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प्रज्वल रेवन्ना मामले में नया मोड़, राष्ट्रीय महिला आयोग ने क्या कहा?- प्रेस रिव्यू
राष्ट्रीय महिला आयोग ने गुरुवार को कहा कि महिलाओं के यौन शोषण के अभियुक्त प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ कोई भी पीड़ित महिला शिकायत दर्ज कराने के लिए आगे नहीं आई है.
इस खबर को द हिंदू अखबार ने प्रमुखता से छापा है. आयोग का कहना है कि उसके पास सिर्फ एक महिला पहुंची थी.
आयोग के मुताबिक इस महिला शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसे जनता दल सेक्युलर के नेता और हसन सीट से सांसद प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ फ़र्ज़ी शिकायत दर्ज करने के लिए मजबूर किया गया था.
प्रज्वल रेवन्ना पर यौन उत्पीड़न, सैकड़ों सेक्स वीडियो रिकॉर्ड करने, धमकाने और साज़िश रचने के आरोप हैं.
पुलिस ने प्रज्वल रेवन्ना और उनके पिता एच डी रेवन्ना, दोनों पर यौन शोषण का मामला दर्ज किया है. इस मामले में कर्नाटक सरकार ने एसआईटी का गठन किया है जो यौन शोषण के मामलों की जांच कर रही है.
प्रज्वल रेवन्ना पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के पोते हैं. प्रज्वल रेवन्ना के पिता कर्नाटक में विधायक हैं और चाचा पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी हैं.
मीडिया में चल रही खबरों को देखते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया था और कर्नाटक पुलिस महानिदेशक को तीन दिनों के अंदर तत्काल कार्रवाई करने को कहा था.
आयोग का कहना है कि पुलिस ने प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ यौन शोषण के दो मामले दर्ज किए हैं. इसके अलावा एक महिला के अपहरण की शिकायत भी दर्ज करवाई गई है.
राष्ट्रीय महिला आयोग का कहना है कि बावजूद इसके कोई भी शिकायतकर्ता, शिकायत दर्ज करवाने के लिए महिला आयोग के सामने नहीं आई है.
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक महिला आयोग ने दावा किया कि एक महिला शिकायतकर्ता, तीन व्यक्तियों के खिलाफ़ शिकायत दर्ज करवाने के लिए सामने आई थी.
इस महिला का आरोप है कि तीनों व्यक्ति महिला पर झूठी शिकायत दर्ज करवाने के लिए दबाव बना रहे हैं और अलग-अलग नंबरों से धमकियां मिल रही हैं.
आयोग का कहना है कि महिला ने अपने और अपने परिवार के लिए सुरक्षा की मांग की है. महिला का आरोप है कि उसे धमकियां देने वाले तीन व्यक्ति कथित तौर पर कर्नाटक पुलिस से जुड़े हुए हैं.
अखबार के मुताबिक महिला आयोग ने उस दावे को खारिज किया है जिसमें कहा गया था कि प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ़ शिकायत दर्ज करवाने के लिए 700 महिलाएं सामने आई हैं.
आयोग का कहना है कि कोई भी महिला सर्वाइवर, प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने के लिए सामने नहीं आई है.
यौन शोषण का मामला सामने आने के बाद प्रज्वल रेवन्ना अभी तक एसआईटी के सामने पेश नहीं हुए हैं. कुछ मीडिया रिपोर्टों में ये दावा किया गया है कि वह विदेश भाग गए हैं.
पश्चिम बंगाल: यौन शोषण का आरोप लगाने वाली महिला की पहचान उजागर
पश्चिम बंगाल के राजभवन ने गुरुवार को आम लोगों को एक घंटे से अधिक समय का सीसीटीवी फुटेज दिखाया गया लेकिन इसमें वह कमरा शामिल नहीं था, जहां आरोप है कि राज्य के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने महिला कर्मचारी को शोषण किया था.
इस खबर को द टेलीग्राफ ने प्रमुखता से छापा है.
अखबार के मुताबिक सीसीटीवी फुटेज में महिला को राजभवन परिसर में देखा जा सकता है.
गुरुवार शाम को महिला ने कहा कि मेरी अनुमति के बिना मेरे चेहरे को बिना ब्लर किए लोगों को दिखाया गया और ऐसा करना एक अपराध है.
उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में शामिल एक व्यक्ति से मुझे मेरा वीडियो मिला, जिसमें मुझे ब्लर नहीं किया गया था. इसका मतलब है कि मुझे बदनाम करने के लिए ये वीडियो फैलाए जा रहे हैं.
भारतीय कानून के मुताबिक कोई व्यक्ति यौन उत्पीड़न की शिकायत करने वाले की पहचान को उजागर नहीं कर सकता है.
फुटेज देखने के लिए राज्यपाल ने आम लोगों के लिए एक इमेल और फोन नंबर जारी किया है. अखबार के मुताबिक उसके रिपोर्टर फुटेज देखने के लिए वहां मौजूद थे.
अखबार के मुताबिक दो कैमरों की फुटेज दिखाई गई. पहला कैमरा नॉर्थ गेट और दूसरा राजभवन पुलिस आउटपोस्ट के करीब लगा था.
राजभवन के एक कर्मचारी का कहना है कि पहली मंजिल पर बने उस कमरे का फुटेज नहीं दिखाया गया है जहां कथित तौर पर महिला के साथ 2 मई को यौन शोषण किया गया था.
अखबार के मुताबिक यह भी साफ नहीं है कि जहां 24 अप्रैल को कथित यौन शोषण हुआ था, वहां सीसीटीवी कैमरा है या नहीं.
द टेलीग्राफ के मुताबिक 2 मई, शाम 5.53 की एक फुटेज दिखाई गई है, जिसमें कथित तौर पर महिला शिकायतकर्ता जल्दबाजी में पुलिस आउटपोस्ट की तरफ जाते हुए दिखाई दे रही हैं. उनका चेहरा फुटेज में साफ दिखाई दे रहा है. फुटेज में महिला एक हाथ उठाते हुए दिखाई देती हैं, जैसे वे पुलिस आउटपोस्ट पर मौजूद किसी व्यक्ति को कुछ कह रही हों. इसके बाद वे पुलिस आउटपोस्ट की तरफ बढ़ती हैं.
अखबार का कहना है कि ऐसी कोई भी फुटेज नहीं दिखाई गई है जहां कथित यौन शोषण की घटना हुई थी.
संदेशखाली में सामने आया नया वीडियो
पश्चिम बंगाल की बहुचर्चित संदेशखाली घटना के संबंध में एक वीडियो सामने आया है.
वीडियो में कथित तौर पर दावा किया गया है कि भारतीय जनता पार्टी की एक स्थानीय महिला नेता ने कई महिलाओं से सादे कागज़ पर हस्ताक्षर कराए और बाद में तृणमूल कांग्रेस नेताओं के खिलाफ बलात्कार और यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराने में उसका इस्तेमाल किया गया.
इस खबर को जनसत्ता अखबार ने पहले पन्ने पर प्रकाशित किया है.
अखबार के मुताबिक इन वीडियो को लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल ने भाजपा पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया है.
वहीं टीएमसी ने दावा किया है कि बीजेपी के एक नेता ने कैमरे पर कबूल किया है कि संदेशखाली मामले में बलात्कार के आरोप मनगढ़ंत थे.
अखबार के मुताबिक पार्टी ने इस संबंध में चुनाव आयोग से शिकायत कर संबंधित नेताओं के खिलाफ़ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने के लिए पुलिस को निर्देश देने का आग्रह किया है.
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