'यहूदी मुसलमान बराबर हैं': उस्मान ख़्वाजा बोले- फ़लस्तीनियों के लिए मैसेज पर आईसीसी के बैन का विरोध करेंगे

उस्मान ख्वाजा

इमेज स्रोत, Getty Images

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर उस्मान ख्वाजा ने कहा है कि वह फ़लस्तीन के समर्थन के संदेशों वाले जूते पहनने की अनुमति नहीं देने के फैसले का सम्मान करते हैं. लेकिन वो आईसीसी के इस फ़ैसले का 'विरोध' करेंगे.

उस्मान ख्वाजा ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ पहले क्रिकेट टेस्ट मैच में 'सभी का जीवन बराबर है' और 'स्वतंत्रता एक मानवाधिकार है' जैसे शब्दों वाले जूते पहनने की योजना बनाई थी.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल ने इसे राजनीतिक बयान बताते हुए, संदेश वाले जूते पहनने की अनुमति नहीं दी थी.

एक वीडियो जारी करते हुए ख़्वाजा ने कहा कि वो एक मानवीय अपील जारी करना चाहते थे.

इस जज़्बाती वीडियो में 36 वर्षीय क्रिकेटर ने कहा, "मैं आईसीसी के नज़रिए और फ़ैसले का सम्मान करता हूँ लेकिन मैं इसका विरोध करूंगा और संदेश वाले जूते पहनने के लिए अप्रूवल मांगूंगा."

ग़ज़ा के आम लोगों का समर्थन

उस्मान ख्वाजा

इमेज स्रोत, Getty Images

आईसीसी के नियमों के तहत अगर ख़्वाजा बिना अप्रूवल के संदेश वाले जूते पहनकर मैदान में उतरने हैं तो उन्हें खेलने से रोका जा सकता है.

लेकिन ऑस्ट्रेलिया के कप्तान पैट कमिन्स पहले ही कह चुके हैं कि ख़्वाजा ऐसा नहीं करने जा रहे हैं.

उस्मान ख़्वाजा को पर्थ में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ टेस्ट मैच से पहले, ट्रेनिंग के दौरान संदेश वाले जूते पहने हुए देखा गया था.

वो पहले भी सोशल मीडिया पर ग़ज़ा के आम लोगों के समर्थन में लिखते रहे हैं.

एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा था, "अपने पैदा होने के स्थान का कोई व्यक्ति चुनाव नहीं कर सकता है. मैं बचपन से ही सोचता हूँ कि सब की ज़िंदगी बराबर नहीं होती. मैं ऐसी दुनिया में कभी नहीं रहा हूँ जहां ज़िंदगी और मौत में इतनी ग़ैर-बराबरी हो."

आईसीसी के नियम

उस्मान ख्वाजा

इमेज स्रोत, Getty Images

इससे पहले ख़्वाजा ने ग़ज़ा के बारे में यूनिसेफ़ का एक वीडियो इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया था.

इस वीडियो पर उन्होंने कमेंट किया, "क्या आप मासूम लोगों के मारे जाने की परवाह नहीं करते? या क्या किसी की चमड़ी का रंग अधिक अहम होता है? या ये उनके धर्म पर निर्भर करता है? अगर आप ये मानते हैं कि सभी लोग बराबर हैं तो ये सब बातें बेमानी सी हैं."

बुधवार को क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने कहा कि वो खिलाड़ियों को निजी राय व्यक्त करने के अधिकार का समर्थन करते हैं लेकिन उन्हें उम्मीद है कि खिलाड़ी आईसीसी के नियमों का पालन करेंगे.

पैट कमिन्स को लगता है कि ख़्वाजा को आईसीसी के नियमों का ज्ञान नहीं था. लेकिन कप्तान ने उनका खुला समर्थन किया है.

उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि वो कोई बड़ा हंगामा करना चाहते थे. मेरे ख़्याल से उन्होंने कहा कि 'सभी लोग बराबर' हैं. मुझे नहीं लगता ये कोई विभाजक बात है. मेरे ख़्याल से इस बयान पर किसी को कोई शिकायत नहीं होनी चाहिए."

'मेरे लिए, एक यहूदी और एक मुसलमान का जीवन बराबर है'

छोड़िए X पोस्ट
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

पोस्ट X समाप्त

उस्मान ख्वाजा ने अपने वीडियो संदेश में कहा है कि 'मेरे लिए सभी इंसान बराबर' हैं.

'(मेरे लिए) एक यहूदी, एक मुस्लिम और एक हिंदू समान हैं. मैं उन लोगों के लिए आवाज उठा रहा हूं जो अपने हक के लिए आवाज नहीं उठा पा रहे हैं.'

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट

इमेज स्रोत, BBC

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ने कहा कि दुनिया ने इस मुद्दे से मुंह मोड़ लिया है और यह उनके लिए असहनीय है.

वह याद करते हैं कि एक बच्चे के रूप में उन्हें लगता था कि उनका जीवन कोई मायने नहीं रखता, लेकिन सौभाग्य से जहां वह बड़े हुए वहां इतनी असमानता नहीं थी.

उस्मान ख्वाजा आईसीसी की आपत्ति से सहमत नहीं हैं क्योंकि यह मानवाधिकार की अपील है. 'स्वतंत्रता मानवाधिकार का एक मुद्दा है.'

उस्मान ख्वाजा

इमेज स्रोत, SOCIAL MEDIA

ऑस्ट्रेलिया की खेल मंत्री अनिक वेल्स ने भी ख़्वाजा का समर्थन किया है.

खेल मंत्री ने कहा है कि वो इस बात से सहमत नहीं हैं कि ख्वाजा के जूतों का संदेश आईसीसी के नियमों का उल्लंघन करता है.

अनिका वेल्स ने कहा, "उस्मान ख़्वाजा एक बढ़िया एथलीट और ऑस्ट्रेलियाई हैं. वो जिस भी विषय को ज़रूरी समझकर बोलना चाहते हैं, उन्हें उसका पूरा अधिकार है. उन्होंने जो किया है वो ख़ामोशी और सम्मानजनक तरीके से किया है."

लेकिन पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर रॉडनी हॉग और साइमन ओ'डोनेल ने कहा है कि खेल का मैदान किसी सियासी बयान के लिए सही जगह नहीं है.

मैच रेफ़री का अधिकार

आजम खान के बल्ले पर फ़लस्तीनी झंडा

इमेज स्रोत, @FAIZANLAKHANI

इमेज कैप्शन, आजम खान के बल्ले पर फ़लस्तीनी झंडा

ओ'डोनेल ने ऑस्ट्रेलिया के एक स्थानीय रेडियो स्टेशन को बताया, "मैं निजी तौर पर उस्मान की मान्यताओं का सम्मान करता हूँ लेकिन जब वो ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधत्व कर रहे हैं तब उन्हें निजी मान्यताओं को लाने का कोई अधिकार नहीं है."

आईसीसी के नियमों के तहत खिलाड़ी और अधिकारी अपने कपड़ों और साज़ो-सामान पर बिना अप्रवूल के कोई 'संभावित विभाजक' या सियासी संदेश नहीं लिख सकते.

मैच रेफ़री को अधिकार है कि वो मैदान पर खिलाड़ियों द्वारा इस रूल के उंल्लघन को रोक सकता है.

वर्ष 2014 में इंग्लैंड के बल्लेबाज़ मोइन अली को भी ग़ज़ा के समर्थन में रिस्टबैंड पहनने से रोका गया था.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)