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प्रज्वल रेवन्ना के कथित यौन उत्पीड़न वीडियो से कर्नाटक की राजनीति पर कितना असर पड़ेगा?
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरु से बीबीसी हिंदी के लिए
कर्नाटक में बीजेपी-जेडीएस गठबंधन के उम्मीदवार प्रज्वल रेवन्ना के कथित यौन उत्पीड़न के वीडियो को पेन ड्राइव के ज़रिये सार्वजनिक करने का मामला कर्नाटक में किसी स्कैंडल के भंडाफोड़ के तरीके में एक बड़े बदलाव को दिखाता है.
वो भी ऐसे समय में जब राज्य में लोकसभा चुनावों के लिए घमासान तेज़ हो चुका है.
इससे पहले राज्य के चुनावी इतिहास में किसी कथित सेक्स स्कैंडल का इस तरह से भंडाफोड़ नहीं हुआ था.
हर तरह के पार्टी कार्यकर्ता सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के इस्तेमाल के बजाय इस तरह से पेन ड्राइव को बस स्टॉप, पार्कों, गांवों में लगने वाले मेलों और यहां तक कि घरों में डंप किए जाने से निराश हैं.
पेन ड्राइव ऐसे समय में सार्वजनिक किए गए हैं जब हासन लोकसभा सीट पर वोटिंग में सिर्फ पांच दिन बचे थे.
कर्नाटक में हासन लोकसभा सीट उन 14 सीटों में से एक है, जहां राज्य के पहले और देश के दूसरे चरण के तहत वोटिंग हुई.
अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी में पॉलिसी एंड गवर्नेंस के प्रोफेसर नारायणा बीबीसी हिंदी से कहते हैं, ''भारत में टेक्नोलॉजी की मदद से पॉलिटिकल इनोवेशन बढ़ता दिख रहा है. लेकिन जो हुआ है वो राजनीतिक चालाकी है. शायद ये जून 2023 में मीडिया घरानों को वीडियो के अंश दिखाने से रोकने के लिए प्रज्वल रेवन्ना की कोशिश से लाए गए निषेधाज्ञा की काट के लिए किया गया है.''
क्या राजनीतिक असर हो सकता है?
इस स्कैंडल के सामने लाने के अलग-अलग राजनीतिक असर हो सकते हैं. ये छोटी और लंबी अवधि में दोनों, जेडीएस और बीजेपी को एक साथ या उन्हें अलग-अलग रूप से प्रभावित कर सकता है. बीजेपी नेता निजी बातचीत में ये मानते हैं कि ये ‘शर्मसार करने वाली बात’ है.
फिलहाल, तो ऐसा लगता है कि बीजेपी और जेडीएस गठबंधन इस तूफान से खुद को निकाल ले जाएगा.
हालांकि राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक ये इस पर निर्भर करता है कि कर्नाटक में अगले चरण में बची 14 लोकसभा सीटों में कांग्रेस अपना प्रचार अभियान कैसे चलाती है .
कर्नाटक सरकार ने इस पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा, "हासन ज़िले में अश्लील वीडियो सर्कुलेट हो रहे हैं. ये देखा गया है कि महिलाओं के ख़िलाफ़ यौन हिंसा की घटना हुई है."
एसआईटी का नेतृत्व राज्य के एडीजीपी बीके सिंह कर रहे हैं. बीके सिंह ने ही पत्रकार गौरी लंकेश और एक्टिविस्ट एमएम कालबुर्गी की हत्याओं की जांच का नेतृत्व किया था.
सामने आया नया पहलू
हासन ज़िला पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा परिवार का मज़बूत गढ़ रहा है. मंड्या के अलावा हासन ताकतवर वोक्कालिग्गा समुदाय की शक्ति का केंद्र माना जाता है. हालांकि वोक्कालिगा समुदाय दक्षिण कर्नाटक के अन्य ज़िलों भी फैला हुआ है.
2019 के चुनाव में एचडी देवगौड़ा, प्रज्वल रेवन्ना (एचडी रेवन्ना के बेटे) के लिए हासन सीट छोड़ कर तुमकुर शिफ्ट हो गए थे. उन्होंने अपने परिवार में संतुलन बनाने के लिए ऐसा किया था क्योंकि उनके दूसरे पोते निखिल कुमारस्वामी (पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के बेटे) मंड्या से चुनाव लड़ रहे थे. लेकिन निखिल कुमारस्वामी और उनके दादा दोनों चुनाव हार गए.
पेन ड्राइव बांटने का मामला पहली बार तब सामने आया जब प्रज्वल रेवन्ना के चुनाव एजेंट ने 21 अप्रैल को हासन पुलिस थाने में ये शिकायत दर्ज कराई कि 'राजनीतिक वजहों से अश्लील वीडियो वाले कुछ पेन ड्राइव बस स्टैंड्स और लोगों के घरों में डंप किए जा रहे हैं. इनमें रेवन्ना की मॉर्फ़्ड तस्वीरें हैं.'
इस शिकायत में एक शख्स नवीन गौड़ा और कुछ दूसरे लोगों की ओर उंगलियां उठाई गई थीं.
इसके बाद के रविवार यानी 28 अप्रैल को देवगौड़ा परिवार हमले का ये एक नया पहलू सामने आया.
एचडी रेवन्ना के घर में खाना बनाने का काम करने वाली एक 47 साल की महिला होलेनरसिपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई. इसमें कहा गया गया था कि एचडी रेवन्ना और प्रज्वल रेवन्ना ने उनका यौन उत्पीड़न किया है.
एचडी रेवन्ना भी अभियुक्त बने
शिकायत करने वाली महिला ने बताया कि वो एचडी रेवन्ना की पत्नी की रिश्तेदार हैं. वो रेवन्ना के बड़े बेटे सूरज की शादी के दौरान घरेलू काम में मदद करने के लिए रेवन्ना परिवार में आई थीं. लेकिन बाद में वो यहां कुक का काम करने लगीं. उन्होंने वहां 2019 से 2022 तक काम किया था.
उन्होंने अपनी शिकायत में कहा है, ''मैंने जब काम शुरू किया तो वहां काम करने वाली अन्य छह घरेलू सहायिकाओं ने बताया कि वो प्रज्वल से डरती हैं. वहां काम करने वाले पुरुष सहायकों ने भी कहा है कि वो रेवन्ना और प्रज्वल से डर कर रहें."
"जब भी उनकी (एचडी रेवन्ना) पत्नी भवानी घर पर नहीं होती थीं तो रेवन्ना मुझे गलत ढंग से छूते थे. उन्होंने मुझ पर यौन हमला किया. वो दूसरे लोगों से कहते थे कि मेरी बेटी को ले आए जो उनकी तेल मालिश करे. प्रज्वल मेरी बेटी को वीडियो कॉल कर उससे अश्लील बातें करते थे.''
महिला ने कहा है कि उनकी बेटी ने प्रज्वल का नंबर ब्लॉक कर दिया था. इसके बाद उन्होंने भी काम छोड़ दिया था.
शिकायत में उन्होंने कहा है, ''मैंने वीडियो देखा और मैं उनमें से (महिलाओं को) एक को जानती हूं.''
लेकिन इस मामले को लेकर एचडी रेवन्ना ने संवाददाताओं से कहा, "अब एसआईटी बन गई है. मैं इसके सामने पेश होउंगा. जब बुलाया जाएगा प्रज्वल भी जाएंगे. एफआईआर कल दर्ज की गई है. यह चार-पांच साल पुराना मुद्दा है."
नाराज़ एचडी कुमारस्वामी ने पत्रकारों से कहा, ''इन रिपोर्टों में आप सभी देवगौड़ा का नाम क्यों डाल रहे हैं. अगर किसी व्यक्ति ने गलती की है तो उसे उसका खमियाज़ा भुगतना पड़ेगा.''
राजनीति पर क्या असर होगा
पिछले साल जून में रेवन्ना ने इन वीडियो पर अदालत से रोक हासिल कर ली थी. इसके बाद बीजेपी के स्थानीय नेता देवराजे गौड़ा ने कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बीवाई विजेंद्र को दिसंबर के पहले सप्ताह में पत्र लिखा था और मांग की थी कि प्रज्वल रेवन्ना या उनके परिवार के किसी सदस्य को गठबंधन से उम्मीदवार ना बनाया जाए.
हालांकि, बीजेपी नेतृत्व ने तय किया था कि एक बार गठबंधन में सीटों का बंटवारा तय हो जाए तो किसे उम्मीदवार बनाना है और किसे नहीं ये गठबंधन सहयोगी पर छोड़ दिया जाए.
पार्टी के प्रवक्ता प्रकाश शेषवर्गावाचर ने बीबीसी हिंदी से कहा, “हम गठबंधन सहयोगी से ये नहीं कह सकते हैं कि किसे उम्मीदवार बनाये और किसे ना बनाये, ये पार्टी पर छोड़ दिया गया था.”
लेकिन प्रोफ़ेसर नारायणा कहते हैं कि अगर कोई स्कैंडल है ‘तो उसका बहुत ज़्यादा असर नहीं होगा क्योंकि जब मतदान हुआ तब कथित वीडियो की पेन ड्राइव सिर्फ़ हासन शहर में ही बांटी जा रही थीं. इसका कर्नाटक में पहले चरण के मतदान में कोई असर नहीं हुआ है. लेकिन, अगर कांग्रेस बची हुई 14 सीटों पर महिलाओं के वोटों को अपनी तरफ़ खींचने की कोशिश करती है तो ये बीजेपी को नैतिक रूप से चुनौती दे सकता है.”
राजनीतिक विश्लेषक डी उमापति कहते हैं कि इस स्कैंडल ने बीजेपी के हाथ में वो छड़ी दे दी है जिससे वो भविष्य में जेडीएस पर हावी हो सकती है.
उमापति कहते हैं, ''आप ये मान सकते हैं कि बीजेपी जेडीएस को निगल जाएगी. जेडीएस ने इसका अंदाज़ा भी लगा लिया होगा लेकिन आज की स्थिति में जेडीएस भविष्य की तरफ़ देखने के लिए अपना वर्तमान बचाना चाहेगी. इसमें कोई शक़ नहीं है कि ये जेडीएस के ताबूत में एक बड़ी कील है.''
प्रोफ़ेसर नारायणा भी कुछ हद तक उमापति से सहमत हैं. वो कहते हैं, “इस प्रकरण से जेडीएस का अंत और क़रीब आ गया है. ये जेडीएस के बीजेपी से अलग होने का कारण बन सकता है और अगर ऐसा हुआ तो जेडीएस नेताओं में बीजेपी में शामिल होने की भगदड़ मच जाएगी.”
हालांकि, उमापति अपनी इस बात पर क़ायम हैं कि जेडीएस नेता एचडी देवगौड़ा जब तक ज़िंदा हैं वो अपनी पार्टी को टूटने नहीं देंगे. लेकिन अगर जेडीएस को कुछ होता है तो इसका मतलब ये है कि कांग्रेस की राजनीति दो ध्रुवीय रह जाएगी और बीजेपी के लिए बहुमत हासिल करना अब ख़्वाब नहीं रह जाएगा.
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