं.
23 फ़रवरी को दिल्ली दंगों से कुछ घंटे पहले कपिल मिश्रा ने एक भाषण दिया था और सड़कों को खाली करने का 'अल्टीमेटम' दिया था. तब यहां चाँद बाग़ और जाफ़राबाद की सड़कों पर लोग सीएए-एनआरसी के ख़िलाफ़ प्रोटेस्ट कर रहे थे.
कई लोग कपिल मिश्रा के भाषण को भड़काऊ मानते हुए उन्हें दिल्ली दंगों के लिए ज़िम्मेदार ठहराते हैं. हालांकि कपिल मिश्रा इस आरोप से इनकार करते हैं और पुलिस की जांच में भी इसकी पुष्टि नहीं हुई है.
बीबीसी से बातचीत में कपिल मिश्रा कहते हैं, "लोग मुझे दंगों के लिए ज़िम्मेदार नहीं मानते हैं. लोग तो यह मानते हैं कि अगर मैं नहीं जाता तो न जाने कितने परिवारों का नुक़सान हो जाता है. लोगों को मालूम है कि सड़कें दिसंबर से बंद थीं. हमने दंगे शुरू नहीं किए, हमने दंगे ख़त्म किए."
कपिल मिश्रा के लिए क्या दिल्ली का दंगा चुनाव में मुद्दा है?
इस पर कपिल मिश्रा कहते हैं, "दिल्ली का दंगा चुनाव में मुद्दा नहीं होना चाहिए. लेकिन अगर कोई हिन्दूओं के ज़ख़्मों को कुरेदेगा तो दंगा मुद्दा बनेगा. अगर ताहिर हुसैन को टिकट दिया जाए तो लोगों के मन में पीड़ा जागेगी."
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन भी इस बार विधानसभा चुनाव लड़ रही है. एआईएमआईएम ने दंगा प्रभावित मुस्तफ़ाबाद सीट से दिल्ली दंगों में अभियुक्त ताहिर हुसैन को टिकट दिया है. ताहिर हुसैन के ख़िलाफ़ हत्या और यूएपीए जैसे गंभीर मामले चल रहे हैं. फिलहाल वह जेल में बंद हैं.
ताहिर के लिए उनकी पत्नी और बेटे शादाब हुसैन प्रचार कर रहे हैं. चुनाव प्रचार के बीच बीबीसी ने शादाब हुसैन से बातचीत की.
हमने पूछा कि ताहिर हुसैन कई गंभीर मामलों में दिल्ली दंगों के अभियुक्त हैं. ऐसे में मुस्तफ़ाबाद की जनता आपको वोट क्यों देगी?
शादाब जवाब देते हैं, "मेरे पिता पर आरोप ज़रूर हैं लेकिन कुछ भी सिद्ध नहीं हुआ है. 12 में से नौ मामलों में हमे बेल मिल गई है और बाक़ियों में भी जल्दी मिल जाएगी. मुस्तफ़ाबाद की जनता भी यह अच्छे से जानती है कि मेरे पिता बेकसूर हैं. दिल्ली दंगों समेत यह चुनाव हक़ और इंसाफ़ की लड़ाई है."
एआईएमआईएम ने ताहिर हुसैन के अलावा ओखला सीट से शिफा उर रहमान को टिकट दिया है. शिफा उर रहमान जेल में बंद दिल्ली दंगों के अभियुक्त हैं.
पार्टी का कहना है कि वह दिल्ली में 10-12 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

आप और कांग्रेस कहां खड़े हैं?
पिछले दो विधानसभा चुनाव में हाशिए पर पहुंच चुकी कांग्रेस को नगर निगम (एमसीडी) चुनाव 2022 में मुस्लिम मतदाताओं का साथ मिला था.
कांग्रेस ने पूरी दिल्ली में नौ वार्ड जीती थीं इनमें से दो वार्ड मुस्तफ़ाबाद और एक सीलमपुर इलाक़े में हैं. इसके अलावा दंगा प्रभावित कई वार्ड में कांग्रेस दूसरे नंबर पर रही थी.
एमसीडी में मुस्लिम मतदाताओं ने कांग्रेस के लिए एक उम्मीद जगाई थी लेकिन क्या विधानसभा में भी ऐसा होगा?
मुस्तफ़ाबाद सीट पर कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता हसन अहमद के बेटे अली मेहदी को उम्मीदवार बनाया है. अली मेहदी दंगों को लेकर आम आदमी पार्टी की भूमिका पर सवाल उठाते हैं.
बीबीसी से बातचीत में अली मेहदी कहते हैं, "दिल्ली के चुने हुए मुख्यमंत्री दंगों के दौरान नदारद रहे. आम आदमी पार्टी को इस पूरे इलाक़े की जनता ने रिजेक्ट कर दिया है. जनता पूछ रही है कि जो दंगों के दौरान हमारे साथ नहीं रहा वो हमारे दुख दर्द में कैसे साथ रहेगा."
पिछले विधानसभा चुनाव में दंगा प्रभावित छह सीटों में से चार सीटें आम आदमी पार्टी ने जीती थी. दो सीटें करावल नगर और घोंडा बीजेपी ने जीती थी. सबसे ज़्यादा प्रभावित मुस्तफ़ाबाद में भी आप के हाजी युनूस विधायक थे.
आम आदमी पार्टी ने इस बार मुस्तफ़ाबाद से आदिल अहमद ख़ान को टिकट दिया है. आदिल चुनाव प्रचार में जुटे हैं और मंदिर से लेकर मस्जिद में प्रार्थना कर रहे हैं.
दंगों के सवाल पर आदिल कहते हैं, "लोग यहां दंगों को भुलाकर भाईचारे के साथ आगे बढ़ रहे हैं. दिल्ली में कानून और व्यवस्था की ज़िम्मेदारी देश के गृह मंत्री अमित शाह की है. इसलिए दिल्ली के दंगों के लिए भाजपा ज़िम्मेदार है.
दंगा पीड़ित और स्थानीय लोग क्या कह रहे हैं?

दंगों के ख़िलाफ़ क़ानूनी लड़ाई लड़ने वाले निसार अहमद आगामी चुनाव में विकल्पों की कमी को एक बड़ा मुद्दा मानते हैं.
वह कहते हैं, "लोगों के मन में बीजेपी का डर है लेकिन बाक़ी पार्टियां भी बीजेपी की तरह काम कर रही हैं. यह सभी पार्टियां बीजेपी का डर दिखाकर वोट ले रही हैं. जैसे मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि हम जाएं तो जाएं कहां? एक मजबूरी के तहत वोट करना पड़ेगा."
यहां रहने वाले लोग दंगों पर खुलकर बात करने से बचते हैं लेकिन इसका असर उन पर नज़र आता है. भूरे ख़ान करावल नगर के वोटर हैं. उनकी गली दंगों के दौरान आगजनी का शिकार हुई थी.
वो कहते हैं. "लोगों के दिल में तो रहेगा ही चाहे जुबां पर न आए. बस मुझे इसके आगे कुछ नहीं कहना है."
गोकलपुरी विधानसभा में रहने वाले वीरू कटारिया दंगों के लिए चुनाव को जिम्मेदार ठहराते हैं.
वीरू बताते हैं, "जनता को पानी, बिजली, शिक्षा और अच्छी सड़कों से मतलब है. इस समय दंगों का कोई असर नहीं है. चुनाव आ गया है और पार्टियां भी भड़काने में लगी हैं. आम जनता का इसमें कोई रोल नहीं है."
आग़ाज़ हुसैन ने दंगे में अपना बेटा खो दिया. रुआंसे होते हुए वो कहते हैं कि कोई पार्टी काम नहीं आती है सिर्फ़ इंसानियत काम आती है.
कुछ साल बाद दिल्ली में फिर चुनाव आएंगे लेकिन दंगों के ज़ख़्म शायद कभी नहीं भर पाएंगे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित
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