टाइटैनिक दिखाने गई पनडुब्बी का अब तक नहीं चला पता, ख़त्म होने वाली है ऑक्सीजन

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मध्य अटलांटिक महासागर में एक व्यापक खोज अभियान चल रहा है.
खोजी दल उस पनडुब्बी को तलाश रहे हैं जो पर्यटकों को लेकर दुनिया के सबसे चर्चित जहाज़ों में से एक टाइटैनिक के मलबे को देखने निकली थी.
रविवार को डुबकी लगाने वाली इस पनडुब्बी से संपर्क टूट गया था और तब से ही इसे खोजने के प्रयास किए जा रहे हैं.
यूएस कोस्ट गार्ड के मुताबिक़ डुबकी लगाने के एक घंटा 45 मिनट बाद इस पनडुब्बी से संपर्क टूट गया था.
टूर कंपनी ओशियनगेट की इस छोटी पनडुब्बी में पांच लोग सवार थे. कंपनी का कहना है कि पनडुब्बी की खोज के लिए हर विकल्प का इस्तेमाल किया जा रहा है.
इस आठ दिन की पर्यटन यात्रा का टिकट ढाई लाख डॉलर (लगभग दो करोड़ रुपए) होता है.
इस टूर के दौरान पनडुब्बी टाइटैनिक जहाज़ के मलबे के पास समंदर में 3800 मीटर नीचे डुबकी लगाती है.
अधिकारियों के मुताबिक़ सरकारी एजेंसियां, अमेरिका और कनाडा की नौसेनाएं और व्यवसायिक रूप से समंदर की गहराई में जाने वाली कंपनियां इस खोज अभियान में जुटी हैं.
टाइटैनिक का मलबा उत्तरी अमेरिका के समंदर के सबसे क़रीबी बिंदू कनाडा के न्यूफ़ाउंडलैंड के सैंट जॉन्स से 700 किलोमीटर दूर एटलाइंटिक महासागर में है.
हालांकि इस पनडुब्बी की खोज का अभियान अमेरिका के बोस्टन से चलाया जा रहा है.
लापता पनडुब्बी ओशियन गेट कंपनी की टाइटन सबमर्सिबल है जो एक ट्रक के बराबर बड़ी है और इसमें पांच लोग सवार हैं. आमतौर पर इस पनडुब्बी में आपात स्थिति में चार दिन की ऑक्सीजन होती है.

सोमवार दोपहर अमेरिकी कोस्ट गार्ड के रियर एडमिरल जॉन मॉगर ने एक प्रैस वार्ता में कहा, “हम अनुमान लगा रहे हैं कि पनडुब्बी को खोजने के लिए हमारे पास 70 घंटों से लेकर 96 घंटों तक का समय है.”
उन्होंने कहा कि इस पनडुब्बी की तलाश में दो विमान और एक पनडुब्बी और सोनार से लैस तैरते बांध लगाए गए हैं.
हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि जिस इलाक़े में ये खोज अभियान चल रहा है वो बहुत दूर है और इसकी वजह से अभियान में मुश्किलें भी आ रही हैं.
रियर एडमिरल ने कहा कि बचाव अभियान में लगे लोग इस अभियान को व्यक्तिगत रूप से ले रहे हैं और पनडुब्बी में सवार लोगों को बचाने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं.
ब्रिटेन के अरबपति कारोबारी हामिश हार्डिंग के परिवार का कहना है कि वो भी इस पनडुब्बी पर सवार हैं.
58 वर्षीय हार्डिंग एक एक्सप्लोरर भी हैं. पिछले सप्ताहांत हार्डिंग ने सोशल मीडिया पर कहा था, “मुझे ये बताते हुए गर्व हो रहा है कि मैं टाइटैनिक के मलबे तक जाने वाले अभियान का हिस्सा हूं.”
उन्होंने ये भी कहा कि न्यू फ़ाउंडलैंड में पिछले चार दशकों की सबसे भीषण सर्दी की वजह से 2023 में टाइटैनिक तक जाना वाला ये अकेला मानवीय मिशन भी हो सकता है.
बाद में उन्होंने लिखा, “मौसम की वजह से एक मौका बना है और हम कल डुबकी लगाने का प्रयास करेंगे.”
ओशियन गेट ने एक बयान में कहा है कि उसका पूरा ध्यान पनडुब्बी में सवार लोगों और उनके परिवारों पर है.
कंपनी के बयान में कहा गया है, “हम पनडुब्बी के साथ फिर से संपर्क करने के प्रयासों में कई सरकारी एजेंसियों और डीप सी कंपनियों की तरफ़ से मिल रहे व्यापक सहयोग के लिए बेहद आभारी हैं.”
लापता पनडुब्बी कार्बन फ़ाइबर से बनी हैं. इसकी यात्रा के प्रचार में कंपनी दावा करती है, “ये रोज़मर्रा की ज़िंदगी के बाहर कुछ वाक़ई असाधारण खोजने का मौका है.”
कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक एक अभियान जारी है और जून 2024 के लिए दो और अभियान तय हैं.
पाकिस्तान के अरबपति कारोबारी और उनका बेटा भी सवार

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इस पनडुब्बी में पाकिस्तान के अरबपति कारोबारी शहज़ादा दाऊद और उनके बेटे सुलेमान भी सवार हैं.
शहज़ादा दाऊद पाकिस्तान के सबसे अमीर परिवारों में से एक से हैं. वो एसईटीआई इंस्टीट्यूट के ट्रस्टी भी हैं. ये दुनिया के प्रमुख गैर-लाभकारी वैज्ञानिक संस्थानों में से एक है.
दाऊद 48 साल के हैं और उनके बेटे की उम्र 19 साल है.
पाकिस्तान मूल के शहज़ादा दाऊद इन दिनों ब्रिटेन में रहते हैं. उनका परवार ब्रिटेन के सरे इलाक़े में रहता है.
उनके परिवार की तरफ़ से जारी बयान में कहा गया है, "हमारे बेटे शहज़ादा दाऊद और उनके बेटे सुलेमान अटलांटिक सागर में टाइटैनिक का मलबा देखने यात्रा पर गए थे. अब उस पनडुब्बी से संपर्क टूट गया है और इस बारे में कम ही जानकारी उपलब्ध है."
टाइटन सबमर्सिबल

आमतौर पर इस पनडुब्बी में एक पायलट, तीन पर्यटक और कंपनी की भाषा में एक ‘कंटेंट एक्सपर्ट’ सवार होते हैं.
ये यात्रा न्यूफाउंडलैंड के सैंट जॉन्स से शुरू होती है. टाइटैनिक के मलबे तक पहुंचने और वापस आने की संपूर्ण डुबकी में आठ घंटे तक का समय लगता है.
ओशियनगेट की वेबसाइट के मुताबिक़ उसके पास तीन पनडुब्बियां हैं लेकिन सिर्फट टाइटन ही टाईटैनिक के मलबे तक पहुंचने में सक्षम है.
ये पनडुब्बी 10432 किलो वज़न की है और कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक ये 13100 फिट की गहराई तक पहुंच सकती है. इस पनडुब्बी में पांच यात्रियों के लिए 96 घंटे की जीवनरक्षक ऑक्सीजन होती है.
ओशियनगेट के मालिक ने बीबीसी को बताया है कि पोलर प्रिंस नाम का एक जहाज़ भी इस अभियान का हिस्सा है. इस जहाज़ के ज़रिये पनडुब्बी को मलबे की लोकेशन तक पहुंचाया जाता है.
पिछले साल टाइटन सबमर्सिबल में यात्रा करने वाले सीबीएस न्यूज़ के संवाददाता डेविज पोग ने बीबीसी से बातचीत में उन दिक्कतों का ज़िक्र किया जिनका सामना पनडुब्बी में सवार लोग और ऊपर पानी की सतह पर मौजूद सदस्य कर रहे होंगे.
उन्होंने बताया कि इस समय पनडुब्बी में सवार लोगों और बाहरी दुनिया के बीच संपर्क का कोई रास्ता नहीं हैं क्योंकि पानी के इतना नीचे ना जीपीएस काम करता है और ना ही रेडियो.
पोग ने बताया, “जब सपोर्ट शिप पनडुब्बी के ठीक ऊपर होता है तो वो टेक्स्ट मैसेज के ज़रिए निर्देश भेज पाता है और संदेश प्राप्त कर पाता है. ज़ाहिर है इन संदेशों का अभी जवाब नहीं मिल रहा है.”
उन्होंने बताया कि पनडुब्बी में सवार यात्रियों को बाहर बोल्ट लगाकर सील कर दिया जाता है, ऐसे में अगर पनडुब्बी सतह पर आ भी जाएगी तो यात्रियों के पास बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं होगा. इस पनडुब्बी को कंपनी के कर्मचारी सिर्फ़ बाहर से ही खोल सकते हैं.

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टाइटैनिक अपने दौर का सबसे बड़ा जहाज़ था जो अपनी पहली ही यात्रा के दौरान डूब गया था.
1912 में ब्रिटेन से अमेरिका जा रहा ये जहाज़ रास्ते में एक आइसबर्ग से टकरा गया था. इस जहाज़ पर 2200 लोग सवार थे जिनमें से लगभग 1500 मारे गए थे.
1985 में टाइटैनिक जहाज़ का मलबा मिला था और तब से ही इस मलबे को देखने के लिए खोजी अभियान जाते रहते हैं.

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जहाज़ का ये मलबा दो हिस्सों में है और एक दूसरे से 2600 फिट दूर हैं. इस टूटे हुए जहाज़ के क़रीब मलबे का एक बड़ा क्षेत्र भी है.
पिछले महीने इस मलबे का पहला फुल साइज़ थ्री डी मैप डीप सी मैपिंग तकनीक के ज़रिए तैयार किया गया था.
इस स्कैन में इस जहाज़ को बेहद बारीक़ी से देखा जा सकता है.
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