शेख़ हसीना के भारत आने और अल्पसंख्यकों को लेकर संसद में क्या बोले जयशंकर

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बांग्लादेश में जारी सियासी उठापटक पर भारत की ओर से कोई बयान नहीं आया है लेकिन इस घटना पर संसद में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बयान जारी किया है.
जयशंकर ने मंगलवार को पहली बार बांग्लादेश के हालात को लेकर राज्यसभा और लोकसभा में बयान दिया.
जयशंकर ने सबसे पहले राज्यसभा में भाषण दिया. उन्होंने शेख़ हसीना के भारत आने से लेकर बांग्लादेश में मौजूद भारतीय नागरिकों और वहां के अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर सदन को अवगत कराया है.
बांग्लादेश की स्थिति को लेकर मंगलवार को ही सर्वदलीय बैठक हुई थी जिसमें उन्होंने सभी पार्टियों की ओर से दिए जा रहे एकतरफ़ा समर्थन की प्रशंसा की थी.
इसको लेकर जयशंकर ने सोशल मीडिया वेबसाइट एक्स पर पोस्ट भी किया है.
जयशंकर ने राज्यसभा में क्या-क्या कहा

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राज्यसभा में जयशंकर ने कहा कि वो बांग्लादेश में बदले हालात को लेकर सदन को अवगत कराने आए हैं.
उन्होंने कहा कि भारत-बांग्लादेश के रिश्ते कई दशकों से और कई सरकारों के दौरान अभूतपूर्व रहे हैं. वहां पर हालिया हिंसा और अस्थिरता को लेकर चिंताओं को हमने राजनीतिक स्तर पर साझा किया है.
जयशंकर ने सदन में कहा, “जनवरी 2024 से वहां चुनावों के बाद काफ़ी तनाव, गहरा विभाजन और ध्रुवीकरण बांग्लादेश की राजनीति में बढ़ रहा था. इसके बाद इस साल जून में छात्रों का विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ. इसके बाद हिंसा बढ़ी और सार्वजनिक इमारतों और इन्फ़्रास्ट्रक्चर पर हमले शुरू हुए. इसके साथ-साथ परिवहन और रेल यातायात बाधित किया गया.”

“हिंसा जुलाई महीने तक जारी रही इस दौरान हम लगातार संयम बरतने और बातचीत के ज़रिए हालात को शांत करने की अपील कर रहे थे. इसी के साथ ही हम यही अपील उन राजनीतिक ताक़तों के साथ कर रहे थे जिनके साथ हम संपर्क में थे.”
“21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बावजूद जनता के विरोध प्रदर्शन में कोई बढ़ोतरी नहीं थी, इसके बाद जो फ़ैसले लिए गए और कार्रवाइयां की गईं उसने हालात को ख़राब किया. इस स्तर पर हुए आंदोलन का सिर्फ़ एक ही एजेंडा था और वो था प्रधानमंत्री शेख़ हसीना अपना पद छोड़ें.”

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बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों और शेख़ हसीना के भारत आने पर क्या बोले

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भारत के विदेश मंत्री ने बांग्लादेश में मौजूद अल्पसंख्यक समुदाय पर भी सदन को बताया है.
उन्होंने बताया कि भारत सरकार बांग्लादेश में मौजूद भारतीय नागरिकों और अल्पसंख्यकों की स्थिति पर भी नज़र बनाए हुए है.
जयशंकर ने कहा, “4 अगस्त को हालात और गंभीर मोड़ पर आ गए, पुलिस, पुलिस थानों और सरकारी संपत्तियों पर हमले बढ़ गए. इसके साथ ही सभी तरह की हिंसाओं में बढ़ोतरी हो गई. सत्ता से जुड़े लोगों की संपत्तियों को देशभर में निशाना बनाया गया. जो ख़ासतौर पर सबसे चिंताजनक बात है वो ये है कि अल्पसंख्यकों के व्यापार और मंदिरों को कई जगहों पर निशाना बनाया गया. ये कितने बड़े पैमाने पर हुआ है ये अभी तक साफ़ नहीं है.”
विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि शेख़ हसीना भारत आई हैं और उनका विमान कल शाम दिल्ली पहुंचा है.
उन्होंने कहा, “5 अगस्त को प्रदर्शनकारी कर्फ़्यू के बावजूद ढाका में जमा हो गए. हमें जितना समझ में आया है वो ये है कि सुरक्षा प्रतिष्ठानों के नेताओं के साथ बैठक के बाद प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला किया. बेहद शॉर्ट नोटिस पर उन्होंने कुछ लम्हे के लिए भारत आने की अनुमति मांगी. इसी के साथ ही हमें बांग्लादेश प्रशासन की ओर से फ़्लाइट क्लियरेंस के लिए अनुमति मांगी गई. वो कल शाम को दिल्ली पहुंची हैं.”

“बांग्लादेश में हालात अभी भी बदल रहे हैं. सेना प्रमुख वक़ार उज़ जमां ने 5 अगस्त को राष्ट्र को संबोधित किया था. उन्होंने ज़िम्मेदारी लेने और अंतरिम सरकार के गठन पर बोला है. हम बांग्लादेश में मौजूद भारतीय समुदाय के साथ अपने भारतीय मिशनों के साथ लगातार संपर्क में हैं. इस समय लगभग 19 हज़ार भारतीय नागरिक वहां मौजूद हैं जिनमें से नौ हज़ार छात्र हैं.”
“भारतीय उच्चायोग की सलाह के बाद काफ़ी संख्या में छात्र भारत वापस लौट चुके हैं. अगर हमारी राजनयिक उपस्थिति की बात की जाए तो ढाका में हमारा उच्चायोग मौजूद है, इसके साथ ही हमारे सहयोग उच्चायोग चटगांव, राजशाही, खुलना और सिलहट में हैं. हमें उम्मीद है कि वहां की सरकार इन सभी प्रतिष्ठानों को सुरक्षा और मदद मुहैया कराएगी.”
विदेश मंत्री अपने पांच मिनट के भाषण के अंत में एक बार फिर अल्पसंख्यकों पर बोले.
उन्होंने कहा, “हम अल्पसंख्यकों से जुड़े हालात पर भी नज़र बनाए हुए हैं. ऐसी रिपोर्टें हैं कि कई समूह और संगठन हैं जो उनकी सुरक्षा का काम कर रहे हैं, हम इसका स्वागत करते हैं. लेकिन हमें इसको लेकर गहरी चिंता है कि क़ानून-व्यवस्था बहाल हो. हमारे सीमा सुरक्षा बलों को निर्देश दिए गए हैं कि इस जटिल स्थिति को देखते हुए अलर्ट पर रहें.”
बांग्लादेश के अब कैसे हैं हालात

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शेख़ हसीना के भारत आने के बाद अब उनका अगला फ़ैसला क्या होगा ये अभी तक साफ़ नहीं हैं लेकिन बांग्लादेश में हालात तेज़ी से बदल रहे हैं.
मंगलवार को बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने आदेश जारी कर देश की संसद को भंग कर दिया है.
राष्ट्रपति कार्यालय के प्रेस विंग की ओर से भेजे गए नोटिस में इस बात की जानकारी दी गई.
इस नोटिस में बताया गया है कि तीनों सेनाओं के प्रमुखों, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सिविल सोसाइटी के नुमाइंदों और छात्र आंदोलन के नेताओं की राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के साथ हुई बैठक के बाद राष्ट्रीय संसद को भंग करने का फ़ैसला लिया गया है.
इस साल सात जनवरी को चुनाव के बाद इस संसद का गठन हुआ था.
वहीं सोमवार को राष्ट्रपति ने एक आदेश जारी कर बीएनपी नेता ख़ालिदा ज़िया समेत कई विपक्षी नेताओं को नज़रबंदी से रिहा कर दिया था.
वहीं बांग्लादेश में प्रमुख विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के महासचिव मिर्ज़ा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा है कि अगर मंगलवार दोपहर दो बजे तक अंतरिम सरकार का गठन नहीं हुआ तो देश में राजनीतिक शून्य पैदा हो सकता है.
मंगलवार को ढाका में एक ब्रीफिंग में बीएनपी ने कहा कि उनकी ओर से अंतरिम सरकार के लिए राष्ट्रपति को कोई नाम प्रस्तावित नहीं किया गया है. राष्ट्रपति की ओर से मांगे जाने पर बीएनपी नाम भेजेगी.
पार्टी ने भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन की ओर से नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस का नाम प्रस्तावित करने के संबंध में ये बात कही.
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