दूरदर्शन ने अपने 'लोगो' का रंग बदलकर लाल से 'भगवा' क्यों किया?

सरकार के स्वामित्व वाले प्रसारक प्रसार भारती ने समाचार चैनल डीडी न्यूज़ के लोगो का रंग लाल से बदलकर 'भगवा' कर दिया है.
लोकसभा चुनावों के दौरान दूरदर्शन के लोगो का रंग बदलने पर विपक्षी दलों ने कड़ी आलोचना की है.
राज्यसभा सदस्य और प्रसार भारती के पूर्व प्रमुख जवाहर सरकार ने इस कदम पर कहा है, "यह प्रसार भारती नहीं है, यह प्रचार भारती है."
हालांकि प्रसार भारती के मौजूदा सीईओ गौरव द्विवेदी ने इन आरोपों से इनकार किया है.
उन्होंने पत्रकारों से कहा, "लोगो में चमकीले रंगों का इस्तेमाल केवल व्यावसायिक रणनीति के तहत किया गया है, इसका राजनीति से कोई संबंध नहीं है."
पिछले साल जनवरी में 'दूरदर्शन पोथिगई' टेलीविजन चैनल का नाम बदलकर 'डीडी तमिल' कर दिया गया था.
उस समय इस ख़बर को लेकर काफी विवाद हुआ था. हालांकि, डीडी तमिल का लोगो भी 'भगवा' रंग का कर दिया गया था.
इस महीने की शुरुआत में केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने दूरदर्शन पर 'द केरल स्टोरी' नाम की फ़िल्म के प्रसारण का कड़ा विरोध किया था.
उन्होंने कहा था, "दूरदर्शन को 'द केरल स्टोरी' प्रसारित करने के अपने फैसले को तुरंत पलटना चाहिए, क्योंकि इसका उद्देश्य प्रदेश में नफ़रत फैलाना है. दूरदर्शन को संघ परिवार के सांप्रदायिक एजेंडे को बढ़ाने का काम नहीं करना चाहिए."
लेकिन इसके बावजूद 5 अप्रैल की रात 8 बजे दूरदर्शन पर इस फिल्म का प्रसारण किया गया. यह मामला अभी थमा भी नहीं था कि एक बार फिर प्रसार भारती डीडी न्यूज के लोगो के रंग बदलने को लेकर विवादों में घिर गया है.

इमेज स्रोत, THE KERALA STORY
दूरदर्शन की घोषणा
दूरदर्शन भारत सरकार का आधिकारिक सरकारी टेलीविज़न है. इसके लोगो का रंग बदलने की घोषणा दूरदर्शन के आधिकारिक सोशल मीडिया पन्ने पर एक पोस्ट के माध्यम से भी की गई.
दूरदर्शन ने उस पोस्ट में कहा, "अब हम एक नए अवतार में आ रहे हैं लेकिन हमारे सिद्धांतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. ख़बरों की दुनिया की ऐसी यात्रा के लिए तैयार हो जाइए जो पहले कभी नहीं हुई और नए डीडी न्यूज़ का अनुभव लीजिए."
दूरदर्शन ने साथ ही ये भी कहा कि "तेज़ ख़बरों की जगह सटीक ख़बरें, सनसनीखेज़ ख़बरों की जगह सच्चाई, दूरदर्शन की ख़बरें सच का भरोसा दिलाती हैं."
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 1
प्रसार भारती के फ़ैसले की आलोचना
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अपने सोशल मीडिया पन्ने पर इस घटना की आलोचना की.
उन्होंने लिखा, "मैं यह देखकर हैरान हूं कि जब देश भर में आम चुनाव हो रहे हैं तो दूरदर्शन का लोगो अचानक भगवा रंग में बदल गया. यह पूरी तरह से अनैतिक और अवैध है."
उन्होंने इसे बीजेपी के साथ जोड़कर टिप्पणी की और चुनाव आयोग से सवाल किया.
ममता ने लिखा, "यह कदम सरकारी प्रसारक के बीजेपी को लेकर पूर्वाग्रह के बारे में बहुत कुछ बताता है. चुनाव आयोग ने चुनाव के दौरान इस तरह के भगवा समर्थक प्रचार को अनुमति कैसे दी? चुनाव आयोग को इस पर तुरंत रोक लगानी चाहिए और दूरदर्शन का लोगो वापस पुराने रंग में बदलना चाहिए."
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 2
वहीं प्रसार भारती के पूर्व प्रमुख जवाहर सरकार का कहना है कि ऐसा लगता है कि एक विशेष पार्टी की प्रचार किया जा रहा है.
जवाहर सरकार 2012 से 2014 तक प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे. मौजूदा वक्त में वो तृणमूल कांग्रेस से राज्यसभा सदस्य हैं.
डीडी न्यूज के लोगो का रंग बदलकर 'भगवा' करने के मामले में उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "भारत के सरकारी प्रसारक दूरदर्शन के ऐतिहासिक लोगो पर भगवा रंग लगाया गया है. पूर्व सीईओ के तौर पर मैं दूरदर्शन के भगवाकरण को चिंता की नज़र से देख रहा हूं. यह अब प्रसार भारती नहीं है, बल्कि एक विशेष पार्टी का प्रचार भारती है."

जवाहर सरकार ने कुछ यही संदेश एक वीडियो के ज़रिए सोशल मीडिया पर भी पोस्ट किया.
वीडियो में उन्होंने कहा "ये दुख की बात है कि सरकारी प्रसारक से अपनी ब्रांडिंग के लिए ये रंग चुना. आप इसे नारंगी या कोई और रंग कह सकते हैं, लेकिन इसे आम तौर पर भगवा कहा जाता है और इसे एक ख़ास धर्म से जोड़कर देखा जाता है.
जवाहर सरकार ने कहा, "इसके साथ देश, सरकार, पार्टी, संगठन और धर्म फर्क करने वाली लकीरें जैसे ख़त्म हो गई हैं."
उन्होंने कहा, "लाखों लोग इसे देखते हैं. इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किसी ख़ास धर्म का रंग फैलाने के लिए करना सही नहीं है. आप कह सकते हैं कि राष्ट्रीय झंडे में भी ये रंग है लेकिन उसमें ये दूसरे रंगों के साथ है."
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 3
क्या दूरदर्शन का 'भगवाकरण' हो रहा है?
दूरदर्शन में काम करने वाले एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बीबीसी से इस विवाद के बारे में बात की.
उन्होंने कहा, "जब दूरदर्शन शुरू हुआ, तो इसे एक सत्तारूढ़ सरकारी चैनल के बैनर तले लॉन्च किया गया था, लेकिन उस वक्त यहां के अधिकारियों को इस बात की समझ नहीं थी कि इस चैनल का उद्देश्य क्या है और इसके विकास का अगला चरण क्या होगा."
अधिकारी ने कहा, "दूरदर्शन ने लोगों के बीच काफी लोकप्रियता हासिल की. इसका एक कारण ये भी था कि उस वक्त कोई दूसरा चैनल उतना बड़ा नहीं था. 2000 के दशक के दौरान निजी चैनल आने शुरू हुए और लोकप्रिय होने लगे, लेकिन फिर भी किसी ने दूरदर्शन को बदलने की कोशिश नहीं की. एक के बाद एक आने वाली सरकारें भी इसे समझने में विफल रही हैं."
इन अधिकारी ने कहा, "जिस तरह बीएसएनएल जैसे पीएसयू को ख़त्म कर दिया गया, वही दूरदर्शन के साथ भी हो रहा था. दूरदर्शन में क्या हो रहा है, जानने-सुनने वाला कोई नहीं है. यही कारण है कि पूरा नियंत्रण कुछ लोगों के हाथों में चला जाता है."
एक उदाहरण के ज़रिए समझाते हुए वो कहते हैं, "दूरदर्शन पर अगर चुनाव प्रचार का कोई वीडियो आता है तो उसमें सभी को समान अधिकार दिया जाना चाहिए, लेकिन एक राज्य में वीडियो में उस राज्य के मुख्यमंत्री, जो विपक्षी पार्टी से हैं उन्हें सातवें स्थान पर रखा जाए, लेकिन एक बीजेपी नेता जो किसी पद पर नहीं हैं, उन्हें तीसरे स्थान पर रखा जाए और अधिक समय दिया जाए. इसमें कौन सी समानता है?"
अधिकारी ने कहा, "दूरदर्शन में सारी नौकरियां उन्हीं को मिलती हैं जो एक ही पार्टी से होते हैं. तमिल दूरदर्शन में भी यही हो रहा है. हाल ही में एक सेलिब्रिटी को मेगा सीरियल करने की डील दी गई, वो अब बीजेपी में शामिल हो गए हैं."
उन्होंने कहा, "कुछ कर्मचारी भी एकपक्षीय पूर्वाग्रह का विरोध कर रहे हैं लेकिन उनकी आवाज नहीं सुनी जाती. दूरदर्शन को बेहतर बनाने के कई और रचनात्मक तरीके हैं, इस तरह के भगवाकरण का कोई फायदा नहीं है."

इमेज स्रोत, Getty Images
'भगवाकरण को सामान्य बनाने की कोशिश'
तमिलनाडु प्रोग्रेसिव राइटर्स आर्टिस्ट एसोसिएशन के महासचिव अधावन दीत्सन्या कहते हैं, "भारतीय मीडिया बीते कुछ वर्षों से बदलाव के दौर से गुज़र रहा है. अगर आप दूरदर्शन के कार्यक्रम देखते रहें तो यह स्पष्ट हो जाता है कि ये कहीं न कहीं भगवा हो गया है."
"आईआरसीटीसी का मोबाइल ऐप, वंदे भारत ट्रेनें- ये केवल कुछ उदाहरण हैं. हर जगह भगवा रंग लाकर, वो भगवाकरण को सामान्य और स्वीकार्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं."
"ये कुछ-कुछ उनके पक्ष में किताबों में ये लिख देने जैसा है कि सरकारी लोग जब बोलते हैं तो जय श्रीराम कहते हैं. केवल दूरदर्शन ही नहीं, हमारे चारों ओर देखिए कि कैसे इन दस वर्षों में जैसे एक महाकाव्य ही बन गया है."
उन्होंने यह भी कहा, "चुनाव प्रचार के लिए जा रहे प्रधानमंत्री, पद की गरिमा बनाए रखने की बजाय कह रहे हैं कि विपक्षी दलों ने नॉन-वेज खाया और मंदिर उद्घाटन समारोह में नहीं आए. ऐसे में यह कोई बड़ी बात नहीं है कि दूरदर्शन के लोगो का रंग भगवा कर दिया गया."

इमेज स्रोत, AADHAVANDHEETCHANYA/FACEBOOK
'सरकारी चैनल पर 'द केरल स्टोरी' नहीं दिखानी थी'
वरिष्ठ पत्रकार प्रियन कहते हैं, "जब फ़िल्म 'द केरल स्टोरी' का मामला अदालत में पहले से है, तो सरकारी चैनल दूरदर्शन ने चुनाव के दौरान फ़िल्म का प्रसारण किया. चुनाव आयोग भी इससे चौंक गया था. तो दूरदर्शन का यह नया अवतार निश्चित रूप से एक भगवा अवतार है."
वो सवाल उठाते हुए कहते हैं, "ये जानते हुए भी कि ये ख़ास वर्ग-विरोधी और समाज-विरोधी फिल्म है. इसे सरकारी समाचार चैनल पर क्यों प्रसारित किया गया? चुनावी फायदे के लिए ऐसा करते वक्त क्या दूरदर्शन को यह पता नहीं होना चाहिए था कि वो किसी पक्ष का समर्थन कर रहा है."
उन्होंने कहा कि जब संसद पर ही भगवा रंग फेंक दिया गया तो डीडी के लोगों का भगवा हो जाना सामान्य बात है.
उन्होंने कहा, "पहले चरण का मतदान संपन्न हो गया है. अभी छह चरण का मतदान बाक़ी है. लोगों पर प्रभाव डालने के लिए वो ऐसी रणनीति का सहारा लेंगे और कहेंगे कि हम बहुसंख्यक समाज समर्थक और अल्पसंख्यक विरोधी हैं. वो यही जानते हैं."

दूरदर्शन का प्रबंधन क्या कहता है?
प्रसार भारती के मौजूदा सीईओ गौरव द्विवेदी ने डीडी के लोगो के रंग बदलने को लेकर लगाए जा रहे आरोपों से इनकार किया है.
उन्होंने कहा है कि नया लोगो नारंगी रंग का है और इस बदलाव का नाता किसी पार्टी या किसी ख़ास रंग से नहीं है.
उन्होंने पत्रकारों से कहा कि "यह नारंगी रंग है. छह-सात महीने पहले, जी20 सम्मेलन के आयोजन से पहले, हमने डीडी इंडिया (अंग्रेजी समाचार चैनल) के लोगो को उसी रंग में अपडेट किया था. इसके बाद हमने नए ग्राफिक्स पर निर्णय लिया."
"हमने विज़ुअल्स और तकनीक के स्तर पर डीडी न्यूज़ के एक नए अवतार की शुरुआत की है. केवल चैनल का लोगो ही नहीं, नई जगहों, आधुनिक उपकरणों, प्रेज़ेनटेशन का नया तरीका, काफी नए बदलाव किए गए हैं."
उन्होंने कहा, "इससे पहले हमने दूरदर्शन के लोगो में नीले और पीले रंग का भी इस्तेमाल किया है. लोगो में चमकीले रंगों का इस्तेमाल विज्ञापन रणनीति का हिस्सा है. इसलिए ये बदलाव चैनल के लिए हैं, इसका राजनीति से कोई संबंध नहीं है."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)














