ईरान ने अमेरिकी हमले को बताया 'रणनीतिक ग़लती', क्या मध्य पूर्व में बढ़ेगा तनाव

    • Author, जॉर्ज राइट
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

ईरान ने सीरिया और इराक़ में हुए अमेरिकी हमलों को 'रणनीतिक ग़लती' बताया है. अमेरिका ने ईरान से जुड़े मिलिशिया ग्रुपों के कई ठिकानों को शुक्रवार को निशाना बनाया था.

जॉर्डन में एक अमेरिकी सैन्य अड्डे 'टॉवर 22' पर 28 जनवरी को ड्रोन हमला हुआ था जिसें तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए. अमेरिका ने इसे लेकर ही जवाबी हमले किए हैं.

व्हाइट हाउस ने इस ड्रोन हमले के लिए 'ईरान समर्थित मिलिशिया ग्रुप को ज़िम्मेदार ठहराया' था.

ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सीरिया और इराक़ पर किए गए हमलों से 'इलाक़े में तनाव और अस्थिरता बढ़ने के अलावा और कोई नतीजा नहीं निकलेगा.'

इससे पहले, इराक़ ने भी कहा था अमेरिका के हमले इस क्षेत्र में 'विनाशकारी परिणाम' लेकर आएंगे.

इराक़ के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, ये हमले उनके देश की संप्रभुता का 'उल्लंघन' थे और इससे 'इराक़ और उस इलाक़े की सुरक्षा और स्थिरता' प्रभावित होगी.

इराक़ी अधिकारियों ने कहा कि अमेरिका के हमलों में आम नागरिकों सहित कम से कम 16 लोग मारे गए.

उधर, सीरिया ने कहा कि उसके इलाक़ों पर अमेरिकी 'क़ब्ज़ा' जारी नहीं रह सकता.

शुक्रवार को अमेरिका के कई बी-1 सुपरसोनिक बमवर्षक विमानों ने 30 मिनट के भीतर सीरिया में चार और इराक़ में तीन ठिकानों के 85 टारगेट पर हमले किए थे.

अमेरिकी सेना के बयान के अनुसार, अमेरिका ने इराक़ और सीरिया में ईरानी रिवोल्यूशनरी गॉर्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) कुद्स फ़ोर्स और इससे जुड़े मिलिशिया ग्रुप पर हमले किए हैं.

ईरान की धरती पर कोई हमला नहीं किया गया है.

बीबीसी के अमेरिकी पार्टनर सीबीएस न्यूज़ को एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि 'शनिवार को जबसे अमेरिका ने इराक़ और सीरिया पर हमला किया है, उसके बाद से अमेरिकी बलों पर एक और हमला हुआ है.'

सीरिया में मिशन सपोर्ट साइट यूफ्रेटस में स्थित अमेरिकी बलों पर रॉकेट से हमला किया गया लेकिन किसी के हताहत होने की ख़बर नहीं है.

इस बीच, अमेरिका और ब्रिटेन ने यमन के हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर तीसरी बार बमबारी की है.

बाइडन ने कहा- 'अभी हमले और होंगे'

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि अमेरिकी हमले "हमारे ओर से चुनी गए जगहों और समय पर जारी रहेंगे.

बाइडन ने कहा कि उनका देश ‘पश्चिम एशिया या दुनिया में किसी और जगह संघर्ष बढ़ाना नहीं चाहता.’

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ड्रोन ईरान निर्मित था और रूस को सप्लाई किए गए ड्रोन जैसा था.

अमेरिका का मानना है कि चरमपंथी संगठन जो कई मिलिशिया ग्रुपों का एक संयुक्त मंच है, को आईआरजीसी की ओर से हथियार, फ़ंड और ट्रेनिंग दी जाती है.

ईरान ने अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुए हमले में अपनी भूमिका से इनकार किया है और कहा कि वो ‘प्रतिरोधी ग्रुपों (रजिस्टेंस ग्रुप) के फ़ैसलों में दख़ल नहीं’ देता.

ईरान के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि इराक़, सीरिया और यमन में अमेरिकी हमले ‘केवल जॉयनिस्ट सरकार की मदद’ के लिए किए गए.

संयुक्त राष्ट्र में मॉस्को के राजनयिक दमित्री पोलियांस्की ने सोशल मीडिया पर कहा कि सीरिया और इराक़ पर अमेरिकी हमले के कारण शांति और सुरक्षा पर ख़तरे को लेकर रूस ने सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की है.

रूस परिषद का स्थाई सदस्य है और ईरान का क़रीबी सहयोगी बन चुका है.

जवाबी हमले में क्यों देर हुई?

ड्रोन हमले में मारे गए सैनिकों विलियम रीवर्स (46), केनेडी सैंडर्स (24), ब्रेओना मोफ़ेट (23) के अंतिम संस्कार में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन मौजूद थे, इसके कई घंटों बाद इराक़ और सीरिया में अमेरिकी हमले हुए.

ड्रोन हमले में 40 अमेरिकी सैनिक भी घायल हो गए थे. यह हमला अमेरिकी टॉवर 22 बेस पर हुआ.

अमेरिकी सेना के तुरंत हमला न करने और जवाबी हमले की टाइमिंग पर अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी ने सवाल उठाए हैं.

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि मौसम ख़राब होने की वजह से हमले में देर हुई.

जबकि विदेश नीति के मामलों के कुछ एक्सपर्ट का कहना है कि इस देरी से ईरान को अपने सैनिकों को हटाने का मौका मिल गया, इससे ईरान और अमेरिका के बीच व्यापक संघर्ष की संभावित स्थिति टल गई है.

हूती विद्रोहियों पर हमले से बढ़ा तनाव

इराक़ और सीरिया में ईरान समर्थित मिलिशिया ग्रुपों के ठिकानों पर हमले के 24 घंटे के अंदर अमेरिका और ब्रिटेन ने यमन में 13 जगहों पर 36 टार्गेट को निशाना बनाया.

ये हमले लाल सागर में हूती विद्रोहियों की ओर से कमर्शियल जहाजों पर हो रहे हमलों के जवाब में किए गए.

ईरान समर्थित और वित्त पोषित हूती विद्रोहियों ने जवाबी हमले करने की चेतावनी दी है.

हूती विद्रोहियों के एक प्रवक्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा कि अमेरिका-ब्रिटेन का यह तीसरा संयुक्त हमला, फ़लस्तीनियों के समर्थन में उनके "नैतिक, धार्मिक और मानवीय पक्ष" से डिगा नहीं पाएगा.

बीते नवंबर से ही लाल सागर में कॉमर्शियल जहाजों पर हूती विद्रोही हमला कर रहे हैं. हर साल 15% वैश्विक व्यापार (लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर) लाल सागर से ही होकर गुजरता है.

कई शिपिंग फ़र्मों ने इस रास्ते से परहेज करना शुरू कर दिया है और वे इसकी बजाय अफ़्रीका के दक्षिणी हिस्से वाले लंबे रास्ते को चुन रही हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)