अरविंद केजरीवाल के ख़िलाफ़ ईडी के सरकारी गवाह की कंपनी ने बीजेपी को दिए करोड़ों के इलेक्टोरल बॉन्ड

इमेज स्रोत, ANI
- Author, राघवेंद्र राव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की कथित शराब घोटाले में गिरफ़्तारी के बाद इस मामले में सरकारी गवाह बने हैदराबाद के बिज़नेसमैन पी सरथ चंद्र रेड्डी एक बार फिर सुर्ख़ियों में हैं.
रेड्डी को 10 नवम्बर, 2022 को एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) ने दिल्ली के कथित शराब घोटाला मामले में मनी लॉन्डरिंग के आरोप में गिरफ़्तार किया था.
ईडी के मुताबिक़, रेड्डी उस "साउथ ग्रुप" का हिस्सा थे जिसने कथित तौर पर आम आदमी पार्टी (आप) को 100 करोड़ रुपये दिए जिसका इस्तेमाल पार्टी ने गोवा चुनावों में किया.
क़रीब छह महीने बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने 9 मई, 2023 को रेड्डी को मेडिकल ग्राउंड्स पर ज़मानत दे दी.
कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा है कि ईडी ने इस ज़मानत की अर्ज़ी का विरोध नहीं किया. ज़मानत देते हुए कोर्ट ने कहा था कि बीमार व्यक्तियों को पर्याप्त और प्रभावी इलाज का अधिकार है.
कुछ ही दिन बात 1 जून 2023 को दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने रेड्डी को सरकारी गवाह बनने की इजाज़त दे दी और रेड्डी को माफ़ी दे दी.
रेड्डी का इलेक्टोरल बॉन्ड कनेक्शन

इमेज स्रोत, Getty Images
जब रेड्डी को ईडी ने गिरफ़्तार किया था उस वक़्त वो ऑरोबिन्दो फार्मा लिमिटेड नाम की कंपनी के डायरेक्टर थे. ऑरोबिन्दो फार्मा का मुख्यालय तेलंगाना के हैदराबाद में है
चुनाव आयोग ने हाल ही में जो इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी सार्वजानिक की है उसके मुताबिक़ ऑरोबिन्दो फार्मा ने 3 अप्रैल 2021 और 8 नवंबर 2023 के बीच 52 करोड़ रुपये के बॉन्ड ख़रीदे.
- 3 अप्रैल 2021 को कंपनी ने 2.5 करोड़ रुपये के बॉन्ड ख़रीदे. ये सभी बॉन्ड तेलुगू देसम पार्टी (टीडीपी) को दिए गए.
- 5 जनवरी 2022 को ऑरोबिन्दो फार्मा ने 3 करोड़ रुपये के बॉन्ड ख़रीदे. ये सभी बॉन्ड भारतीय जनता पार्टी को दिए गए.
- 8 अप्रैल 2022 को कंपनी ने 15 करोड़ रुपए के बॉन्ड ख़रीदे. ये सभी बॉन्ड तेलंगाना की भारत राष्ट्र समिति पार्टी को दिए गए.
- 7 जुलाई 2022 को कंपनी ने 1.5 करोड़ रुपए के बॉन्ड ख़रीदे. ये सभी बॉन्ड बीजेपी को दिए गए.
बीजेपी को कितने करोड़ के बॉन्ड दिए गए

पी सरथ चंद्र रेड्डी की गिरफ़्तारी से पहले ऑरोबिन्दो फार्मा ने कुल 22 करोड़ रुपए के इलेक्टोरल बांड ख़रीदे थे जिसमें से 4.5 करोड़ रुपये के बॉन्ड बीजेपी को दिए गए.
फिर 10 नवम्बर, 2022 को ईडी ने रेड्डी को गिरफ़्तार कर लिया.
इस गिरफ़्तारी के पांच दिन बाद ऑरोबिंदो फार्मा ने 15 नवम्बर, 2022 को 5 करोड़ रुपये के बॉन्ड ख़रीदे और ये सभी बॉन्ड बीजेपी को दिए गए. बीजेपी ने ये बॉन्ड 21 नवम्बर, 2022 को भुना लिए.
गिरफ़्तारी के छह महीने बाद रेड्डी को मेडिकल ग्राउंड पर ज़मानत मिल गई और 1 जून 2023 को वो सरकारी गवाह बन गए और उन्हें अदालत से माफ़ी मिल गई.
क़रीब पांच महीने बाद 8 नवंबर, 2023 को ऑरोबिंदो फार्मा ने 25 करोड़ रुपये के बॉन्ड ख़रीदे और ये सभी बॉन्ड भारतीय जनता पार्टी को दिए गए. बीजेपी ने ये सभी बॉन्ड 17 नवम्बर, 2023 को भुना लिए.
यानि रेड्डी की गिरफ़्तारी से पहले और उसके बाद इस कंपनी ने बीजेपी को 34.5 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बॉन्ड दिए. इसमें से 30 करोड़ रुपये के बॉन्ड रेड्डी की गिरफ़्तारी के बाद और उनके सरकारी गवाह बन जाने के बाद दिए गए.
ये जानकारी भी सामने आई है कि ऑरोबिंदो फार्मा से जुड़ी दो और कंपनियों ने भी इलेक्टोरल बॉन्ड ख़रीदे और भारतीय जनता पार्टी को दिए.
इनमें से एक है यूजिया फार्मा स्पेशलिटीज़. इस कंपनी का मुख्यालय हैदराबाद में है.
इस कंपनी ने 8 नवम्बर, 2023 को 15 करोड़ रुपये के बॉन्ड ख़रीदे. ये सभी बॉन्ड बीजेपी को दिए गए. बीजेपी ने इन बॉन्ड्स को 17 नवम्बर, 2023 को भुना लिया.
दूसरी कंपनी है एपीएल हेल्थकेयर लिमिटेड. इस कम्पनी का मुख्यालय भी हैदराबाद में ही है.
इस कंपनी ने 8 नवंबर, 2023 को 10 करोड़ रुपये के बॉन्ड ख़रीदे और ये सभी बॉन्ड बीजेपी को दिए गए. बीजेपी ने ये बॉन्ड 17 नवंबर, 2023 को भुना लिए.
कुल मिलकर इन तीनों कंपनियों ने भारतीय जनता पार्टी को 59.5 करोड़ रुपये का चंदा इलेक्टोरल बॉन्ड के ज़रिए दिया.
बीबीसी ने इस विषय पर भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा, सुधांशु त्रिवेदी और शहज़ाद पूनावाला से बात करने की कोशिश की. लेकिन प्रवक्ताओं से संपर्क नहीं हो सका है.
इनका जवाब मिलने पर ये कॉपी अपडेट की जाएगी. भारतीय जनता पार्टी ने भी आधिकारिक तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
'शराब घोटाले का मनी ट्रेल बीजेपी को जाता है'

इमेज स्रोत, ANI
इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी सार्वजानिक होने के बाद आम आदमी पार्टी ने अरविंद केजरीवाल की गिरफ़्तारी के मामले में बीजेपी को घेरना शुरू कर दिया है.
आम आदमी पार्टी की नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा, "दिल्ली में नई आबकारी पॉलिसी के तहत ऑरोबिन्दो फ़ार्मा के मालिक सरथ चंद्र रेड्डी को शराब बेचने के लिए कुछ ज़ोन मिले. ये एपीएल हेल्थकेयर और ईयूजीआईए फार्मा के भी मालिक हैं."
"9 नवम्बर को सरथ चंद्र रेड्डी ने बयान दिया कि उन्होंने ना अरविंद केजरीवाल को पैसे दिए है, ना विजय नायर को, ना किसी और आप नेता को. उन्हें अगले ही दिन गिरफ़्तार कर लिया गया. कुछ महीने बाद, सरथ रेड्डी का बयान पलट कर केजरीवाल जी के ख़िलाफ़ हो गया, तो कुछ महीनों में ही उन्हें जेल से बेल दे दी गई."
जिस मनी ट्रेल की तलाश दो साल से हो रही थी, उसका पता चल गया है. शराब घोटाले का मनी ट्रेल बीजेपी को जाता है, आम आदमी पार्टी को नहीं.
आतिशी ने लिखा कि रेड्डी के इस बयान के आधार पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गिरफ़्तार किया गया हैं.
उन्होंने पूछा, "ये तो सिर्फ़ एक बयान है. मनी ट्रेल कहां है? बीजेपी को मिले इलेक्टोरल बॉन्ड्स के डेटा में ये मनी ट्रेल साफ़ साफ़ दिख जाता है. सरथ रेड्डी ने बीजेपी को आबकारी नीति लागू होने के दौरान साढ़े चार करोड़ रुपये दिये. और गिरफ़्तार होने के बाद 55 करोड़ और दिए. पहले वो गिरफ़्तार हुए, फिर बीजेपी को पैसे दिए, फिर केजरीवाल जी के ख़िलाफ़ बयान दिया, फिर ईडी ने उन्हें छोड़ दिया, फिर उन्होंने बीजेपी को और पैसे दिए."
आतिशी के मुताबिक़, "जिस मनी ट्रेल की तलाश दो साल से हो रही थी, उसका पता चल गया है. शराब घोटाले का मनी ट्रेल बीजेपी को जाता है, आम आदमी पार्टी को नहीं."
साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चुनौती दी कि वो बीजेपी को घोटाले का प्रमुख आरोपी बनाए और ईडी बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा को गिरफ़्तार करे.
'ईडी की जाँच पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं'

इमेज स्रोत, Getty Images
अंजलि भारद्वाज एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं जो सूचना का अधिकार, पारदर्शिता और जवाबदेही के मुद्दों पर काम करती हैं.
वो इस बात को रेखांकित करती हैं कि दिल्ली की शराब नीति के मामले में दो सरकारी गवाह हैं जिन पर ईडी निर्भर है उनमें से एक की कंपनी सत्तारूढ़ दल को चुनावी बॉन्ड देते हुए दिखाई दे रही है.
वे कहती हैं, "ये बहुत सारे सवाल खड़े करता है. यह इस बात पर सवाल उठाता है कि जिस व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया है उसकी कंपनी पहले पांच करोड़ रुपये क्यों देना चाहेगी? फिर उस व्यक्ति को ज़मानत मिल जाती है और वो सरकारी गवाह बन जाता है और उसे माफ़ कर दिया जाता है और फिर उसकी कंपनी सत्तारूढ़ पार्टी को और ज़्यादा पैसा चंदे के रूप में क्यों देती है. इससे जांच पर बेहद गंभीर सवाल खड़े होते हैं."
अंजलि भारद्वाज के मुताबिक़ ऐसे कई मामलों में ईडी और सीबीआई जैसी प्रमुख जांच एजेंसियों की मिलीभगत नज़र आ रही है.
वे कहती हैं, "ये बहुत चिंताजनक है और यह सवाल भी उठाता है कि इस तरह के आरोपों की जांच कौन करेगा जो निश्चित रूप से इस और अन्य मामलों में सामने आने वाले हैं. ऐसे मामलों में इन एजेंसियों से निष्पक्ष और स्वतंत्र जाँच की उम्मीद नहीं की जा सकती जिनमें वो खुद शामिल हैं."
भारद्वाज कहती हैं कि चूंकि लोकपाल का संस्थान वैसा नहीं बन पाया जैसा उसे बनाने की सोच थी इसलिए अब एक ऐसी स्थिति आ गई है जहां लोगों के पास यह कहने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है कि इन मामलों में अदालत की निगरानी वाली एसआईटी की ज़रुरत है.
वे कहती हैं, "मुझे लगता है कि इस मामले में तो बहुत गहन जांच की ही जानी चाहिए, लेकिन उन सभी मामलों की जांच होनी चाहिए जहां पहली नज़र में कोई देख सकता है कि क्विड प्रो क्वो (कुछ हासिल करने की नीयत से कुछ देना) हुआ, ज़बरन वसूली की गई या सत्तारूढ़ दल द्वारा धन इकट्ठा करने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया गया."
पी सरथ चंद्र रेड्डी के सरकारी गवाह बन जाने के बाद ये माना जा रहा था कि अरविंद केजरीवाल के ख़िलाफ़ ईडी की कार्रवाई का आधार रेड्डी का केजरीवाल के ख़िलाफ़ दिया गया बयान है.
अब जब ये सामने आ गया है कि रेड्डी की कंपनी ने भारतीय जनता पार्टी को करोड़ों रुपए चंदे में दिए, क्या इससे ईडी का केस कमज़ोर पड़ेगा?
अंजलि भारद्वाज कहती हैं, "इस मामले में ईडी के पास क्या सबूत हैं ये कोई नहीं जानता. निश्चित रूप से कई दावे और प्रतिदावे किए गए हैं और इस प्रकृति और पैमाने की जांच में जहां दिल्ली के मौजूदा मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के एक राज्यसभा सदस्य को गिरफ़्तार किया गया है, ये माना जा सकता है कि ईडी के पास कई तरह के सबूत होंगे."
भारद्वाज कहती हैं ईडी के मुताबिक़ उनके पास दो सरकारी गवाह हैं जिनमें से एक पी सरथ चंद्र रेड्डी हैं और फ़िलहाल ये नहीं कहा जा सकता कि ये केस कोर्ट में टिक पायेगा या नहीं.
वो कहती हैं, "लेकिन यह इस मामले में रेड्डी के बयानों की सत्यता पर संदेह की गहरी छाया डालता है और इसकी बहुत गहन जांच की ज़रुरत होगी."
डॉ सुव्रोकमल दत्ता एक जाने-माने राजनीतिक और आर्थिक विशेषज्ञ हैं. हमने उनसे पूछा कि वो इस मामले में हुए घटनाक्रम को कैसे देखते हैं.
उन्होंने कहा, "कोई भी कंपनी किसी भी पार्टी को अपने हिसाब से फंडिंग कर सकती है."
लेकिन इस बात का क्या कि ऑरोबिंदो फार्मा ने पी सरथ चंद्र रेड्डी की गिरफ़्तारी से पहले जहां बीजेपी को 4.5 करोड़ रुपए दिए थे वहीं रेड्डी की गिरफ़्तारी के बाद और उन्हें अदालत से माफ़ी मिल जाने के बाद 30 करोड़ रुपए इलेक्टोरल बॉन्ड के ज़रिए दिए.
इस पर डॉ दत्ता ने कहा कि ये महज़ एक संयोग है और हर कंपनी अपने हिसाब से देखती है कि उसे कब किसे कितना चंदा देना है.
डॉ दत्ता कहते हैं, "अगर आम आदमी पार्टी को लगता है कि इस मामले में कोई राजनीतिक रंग है तो उनको पुख्ता सबूत लेकर अदालत जाना चाहिए. अगर उन्हें लगता है कि बीजेपी ने दबाव दाल कर चंदा लिया है और आरोपी को क्लीन चिट दिलवाई और ईडी ने नरमी दिखाई तो उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका डालनी चाहिए."
पी सरथ चंद्र रेड्डी के सरकारी गवाह बन जाने और उसके बाद उन्हें अदालत से माफ़ी मिल जाने पर डॉ दत्ता ने कहा, "जब कोई आरोपी सरकारी गवाह बनता है तो वो तब बनता है जब उसको पता होता है कि उसने गलती की है और सज़ा कम करवाने के लिए ही कोई भी व्यक्ति सरकारी गवाह बनता है."
"क़ानून का सहयोग करने और सारी जानकारियां साझा करने के बाद ही कोई आरोपी सरकारी गवाह बनता है. और जब कोई सरकारी गवाह बन जाता है तो क़ानून सहानुभूति की नज़र से देखता है और नरम तरीक़े से पेश आता है."
डॉ दत्ता के मुताबिक़ अरविन्द केजरीवाल की गिरफ़्तारी नहीं होती अगर उन्होंने ईडी के लगातार भेजे जा रहे समन का सम्मान किया होता.
वे कहते हैं, "अगर वो बेदाग़ हैं तो उन्हें ईडी के समन्नों से भागने की क्या ज़रुरत थी? उनके ऊपर गंभीर और पुख्ता आरोप हैं इसीलिए उन्होंने अंत तक भागने की कोशिश की. ये पहली बार हुआ है कि किसी राजनेता ने नौ बार ईडी के सम्मन का उल्लंघन किया. इसलिए वो जो विक्टिम कार्ड खेल रहे हैं वो बेबुनियाद है. चुनाव का समय है और आम आदमी पार्टी सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रही है."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
















